और जब कोई सूरह उतारी जाये, तो वे एक-दूसरे की ओर देखते हैं कि तुम्हें कोई देख तो नहीं रहा है? फिर मुँह फेरकर चल देते हैं। अल्लाह ने उनके दिलों को (ईमान से)[1] फेर दिया है। इस कारण कि वे समझ-बूझ नहीं रखते।
1. इस से अभिप्राय मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं।
الترجمة الهندية