फिर वह ओंधे कर दिये गये अपने सिरों के बल[1] ( और बोलेः) तू जानता है कि ये बोलते नहीं हैं।
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1. अर्थात सत्य को स्वीकार कर के उस से फिर गये।
फिर वह ओंधे कर दिये गये अपने सिरों के बल[1] ( और बोलेः) तू जानता है कि ये बोलते नहीं हैं।
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1. अर्थात सत्य को स्वीकार कर के उस से फिर गये।