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title: "ترجمة سورة الذاريات - الترجمة الهندية (الهندية)"
url: "https://quranpedia.net/surah/1/51/book/1986.md"
canonical: "https://quranpedia.net/surah/1/51/book/1986"
surah_id: "51"
book_id: "1986"
book_name: "الترجمة الهندية"
author: "مولانا عزيز الحق العمري"
type: "translation"
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# ترجمة سورة الذاريات - الترجمة الهندية (الهندية)

📖 **[اقرأ النسخة التفاعلية الكاملة على Quranpedia](https://quranpedia.net/surah/1/51/book/1986)** — مع التلاوات الصوتية، البحث، والربط بين المصادر.

## Citation

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Translation of Surah الذاريات from "الترجمة الهندية" in الهندية.

### الآية 51:1

> وَالذَّارِيَاتِ ذَرْوًا [51:1]

शपथ है (बादलों को) बिखेरने वालियों की!

### الآية 51:2

> ﻿فَالْحَامِلَاتِ وِقْرًا [51:2]

फिर (बादलों का) बोझ लादने वालियों की!

### الآية 51:3

> ﻿فَالْجَارِيَاتِ يُسْرًا [51:3]

फिर धीमी गति से चलने वालियों की!

### الآية 51:4

> ﻿فَالْمُقَسِّمَاتِ أَمْرًا [51:4]

फिर (अल्लाह का) आदेश बाँटने वाले (फ़रिश्तों की)!

### الآية 51:5

> ﻿إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقٌ [51:5]

निश्चय जिस (प्रलय) से तुम्हें डराया जा रहा है, वह सच्ची है।\[1\]
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1\. इन आयतों में हवाओं की शपथ ली गई है कि हवा (वायु) तथा वर्षा की यह व्यवस्था गवाह है कि प्रलय तथा परलोक का वचन सत्य तथा न्याय का होना आवश्यक है।

### الآية 51:6

> ﻿وَإِنَّ الدِّينَ لَوَاقِعٌ [51:6]

तथा कर्मों का फल अवश्य मिलने वाला है।

### الآية 51:7

> ﻿وَالسَّمَاءِ ذَاتِ الْحُبُكِ [51:7]

शपथ है रास्तों वाले आकाश की!

### الآية 51:8

> ﻿إِنَّكُمْ لَفِي قَوْلٍ مُخْتَلِفٍ [51:8]

वास्तव में, तुम विभिन्न\[1\] बातों में हो।
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1\. अर्थात क़ुर्आन तथा प्रलय के विषय में विभिन्न बातें कर रहे हैं।

### الآية 51:9

> ﻿يُؤْفَكُ عَنْهُ مَنْ أُفِكَ [51:9]

उससे वही फेर दिया जाता है, जो (सत्य से) फिरा हुआ हो।

### الآية 51:10

> ﻿قُتِلَ الْخَرَّاصُونَ [51:10]

नाश कर दिये गये अनुमान लगाने वाले।

### الآية 51:11

> ﻿الَّذِينَ هُمْ فِي غَمْرَةٍ سَاهُونَ [51:11]

जो अपनी अचेतना में भूले हुए हैं।

### الآية 51:12

> ﻿يَسْأَلُونَ أَيَّانَ يَوْمُ الدِّينِ [51:12]

वे प्रश्न\[1\] करते हैं कि प्रतिकार का दिन कब है?
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1\. अर्थात उपहास स्वरूप प्रश्न करते हैं।

### الآية 51:13

> ﻿يَوْمَ هُمْ عَلَى النَّارِ يُفْتَنُونَ [51:13]

(उस दिन है) जिस दिन वह अग्नि पर तपाये जायेंगे।

### الآية 51:14

> ﻿ذُوقُوا فِتْنَتَكُمْ هَٰذَا الَّذِي كُنْتُمْ بِهِ تَسْتَعْجِلُونَ [51:14]

(उनसे कहा जायेगाः) स्वाद चखो अपने उपद्रव का। यही वह है, जिसकी तुम शीघ्र माँग कर रहे थे।

