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title: "ترجمة سورة الصافات - الترجمة الهندية (الهندية)"
url: "https://quranpedia.net/surah/1/37/book/1986.md"
canonical: "https://quranpedia.net/surah/1/37/book/1986"
surah_id: "37"
book_id: "1986"
book_name: "الترجمة الهندية"
author: "مولانا عزيز الحق العمري"
type: "translation"
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# ترجمة سورة الصافات - الترجمة الهندية (الهندية)

📖 **[اقرأ النسخة التفاعلية الكاملة على Quranpedia](https://quranpedia.net/surah/1/37/book/1986)** — مع التلاوات الصوتية، البحث، والربط بين المصادر.

## Citation

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Translation of Surah الصافات from "الترجمة الهندية" in الهندية.

### الآية 37:1

> وَالصَّافَّاتِ صَفًّا [37:1]

शपथ है पंक्तिवध्द (फ़रिश्तों) की!

### الآية 37:2

> ﻿فَالزَّاجِرَاتِ زَجْرًا [37:2]

फिर झिड़कियाँ देने वालों की!

### الآية 37:3

> ﻿فَالتَّالِيَاتِ ذِكْرًا [37:3]

फिर स्मरण करके पढ़ने वालों\[1\] की!
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1\. यह तीनों गुण फ़रिश्तों के हैं जो आकाशों में अल्लाह की इबादत के लिये पंक्तिवध्द रहते तथा बादलों को हाँकते और अल्लाह के स्मरण जैसे क़ुर्आन तथा नमाज़ पढ़ने और उस की पवित्रता का गान करने इत्यादि में लगे रहते हैं।

### الآية 37:4

> ﻿إِنَّ إِلَٰهَكُمْ لَوَاحِدٌ [37:4]

निश्चय तुम्हारा पूज्य, एक ही है।

### الآية 37:5

> ﻿رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَرَبُّ الْمَشَارِقِ [37:5]

आकाशों तथा धरती का पालनहार तथा जो कुछ उनके मध्य है और सुर्योदय होने के स्थानों का रब।

### الآية 37:6

> ﻿إِنَّا زَيَّنَّا السَّمَاءَ الدُّنْيَا بِزِينَةٍ الْكَوَاكِبِ [37:6]

हमने अलंकृत किया है संसार (समीप) के आकाश को, तारों की शोभा से।

### الآية 37:7

> ﻿وَحِفْظًا مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ مَارِدٍ [37:7]

तथा रक्षा करने के लिए प्रत्येक उध्दत शैतान से।

### الآية 37:8

> ﻿لَا يَسَّمَّعُونَ إِلَى الْمَلَإِ الْأَعْلَىٰ وَيُقْذَفُونَ مِنْ كُلِّ جَانِبٍ [37:8]

वह नहीं सुन सकते (जाकर) उच्च सभा तक फ़रिश्तों की बात तथा मारे जाते हैं, प्रत्येक दिशा से।

### الآية 37:9

> ﻿دُحُورًا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ وَاصِبٌ [37:9]

राँदने के लिए तथा उनके लिए स्थायी यातना है।

### الآية 37:10

> ﻿إِلَّا مَنْ خَطِفَ الْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُ شِهَابٌ ثَاقِبٌ [37:10]

परन्तु, जो ले उड़े कुछ, तो पीछा करती है उसका दहकती ज्वाला।\[1\]
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1\. फिर यदि उस से बचा रह जाये तो आकाश की बात अपने नीचे के शैतानों तक पहूँचाता है और वह उसे काहिनों तथा ज्योतिषियों को बताते हैं। फिर वह उस में सौ झूठ मिला कर लोगों को बताते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारीः 6213, सह़ीह़ मुस्लिमः2228)

### الآية 37:11

> ﻿فَاسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمْ مَنْ خَلَقْنَا ۚ إِنَّا خَلَقْنَاهُمْ مِنْ طِينٍ لَازِبٍ [37:11]

तो आप इन (काफ़िरों) से प्रश्न करें कि क्या उन्हें पैदा करना अधिक कठिन है या जिन्हें\[1\] हमने पैदा किया है? हमने उन्हें\[2\] पैदा किया है, लेसदार मिट्टी से।
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1\. अर्थात फ़रिश्तों तथा आकाशों को। 2. उन के पिता आदम (अलैहिस्सलाम) को।

### الآية 37:12

> ﻿بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ [37:12]

बल्कि आपने आश्चर्य किया (उनके अस्वीकार पर) तथा वे उपहास करते हैं।

### الآية 37:13

> ﻿وَإِذَا ذُكِّرُوا لَا يَذْكُرُونَ [37:13]

और जब शिक्षा दी जाये, तो वे शिक्षा ग्रहण नहीं करते।

### الآية 37:14

> ﻿وَإِذَا رَأَوْا آيَةً يَسْتَسْخِرُونَ [37:14]

और जब देखते हैं कोई निशानी, तो उपहास करने लगते हैं।

### الآية 37:15

> ﻿وَقَالُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُبِينٌ [37:15]

तथा कहते हें कि ये तो मात्र खुला जादू है।

### الآية 37:16

> ﻿أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ [37:16]

(कहते हैं कि) क्या, जब हम मर जायेंगे तथा मिट्टी और हड्डियाँ हो जायेंगे, तो हम निश्चय पुनः जीवित किये जायेंगे?

### الآية 37:17

> ﻿أَوَآبَاؤُنَا الْأَوَّلُونَ [37:17]

और क्या, हमारे पहले पूर्वज भी (जीवित किये जायेंगे)?

