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title: "ترجمة سورة الحجر - الترجمة الهندية (الهندية)"
url: "https://quranpedia.net/surah/1/15/book/1986.md"
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surah_id: "15"
book_id: "1986"
book_name: "الترجمة الهندية"
author: "مولانا عزيز الحق العمري"
type: "translation"
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# ترجمة سورة الحجر - الترجمة الهندية (الهندية)

📖 **[اقرأ النسخة التفاعلية الكاملة على Quranpedia](https://quranpedia.net/surah/1/15/book/1986)** — مع التلاوات الصوتية، البحث، والربط بين المصادر.

## Citation

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Translation of Surah الحجر from "الترجمة الهندية" in الهندية.

### الآية 15:1

> الر ۚ تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ وَقُرْآنٍ مُبِينٍ [15:1]

अलिफ़, लाम, रा। वो इस पुस्कत तथा खुले क़ुर्आन की आयतें हैं।

### الآية 15:2

> ﻿رُبَمَا يَوَدُّ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْ كَانُوا مُسْلِمِينَ [15:2]

(एक समय आयेगा) जब काफ़िर ये कामना करेंगे कि क्या ही अच्छा होता, यदि वे मुसलामन\[1\] होते? 
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1\. ऐसा उस समय होगा जब फ़रिश्ते उन की आत्मा निकालने आयेंगे, और उन को उन का नरक का स्थान दिखा देंगे। और क़्यामत के दिन तो ऐसी दुर्दशा होगी कि धूल हो जाने की कामना करेंगे। (देखियेः सूरह नबा, आयतः40)

### الآية 15:3

> ﻿ذَرْهُمْ يَأْكُلُوا وَيَتَمَتَّعُوا وَيُلْهِهِمُ الْأَمَلُ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ [15:3]

(हे नबी!)आप उन्हें छोड़ दें, वे खाते तथा आनन्द लेते रहें और उन्हें आशा निश्चेत किये रहे, फिर शीघ्र ही वे जान लेंगे\[1\]।
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1\. अपने दुष्परिणाम का।

### الآية 15:4

> ﻿وَمَا أَهْلَكْنَا مِنْ قَرْيَةٍ إِلَّا وَلَهَا كِتَابٌ مَعْلُومٌ [15:4]

और हमने जिस बस्ती को भी ध्वस्त किया, उसके लिए एक निश्चित अवधि अंत थी।

### الآية 15:5

> ﻿مَا تَسْبِقُ مِنْ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسْتَأْخِرُونَ [15:5]

कोई जाति न अपनी निश्चित अवधि से आगे जा सकती है और न पीछे रह सकती है।

### الآية 15:6

> ﻿وَقَالُوا يَا أَيُّهَا الَّذِي نُزِّلَ عَلَيْهِ الذِّكْرُ إِنَّكَ لَمَجْنُونٌ [15:6]

तथा उन (काफ़िरों) ने कहाः हे वह व्यक्ति जिसपर ये शिक्षा (क़ुर्आन) उतारी गयी है! वास्तव में, तू पागल है।

### الآية 15:7

> ﻿لَوْ مَا تَأْتِينَا بِالْمَلَائِكَةِ إِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِقِينَ [15:7]

क्यों हमारे पास फ़रिश्तों को नहीं लाता, यदि तू सचों में से है?

### الآية 15:8

> ﻿مَا نُنَزِّلُ الْمَلَائِكَةَ إِلَّا بِالْحَقِّ وَمَا كَانُوا إِذًا مُنْظَرِينَ [15:8]

जबकि हम फ़रिश्तों को सत्य निर्णय के साथ ही\[1\] उतारते हैं और उन्हें उस समय कोई अवसर नहीं दिया जाता।

### الآية 15:9

> ﻿إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ [15:9]

