अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, वह जीवित[1] तथा नित्य स्थायी है, उसे ऊँघ तथा निद्रा नहीं आती। आकाश और धरती में जो कुछ है, सब उसी का[2] है। कौन है, जो उसके पास उसकी अनुमति के बिना अनुशंसा (सिफ़ारिश) कर सके? जो कुछ उनके समक्ष और जो कुछ उनसे ओझल है, सब जानता है। उसके ज्ञान में से वही जान सकते हैं, जिसे वह चाहे। उसकी कुर्सी आकाश तथा धरती को समोये हुए है। उन दोनों की रक्षा उसे नहीं थकाती। वही सर्वोच्च[3], महान है।
1. अर्थात स्वयंभु, अनन्त है। 2. अर्थात जो स्वयं स्थित तथा सब उस की सहायता से स्थित हैं। 3. यह क़ुर्आन की सर्वमहान आयत है। और इस का नाम "आयतुल कुर्सी" है। ह़दीस में इस की बड़ी प्रधानता बताई गई है। (तफ़्सीर इब्ने कसीर)
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