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title: "ترجمة سورة الرحمن - الترجمة الهندية (الهندية)"
url: "https://quranpedia.net/surah/1/55/book/1986.md"
canonical: "https://quranpedia.net/surah/1/55/book/1986"
surah_id: "55"
book_id: "1986"
book_name: "الترجمة الهندية"
author: "مولانا عزيز الحق العمري"
type: "translation"
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# ترجمة سورة الرحمن - الترجمة الهندية (الهندية)

📖 **[اقرأ النسخة التفاعلية الكاملة على Quranpedia](https://quranpedia.net/surah/1/55/book/1986)** — مع التلاوات الصوتية، البحث، والربط بين المصادر.

## Citation

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Translation of Surah الرحمن from "الترجمة الهندية" in الهندية.

### الآية 55:1

> الرَّحْمَٰنُ [55:1]

अत्यंत कृपाशील ने।

### الآية 55:2

> ﻿عَلَّمَ الْقُرْآنَ [55:2]

शिक्षा दी क़ुर्आन की।

### الآية 55:3

> ﻿خَلَقَ الْإِنْسَانَ [55:3]

उसीने उत्पन्न किया मनुष्य को।

### الآية 55:4

> ﻿عَلَّمَهُ الْبَيَانَ [55:4]

सिखाया उसे साफ़-साफ़ बोलना।

### الآية 55:5

> ﻿الشَّمْسُ وَالْقَمَرُ بِحُسْبَانٍ [55:5]

सूर्य तथा चन्द्रमा एक (नियमित) ह़िसाब से हैं।

### الآية 55:6

> ﻿وَالنَّجْمُ وَالشَّجَرُ يَسْجُدَانِ [55:6]

तथा तारे और वृक्ष दोनों (उसे) सज्दा करते हैं।

### الآية 55:7

> ﻿وَالسَّمَاءَ رَفَعَهَا وَوَضَعَ الْمِيزَانَ [55:7]

और आकाश को ऊँचा किया और रख दी तराजू।\[1\]
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1\. (देखियेः सूरह ह़दीद, आयतः25) अर्थ यह है कि धरती में न्याय का नियम बनाया और उस के पालन का आदेश दिया।

### الآية 55:8

> ﻿أَلَّا تَطْغَوْا فِي الْمِيزَانِ [55:8]

ताकि तुम उल्लंघन न करो तराजू (न्याय) में।

### الآية 55:9

> ﻿وَأَقِيمُوا الْوَزْنَ بِالْقِسْطِ وَلَا تُخْسِرُوا الْمِيزَانَ [55:9]

तथा सीधी रखो तराजू न्याय के साथ और कम न तोलो।

### الآية 55:10

> ﻿وَالْأَرْضَ وَضَعَهَا لِلْأَنَامِ [55:10]

धरती को उसने (रहने योग्य) बनाया पूरी उत्पत्ति के लिए।

### الآية 55:11

> ﻿فِيهَا فَاكِهَةٌ وَالنَّخْلُ ذَاتُ الْأَكْمَامِ [55:11]

जिसमें मेवे तथा गुच्छे वाले खजूर हैं।

### الآية 55:12

> ﻿وَالْحَبُّ ذُو الْعَصْفِ وَالرَّيْحَانُ [55:12]

और भूसे वाले अन्न तथा सुगंधित (पुष्प) फूल हैं।

### الآية 55:13

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:13]

तो (हे मनुष्य तथा जिन्न!) तुम अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:14

> ﻿خَلَقَ الْإِنْسَانَ مِنْ صَلْصَالٍ كَالْفَخَّارِ [55:14]

उसने उत्पन्न किया मनुष्य को खनखनाते ठीकरी जैसे सूखे गारे से।

### الآية 55:15

> ﻿وَخَلَقَ الْجَانَّ مِنْ مَارِجٍ مِنْ نَارٍ [55:15]

तथा उत्पन्न किया जिन्नों को अग्नि की ज्वाला से।

### الآية 55:16

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:16]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:17

> ﻿رَبُّ الْمَشْرِقَيْنِ وَرَبُّ الْمَغْرِبَيْنِ [55:17]

वह दोनों सूर्योदय\[1\] के स्थानों तथा दोनों सूर्यास्त के स्थानों का स्वामी है।
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1\. गर्मी तथा जाड़े में सूर्योदय तथा सूर्यास्त के स्थानों का। इस से अभिप्राय पूर्व तथा पश्चिम की दिशा नहीं है।

### الآية 55:18

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:18]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:19

> ﻿مَرَجَ الْبَحْرَيْنِ يَلْتَقِيَانِ [55:19]

उसने दो सागर बहा दिये, जिनका संगम होता है।

### الآية 55:20

> ﻿بَيْنَهُمَا بَرْزَخٌ لَا يَبْغِيَانِ [55:20]

उन दोनों के बीच एक आड़ है। वह एक-दूसरे से मिल नहीं सकते।

### الآية 55:21

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:21]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:22