वास्तव में, हमने ही ये शिक्षा (क़ुर्आन) उतारी है और हम ही इसके रक्षक\[1\] हैं।
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1\. यह ऐतिहासिक सत्य है। इस विश्व के धर्म ग्रंथों में क़ुर्आन ही एक ऐसा धर्म ग्रंथ है जिस में उस के अवतरित होने के समय से अब तक एक अक्षर तो क्या एक मात्रा का भी परिवर्तन नहीं हुआ। और न हो सकता है। यह विशेषता इस विश्व के किसी भी धर्म ग्रंथ को प्राप्त नहीं है। तौरात हो अथवा इंजील या इस विश्व के अन्य धर्म शास्त्र हों, सब में इतने परिवर्तन किये गये हैं कि सत्य मूल धर्म की पहचान असंभव हो गय है। इसी प्रकार इस (क़ुर्आन) की व्याख्या जिसे ह़दीस कहा जाता है, वह भी सुरक्षित है। और उस का पालन किये बिना किसी का जीवन इस्लामी नहीं हो सकता। क्यों कि क़ुर्आन का आदेश है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) तुम्हें जो दें उस को ले लो। और जिस से रोक दें उस से रुक जाओ। (देखियेः सूरह ह़श्र, आयतः 7) क़ुर्आन कहता है कि हे नबी! अल्लाह ने आप पर क़ुर्आन इस लिये उतारा है कि आप लोगों के लिये उस की व्याख्या कर दें। क़ुर्आन कहता है कि हे नबी! (सूरह नह़्ल, आयतः 44) जिस व्याख्या से नमाज़, व्रत आदि इस्लामी अनिवार्य कर्तव्यों की विधि का ज्ञान होता है। इसी लिये उस को सुरक्षित किया गाय है। और हम ह़दीस के एक-एक रावी के जन्म और मौत का समय और उस की पूरी दशा को जानते हैं। और यह भी जानते हैं कि वह विश्वसनीय है या नहीं? इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि इस संसार में इस्लाम के सिवा कोई धर्म ऐसा नहीं है, जिस की मूल पुस्तकें तथा उस के नबी की सारी बातें सुरक्षित हों।

### الآية 15:10

> ﻿وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ فِي شِيَعِ الْأَوَّلِينَ [15:10]

और हमने आपसे पहले भी प्राचीन (विगत) जातियों में रसूल भेजे।

### الآية 15:11

> ﻿وَمَا يَأْتِيهِمْ مِنْ رَسُولٍ إِلَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ [15:11]

और उनके पास जो भी रसूल आया, वे उसके साथ परिहास करते रहे।

### الآية 15:12

> ﻿كَذَٰلِكَ نَسْلُكُهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ [15:12]

इसी प्रकार, हम इसे\[1\] अपराधियों के दिलों में पिरो देते हैं। 
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1\. अर्थात रसूलों के साथ परिहास को, अर्थात उसे इस का दण्ड देंगे।

### الآية 15:13

> ﻿لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ الْأَوَّلِينَ [15:13]

वे उसपर ईमान नहीं लाते और प्रथम जातियों से यही रीति चली आ रही है।

### الآية 15:14

> ﻿وَلَوْ فَتَحْنَا عَلَيْهِمْ بَابًا مِنَ السَّمَاءِ فَظَلُّوا فِيهِ يَعْرُجُونَ [15:14]

और यदि हम उनपर आकाश का कोई द्वार खोल देते, फिर वे उसमें चढ़ने लगते।

### الآية 15:15

> ﻿لَقَالُوا إِنَّمَا سُكِّرَتْ أَبْصَارُنَا بَلْ نَحْنُ قَوْمٌ مَسْحُورُونَ [15:15]

तबभी वे यही कहते कि हमारी आँखें धोखा खा रही हैं, बल्कि हमपर जादू कर दिया गया है।

### الآية 15:16

> ﻿وَلَقَدْ جَعَلْنَا فِي السَّمَاءِ بُرُوجًا وَزَيَّنَّاهَا لِلنَّاظِرِينَ [15:16]

हमने आकाश में राशि-चक्र बनाये हैं और उसे देखने वालों के लिए सुसज्जित किया है।

### الآية 15:17

> ﻿وَحَفِظْنَاهَا مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ رَجِيمٍ [15:17]

और उसे प्रत्येक धिक्कारे हुए शैतान से सुरक्षित किया है।

### الآية 15:18

> ﻿إِلَّا مَنِ اسْتَرَقَ السَّمْعَ فَأَتْبَعَهُ شِهَابٌ مُبِينٌ [15:18]

परन्तु जो (शैतान) चोरी से सुनना चाहे, तो एक खुली ज्वाला उसका पीछा करती\[1\] है।
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1\. शैतान चोरी से फ़रिश्तों की बात सुनने का प्रयास करते हैं। तो ज्वलंत उल्का उन्हें मारता है। अधिक विवरण के लिये देखियेः (सूरह मुल्क, आयतः5)

### الآية 15:19

> ﻿وَالْأَرْضَ مَدَدْنَاهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ وَأَنْبَتْنَا فِيهَا مِنْ كُلِّ شَيْءٍ مَوْزُونٍ [15:19]

और हमने धरती को फैलाया और उसमें पर्वत बना दिये और उसमें हमने प्रत्येक उचित चीज़ें उगायीं।

