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title: "ترجمة سورة القمر - الترجمة الهندية (الهندية)"
url: "https://quranpedia.net/surah/1/54/book/1986.md"
canonical: "https://quranpedia.net/surah/1/54/book/1986"
surah_id: "54"
book_id: "1986"
book_name: "الترجمة الهندية"
author: "مولانا عزيز الحق العمري"
type: "translation"
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# ترجمة سورة القمر - الترجمة الهندية (الهندية)

📖 **[اقرأ النسخة التفاعلية الكاملة على Quranpedia](https://quranpedia.net/surah/1/54/book/1986)** — مع التلاوات الصوتية، البحث، والربط بين المصادر.

## Citation

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Translation of Surah القمر from "الترجمة الهندية" in الهندية.

### الآية 54:1

> اقْتَرَبَتِ السَّاعَةُ وَانْشَقَّ الْقَمَرُ [54:1]

समीप आ गयी\[1\] प्रलय तथा दो खण्ड हो गया चाँद। 
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1\. आप (सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम) से मक्का वासियों ने माँग की कि आप कोई चमत्कार दिखायें। अतः आप ने चाँद को दो भाग होते उन्हें दिखा दिया। (बुख़ारीः 4867) आदरणीय अब्दुल्लाह बिन मस्ऊद कहते हैं कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के युग में चाँद दो खण्ड हो गयाः एक खण्ड पर्वत के ऊपर और दूसरा उस के नीचे। और आप ने कहाः तुम सभी गवाह रहो। (सह़ीह़ बुख़ारीः4864)

### الآية 54:2

> ﻿وَإِنْ يَرَوْا آيَةً يُعْرِضُوا وَيَقُولُوا سِحْرٌ مُسْتَمِرٌّ [54:2]

और यदि वे देखते हैं कोई निशानी, तो मुँह फेर लेते हैं और कहते हैं: ये तो जादू है, जो होता रहा है।

### الآية 54:3

> ﻿وَكَذَّبُوا وَاتَّبَعُوا أَهْوَاءَهُمْ ۚ وَكُلُّ أَمْرٍ مُسْتَقِرٌّ [54:3]

और उन्होंने झुठलाया और अनुसरण किया अपनी आकांक्षाओं का और प्रत्येक कार्य का एक निश्चित समय है।

### الآية 54:4

> ﻿وَلَقَدْ جَاءَهُمْ مِنَ الْأَنْبَاءِ مَا فِيهِ مُزْدَجَرٌ [54:4]

और निश्चय आ चुके हैं उनके पास कुछ ऐसे समाचार, जिनमें चेतावनी है।

### الآية 54:5

> ﻿حِكْمَةٌ بَالِغَةٌ ۖ فَمَا تُغْنِ النُّذُرُ [54:5]

ये (क़ुर्आन) पूर्णतः तत्वदर्शिता (ज्ञान) है, फिर भी नहीं काम आयी उनके, चेतावनियाँ।

### الآية 54:6

> ﻿فَتَوَلَّ عَنْهُمْ ۘ يَوْمَ يَدْعُ الدَّاعِ إِلَىٰ شَيْءٍ نُكُرٍ [54:6]

तो आप विमुख हो जायें उनसे, जिस दिन पुकारने वाला पुकारेगा एक अप्रिय चीज़ की\[1\] ओर।
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1\. अर्थात प्रयल के दिन ह़िसाब के लिये।

### الآية 54:7

> ﻿خُشَّعًا أَبْصَارُهُمْ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ كَأَنَّهُمْ جَرَادٌ مُنْتَشِرٌ [54:7]

झुकी होंगी उनकी आँखें। वे निकल रहे होंगे समाधियों से, जैसे कि वे टिड्डी दल हों बिखरे हुए।

### الآية 54:8

> ﻿مُهْطِعِينَ إِلَى الدَّاعِ ۖ يَقُولُ الْكَافِرُونَ هَٰذَا يَوْمٌ عَسِرٌ [54:8]

तो उसने प्रार्थना की अपने पालनहार से कि मैं विवश हूँ, अतः, मेरा बदला ले ले।

### الآية 54:9

> ﻿۞ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ فَكَذَّبُوا عَبْدَنَا وَقَالُوا مَجْنُونٌ وَازْدُجِرَ [54:9]

झुठलाया इनसे पहले नूह़ की जाति ने। तो झुठलाया उन्होंने हमारे भक्त को और कहा कि पागल है और (उसे) झड़का गया।

### الآية 54:10

> ﻿فَدَعَا رَبَّهُ أَنِّي مَغْلُوبٌ فَانْتَصِرْ [54:10]