### الآية 37:18

> ﻿قُلْ نَعَمْ وَأَنْتُمْ دَاخِرُونَ [37:18]

आप कह दें कि हाँ तथा तुम अपमानित (भी) होगे!

### الآية 37:19

> ﻿فَإِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٌ وَاحِدَةٌ فَإِذَا هُمْ يَنْظُرُونَ [37:19]

वो तो बस एक झिड़की होगी, फिर सहसा वे देख रहे होंगे।

### الآية 37:20

> ﻿وَقَالُوا يَا وَيْلَنَا هَٰذَا يَوْمُ الدِّينِ [37:20]

तथा कहेंगेः हाय हमारा विनाश! ये तो बदले (प्रलय) का दिन है।

### الآية 37:21

> ﻿هَٰذَا يَوْمُ الْفَصْلِ الَّذِي كُنْتُمْ بِهِ تُكَذِّبُونَ [37:21]

यही निर्णय का दिन है, जिसे तुम झुठला रहे थे।

### الآية 37:22

> ﻿۞ احْشُرُوا الَّذِينَ ظَلَمُوا وَأَزْوَاجَهُمْ وَمَا كَانُوا يَعْبُدُونَ [37:22]

(आदेश होगा कि) घेर लाओ सब अत्याचारियों को तथा उनके साथियों को और जिसकी वे इबादत (वंदना) कर रहे थे।

### الآية 37:23

> ﻿مِنْ دُونِ اللَّهِ فَاهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَاطِ الْجَحِيمِ [37:23]

अल्लाह के सिवा। फिर दिखा दो उन्हें नरक की राह।

### الآية 37:24

> ﻿وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُمْ مَسْئُولُونَ [37:24]

और उन्हें रोक\[1\] लो। उनसे प्रश्न किया जाये।
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1\. नरक में झोंकने से पहले।

### الآية 37:25

> ﻿مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ [37:25]

क्या हो गया है तुम्हें कि एक-दूसरे की सहायता नहीं करते?

### الآية 37:26

> ﻿بَلْ هُمُ الْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ [37:26]

बल्कि वे उस दिन, सिर झुकाये खड़े होंगे।

### الآية 37:27

> ﻿وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ [37:27]

और एक-दूसरे के सम्मुख होकर परस्पर प्रश्न करेंगेः\[1\]
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1. अर्थात एक-दूसरे को धिक्कारेंगे।

### الآية 37:28

> ﻿قَالُوا إِنَّكُمْ كُنْتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ الْيَمِينِ [37:28]

कहेंगे कि तुम हमारे पास आया करते थे दायें\[1\] से।
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1\. इस से अभिप्राय यह है कि धर्म तथा सत्य के नाम से आते थे अर्थात यह विश्वास दिलाते थे कि यही मिश्रणवाद मूल तथा सत्धर्म है।

### الآية 37:29

> ﻿قَالُوا بَلْ لَمْ تَكُونُوا مُؤْمِنِينَ [37:29]

वे\[1\] कहेंगेः बल्कि तुम स्वयं ईमान वाले न थे।
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1\. इस से अभिप्राय उन के प्रमुख लोग हैं।

### الآية 37:30

> ﻿وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُمْ مِنْ سُلْطَانٍ ۖ بَلْ كُنْتُمْ قَوْمًا طَاغِينَ [37:30]

तथा नहीं था हमारा तुमपर कोई अधिकार,\[1\] बल्कि तुम सवंय अवज्ञाकारी थे।
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1\. देखियेः सूरह इब्राहीम, आयतः22

### الآية 37:31

> ﻿فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَا ۖ إِنَّا لَذَائِقُونَ [37:31]

तो सिध्द हो गया हमपर हमारे पालनहार का कथन कि हम (यातना) चखने वाले हैं।

### الآية 37:32

> ﻿فَأَغْوَيْنَاكُمْ إِنَّا كُنَّا غَاوِينَ [37:32]

तो हमने तुम्हें कुपथ कर दिया। हम तो स्वयं कुपथ थे।

### الآية 37:33

> ﻿فَإِنَّهُمْ يَوْمَئِذٍ فِي الْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ [37:33]

फिर वे सभी, उस दिन यातना में साझी होंगे।

### الآية 37:34

> ﻿إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِالْمُجْرِمِينَ [37:34]

हम, इसी प्रकार, किया करते हैं अपराधियों के साथ।

### الآية 37:35

> ﻿إِنَّهُمْ كَانُوا إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ [37:35]

ये वो हैं कि जब कहा जाता था उनसे कि कोई पूज्य (वंदनीय) नहीं अल्लाह के अतिरिक्त, तो वे अभिमान करते थे।

### الآية 37:36

> ﻿وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُو آلِهَتِنَا لِشَاعِرٍ مَجْنُونٍ [37:36]

तथा कह रहे थेः क्या हम त्याग देने वाले हैं अपने पूज्यों को, एक उन्मत कवि के कारण?