### الآية 15:20

> ﻿وَجَعَلْنَا لَكُمْ فِيهَا مَعَايِشَ وَمَنْ لَسْتُمْ لَهُ بِرَازِقِينَ [15:20]

और हमने उसमें तुम्हारे लिए जीवन के संसाधन बना दिये तथा उनके लिए जिनके जीविका दाता तुम नहीं हो।

### الآية 15:21

> ﻿وَإِنْ مِنْ شَيْءٍ إِلَّا عِنْدَنَا خَزَائِنُهُ وَمَا نُنَزِّلُهُ إِلَّا بِقَدَرٍ مَعْلُومٍ [15:21]

और कोई चीज़ ऐसी नहीं है, जिसके कोष हमारे पास न हों और हम उसे एक निश्चित मात्रा ही में उतारते हैं।

### الآية 15:22

> ﻿وَأَرْسَلْنَا الرِّيَاحَ لَوَاقِحَ فَأَنْزَلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَسْقَيْنَاكُمُوهُ وَمَا أَنْتُمْ لَهُ بِخَازِنِينَ [15:22]

और हमने जलभरी वायुओं को भेजा, फिर आकाश से जल बरसाया और उसे तुम्हें पिलाया तथा तुम उसके कोषाधिकारी नहीं हो।

### الآية 15:23

> ﻿وَإِنَّا لَنَحْنُ نُحْيِي وَنُمِيتُ وَنَحْنُ الْوَارِثُونَ [15:23]

तथा हम ही जीवन देते तथा मारते हैं और हम ही सबके उत्तराधिकारी हैं।

### الآية 15:24

> ﻿وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَقْدِمِينَ مِنْكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَأْخِرِينَ [15:24]

तथा तुममें से विगत लोगों को जानते हैं और भविष्य के लोगों को भी जानते हैं।

### الآية 15:25

> ﻿وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ ۚ إِنَّهُ حَكِيمٌ عَلِيمٌ [15:25]

और वास्तव, में आपका पालनहार ही उन्हें एकत्र करेगा\[1\], निश्चय वह सब गुण और सब कुछ जानने वाला है।
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1\. अर्थात प्रलय के दिन ह़िसाब के लिये।

### الآية 15:26

> ﻿وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنْسَانَ مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍ [15:26]

और हमने मनुष्य को सड़े हुए कीचड़ के सूखे गारे बनाया।

### الآية 15:27

> ﻿وَالْجَانَّ خَلَقْنَاهُ مِنْ قَبْلُ مِنْ نَارِ السَّمُومِ [15:27]

और इससे पहले जिन्नों को हमने अग्नि की ज्वाला से पैदा किया।

### الآية 15:28

> ﻿وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَائِكَةِ إِنِّي خَالِقٌ بَشَرًا مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍ [15:28]

और (याद करो) जब आपके पालनहार ने फ़रिश्तों से कहाः मैं एक मनुष्य उत्पन्न करने वाला हूँ, सड़े हुए कीचड़ के सूखे गारे से।

### الآية 15:29

> ﻿فَإِذَا سَوَّيْتُهُ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِنْ رُوحِي فَقَعُوا لَهُ سَاجِدِينَ [15:29]

तो जब मैं उसे पूरा बना लूँ और उसमें अपनी आत्मा फूँक दूँ, तो उसके लिए सज्दे में गिर जाना\[1\]।
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1\. फ़रिश्तों के लिये आदम का सज्दा अल्लाह के आदेश से उन की परीक्षा के लिये था, किन्तु इस्लाम में मनुष्य के लिये किसी मनुष्य या वस्तु को सज्दा करना शिर्क और अक्षम्य पाप है। (सूरह ह़ा-मीम-सज्दा, आयत संख्याः37)

### الآية 15:30

> ﻿فَسَجَدَ الْمَلَائِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ [15:30]

अतः उनसब फ़रिश्तों ने सज्दा किया।

### الآية 15:31

> ﻿إِلَّا إِبْلِيسَ أَبَىٰ أَنْ يَكُونَ مَعَ السَّاجِدِينَ [15:31]

इब्लीस के सिवा। उसने सज्दा करने वालों का साथ देने से इन्कार कर दिया।

### الآية 15:32

> ﻿قَالَ يَا إِبْلِيسُ مَا لَكَ أَلَّا تَكُونَ مَعَ السَّاجِدِينَ [15:32]

अल्लाह ने पूछाः हे इब्लीस! तुझे क्या हुआ कि सज्दा करने वालों का साथ नहीं दिया?