तो उसने प्रार्थना की अपने पालनहार से कि मैं विवश हूँ, अतः मेरा बदला ले ले।

### الآية 54:11

> ﻿فَفَتَحْنَا أَبْوَابَ السَّمَاءِ بِمَاءٍ مُنْهَمِرٍ [54:11]

तो हमने खोल दिये आकाश के द्वार धारा प्रवाह जल के साथ।

### الآية 54:12

> ﻿وَفَجَّرْنَا الْأَرْضَ عُيُونًا فَالْتَقَى الْمَاءُ عَلَىٰ أَمْرٍ قَدْ قُدِرَ [54:12]

तथा फाड़ दिये धरती के स्रोत, तो मिल गया (आकाश और धरती का) जल उस कार्य के अनुसार जो निश्चित किया गया।

### الآية 54:13

> ﻿وَحَمَلْنَاهُ عَلَىٰ ذَاتِ أَلْوَاحٍ وَدُسُرٍ [54:13]

और सवार कर दिया हमने उसे (नूह़ को) तख़्तों तथा कीलों वाली (नाव) पर।

### الآية 54:14

> ﻿تَجْرِي بِأَعْيُنِنَا جَزَاءً لِمَنْ كَانَ كُفِرَ [54:14]

जो चल रही थी हमारी रक्षा में, उसका बदला लेने के लिए, जिसके साथ कुफ़्र किया गया था।

### الآية 54:15

> ﻿وَلَقَدْ تَرَكْنَاهَا آيَةً فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ [54:15]

और हमने छोड़ दिया इसे एक शिक्षा बनाकर। तो क्या, है कोई शिक्षा ग्रहण करने वाला?

### الآية 54:16

> ﻿فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ [54:16]

फिर (देख लो!) कैसी रही मेरी यातना तथा मेरी चेतावनियाँ?

### الآية 54:17

> ﻿وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ [54:17]

और हमने सरल कर दिया है क़ुर्आन को शिक्षा के लिए। तो क्या, है कोई शिक्षा ग्रहण करने वाला?

### الآية 54:18

> ﻿كَذَّبَتْ عَادٌ فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ [54:18]

झुठलाया आद ने, तो कैसी रही मेरी यातना तथा मेरी चेतावनियाँ?

### الآية 54:19

> ﻿إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا صَرْصَرًا فِي يَوْمِ نَحْسٍ مُسْتَمِرٍّ [54:19]

हमने भेज दी उनपर कड़ी आँधी, एक निरन्तर अशुभ दिन में।

### الآية 54:20

> ﻿تَنْزِعُ النَّاسَ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ مُنْقَعِرٍ [54:20]

जो उखाड़ रही थी लोगों को, जैसे वे खजूर के खोखले तने हों।

### الآية 54:21

> ﻿فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ [54:21]

तो कैसी रही मेरी यातना तथा मेरी चेतावनियाँ?

### الآية 54:22

> ﻿وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ [54:22]

और हमने सरल कर दिया है क़ुर्आन को शिक्षा के लिए। तो क्या, है कोई शिक्षा ग्रहण करने वाला?

### الآية 54:23

> ﻿كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِالنُّذُرِ [54:23]

झुठला दिया समूद\[1\] ने चेतावनियों को।
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1\. यह सालेह (अलैहिस्सलाम) की जाति थी। उन्हों ने उन से चमत्कार की माँग की तो अल्लाह ने पर्वत से एक ऊँटनी निकाल दी। फिर भी वह ईमान नहीं लाये। क्यों कि उन के विचार से अल्लाह का रसूल कोई मनुष्य नहीं फ़रिश्ता होना चाहिये था। जैसा कि मक्का के मुश्रिकों का विचार था।

### الآية 54:24

> ﻿فَقَالُوا أَبَشَرًا مِنَّا وَاحِدًا نَتَّبِعُهُ إِنَّا إِذًا لَفِي ضَلَالٍ وَسُعُرٍ [54:24]

और कहाः क्या अपने ही में से एक मनुष्य का हम अनुसरण करें? वास्तव में, तब तो हम निश्चय बड़े कुपथ तथा पागलपन में हैं।

### الآية 54:25

> ﻿أَأُلْقِيَ الذِّكْرُ عَلَيْهِ مِنْ بَيْنِنَا بَلْ هُوَ كَذَّابٌ أَشِرٌ [54:25]

क्या उतारी गयी है शिक्षा उसीपर हमारे बीच में से? (नहीं) बल्कि वह बड़ा झूठा अहंकारी है।

### الآية 54:26

> ﻿سَيَعْلَمُونَ غَدًا مَنِ الْكَذَّابُ الْأَشِرُ [54:26]

उन्हें कल ही ज्ञान हो जायेगा कि कौन बड़ा झूठा अहंकारी है?

