सम्मानित[1] मास, सम्मानित मास के बदले है और सम्मानित विषयों में बराबरी है। अतः, जो तुमपर अतिक्रमण (अत्याचार) करे, तो तुम भी उसपर उसी के समान (अतिक्रमण) करो तथा अल्लाह के आज्ञाकारी रहो और जान लो कि अल्लाह आज्ञाकारियों के साथ है।
1. सम्मानित मासों से अभिप्रेत चार अर्बी महीनेः ज़ुलक़ादह, ज़ुलहिज्जह, मुह़र्रम तथा रजब हैं। इब्राहीम अलैहिस्सलाम के युग से इन मासों का आदर सम्मान होता आ रहा है। आयत का अर्थ यह है कि कोई सम्मानित स्थान अथवा युग में अतिक्रमण करे तो उसे बराबरी का बदला दिया जाये।
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