### الآية 15:33

> ﻿قَالَ لَمْ أَكُنْ لِأَسْجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقْتَهُ مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍ [15:33]

उसने कहाः मैं ऐसा नहीं हूँ कि एक मनुष्य को सज्दा करूँ, जिसे तूने सड़े हुए कीचड़ के सूखे गारे से पैदा किया है।

### الآية 15:34

> ﻿قَالَ فَاخْرُجْ مِنْهَا فَإِنَّكَ رَجِيمٌ [15:34]

अल्लाह ने कहाः यहाँ से निकल जा, वास्तव में, तू धिक्कारा हुआ है।

### الآية 15:35

> ﻿وَإِنَّ عَلَيْكَ اللَّعْنَةَ إِلَىٰ يَوْمِ الدِّينِ [15:35]

और तुझपर धिक्कार है, प्रतिकार (प्रलय) के दिन तक।

### الآية 15:36

> ﻿قَالَ رَبِّ فَأَنْظِرْنِي إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ [15:36]

(इब्लीस) ने कहाः\[1\] मेरे पालनहार! तू फिर मुझे उस दिन तक अवसर दे, जब सभी पुनः जीवित किये जायेंगे।
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1\. अर्थात फ़रिश्ते परीक्षा में सफल हुये और इब्लीस असफल रहा। क्यों कि उस ने आदेश का पालन न कर के अपनी मनमानी की। इसी प्रकार वह भी हैं जो अल्लाह की बात न मान कर मनमानी करते हैं।

### الآية 15:37

> ﻿قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَرِينَ [15:37]

अल्लाह ने कहाः तुझे अवसर दे दिया गया है।

### الآية 15:38

> ﻿إِلَىٰ يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُومِ [15:38]

विध्दित समय के दिन तक के लिए।

### الآية 15:39

> ﻿قَالَ رَبِّ بِمَا أَغْوَيْتَنِي لَأُزَيِّنَنَّ لَهُمْ فِي الْأَرْضِ وَلَأُغْوِيَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ [15:39]

वह बोलाः मेरे पालनहार! तेरे, मुझको कुपथ कर देने के कारण, मैं अवश्य उनके लिए धरती में (तेरी अवज्ञा को) मनोरम बना दूँगा और उनसभी को कुपथ कर दूँगा।

### الآية 15:40

> ﻿إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ الْمُخْلَصِينَ [15:40]

उनमें से तेरे शुध्द भक्तों के सिवा।

### الآية 15:41

> ﻿قَالَ هَٰذَا صِرَاطٌ عَلَيَّ مُسْتَقِيمٌ [15:41]

अल्लाह ने कहाः यही मुझतक (पहुँचने की) सीधी राह है।

### الآية 15:42

> ﻿إِنَّ عِبَادِي لَيْسَ لَكَ عَلَيْهِمْ سُلْطَانٌ إِلَّا مَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْغَاوِينَ [15:42]

वस्तुतः, मेरे भक्तों पर तेरा कोई अधिकार नहीं\[1\] चलेगा, सिवाय उसके जो कुपथों में से तेरा अनुसरण करे।
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1\. अर्थात जो बन्दे क़ुर्आन तथा ह़दीस (नबी का तरीक़ा) का ज्ञान रखेंगे, उन पर शैतान का प्रभाव नहीं होगा। और जो इन दोनों के ज्ञान से जाहिल होंगे वही उस के झाँसे में आयेंगे। किन्तु जो तौबा कर लें तो उन को क्षमा कर दिया जायेगा।

### الآية 15:43

> ﻿وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمَوْعِدُهُمْ أَجْمَعِينَ [15:43]

और वास्तव में, उनसबके लिए नरक का वचन है।

### الآية 15:44

> ﻿لَهَا سَبْعَةُ أَبْوَابٍ لِكُلِّ بَابٍ مِنْهُمْ جُزْءٌ مَقْسُومٌ [15:44]

उस (नरक) के सात द्वार हैं और उनमें से प्रत्येक द्वार के लिए एक विभाजित भाग\[1\] है।
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1\. अर्थात इब्लीस के अनुयायी अपने कुकर्मों के अनुसार नरक के द्वार में प्रवेश करेंगे।

### الآية 15:45

> ﻿إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ [15:45]

वास्तव में, आज्ञाकारी लोग स्वर्गों तथा स्रोतों में होंगे।

### الآية 15:46

> ﻿ادْخُلُوهَا بِسَلَامٍ آمِنِينَ [15:46]

(उनसे कहा जायेगा) इसमें प्रवेश कर जाओ, शान्ति के साथ निर्भय होकर।

### الآية 15:47

> ﻿وَنَزَعْنَا مَا فِي صُدُورِهِمْ مِنْ غِلٍّ إِخْوَانًا عَلَىٰ سُرُرٍ مُتَقَابِلِينَ [15:47]