### الآية 37:37

> ﻿بَلْ جَاءَ بِالْحَقِّ وَصَدَّقَ الْمُرْسَلِينَ [37:37]

बल्कि वह (नबी) सच लाये हैं तथा पुष्टि की है, सब रसूलों की।

### الآية 37:38

> ﻿إِنَّكُمْ لَذَائِقُو الْعَذَابِ الْأَلِيمِ [37:38]

निश्चय तुम दुःखदायी यातना चखने वाले हो।

### الآية 37:39

> ﻿وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ [37:39]

तथा तुम उसका प्रतिकार (बदला) दिये जाओगे, जो तुम कर रहे थे।

### الآية 37:40

> ﻿إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ [37:40]

परन्तु अल्लाह के शुध्द भक्त।

### الآية 37:41

> ﻿أُولَٰئِكَ لَهُمْ رِزْقٌ مَعْلُومٌ [37:41]

यही हैं, जिनके लिए विदित जीविका है।

### الآية 37:42

> ﻿فَوَاكِهُ ۖ وَهُمْ مُكْرَمُونَ [37:42]

प्रत्येक प्रकार के फल तथा यही आदरणीय होंगे।

### الآية 37:43

> ﻿فِي جَنَّاتِ النَّعِيمِ [37:43]

सुख के स्वर्गों में।

### الآية 37:44

> ﻿عَلَىٰ سُرُرٍ مُتَقَابِلِينَ [37:44]

आसनों पर एक-दूसरे के सम्मुख असीन होंगे।

### الآية 37:45

> ﻿يُطَافُ عَلَيْهِمْ بِكَأْسٍ مِنْ مَعِينٍ [37:45]

फिराये जायेंगे इनपर प्याले, प्रवाहित पेय के।

### الآية 37:46

> ﻿بَيْضَاءَ لَذَّةٍ لِلشَّارِبِينَ [37:46]

श्वेत आस्वात पीने वालों के लिए।

### الآية 37:47

> ﻿لَا فِيهَا غَوْلٌ وَلَا هُمْ عَنْهَا يُنْزَفُونَ [37:47]

नहीं होगी उसमें शारिरिक पीड़ा, न वे उसमें बहकेंगे।

### الآية 37:48

> ﻿وَعِنْدَهُمْ قَاصِرَاتُ الطَّرْفِ عِينٌ [37:48]

तथा उनके पास आँखे झुकाये, (सति) बड़ी आँखों वाली (नारियाँ) होंगी।

### الآية 37:49

> ﻿كَأَنَّهُنَّ بَيْضٌ مَكْنُونٌ [37:49]

वह छुपाये हुए अन्डों के मानिन्द होंगी।\[1\]
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1\. अर्थात जिस प्रकार पक्षी के पंखों के नीचे छुपे हुये अन्डे सुरक्षित होते हैं वैसे ही वह नारियाँ सुरक्षित, सुन्दर रंग और रूप की होंगी।

### الآية 37:50

> ﻿فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ [37:50]

वह एक-दूसरे से सम्मुख होकर प्रश्न करेंगे।

### الآية 37:51

> ﻿قَالَ قَائِلٌ مِنْهُمْ إِنِّي كَانَ لِي قَرِينٌ [37:51]

तो कहेगा एक कहने वाला उनमें सेः मेरा एक साथी था।

### الآية 37:52

> ﻿يَقُولُ أَإِنَّكَ لَمِنَ الْمُصَدِّقِينَ [37:52]

जो कहता था कि क्या तुम (प्रलय का) विश्वास करने वालों में से हो?

### الآية 37:53

> ﻿أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَدِينُونَ [37:53]

क्या जब हम, मर जायेंगे तथा मिट्टी और अस्थियाँ हो जायेंगे, तो क्या हमें (कर्मों) का प्रतिफल दिया जायेगा?

### الآية 37:54

> ﻿قَالَ هَلْ أَنْتُمْ مُطَّلِعُونَ [37:54]

वह कहेगाः क्या तुम झाँककर देखने वाले हो?

### الآية 37:55

> ﻿فَاطَّلَعَ فَرَآهُ فِي سَوَاءِ الْجَحِيمِ [37:55]

फिर झाँकते ही उसे देख लेगा, नरक के बीच।

### الآية 37:56

> ﻿قَالَ تَاللَّهِ إِنْ كِدْتَ لَتُرْدِينِ [37:56]

उससे कहेगाः अल्लाह की शपथ! तुम तो मेरा विनाश कर देने के समीप थे।

### الآية 37:57

> ﻿وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّي لَكُنْتُ مِنَ الْمُحْضَرِينَ [37:57]

और यदि मेरे पालनहार का अनुग्रह न होता, तो मैं (नरक के) उपस्थितों में होता।

### الآية 37:58

> ﻿أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ [37:58]

फिर वह कहेगाः क्या (ये सही नहीं है कि) हम मरने वाले नहीं हैं?

### الآية 37:59

> ﻿إِلَّا مَوْتَتَنَا الْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ [37:59]

सिवाय अपनी प्रथम मौत के और न हमें यातना दी जायेगी।

### الآية 37:60

> ﻿إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ [37:60]

वास्तव में, यही बड़ी सफलता है।

### الآية 37:61

> ﻿لِمِثْلِ هَٰذَا فَلْيَعْمَلِ الْعَامِلُونَ [37:61]

इसी (जैसी सफलता) के लिए चाहिये कि कर्म करें, कर्म करने वाले।

### الآية 37:62

> ﻿أَذَٰلِكَ خَيْرٌ نُزُلًا أَمْ شَجَرَةُ الزَّقُّومِ [37:62]

क्या ये आतिथ्य उत्तम है अथवा थोहड़ का वृक्ष?