### الآية 51:15

> ﻿إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ [51:15]

वास्तव में, आज्ञाकारी स्वर्गों तथा जल स्रोतों में होंगे।

### الآية 51:16

> ﻿آخِذِينَ مَا آتَاهُمْ رَبُّهُمْ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَبْلَ ذَٰلِكَ مُحْسِنِينَ [51:16]

लेते हुए जो कुछ प्रदान किया है उनहें, उनके पालनहारन ने। वस्तुतः, वे इससे पहले (संसार में) सदाचारी थे।

### الآية 51:17

> ﻿كَانُوا قَلِيلًا مِنَ اللَّيْلِ مَا يَهْجَعُونَ [51:17]

वे रात्रि में बहुत कम सोया करते थे।\[1\]
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1\. अर्थात अपना अधिक समय अल्लाह के स्मरण में लगाते थे। जैसे तहज्जुद की नमाज़ और तस्बीह़ आदि।

### الآية 51:18

> ﻿وَبِالْأَسْحَارِ هُمْ يَسْتَغْفِرُونَ [51:18]

तथा भोरों\[1\] में क्षमा माँगते थे।
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1\. ह़दीस में है कि अल्लाह प्रत्येक रात में जब तिहाई रात रह जाये तो संसार के आकाश की ओर उतरता है। और कहता हैः है कोई जो मुझे पुकारे तो मैं उस की पुकार सुनूँ? है कोई जो माँगे तो मैं उसे दूँ? है कोई जो मुझ से क्षमा माँगे तो मैं उसे क्षमा करूँ? ( बुख़ारीः 1145, मुस्लिमः758)

### الآية 51:19

> ﻿وَفِي أَمْوَالِهِمْ حَقٌّ لِلسَّائِلِ وَالْمَحْرُومِ [51:19]

और उनके धनों में माँगने वाले\[1\] तथा न पाने वाले का ह़क़ था।
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1\. अर्थात जो निर्धन होते हुये भी नहीं माँगता था इस लिये उसे नहीं मिलता था।

### الآية 51:20

> ﻿وَفِي الْأَرْضِ آيَاتٌ لِلْمُوقِنِينَ [51:20]

तथा धरती में बहुत-सी निशानियाँ हैं विश्वास करने वालों के लिए।

### الآية 51:21

> ﻿وَفِي أَنْفُسِكُمْ ۚ أَفَلَا تُبْصِرُونَ [51:21]

तथा स्वयं तुम्हारे भीतर (भी)। फिर क्यों तुम देखते नहीं?

### الآية 51:22

> ﻿وَفِي السَّمَاءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوعَدُونَ [51:22]

और आकाश में तुम्हारी जीविका\[1\] है तथा जिसका तुम्हें वचन दिया जा रहा है।
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1\. अर्थात आकाश की वर्षा तुम्हारी जीविका का साधन बनती है। तथा स्वर्ग और नरक आकाशों में हैं।

### الآية 51:23

> ﻿فَوَرَبِّ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ إِنَّهُ لَحَقٌّ مِثْلَ مَا أَنَّكُمْ تَنْطِقُونَ [51:23]

तो शपथ है आकाश एवं धरती के पालनहार की! ये (बात) ऐसे ही सच है, जैसे तुम बोल रहे हो।\[1\]
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1\. अर्थात अपने बोलने का विश्वास है।

### الآية 51:24

> ﻿هَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ ضَيْفِ إِبْرَاهِيمَ الْمُكْرَمِينَ [51:24]

(हे नबी!) क्या आयी आपके पास इब्राहीम के सम्मानित अतिथियों की सूचना?

### الآية 51:25

> ﻿إِذْ دَخَلُوا عَلَيْهِ فَقَالُوا سَلَامًا ۖ قَالَ سَلَامٌ قَوْمٌ مُنْكَرُونَ [51:25]

जब वे आये उसके पास, तो सलाम किया। इब्राहीम ने (भी) सलाम किया (तथा कहाः) अपरिचित लोग हैं।

### الآية 51:26

> ﻿فَرَاغَ إِلَىٰ أَهْلِهِ فَجَاءَ بِعِجْلٍ سَمِينٍ [51:26]

फिर चुपके से अपने परिजनों की ओर गया और एक मोटा (भुना हुआ) बछड़ा लाया।

### الآية 51:27

> ﻿فَقَرَّبَهُ إِلَيْهِمْ قَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ [51:27]

फिर रख दिया उनके पास, उसने कहाः तुम क्यों नहीं खाते हो?