और हम निकाल देंगे उनके दिलों में जो कुछ बैर होगा। वे भाई-भाई होकर एक-दूसरे के सम्मुख तख़्तों के ऊपर रहेंगे।

### الآية 15:48

> ﻿لَا يَمَسُّهُمْ فِيهَا نَصَبٌ وَمَا هُمْ مِنْهَا بِمُخْرَجِينَ [15:48]

न उसमें उन्हें कोई थकान होगी और न वहाँ से निकाले जायेंगे।

### الآية 15:49

> ﻿۞ نَبِّئْ عِبَادِي أَنِّي أَنَا الْغَفُورُ الرَّحِيمُ [15:49]

(हे नबी!) आप मेरे भक्तों को सूचित कर दें कि वास्तव में, मैं बड़ा क्षमाशील दयावान्\[1\] हूँ।
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1\. ह़दीस में है कि अल्लाह ने सौ दया पैदा की, निन्नानवे अपने पास रख लीं। और एक को पूरे संसार के लिये भेज दिया। तो यदि काफ़िर उस की पूरी दया जान जाये तो स्वर्ग से निराश नहीं होगा। और ईमान वाला उस की पूरी यातना जान जाये तो नरक से निर्भय नहीं होगा। (सह़ीह़ बुख़ारीः6469)

### الآية 15:50

> ﻿وَأَنَّ عَذَابِي هُوَ الْعَذَابُ الْأَلِيمُ [15:50]

और मेरी यातना ही दुःखदायी यातना है।

### الآية 15:51

> ﻿وَنَبِّئْهُمْ عَنْ ضَيْفِ إِبْرَاهِيمَ [15:51]

और आप उन्हें इब्राहीम के अतिथियों के बारे में सूचित कर दें।

### الآية 15:52

> ﻿إِذْ دَخَلُوا عَلَيْهِ فَقَالُوا سَلَامًا قَالَ إِنَّا مِنْكُمْ وَجِلُونَ [15:52]

जब वे इब्राहीम के पास आये, तो सलाम किया। उसने कहाः वास्तव में, हम तुमसे डर रहे हैं।

### الآية 15:53

> ﻿قَالُوا لَا تَوْجَلْ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَامٍ عَلِيمٍ [15:53]

उन्होंने कहाः डरो नहीं, हम तुम्हें एक ज्ञानी बालक की शुभ सूचना दे रहे हैं।

### الآية 15:54

> ﻿قَالَ أَبَشَّرْتُمُونِي عَلَىٰ أَنْ مَسَّنِيَ الْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ [15:54]

उसने कहाः क्या तुमने मुझे इस बुढ़ापे में शुभ सूचना दी है, तुम मुझे ये शुभ सूचना कैसे दे रहे हो?

### الآية 15:55

> ﻿قَالُوا بَشَّرْنَاكَ بِالْحَقِّ فَلَا تَكُنْ مِنَ الْقَانِطِينَ [15:55]

उन्होंने कहाः हमने तुम्हें सत्य शुभ सूचना दी है, अतः तुम निराश न हो।

### الآية 15:56

> ﻿قَالَ وَمَنْ يَقْنَطُ مِنْ رَحْمَةِ رَبِّهِ إِلَّا الضَّالُّونَ [15:56]

(इब्राहीम) ने कहाः अपने पालनहार की दया से निराश, केवल कुपथ लोग ही हुआ करते हैं।

### الآية 15:57

> ﻿قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا الْمُرْسَلُونَ [15:57]

उसने कहाः हे अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्तो! तुम्हारा अभियान क्या है?

### الآية 15:58

> ﻿قَالُوا إِنَّا أُرْسِلْنَا إِلَىٰ قَوْمٍ مُجْرِمِينَ [15:58]

उन्होंने उत्तर दिया कि हम एक अपराधी जाति के पास भेजे गये हैं।

### الآية 15:59

> ﻿إِلَّا آلَ لُوطٍ إِنَّا لَمُنَجُّوهُمْ أَجْمَعِينَ [15:59]

लूत के घराने के सिवा, उनसभी को हम बचाने वाले हैं।

### الآية 15:60

> ﻿إِلَّا امْرَأَتَهُ قَدَّرْنَا ۙ إِنَّهَا لَمِنَ الْغَابِرِينَ [15:60]

परन्तु लूत की पत्नि के लिए हमने निर्णय किया है कि वह पीछे रह जाने वालों में होगी।