### الآية 37:63

> ﻿إِنَّا جَعَلْنَاهَا فِتْنَةً لِلظَّالِمِينَ [37:63]

हमने उसे अत्याचारियों के लिए एक परीक्षा बनाया है।

### الآية 37:64

> ﻿إِنَّهَا شَجَرَةٌ تَخْرُجُ فِي أَصْلِ الْجَحِيمِ [37:64]

वह एक वृक्ष है, जो नरक की जड़ (तह) से निकलता है।

### الآية 37:65

> ﻿طَلْعُهَا كَأَنَّهُ رُءُوسُ الشَّيَاطِينِ [37:65]

उसके गुच्छे शैतानों के सिरों के समान हैं।

### الآية 37:66

> ﻿فَإِنَّهُمْ لَآكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِئُونَ مِنْهَا الْبُطُونَ [37:66]

तो वे (नरक वासी) खाने वाले हैं, उससे। फिर भरने वाले हैं, उससे अपने पेट।

### الآية 37:67

> ﻿ثُمَّ إِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًا مِنْ حَمِيمٍ [37:67]

फिर उनके लिए उसके ऊपर से खौलता गरम पानी है।

### الآية 37:68

> ﻿ثُمَّ إِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَإِلَى الْجَحِيمِ [37:68]

फिर उन्हें प्रत्यागत होना है, नरक की ओर।

### الآية 37:69

> ﻿إِنَّهُمْ أَلْفَوْا آبَاءَهُمْ ضَالِّينَ [37:69]

वास्तव में, उन्होंने पाया अपने पूर्वजों को कुपथ।

### الآية 37:70

> ﻿فَهُمْ عَلَىٰ آثَارِهِمْ يُهْرَعُونَ [37:70]

फिर वे उन्हीं के पद्चिन्हों पर\[1\] दौड़े चले जा रहे हैं।
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1\. इस में नरक में जाने का जो सब से बड़ा कारण बताया गया है वह है नबी को न मानना, और अपने पूर्वजों के पंथ पर ही चलते रहना।

### الآية 37:71

> ﻿وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ أَكْثَرُ الْأَوَّلِينَ [37:71]

और कुपथ हो चुके हैं, इनसे पूर्व अगले लोगों में से अधिक्तर।

### الآية 37:72

> ﻿وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِمْ مُنْذِرِينَ [37:72]

तथा हम भेज चुके हैं उनमें, सचेत (सावधान) करने वाले।

### الآية 37:73

> ﻿فَانْظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنْذَرِينَ [37:73]

तो देखो कि कैसा रहा सावधान किये हुए लोगों का परिणाम?\[1\]
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1\. अतः उन के दुष्परिणाम से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिये।

### الآية 37:74

> ﻿إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ [37:74]

हमारे शुध्द भक्तों के सिवा।

### الآية 37:75

> ﻿وَلَقَدْ نَادَانَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ الْمُجِيبُونَ [37:75]

तथा हमें पुकारा नूह़ नेः तो हम क्या ही अच्छे प्रार्थना स्वीकार करने वाले हैं।

### الآية 37:76

> ﻿وَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ [37:76]

और हमने बचा लिया उसे और उसके परिजनों को, घोर आपदा से।

### الآية 37:77

> ﻿وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُ هُمُ الْبَاقِينَ [37:77]

तथा कर दिया हमने उसकी संतति को, शेष\[1\] रह जाने वालों में से।
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1\. उस की जाति के जलमग्न हो जाने के पश्चात्।

### الآية 37:78

> ﻿وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ [37:78]

तथा शेष रखा हमने उसकी सराहना तथा प्रशंसा को पिछलों में।

### الآية 37:79

> ﻿سَلَامٌ عَلَىٰ نُوحٍ فِي الْعَالَمِينَ [37:79]

सलाम (सुरक्षा)\[1\] है नूह़ के लिए समस्त विश्ववासियों में।
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1\. अर्थात उस की बुरी चर्चा से।

### الآية 37:80

> ﻿إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ [37:80]

इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।

### الآية 37:81

> ﻿إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ [37:81]

वास्तव में, वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।

### الآية 37:82

> ﻿ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ [37:82]

फिर हमने जलमगन कर दिया दूसरों को।

### الآية 37:83

> ﻿۞ وَإِنَّ مِنْ شِيعَتِهِ لَإِبْرَاهِيمَ [37:83]

और उसके अनुयायियों में निश्चय इब्राहीम है।

### الآية 37:84

> ﻿إِذْ جَاءَ رَبَّهُ بِقَلْبٍ سَلِيمٍ [37:84]

जब लाया वह अपने पालनहार के पास स्वच्छ दिल।

### الآية 37:85

> ﻿إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ مَاذَا تَعْبُدُونَ [37:85]

जब कहा उसने अपने पिता तथा अपनी जाति सेः तुम किसकी इबादत (वंदना) कर रहे हो?

### الآية 37:86

> ﻿أَئِفْكًا آلِهَةً دُونَ اللَّهِ تُرِيدُونَ [37:86]

क्या अपने बनाये हुए पूज्यों को अल्लाह के सिवा चाहते हो?

### الآية 37:87

> ﻿فَمَا ظَنُّكُمْ بِرَبِّ الْعَالَمِينَ [37:87]

तो तुम्हारा क्या विचार है, विश्व के पालनहार के विषय में?

### الآية 37:88

> ﻿فَنَظَرَ نَظْرَةً فِي النُّجُومِ [37:88]

फिर उसने देखा तोरों की\[1\] ओर।
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1\. यह सोचते हुये कि इन के उत्सव में न जाने के लिये क्या बहाना करूँ।

### الآية 37:89

> ﻿فَقَالَ إِنِّي سَقِيمٌ [37:89]

तथा उनसे कहाः मैं रोगी हूँ।

### الآية 37:90

> ﻿فَتَوَلَّوْا عَنْهُ مُدْبِرِينَ [37:90]

तो उसे छोड़कर चले गये।

### الآية 37:91

> ﻿فَرَاغَ إِلَىٰ آلِهَتِهِمْ فَقَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ [37:91]

फिर वह जा पहुँचा, उनके उपास्यों (पूज्यों) की ओर। कहा कि (वे प्रसाद) क्यों नहीं खाते?