### الآية 51:28

> ﻿فَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةً ۖ قَالُوا لَا تَخَفْ ۖ وَبَشَّرُوهُ بِغُلَامٍ عَلِيمٍ [51:28]

फिर अपने दिल में उनसे कुछ डरा, उन्होंने कहाः डरो नहीं और उसे शुभ सूचना दी एक ज्ञानी पुत्र की।

### الآية 51:29

> ﻿فَأَقْبَلَتِ امْرَأَتُهُ فِي صَرَّةٍ فَصَكَّتْ وَجْهَهَا وَقَالَتْ عَجُوزٌ عَقِيمٌ [51:29]

तो सामने आयी उसकी पत्नी और उसने मार लिया (आश्चर्य से) अपने मुँह पर हाथ तथा कहाः मैं बाँझ बुढ़िया हूँ।

### الآية 51:30

> ﻿قَالُوا كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْحَكِيمُ الْعَلِيمُ [51:30]

उन्होंने कहाः इसी प्रकार, तेरे पालनहार ने कहा है। वास्तव में, वह सब गुण और सब कुछ जानने वाला है।

### الآية 51:31

> ﻿۞ قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا الْمُرْسَلُونَ [51:31]

उस (इब्राहीम) ने कहाः तो तुम्हारा क्या अभियान है, हे भेजे हुए (फ़रिश्तो)!

### الآية 51:32

> ﻿قَالُوا إِنَّا أُرْسِلْنَا إِلَىٰ قَوْمٍ مُجْرِمِينَ [51:32]

उन्होंने कहाः वास्तव में, हम भेजे गये हैं एक अपरीधी जाति की ओर।

### الآية 51:33

> ﻿لِنُرْسِلَ عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِنْ طِينٍ [51:33]

ताकि हम बरसायें उनपर पत्थर की कंकरी।

### الآية 51:34

> ﻿مُسَوَّمَةً عِنْدَ رَبِّكَ لِلْمُسْرِفِينَ [51:34]

नामांकित\[1\] तुम्हारे पालनहार की ओर से उल्लंघनकारियों के लिए।
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1\. अर्थात प्रत्येक पत्थर पर पापी का नाम है।

### الآية 51:35

> ﻿فَأَخْرَجْنَا مَنْ كَانَ فِيهَا مِنَ الْمُؤْمِنِينَ [51:35]

फिर हमने निकाल दिया जो भी उस (बस्ती) में ईमान वाले थे।

### الآية 51:36

> ﻿فَمَا وَجَدْنَا فِيهَا غَيْرَ بَيْتٍ مِنَ الْمُسْلِمِينَ [51:36]

और हमने उसमें मोमिनों का केवल एक ही घर\[1\] पाया।
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1\. जो आदरणीय लूत (अलैहिस्सलाम) का घर था।

### الآية 51:37

> ﻿وَتَرَكْنَا فِيهَا آيَةً لِلَّذِينَ يَخَافُونَ الْعَذَابَ الْأَلِيمَ [51:37]

तथा छोड़ दी हमने उस (बस्ती) में एक निशानी उनके लिए, जो डरते हों दुःखदायी यातना से।

### الآية 51:38

> ﻿وَفِي مُوسَىٰ إِذْ أَرْسَلْنَاهُ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ بِسُلْطَانٍ مُبِينٍ [51:38]

तथा मूसा (की कथा) में, जब हमने भेजा उसे फ़िरऔन की ओर प्रत्यक्ष (खुले) प्रमाण के साथ।

### الآية 51:39

> ﻿فَتَوَلَّىٰ بِرُكْنِهِ وَقَالَ سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ [51:39]