### الآية 54:27

> ﻿إِنَّا مُرْسِلُو النَّاقَةِ فِتْنَةً لَهُمْ فَارْتَقِبْهُمْ وَاصْطَبِرْ [54:27]

वास्तव में, हम भेजने वाले हैं ऊँटनी उनकी परीक्षा के लिए। अतः, (हे सालेह!) तुम उनके (परिणाम की) प्रतीक्षा करो तथा धैर्य रखो।

### الآية 54:28

> ﻿وَنَبِّئْهُمْ أَنَّ الْمَاءَ قِسْمَةٌ بَيْنَهُمْ ۖ كُلُّ شِرْبٍ مُحْتَضَرٌ [54:28]

और उन्हें सूचित कर दो कि जल विभाजित होगा उनके बीच और प्रत्येक अपनी बारी के दिन\[1\] उपस्थित होगा।
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1\. अर्थात एक दिन जल स्रोत का पानी ऊँटनी पियेगी और एक दिन तुम सब।

### الآية 54:29

> ﻿فَنَادَوْا صَاحِبَهُمْ فَتَعَاطَىٰ فَعَقَرَ [54:29]

तो उन्होंने पुकारा अपने साथी को। तो उसने आक्रमण किया और उसे वध कर दिया।

### الآية 54:30

> ﻿فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ [54:30]

फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरी चेतावनियाँ?

### الآية 54:31

> ﻿إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ صَيْحَةً وَاحِدَةً فَكَانُوا كَهَشِيمِ الْمُحْتَظِرِ [54:31]

हमने भेज दी उनपर कर्कश ध्वनि, तो वे हो गये बाड़ा बनाने वाले की रौंदी हुई बाढ़ के समान (चूर-चूर)।

### الآية 54:32

> ﻿وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ [54:32]

और हमने सरल कर दिया है क़ुर्आन को शिक्षा के लिए। तो क्या, है कोई शिक्षा ग्रहण करने वाला?

### الآية 54:33

> ﻿كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ بِالنُّذُرِ [54:33]

झुठला दिया लूत की जाति ने चेतावनियों को।

### الآية 54:34

> ﻿إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ حَاصِبًا إِلَّا آلَ لُوطٍ ۖ نَجَّيْنَاهُمْ بِسَحَرٍ [54:34]

तो हमने भेज दिये उनपर पत्थर लूत के परिजनों के सिवा, हमने उन्हें बचा लिया रात्रि के पिछले पहर।

### الآية 54:35

> ﻿نِعْمَةً مِنْ عِنْدِنَا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي مَنْ شَكَرَ [54:35]

अपने विशेष अनुग्रह से। इसी प्रकार हम बदला देते हैं उसको जो कृतज्ञ हो।

### الآية 54:36

> ﻿وَلَقَدْ أَنْذَرَهُمْ بَطْشَتَنَا فَتَمَارَوْا بِالنُّذُرِ [54:36]

और निःसंदेह, लूत ने सावधान किया उनको हमारी पकड़ से। परन्तु, उन्होंने संदेह किया चेतावनियों के विषय में।

### الآية 54:37

> ﻿وَلَقَدْ رَاوَدُوهُ عَنْ ضَيْفِهِ فَطَمَسْنَا أَعْيُنَهُمْ فَذُوقُوا عَذَابِي وَنُذُرِ [54:37]

और बहलाना चाहा उस (लूत) को उसके अतिथियों\[1\] से तो हमने अंधी कर दी उनकी आँखें कि चखो मेरी यातना तथा मेरी चेतावनियों (का परिणाम)।
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1\. अर्थात उन्हों ने अपने दुराचार के लिये फ़रिश्तों को जो सुन्दर युवकों के रूप में आये थे, उन को लूत (अलैहिस्सलाम) से अपने सुपुर्द करने की माँग की।

### الآية 54:38

> ﻿وَلَقَدْ صَبَّحَهُمْ بُكْرَةً عَذَابٌ مُسْتَقِرٌّ [54:38]

और उनपर आ पहुँची प्रातः भोर ही में स्थायी यातना।

### الآية 54:39

> ﻿فَذُوقُوا عَذَابِي وَنُذُرِ [54:39]

तो चखो मेरी यातना तथा मेरी चेतावनियाँ।

### الآية 54:40

> ﻿وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ [54:40]

और हमने सरल कर दिया है क़ुर्आन को शिक्षा के लिए। तो क्या, है कोई शिक्षा ग्रहण करने वाला?