### الآية 37:92

> ﻿مَا لَكُمْ لَا تَنْطِقُونَ [37:92]

तुम्हें क्या हुआ है कि बोलते नहीं?

### الآية 37:93

> ﻿فَرَاغَ عَلَيْهِمْ ضَرْبًا بِالْيَمِينِ [37:93]

फिर पिल पड़ा उनपर मारते हुए, दायें हाथ से।

### الآية 37:94

> ﻿فَأَقْبَلُوا إِلَيْهِ يَزِفُّونَ [37:94]

तो वे आये उसकी ओर दौड़ते हुए।

### الآية 37:95

> ﻿قَالَ أَتَعْبُدُونَ مَا تَنْحِتُونَ [37:95]

इब्राहीम ने कहाः क्या तुम इबादत (वंदना) करते हो उसकी जिसे, पत्थरों से तराश्ते हो?

### الآية 37:96

> ﻿وَاللَّهُ خَلَقَكُمْ وَمَا تَعْمَلُونَ [37:96]

जबकि अल्लाह ने पैदा किया है तुम्हें तथा जो तुम करते हो।

### الآية 37:97

> ﻿قَالُوا ابْنُوا لَهُ بُنْيَانًا فَأَلْقُوهُ فِي الْجَحِيمِ [37:97]

उन्होंने कहाः इसके लिए एक (अग्निशाला का) निर्माण करो और उसे झोंक दो दहकती अग्नि में।

### الآية 37:98

> ﻿فَأَرَادُوا بِهِ كَيْدًا فَجَعَلْنَاهُمُ الْأَسْفَلِينَ [37:98]

तो उन्होंने उसके साथ षड्यंत्र रचा, तो हमने उन्हीं को नीचा कर दिया।

### الآية 37:99

> ﻿وَقَالَ إِنِّي ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّي سَيَهْدِينِ [37:99]

तथा उसने कहाः मैं जाने वाला हूँ अपने पालनहार की\[1\] ओर। वह मुझे सुपथ दर्शायेगा।
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. अर्थात ऐसे स्थान की ओर जहाँ अपने पालनहार की इबादत कर सकूँ।

### الآية 37:100

> ﻿رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ [37:100]

हे मेरे पालनहार! प्रदान कर मुझे, एक सदाचारी (पुनीत) पुत्र।

### الآية 37:101

> ﻿فَبَشَّرْنَاهُ بِغُلَامٍ حَلِيمٍ [37:101]

तो हमने शुभ सूचना दी उसे, एक सहनशील पुत्र की।

### الآية 37:102

> ﻿فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ السَّعْيَ قَالَ يَا بُنَيَّ إِنِّي أَرَىٰ فِي الْمَنَامِ أَنِّي أَذْبَحُكَ فَانْظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَا أَبَتِ افْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِي إِنْ شَاءَ اللَّهُ مِنَ الصَّابِرِينَ [37:102]

फिर जब वह पहुँचा उसके साथ चलने-फिरने की आयु को, तो इब्राहीम ने कहाः हे मेरे प्रिय पुत्र! मैं देख रहा हूँ स्वप्न में कि मैं तुझे वध कर रहा हूँ। अब, तू बता कि तेरा क्या विचार है? उसने कहाः हे पिता! पालन करें, जिसका आदेश आपको दिया जा रहा है। आप पायेंगे मुझे सहनशीलों में से, यदि अल्लाह की इच्छा हूई।

### الآية 37:103

> ﻿فَلَمَّا أَسْلَمَا وَتَلَّهُ لِلْجَبِينِ [37:103]

अन्ततः, जब दोनों ने स्वयं को अर्पित कर दिया और उस (पिता) ने उसे गिरा दिया माथे के बल।

### الآية 37:104

> ﻿وَنَادَيْنَاهُ أَنْ يَا إِبْرَاهِيمُ [37:104]

तब हमने उसे आवाज़ दी कि हे इब्राहीम!

### الآية 37:105

> ﻿قَدْ صَدَّقْتَ الرُّؤْيَا ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ [37:105]

तूने सच कर दिया अपना स्वप्न। इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।

### الآية 37:106

> ﻿إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْبَلَاءُ الْمُبِينُ [37:106]

वास्तव में, ये खुली परीक्षा थी।

### الآية 37:107

> ﻿وَفَدَيْنَاهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍ [37:107]

और हमने उसके मुक्ति-प्रतिदान के रूप में, प्रदान कर दी एक महान\[1\] बली।
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. यह महान बलि एक मेंढा था। जिसे जिब्रील (अलाहिस्सलाम) द्वारा स्वर्ग से भेजा गया। जो आप के प्रिय पुत्र इस्माईल (अलैहिस्सलाम) के स्थान पर बलि दिया गया। फिर इस विधि को प्रलय तक के लिये अल्लाह के सामिप्य का एक साधन तथा ईदुल अज़्ह़ा (बक़रईद) का प्रियवर कर्म बना दिया गया। जिसे संसार के सभी मुसलमान ईदुल अज़्ह़ा में करते हैं।

### الآية 37:108

> ﻿وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ [37:108]