### الآية 15:61

> ﻿فَلَمَّا جَاءَ آلَ لُوطٍ الْمُرْسَلُونَ [15:61]

फिर जब लूत के घर भेजे हुए (फ़रिश्ते) आये।

### الآية 15:62

> ﻿قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌ مُنْكَرُونَ [15:62]

तो लूत ने कहाः तुम (मेरे लिए) अपरिचित हो।

### الآية 15:63

> ﻿قَالُوا بَلْ جِئْنَاكَ بِمَا كَانُوا فِيهِ يَمْتَرُونَ [15:63]

उन्होंने कहाः डरो नहीं, बल्कि हम तुम्हारे पास वो (यातना) लाये हैं, जिसके बारे में वे संदेह कर रहे थे।

### الآية 15:64

> ﻿وَأَتَيْنَاكَ بِالْحَقِّ وَإِنَّا لَصَادِقُونَ [15:64]

हम तुम्हारे पास सत्य लाये हैं और वास्तव में, हम सत्यवादी हैं।

### الآية 15:65

> ﻿فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِنَ اللَّيْلِ وَاتَّبِعْ أَدْبَارَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنْكُمْ أَحَدٌ وَامْضُوا حَيْثُ تُؤْمَرُونَ [15:65]

अतः कुछ रात रह जाये, तो अपने घराने को लेकर निकल जाओ और तुम उनके पीछे रहो और तुममें से कोई फिरकर न देखे तथा चले जाओ, जहाँ आदेश दिया जा रहा है।

### الآية 15:66

> ﻿وَقَضَيْنَا إِلَيْهِ ذَٰلِكَ الْأَمْرَ أَنَّ دَابِرَ هَٰؤُلَاءِ مَقْطُوعٌ مُصْبِحِينَ [15:66]

और हमने लूत को निर्णय सुना दिया कि भोर होते ही इनका उन्मूलन कर दिया जायेगा।

### الآية 15:67

> ﻿وَجَاءَ أَهْلُ الْمَدِينَةِ يَسْتَبْشِرُونَ [15:67]

और नगर वासी प्रसन्न होकर आ गये\[1\]।
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1\. अर्थात जब फ़रिश्तों को नवयुवकों के रूप में देखा तो लूत अलैहिस्सलाम के यहाँ आ गये ताकि उन के साथ अश्लील कर्म करें।

### الآية 15:68

> ﻿قَالَ إِنَّ هَٰؤُلَاءِ ضَيْفِي فَلَا تَفْضَحُونِ [15:68]

लूत ने कहाः ये मेरे अतिथि हैं, अतः मेरा अपमान न करो।

### الآية 15:69

> ﻿وَاتَّقُوا اللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ [15:69]

तथा अल्लाह से डरो और मेरा अनादर न करो।

### الآية 15:70

> ﻿قَالُوا أَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ الْعَالَمِينَ [15:70]

उन्होंने कहाः क्या हमने तुम्हें विश्व वासियों से नहीं रोका\[1\] था?
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1\. सब के समर्थक न बनो।

### الآية 15:71

> ﻿قَالَ هَٰؤُلَاءِ بَنَاتِي إِنْ كُنْتُمْ فَاعِلِينَ [15:71]

लूत ने कहाः ये मेरी पुत्रियाँ हैं, यदि तुम कुछ करने वाले\[1\] हो।
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1\. अरथात् इन से विवाह कर लो, और अपनी कामवासना पूरी करो, और कुकर्म न करो।

### الآية 15:72

> ﻿لَعَمْرُكَ إِنَّهُمْ لَفِي سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ [15:72]

हे नबी! आपकी आयु की शपथ\[1\]! वास्तव में, वे अपने उन्माद में बहक रहे थे।
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1\. अल्लाह के सिवा किसी मनुष्य के लिये उचित नहीं है कि वह अल्लाह के सिवा किसी और चीज़ की शपथ ले।

### الآية 15:73

> ﻿فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُشْرِقِينَ [15:73]

अंततः, सूर्योदय के समय उन्हें एक कड़ी ध्वनि ने पकड़ लिया।

### الآية 15:74

> ﻿فَجَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِنْ سِجِّيلٍ [15:74]

फिर हमने उस बस्ती के ऊपरी भाग को नीचे कर दिया और उनपर कंकरीले पत्थर बरसा दिये।

### الآية 15:75

> ﻿إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِلْمُتَوَسِّمِينَ [15:75]

वास्तव में, इसमें कई निशानियाँ हैं, प्रतिभाशालियों\[1\] के लिए।
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1\. अर्थात जो लक्षणों से तथ्य को समझ जाते हैं।

