(हे नबी!) उनसे कहो कि क्या मैं अल्लाह के सिवा किसी दूसरे न्यायकारी की खोज करूँ, जबकि उसीने तुम्हारी ओर ये खुली पुस्तक (क़ुर्आन) उतारी[1] है? तथा जिहें हमने पुस्तक[2] प्रदान की है, वे जानते हैं कि ये क़ुर्आन आपके पालनहार की ओर से सत्य के साथ उतरा है। अतः आप संदेह करने वालों में से न हों।
1. अर्थात इस में निर्णय के नियमों का विवरण है। 2. अर्थात जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर जिब्रील प्रथम वह़्यी लाये और आप ने मक्का के ईसाई विद्वान वरक़ा बिन नौफ़ल को बताया, तो उस ने कहा कि यह वही फ़रिश्ता है जिसे अल्लाह ने मूसा पर उतारा था। (बुख़ारीः3, मुस्लिमः160) इसी प्रकार मदीना के यहूदी विद्वान अब्दुल्लाह बिन सलाम ने भी नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को माना और इस्लाम लाये।
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