तथा हमने शेष रखी उसकी शुभ चर्चा पिछलों में।

### الآية 37:109

> ﻿سَلَامٌ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ [37:109]

सलाम है इब्रीम पर।

### الآية 37:110

> ﻿كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ [37:110]

इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।

### الآية 37:111

> ﻿إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ [37:111]

निश्चय ही वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।

### الآية 37:112

> ﻿وَبَشَّرْنَاهُ بِإِسْحَاقَ نَبِيًّا مِنَ الصَّالِحِينَ [37:112]

तथा हमने उसे शुभसूचना दी इस्ह़ाक़ नबी की, जो सदाचारियों में\[1\] होगा।
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. इस आयत से विद्वत होता है कि इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को इस बलि के पश्चात् दूसरे पुत्र आदरणीय इस्ह़ाक़ की शुभ सूचना दी गई। इस से ज्ञान हुआ की बलि इस्माईल (अलैहिस्सलाम) की दी गई थी। और दोनों की आयु में लग-लग चौदह वर्ष का अन्तर है।

### الآية 37:113

> ﻿وَبَارَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰ إِسْحَاقَ ۚ وَمِنْ ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌ وَظَالِمٌ لِنَفْسِهِ مُبِينٌ [37:113]

तथा हमने बरकत (विभूति) अवतरिक की उसपर तथा इस्ह़ाक़ पर और उन दोनों की संतति में से कोई सदाचारी है और कोई अपने लिए खुला अत्याचारी।

### الآية 37:114

> ﻿وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ [37:114]

तथा हमने उपकार किया मूसा और हारून पर।

### الآية 37:115

> ﻿وَنَجَّيْنَاهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ [37:115]

तथा मुक्त किया दोनों को और उनकी जाति को, घोर व्यग्रता से।

### الآية 37:116

> ﻿وَنَصَرْنَاهُمْ فَكَانُوا هُمُ الْغَالِبِينَ [37:116]

तथा हमने सहायता की उनकी, तो वही प्रभावशाली हो गये।

### الآية 37:117

> ﻿وَآتَيْنَاهُمَا الْكِتَابَ الْمُسْتَبِينَ [37:117]

तथा हमने प्रदान की दोनों को प्रकाशमय पुस्तक (तौरात)।

### الآية 37:118

> ﻿وَهَدَيْنَاهُمَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ [37:118]

और हमने दर्शाई दोनों को सीधी डगर।

### الآية 37:119

> ﻿وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِي الْآخِرِينَ [37:119]

तथा शेष रखी दोनों की शुभ चर्चा, पिछलों में।

### الآية 37:120

> ﻿سَلَامٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ [37:120]

सलाम है मूसा तथा हारून पर।

### الآية 37:121

> ﻿إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ [37:121]

हम इसी प्रकार प्रतिफल प्रदान करते हैं, सदाचारियों को।

### الآية 37:122

> ﻿إِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ [37:122]

वस्तुतः, वे दोनों हमारे ईमान वाले भक्तों में थे।

### الآية 37:123

> ﻿وَإِنَّ إِلْيَاسَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ [37:123]

तथा निश्चय इल्यास, नबियों में से था।

### الآية 37:124

> ﻿إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ أَلَا تَتَّقُونَ [37:124]

जब कहा उसने अपनी जाति सेः क्या तुम डरते नहीं हो?

### الآية 37:125

> ﻿أَتَدْعُونَ بَعْلًا وَتَذَرُونَ أَحْسَنَ الْخَالِقِينَ [37:125]

क्या तुम बअल ( नामक मूर्ति) को पुकारते हो? तथा त्याग रहे हो सर्वोत्तम उत्पत्तिकर्ता को?

### الآية 37:126

> ﻿اللَّهَ رَبَّكُمْ وَرَبَّ آبَائِكُمُ الْأَوَّلِينَ [37:126]

अल्लाह ही तुम्हारा पालनहार है तथा तुम्हारे प्रथम पूर्वजों का पालनहार है।

### الآية 37:127

> ﻿فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ [37:127]

अन्ततः, उन्होंने झुठला दिया उसे। तो निश्चय वही (नरक में) उपस्थित होंगे।

### الآية 37:128

> ﻿إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ [37:128]

किन्तु, अल्लाह के शुध्द भक्त।

### الآية 37:129

> ﻿وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ [37:129]

तथा शेष रखी हमने उसकी शुभ चर्चा पिछलों में।

### الآية 37:130

> ﻿سَلَامٌ عَلَىٰ إِلْ يَاسِينَ [37:130]

सलाम है इल्यासीन\[1\] पर।
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. इल्यासीन इल्यास ही का एक उच्चारण है। उन्हें अन्य धर्म ग्रन्थों में इलया भी कहा गया है।

### الآية 37:131

> ﻿إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ [37:131]

वास्तव में, हम इसी प्रकार प्रतिफल प्रदान करते हैं, सदाचारियों को।

### الآية 37:132

> ﻿إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ [37:132]

वस्तुतः, वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।

### الآية 37:133

> ﻿وَإِنَّ لُوطًا لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ [37:133]

तथा निश्चय लूत नबियों में से था।

### الآية 37:134

> ﻿إِذْ نَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ أَجْمَعِينَ [37:134]

जब हमने मुक्त किया उसे तथा उसके सबपरिजनों को।

### الآية 37:135

> ﻿إِلَّا عَجُوزًا فِي الْغَابِرِينَ [37:135]

एक बुढ़िया\[1\] के सिवा, जो पीछे रह जाने वालों में थी।
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. यह लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नि थी।

### الآية 37:136

> ﻿ثُمَّ دَمَّرْنَا الْآخَرِينَ [37:136]

फिर हमने अन्यों को तहस-नहस कर दिया।

### الآية 37:137

> ﻿وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِمْ مُصْبِحِينَ [37:137]

तथा तुम\[1\] ग़ुज़रते हो उन (की निर्जीव बस्तियों) पर, प्रातः के समय।
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. मक्का वासियों को संबोधित किया गया है।

### الآية 37:138

> ﻿وَبِاللَّيْلِ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ [37:138]

तथा रात्रि में। तो क्या तुम समझते नहीं हो?