### الآية 15:76

> ﻿وَإِنَّهَا لَبِسَبِيلٍ مُقِيمٍ [15:76]

और वह (बस्ती) साधारण\[1\] मार्ग पर स्थित है।
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1\. अर्थात जो साधारण मार्ग ह़िजाज़ (मक्का) से शाम को जाता है। यह शिक्षा प्रद बस्ती उसी मार्ग में आती है, जिस से तुम गुज़रते हुये शाम जाते हो।

### الآية 15:77

> ﻿إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِلْمُؤْمِنِينَ [15:77]

निःसंदेह इसमें बड़ी निशानी है, ईमान वलों के लिए।

### الآية 15:78

> ﻿وَإِنْ كَانَ أَصْحَابُ الْأَيْكَةِ لَظَالِمِينَ [15:78]

और वास्तव में, (ऐय्का) के\[1\] वासी अत्याचारी थे।
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1\. इस से अभिप्रेत शोऐब अलैहिस्सलाम की जाति है, ऐय्का का अर्थ वन तथा झाड़ी है।

### الآية 15:79

> ﻿فَانْتَقَمْنَا مِنْهُمْ وَإِنَّهُمَا لَبِإِمَامٍ مُبِينٍ [15:79]

तो हमने उनसे बदला ले लिया और वे दोनों\[1\] ही साधारण मार्ग पर हैं।
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1\. अर्थात मद्यन और ऐय्का का क्षेत्र भी ह़िजाज़ से फ़िलस्तीन और सीरिया जाते हुये, राह में पड़ता है।

### الآية 15:80

> ﻿وَلَقَدْ كَذَّبَ أَصْحَابُ الْحِجْرِ الْمُرْسَلِينَ [15:80]

और ह़िज्र के\[1\] लोगों ने रसूलों को झुठलाया।
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1\. ह़िज्र समूद जाति की बस्ती थी, जो सालेह (अलैहिस्सलाम) की जाति थी, यह बस्ती मदीना और तबूक के बीच में स्थित थी।

### الآية 15:81

> ﻿وَآتَيْنَاهُمْ آيَاتِنَا فَكَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ [15:81]

और उन्हें हमने अपनी आयतें (निशानियाँ) दीं, तो वे उनसे विमुख ही रहे।

### الآية 15:82

> ﻿وَكَانُوا يَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا آمِنِينَ [15:82]

वे शिलाकारी करके पर्वतों से घर बनाते और निर्भय होकर रहते थे।

### الآية 15:83

> ﻿فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَ [15:83]

अन्ततः, उन्हें कड़ी ध्वनि ने भोर के समय पकड़ लिया।

### الآية 15:84

> ﻿فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَكْسِبُونَ [15:84]

और उनकी कमाई उनके कुछ काम न आयी।

### الآية 15:85

> ﻿وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ ۗ وَإِنَّ السَّاعَةَ لَآتِيَةٌ ۖ فَاصْفَحِ الصَّفْحَ الْجَمِيلَ [15:85]

और हमने आकाशों तथा धरती को और जो कुछ उन दोनों के बीच है, सत्य के आधार पर ही उत्पन्न किया है और निश्चय प्रलय आनी है। अतः (हे नबी!) आप (उन्हें) भले तौर पर क्षमा कर दें।

### الآية 15:86

> ﻿إِنَّ رَبَّكَ هُوَ الْخَلَّاقُ الْعَلِيمُ [15:86]

वास्तव में, आपका पालनहार ही सबका स्रेष्टा, सर्वज्ञ है।

### الآية 15:87

> ﻿وَلَقَدْ آتَيْنَاكَ سَبْعًا مِنَ الْمَثَانِي وَالْقُرْآنَ الْعَظِيمَ [15:87]

तथा (हे नबी!) हमने आपको सात ऐसी आयतें, जो बार-बार दुहराई जाती हैं और महा क़ुर्आन\[1\] प्रदान किया है।
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1\. अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु ने कहा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का कथन है कि उम्मुल क़ुर्आन (सूरह फ़ातिह़ा) ही वह सात आयतें हैं जो दुहराई जाती हैं, तथा महाक़ुर्आन हैं। (सह़ीह़ बुख़ारीः4704) एक दूसरी ह़दीस में है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः "अल्ह़म्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन" ही वह सात आयतें हैं जो बाब-बार दुहराई जाती हैं, और महा क़ुर्आन हैं, जो मुझे प्रदान किया गया है। (संक्षिप अऩुवाद, सह़ीह़ बुख़ारीः4702) यही कारण है कि इस के पढ़े बिना नमाज़ नहीं होती। ( सह़ीह़ बुख़ारीः756, मुस्लिमः 394)