### الآية 54:41

> ﻿وَلَقَدْ جَاءَ آلَ فِرْعَوْنَ النُّذُرُ [54:41]

तथा फ़िरऔनियों के पास भी चेतावनियाँ आयीं।

### الآية 54:42

> ﻿كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا كُلِّهَا فَأَخَذْنَاهُمْ أَخْذَ عَزِيزٍ مُقْتَدِرٍ [54:42]

उन्होंने झुठलाया हमारी प्रत्येक निशानी को तो हमने पकड़ लिया उन्हें अति प्रभावी आधिपति के पकड़ने के समान।

### الآية 54:43

> ﻿أَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌ مِنْ أُولَٰئِكُمْ أَمْ لَكُمْ بَرَاءَةٌ فِي الزُّبُرِ [54:43]

(हे मक्का वासियों!) क्या तुम्हारे काफ़िर उत्तम हैं उनसे अथवा तुम्हारी मुक्ति लिखी हुई है आकाशीय पुस्तकों में?

### الآية 54:44

> ﻿أَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَمِيعٌ مُنْتَصِرٌ [54:44]

अथवा वे कहते हैं कि हम विजेता समूह हैं।

### الآية 54:45

> ﻿سَيُهْزَمُ الْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ الدُّبُرَ [54:45]

शीध्र ही प्राजित कर दिया जायेगा ये समूह और वे पीठ दिखा\[1\] देंगे।
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1\. इस में मक्का के काफ़िरों की पराजय की भविष्यवाणी है जो बद्र के युध्द में पूरी हुई। ह़दीस में है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बद्र के दिन एक ख़ेमे में अल्लाह से प्रार्थना कर रहे थे। फिर यही आयत पढ़ते हुये निकले। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4875)

### الآية 54:46

> ﻿بَلِ السَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَالسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّ [54:46]

बल्कि प्रलय उनके वचन का समय है तथा प्रलय अधिक कड़ी और तीखी है।

### الآية 54:47

> ﻿إِنَّ الْمُجْرِمِينَ فِي ضَلَالٍ وَسُعُرٍ [54:47]

वस्तुतः, ये पापी, कुपथ तथा अग्नि में हैं।

### الآية 54:48

> ﻿يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِي النَّارِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ ذُوقُوا مَسَّ سَقَرَ [54:48]

जिस दिन वे घसीटे जायेंगे यातना में अपने मुखों के बल (उनसे कहा जायेगा कि) चखो नरक की यातना का स्वाद।

### الآية 54:49

> ﻿إِنَّا كُلَّ شَيْءٍ خَلَقْنَاهُ بِقَدَرٍ [54:49]

निश्चय हमने प्रत्येक वस्तु को उत्पन्न किया है एक अनुमान से।

### الآية 54:50

> ﻿وَمَا أَمْرُنَا إِلَّا وَاحِدَةٌ كَلَمْحٍ بِالْبَصَرِ [54:50]

और हमारा आदेश बस एक ही बार होता है आँख झपकने के समान।\[1\]
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1\. अर्थात प्रलय होने में देर नहीं होगी। अल्लाह का आदेश होते ही तत्क्षण प्रलय आ जायेगी।

### الآية 54:51

> ﻿وَلَقَدْ أَهْلَكْنَا أَشْيَاعَكُمْ فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ [54:51]

और हम ध्वस्त कर चुके हैं तुम्हारे जैसे बहुत-से समुदायों को।

### الآية 54:52

> ﻿وَكُلُّ شَيْءٍ فَعَلُوهُ فِي الزُّبُرِ [54:52]

जो कुछ उन्होंने किया है कर्मपत्र में है।\[1\]
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1\. जिसे उन फ़रिश्तों ने जो दायें तथा बायें रहते हैं लिख रखा है।

### الآية 54:53

> ﻿وَكُلُّ صَغِيرٍ وَكَبِيرٍ مُسْتَطَرٌ [54:53]

और प्रत्येक तुच्छ तथा बड़ी बात अंकित है।

### الآية 54:54

> ﻿إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَنَهَرٍ [54:54]

वस्तुतः, सदाचारी लोग स्वर्गों तथा नहरों में होंगे।

### الآية 54:55

> ﻿فِي مَقْعَدِ صِدْقٍ عِنْدَ مَلِيكٍ مُقْتَدِرٍ [54:55]

सत्य के स्थान में, अति सामर्थ्यवान स्वामी के पास।

## روابط ذات صلة

- [النص القرآني للسورة](https://quranpedia.net/surah/1/54.md)
- [كل تفاسير سورة القمر
](https://quranpedia.net/surah-tafsir/54.md)
- [ترجمات سورة القمر
](https://quranpedia.net/translations/54.md)
- [صفحة الكتاب: الترجمة الهندية](https://quranpedia.net/book/1986.md)
- [المؤلف: مولانا عزيز الحق العمري](https://quranpedia.net/person/1761.md)

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