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title: "ترجمة سورة النّاس - الترجمة الهندية (الهندية)"
url: "https://quranpedia.net/surah/1/114/book/1986.md"
canonical: "https://quranpedia.net/surah/1/114/book/1986"
surah_id: "114"
book_id: "1986"
book_name: "الترجمة الهندية"
author: "مولانا عزيز الحق العمري"
type: "translation"
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# ترجمة سورة النّاس - الترجمة الهندية (الهندية)

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## Citation

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Translation of Surah النّاس from "الترجمة الهندية" in الهندية.

### الآية 114:1

> قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ [114:1]

(हे नबी!) कहो कि मैं इन्सानों के पालनहार की शरण में आता हूँ।

### الآية 114:2

> ﻿مَلِكِ النَّاسِ [114:2]

जो सारे इन्सानों का स्वामी है।

### الآية 114:3

> ﻿إِلَٰهِ النَّاسِ [114:3]

जो सारे इन्सानों का पूज्य है।\[1\]
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1\. (1-3) यहाँ अल्लाह को उस के तीन गुणों के साथ याद कर के उस की शरण लेने की शिक्षा दी गई है। एक उस का सब मानव जाति का पालनहार और स्वामी होना। दूसरे उस का सभी इन्सानों का अधिपति और शासक होना। तीसरे उस का इन्सानों का सत्य पूज्य होना। भावार्थ यह है कि उस अल्लाह की शरण माँगता हूँ जो इन्सानों का पालनहार, शासक और पूज्य होने के कारण उन पर पूरा नियंत्रण और अधिकार रखता है। जो वास्तव में उस बुराई से इन्सानों को बचा सकता है जिस से स्वयं बचने और दूसरों को बचाने में सक्षम है उस के सिवा कोई है भी नहीं जो शरण दे सकता हो।

### الآية 114:4

> ﻿مِنْ شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ [114:4]

भ्रम डालने वाले और छुप जाने वाले (राक्षस) की बुराई से।

### الآية 114:5

> ﻿الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ [114:5]

जो लोगों के दिलों में भ्रम डालता रहता है।

### الآية 114:6

> ﻿مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ [114:6]

जो जिन्नों में से है और मनुष्यों में से भी।\[1\]
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1\. (4-6) आयत संख्या 4 में 'वस्वास' शब्द का प्रयोग हुआ है। जिस का अर्थ है दिलों में ऐसी बुरी बातें डान देना कि जिस के दिल में डाली जा रही हों उसे उस का ज्ञान भी न हो। और इसी प्रकार आयत संख्या 4 में 'ख़न्नास' का शब्द प्रोग हुआ है। जिस का अर्थ है सुकड़ जाना, छुप जाना, पीछे हट जाना, धीरे धीरे किसी को बुराई के लिये तैयार करना आदि। अर्थात दिलों में भ्रम डालने वाला, और सत्य के विरुध्द मन में बुरी भावनायें उत्पन्न करने वाला। चाहे वह जिन्नों में से हो, अथवा मनुष्यों में से हो। इन सब की बुराईयों से हम अल्लाह की शरण लेते हैं जो हमारा स्वामी और सच्चा पूज्य है।

## روابط ذات صلة

- [النص القرآني للسورة](https://quranpedia.net/surah/1/114.md)
- [كل تفاسير سورة النّاس](https://quranpedia.net/surah-tafsir/114.md)
- [ترجمات سورة النّاس](https://quranpedia.net/translations/114.md)
- [صفحة الكتاب: الترجمة الهندية](https://quranpedia.net/book/1986.md)
- [المؤلف: مولانا عزيز الحق العمري](https://quranpedia.net/person/1761.md)

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