### الآية 37:139

> ﻿وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ [37:139]

तथा निश्चय यूनुस नबियों में से था।

### الآية 37:140

> ﻿إِذْ أَبَقَ إِلَى الْفُلْكِ الْمَشْحُونِ [37:140]

जब वह भाग\[1\] गया भरी नाव की ओर।
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. अल्लाह की अनुमति के बिना अपने नगर से नगर वासियों को यातना के आन की सूचना दे कर निकल गये। और नाव पर सवार हो गये। नाव सागर की लहरों में घिर गई। इस लिये बोझ कम करने के लिये नाम निकाला गया। तो यूनुस अलैहिस्सलाम का नाम निकला और उन्हें समुद्र में फेंक दिया गया।

### الآية 37:141

> ﻿فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ الْمُدْحَضِينَ [37:141]

फिर नाम निकाला गया, तो वह हो गया फेंके हुओं में से।

### الآية 37:142

> ﻿فَالْتَقَمَهُ الْحُوتُ وَهُوَ مُلِيمٌ [37:142]

तो निगल लिया उसे मछली ने और वह निन्दित था।

### الآية 37:143

> ﻿فَلَوْلَا أَنَّهُ كَانَ مِنَ الْمُسَبِّحِينَ [37:143]

तो यदि न होता अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करने वालों में।

### الآية 37:144

> ﻿لَلَبِثَ فِي بَطْنِهِ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ [37:144]

तो वह रह जाता उसके उदर में उस दिन तक, जब सब पुनः जीवित किये\[1\] जायेंगे।
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. अर्थात प्रयल के दिन तक। (देखियेः सूरह अम्बिया, आयतः87)

### الآية 37:145

> ﻿۞ فَنَبَذْنَاهُ بِالْعَرَاءِ وَهُوَ سَقِيمٌ [37:145]

तो हमने फेंक दिया उसे खुले मैदान में और वह रोगी\[1\] था।
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. अर्थात निर्बल नवजात शिशु के समान।

### الآية 37:146

> ﻿وَأَنْبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةً مِنْ يَقْطِينٍ [37:146]

और उगा दिया उस\[1\] पर लताओं का एक वृक्ष।
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. रक्षा के लिये।

### الآية 37:147

> ﻿وَأَرْسَلْنَاهُ إِلَىٰ مِائَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ [37:147]

तथा हमने उसे रसूल बनाकर भेजा एक लाख, बल्कि अधिक की ओर।

### الآية 37:148

> ﻿فَآمَنُوا فَمَتَّعْنَاهُمْ إِلَىٰ حِينٍ [37:148]

तो वे ईमान लाये। फिर हमने उन्हें सुख-सुविधा प्रदान की एक समय\[1\] तक।
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. देखियेः सूरह यूनुस।

### الآية 37:149

> ﻿فَاسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ الْبَنَاتُ وَلَهُمُ الْبَنُونَ [37:149]

तो (हे नबी!) आप उनसे प्रश्न करें कि क्या आपके पालनहार के लिए तो पुत्रियाँ हों और उनके लिए पुत्र?

### الآية 37:150

> ﻿أَمْ خَلَقْنَا الْمَلَائِكَةَ إِنَاثًا وَهُمْ شَاهِدُونَ [37:150]

अथवा किया हमने पैदा किया है फ़रिश्तों को नारियाँ और वे उस समय उपस्थित\[1\] थे?
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. इस में मक्का के मिश्रणवादियों का खण्डन किया जा रहा है जो फ़रिश्तों को देवियाँ तथा अल्लाह की पुत्रियाँ कहते थे। जब कि वह स्वयं पुत्रियों के जन्म को अप्रिय मानते थे।

### الآية 37:151

> ﻿أَلَا إِنَّهُمْ مِنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ [37:151]

सावधान! वास्तव में, वे अपने मन से बनाकर ये बात कह रहे हैं।

### الآية 37:152

> ﻿وَلَدَ اللَّهُ وَإِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ [37:152]

कि अल्लाह ने संतान बनाई है और निश्चय ये मिथ्या भाषी हैं।

### الآية 37:153

> ﻿أَصْطَفَى الْبَنَاتِ عَلَى الْبَنِينَ [37:153]

क्या अल्लाह ने प्राथमिक्ता दी है पुत्रियों को, पुत्रों पर?

### الآية 37:154

> ﻿مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ [37:154]

तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा निर्णय दे रहे हो?

### الآية 37:155

> ﻿أَفَلَا تَذَكَّرُونَ [37:155]

तो क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते?

### الآية 37:156

> ﻿أَمْ لَكُمْ سُلْطَانٌ مُبِينٌ [37:156]

अथवा तुम्हारे पास कोई प्रत्यक्ष प्रमाण है?

### الآية 37:157

> ﻿فَأْتُوا بِكِتَابِكُمْ إِنْ كُنْتُمْ صَادِقِينَ [37:157]

तो अपनी पुस्तक लाओ, यदि तुम सत्यवादी हो?