### الآية 15:88

> ﻿لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِ أَزْوَاجًا مِنْهُمْ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِلْمُؤْمِنِينَ [15:88]

और आप, उसकी ओर न देखें, जो सांसारिक लाभ का संसाधन हमने उनमें से विभिन्न प्रकार के लोगों को दे रखा है और न उनपर शोक करें और ईमान वालों के लिए सुशील रहें।

### الآية 15:89

> ﻿وَقُلْ إِنِّي أَنَا النَّذِيرُ الْمُبِينُ [15:89]

और कह दें कि मैं प्रत्यक्ष (खुली) चेतावनी\[1\] देने वाला हूँ।
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1\. अर्थात अवैज्ञा पर यातना की।

### الآية 15:90

> ﻿كَمَا أَنْزَلْنَا عَلَى الْمُقْتَسِمِينَ [15:90]

जैसे हमने खण्डन कारियों\[1\] पर (यातना) उतारी।
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1\. खण्डन कारियों से अभिप्राय यहूद और ईसाई हैं। जिन्हों ने अपनी पुस्तकों तौरात तथा इंजील को खण्ड खण्ड कर दिया। अर्थात उन के कुछ भाग पर ईमान लाये और कुछ को नकार दिया। (सह़ीह़ बुख़ारीः4705-4706)

### الآية 15:91

> ﻿الَّذِينَ جَعَلُوا الْقُرْآنَ عِضِينَ [15:91]

जिन्होंने क़ुर्आन को खण्ड-खण्ड कर दिया\[1\]।
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1\. इसी प्रकार इन्हों ने भी क़ुर्आन के कुछ भाग को मान लिया और कुछ का अगलों की कहानियाँ बता कर इन्कार कर दिया। तो ऐसे सभी लोगों से प्रलय के दिन पूछ होगी कि मेरी पुस्तकों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया?

### الآية 15:92

> ﻿فَوَرَبِّكَ لَنَسْأَلَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ [15:92]

तो शपथ है आपके पालनहार की। हम उनसे अवश्य पूछेंगे।

### الآية 15:93

> ﻿عَمَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ [15:93]

तुम क्या करते रहे?

### الآية 15:94

> ﻿فَاصْدَعْ بِمَا تُؤْمَرُ وَأَعْرِضْ عَنِ الْمُشْرِكِينَ [15:94]

अतः आपको, जो आदेश दिया जा रहा है, उसे खोलकर सुना दें और मुश्रिकों (मिश्रमवादियों) की चिन्ता न करें।

### الآية 15:95

> ﻿إِنَّا كَفَيْنَاكَ الْمُسْتَهْزِئِينَ [15:95]

हम आपके लिए परिहास करने वालों को काफ़ी हैं।

### الآية 15:96

> ﻿الَّذِينَ يَجْعَلُونَ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ ۚ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ [15:96]

जो अल्लाह के साथ दूसरे पूज्य बना लेते हैं, तो उन्हें शीघ्र ज्ञान हो जायेगा।

### الآية 15:97

> ﻿وَلَقَدْ نَعْلَمُ أَنَّكَ يَضِيقُ صَدْرُكَ بِمَا يَقُولُونَ [15:97]

और हम जानते हैं कि उनकी बातों से आपका दिल संकुचित हो रहा है।

### الآية 15:98

> ﻿فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَكُنْ مِنَ السَّاجِدِينَ [15:98]

अतः आप अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का वर्णन करें तथा सज्दा करने वालों में रहें।

### الآية 15:99

> ﻿وَاعْبُدْ رَبَّكَ حَتَّىٰ يَأْتِيَكَ الْيَقِينُ [15:99]

और अपने पालनहार की इबादत (वंदना) करते रहें, यहाँ तक कि आपके पास विश्वास आ जाये\[1\]।
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1\. अर्थात मरण का समय जिस का विश्वास सभी को है। (क़ुर्तुबी)

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- [النص القرآني للسورة](https://quranpedia.net/surah/1/15.md)
- [كل تفاسير سورة الحجر
](https://quranpedia.net/surah-tafsir/15.md)
- [ترجمات سورة الحجر
](https://quranpedia.net/translations/15.md)
- [صفحة الكتاب: الترجمة الهندية](https://quranpedia.net/book/1986.md)
- [المؤلف: مولانا عزيز الحق العمري](https://quranpedia.net/person/1761.md)

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