तो वह विमुख हो गया अपने बल-बूते के कारण और कह दिया कि जादूगर अथवा पागल है।

### الآية 51:40

> ﻿فَأَخَذْنَاهُ وَجُنُودَهُ فَنَبَذْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٌ [51:40]

अन्ततः, हमने पकड़ लिया उसको तथा उसकी सेनाओं को, फिर फेंक दिया उन्हें सागर में और वह निन्दित होकर रह गया।

### الآية 51:41

> ﻿وَفِي عَادٍ إِذْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ الرِّيحَ الْعَقِيمَ [51:41]

तथा आद में (शिक्षाप्रद निशानी है)। जब हमने भेज दी उनपर बाँझ\[1\] आँधी।
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1\. अर्थात अशुभ। (देखियेः सूरह ह़ाक़्क़ा, आयतः7)

### الآية 51:42

> ﻿مَا تَذَرُ مِنْ شَيْءٍ أَتَتْ عَلَيْهِ إِلَّا جَعَلَتْهُ كَالرَّمِيمِ [51:42]

वह नहीं छोड़ती थी किसी वस्तु को जिसपर गुज़रती, परन्तु उसे बना देती थी जीर्ण चूर-चूर हड्डी के समान।

### الآية 51:43

> ﻿وَفِي ثَمُودَ إِذْ قِيلَ لَهُمْ تَمَتَّعُوا حَتَّىٰ حِينٍ [51:43]

तथा समूद में जब उनसे कहा गया कि लाभान्वित हो लो, एक निश्चित समय तक।

### الآية 51:44

> ﻿فَعَتَوْا عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْ فَأَخَذَتْهُمُ الصَّاعِقَةُ وَهُمْ يَنْظُرُونَ [51:44]

तो उन्होंने अवज्ञा की अपने पालनहार के आदेश की, तो सहसा पकड़ लिया उन्हें कड़क ने और वे देखते रह गये।

### الآية 51:45

> ﻿فَمَا اسْتَطَاعُوا مِنْ قِيَامٍ وَمَا كَانُوا مُنْتَصِرِينَ [51:45]

तो वे न खड़े हो सके और न (हमसे) बदला ले सके।

### الآية 51:46

> ﻿وَقَوْمَ نُوحٍ مِنْ قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ [51:46]

तथा नूह़\[1\] की जाति को इससे पहले (याद करो)। वास्तव में, वे अवज्ञाकारी जाति थे।
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1\. आयत 31 से 46 तक नबियों तथा विगत जातियों के परिणाम की ओर निरन्तर संकेत कर के सावधान किया गया है कि अल्लाह के बदले का नियम बराबर काम कर रहा है।

### الآية 51:47

> ﻿وَالسَّمَاءَ بَنَيْنَاهَا بِأَيْدٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ [51:47]

तथा आकाश को हमने बनाया है हाथों\[1\] से और हम निश्चय विस्तार करने वाले हैं।
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1\. अर्थात अपनी शक्ति से।

### الآية 51:48

> ﻿وَالْأَرْضَ فَرَشْنَاهَا فَنِعْمَ الْمَاهِدُونَ [51:48]

तथा धरती को हमने बिछाया है, तो हम क्या\[1\] ही अच्छे बिछाने वाले हैं।
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1\. आयत का भावार्थ यह है कि जब सब जिन्नों तथा मनुष्यों को अल्लाह ने अपनी वंदना के लिये उत्पन्न किया है तो अल्लाह के सिवा या उस के साथ किसी जिन्न या मनुष्य अथवा फ़रिश्ते और देवी-देवता की वंदना अवैध और शिर्क है। जिस के लिये क्षमा नहीं है। (देखियेः सूरह निसा, आयतः 48,116)। और जो व्यक्ति शिर्क कर लेता है तो उस के लिये स्वर्ग निषेध है। (देखियेःसूरह माइदा,आयतः72)

### الآية 51:49

> ﻿وَمِنْ كُلِّ شَيْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ [51:49]

