और समीपवर्तियों को उनका स्वत्व (हिस्सा) दो तथा दरिद्र और यात्री को और अपव्यय[1] न करो।
1. अर्थात अपरिमित और दुष्कर्म में ख़र्च न करो।
الترجمة الهندية