### الآية 37:158

> ﻿وَجَعَلُوا بَيْنَهُ وَبَيْنَ الْجِنَّةِ نَسَبًا ۚ وَلَقَدْ عَلِمَتِ الْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ [37:158]

और उन्होंने बना दिया अल्लाह तथा जिन्नों के मध्य, वंश-संबंध। जबकि जिन्न स्वयं जानते हैं कि वे अल्लाह के समक्ष निश्चय उपस्थित किये\[1\] जायेंगे।
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. अर्थात यातना के लिये। तो यदि वे उस के संबंधी होते तो उन्हें यातना क्यों देता?

### الآية 37:159

> ﻿سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ [37:159]

अल्लाह पवित्र है उन गुणों से, जिनका वे वर्णन कर रहे हैं।

### الآية 37:160

> ﻿إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ [37:160]

परन्तु, अल्लाह के शुध्द भक्त।\[1\]
\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_\_
1\. वह अल्लाह को ऐसे दुर्गुणों से युक्त नहीं करते।

### الآية 37:161

> ﻿فَإِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ [37:161]

तो निश्चय तुम तथा तुम्हारे पूज्य।

### الآية 37:162

> ﻿مَا أَنْتُمْ عَلَيْهِ بِفَاتِنِينَ [37:162]

तुम सब किसी एक को भी कुपथ नहीं कर सकते।

### الآية 37:163

> ﻿إِلَّا مَنْ هُوَ صَالِ الْجَحِيمِ [37:163]

उसके सिवा, जो नरक में झोंका जाने वाला है।

### الآية 37:164

> ﻿وَمَا مِنَّا إِلَّا لَهُ مَقَامٌ مَعْلُومٌ [37:164]

और नहीं है हम (फ़रिश्तों) में से कोई, परन्तु उसका एक नियमित स्थान है।

### الآية 37:165

> ﻿وَإِنَّا لَنَحْنُ الصَّافُّونَ [37:165]

तथा हम ही (आज्ञापालन के लिए) पंक्तिवध्द हैं।

### الآية 37:166

> ﻿وَإِنَّا لَنَحْنُ الْمُسَبِّحُونَ [37:166]

और हम ही तस्बीह़ (पवित्रता गान) करने वाले हैं।

### الآية 37:167

> ﻿وَإِنْ كَانُوا لَيَقُولُونَ [37:167]

तथा वे (मुश्रिक) तो कहा करते थे किः

### الآية 37:168

> ﻿لَوْ أَنَّ عِنْدَنَا ذِكْرًا مِنَ الْأَوَّلِينَ [37:168]

यदि हमारे पास कोई स्मृति (पुस्तक) होती, जो पहले लोगों में आई......

### الآية 37:169

> ﻿لَكُنَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ [37:169]

तो हम अवश्य अल्लाह के शुध्द भक्तों में हो जाते।

### الآية 37:170

> ﻿فَكَفَرُوا بِهِ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ [37:170]

(फिर जब आ गयी) तो उन्होंने क़ुर्आन के साथ कुफ़्र कर दिया, अतः, शीघ्र ही उन्हें ज्ञान हो जायेगा।

### الآية 37:171

> ﻿وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا الْمُرْسَلِينَ [37:171]

और पहले ही हमारा वचन हो चुका है अपने भेजे हुए भक्तों के लिए।

### الآية 37:172

> ﻿إِنَّهُمْ لَهُمُ الْمَنْصُورُونَ [37:172]

कि निश्चय उन्हीं की सहायता की जायेगी।

### الآية 37:173

> ﻿وَإِنَّ جُنْدَنَا لَهُمُ الْغَالِبُونَ [37:173]

तथा वास्तव में हमारी सेना ही प्रभावशाली (विजयी) होने वाली है।

### الآية 37:174

> ﻿فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ [37:174]

तो आप मुँह फेर लें उनसे, कुछ समय तक।

### الآية 37:175

> ﻿وَأَبْصِرْهُمْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ [37:175]

तथा उन्हें देखते रहें। वे भी शीघ्र ही देख लेंगे।

### الآية 37:176

> ﻿أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ [37:176]

तो क्या, वे हमारी यातना की शीघ्र माँग कर रहे हैं।

### الآية 37:177

> ﻿فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَاءَ صَبَاحُ الْمُنْذَرِينَ [37:177]

तो जब वह उतर आयेगी उनके मैदानों में, तो बुरा हो जायेगा सावधान किये हुओं का सवेरा।

### الآية 37:178

> ﻿وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ [37:178]

और आप मुँह फेर लें उनसे, कुछ समय तक।

### الآية 37:179

> ﻿وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ [37:179]

तथा देखते रहें, अन्ततः वे (भी) देख लेंगे।

### الآية 37:180

> ﻿سُبْحَانَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ [37:180]

पवित्र है आपका पालनहार, गौरव का स्वामी, उस बात से, जो वे बना रहे हैं।

### الآية 37:181

> ﻿وَسَلَامٌ عَلَى الْمُرْسَلِينَ [37:181]

तथा सलाम है रसूलों पर।

### الآية 37:182

> ﻿وَالْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ [37:182]

तथा सभी प्रशंसा, अल्लाह, सर्वलोक के पालनहार के लिए है।

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- [كل تفاسير سورة الصافات
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- [صفحة الكتاب: الترجمة الهندية](https://quranpedia.net/book/1986.md)
- [المؤلف: مولانا عزيز الحق العمري](https://quranpedia.net/person/1761.md)

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