तथा प्रत्येक वस्तु को हमने उत्पन्न किया है जोड़ा, ताकि तुम शिक्षा ग्रहण करो।

### الآية 51:50

> ﻿فَفِرُّوا إِلَى اللَّهِ ۖ إِنِّي لَكُمْ مِنْهُ نَذِيرٌ مُبِينٌ [51:50]

तो तुम दौड़ो अल्लाह की ओर, वास्तव में, मैं तुम्हें उसकी ओर से प्रत्यक्ष रूप से (खुला) सावधान कर ने वाला हूँ।

### الآية 51:51

> ﻿وَلَا تَجْعَلُوا مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ ۖ إِنِّي لَكُمْ مِنْهُ نَذِيرٌ مُبِينٌ [51:51]

और मत बनाओ अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य। वास्तव में, मैं तुम्हें इससे खुला सावधान करने वाला हूँ।

### الآية 51:52

> ﻿كَذَٰلِكَ مَا أَتَى الَّذِينَ مِنْ قَبْلِهِمْ مِنْ رَسُولٍ إِلَّا قَالُوا سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ [51:52]

इसी प्रकार नहीं आया उनके पास जो इन (मक्का वासियों) से पूर्व रहे कोई रसूल, परन्तु उन्होंने कहा कि जादूगर या पागल है।

### الآية 51:53

> ﻿أَتَوَاصَوْا بِهِ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَ [51:53]

क्या वे एक-दूसरे को वसिय्यत\[1\] कर चुके हैं इसकी? बल्कि वे उल्लंघनकारी लोग हैं।
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1\. वसिय्यत का अर्थ है मरणसन्न आदेश। अर्थ यह है कि वे रसूलों के इन्कार का अपने मरण के समय आदेश देते आ रहे हैं कि यह भी अपने पूर्व के लोगों के समान रसूल का इन्कार कर रहे हैं?

### الآية 51:54

> ﻿فَتَوَلَّ عَنْهُمْ فَمَا أَنْتَ بِمَلُومٍ [51:54]

तो आप मुख फेर लें उनसे। आपकी कोई निन्दा नहीं है।

### الآية 51:55

> ﻿وَذَكِّرْ فَإِنَّ الذِّكْرَىٰ تَنْفَعُ الْمُؤْمِنِينَ [51:55]

और आप शिक्षा देते रहें। इसलिए कि शिक्षा लाभप्रद है इमान वालों के लिए।

### الآية 51:56

> ﻿وَمَا خَلَقْتُ الْجِنَّ وَالْإِنْسَ إِلَّا لِيَعْبُدُونِ [51:56]

और नहीं उत्पन्न किया है मैंने जिन्न तथा मनुष्य को, परन्तु ताकि मेरी ही इबादत करें।

### الآية 51:57

> ﻿مَا أُرِيدُ مِنْهُمْ مِنْ رِزْقٍ وَمَا أُرِيدُ أَنْ يُطْعِمُونِ [51:57]

मैं नहीं चाहता हूँ उनसे कोई जीविका और न चाहता हूँ कि वे मुझे खिलायें।

### الآية 51:58

> ﻿إِنَّ اللَّهَ هُوَ الرَّزَّاقُ ذُو الْقُوَّةِ الْمَتِينُ [51:58]

अवश्य अल्लाह ही जीविका दाता, शक्तिशाली, बलवान् है।

### الآية 51:59

> ﻿فَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا ذَنُوبًا مِثْلَ ذَنُوبِ أَصْحَابِهِمْ فَلَا يَسْتَعْجِلُونِ [51:59]

तो इन अत्याचारियों के पाप हैं इनके साथियों के पापों के समान, अतः उतावले न बनें।

### الآية 51:60

> ﻿فَوَيْلٌ لِلَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ يَوْمِهِمُ الَّذِي يُوعَدُونَ [51:60]

अन्ततः, विनाश है काफ़िरों के लिए उनके उस दिन\[1\] से, जिससे हे डराये जा रहे हैं।
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1\. अर्थात प्रलय के दिन।

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- [المؤلف: مولانا عزيز الحق العمري](https://quranpedia.net/person/1761.md)

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