> ﻿يَخْرُجُ مِنْهُمَا اللُّؤْلُؤُ وَالْمَرْجَانُ [55:22]

निकलता है उन दोनों से मोती तथा मूँगा।

### الآية 55:23

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:23]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:24

> ﻿وَلَهُ الْجَوَارِ الْمُنْشَآتُ فِي الْبَحْرِ كَالْأَعْلَامِ [55:24]

तथा उसी के अधिकार में हैं जहाज़, खड़े किये हुए सागर में पर्वतों जैसे।

### الآية 55:25

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:25]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:26

> ﻿كُلُّ مَنْ عَلَيْهَا فَانٍ [55:26]

प्रत्येक, जो धरती पर हैं, नाशवान हैं।

### الآية 55:27

> ﻿وَيَبْقَىٰ وَجْهُ رَبِّكَ ذُو الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ [55:27]

तथा शेष रह जायेगा आपके प्रतापी सम्मानित पालनहार का मुख (अस्तित्व)।

### الآية 55:28

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:28]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:29

> ﻿يَسْأَلُهُ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِي شَأْنٍ [55:29]

उसीसे माँगते हैं, जो आकाशों तथा धरती में हैं। प्रत्येक दिन वह एक नये कार्य में है।\[1\]
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1\. अर्थात वह अपनी उत्पत्ति की आवश्यक्तायें पूरी करता, प्रार्थनायें सुनता, सहायता करता, रोगी को निरोग करता, अपनी दया प्रदान करता, तथा अपमान-सम्मान और विजय-प्राजय देता और अगणित कार्य करता है।

### الآية 55:30

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:30]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:31

> ﻿سَنَفْرُغُ لَكُمْ أَيُّهَ الثَّقَلَانِ [55:31]

और शीघ्र ही हम पूर्णतः आकर्षित हो जायेंगे तुम्हारी ओर, हे (धरती के) दोनों बोझ\[1\] (जन्नो और मनुष्यो!)\[2\]
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1\. इस वाक्या का अर्थ मुह़ावरे में धमकी देना और सावधान करना है। 2. इस में प्रलय के दिन की ओर संकेत है जब सब मनुष्यों और जिन्नों के कर्मों का ह़िसाब लिया जायेगा।

### الآية 55:32

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:32]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:33

> ﻿يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْإِنْسِ إِنِ اسْتَطَعْتُمْ أَنْ تَنْفُذُوا مِنْ أَقْطَارِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ فَانْفُذُوا ۚ لَا تَنْفُذُونَ إِلَّا بِسُلْطَانٍ [55:33]

हे जिन्न तथा मनुष्य के समूह! यदि निकल सकते हो आकाशों तथा थरती के किनारों से, तो निकल भागो और तुम निकल नहीं सकोगे बिना बड़ी शक्ति\[1\] के।
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1\. अर्थ यह है कि अल्लाह की पकड़ से बच निकलना तुम्हारे बस में नहीं है।

### الآية 55:34

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:34]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:35

> ﻿يُرْسَلُ عَلَيْكُمَا شُوَاظٌ مِنْ نَارٍ وَنُحَاسٌ فَلَا تَنْتَصِرَانِ [55:35]

तुम दोनों पर अग्नि की ज्वाला तथा धुवाँ छोड़ा जायेगा। तो तुम अपनी सहायता नहीं कर सकोगे।

### الآية 55:36

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:36]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:37

> ﻿فَإِذَا انْشَقَّتِ السَّمَاءُ فَكَانَتْ وَرْدَةً كَالدِّهَانِ [55:37]

जब आकाश (प्रलय के दिन) फट जायेगा, तो लाल हो जायेगा लाल चमड़े के समान।

### الآية 55:38

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:38]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:39

> ﻿فَيَوْمَئِذٍ لَا يُسْأَلُ عَنْ ذَنْبِهِ إِنْسٌ وَلَا جَانٌّ [55:39]

तो उस दिन नहीं प्रश्न किया जायेगा अपने पाप का किसी मनुष्य से और न जिन्न से।

### الآية 55:40

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:40]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:41

> ﻿يُعْرَفُ الْمُجْرِمُونَ بِسِيمَاهُمْ فَيُؤْخَذُ بِالنَّوَاصِي وَالْأَقْدَامِ [55:41]

पहचान लिये जायेंगे अपराधी अपने मुखों से, तो पकड़ा जायेगा उनके माथे के बालों और पैरों को।

### الآية 55:42

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:42]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:43

> ﻿هَٰذِهِ جَهَنَّمُ الَّتِي يُكَذِّبُ بِهَا الْمُجْرِمُونَ [55:43]

यही वो नरक है, जिसे झूठ कह रहे थे अपराधी।

### الآية 55:44

> ﻿يَطُوفُونَ بَيْنَهَا وَبَيْنَ حَمِيمٍ آنٍ [55:44]

वे फिरते रहेंगे उसके बीच तथा खौलते पानी के बीच।

### الآية 55:45

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:45]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:46

> ﻿وَلِمَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ جَنَّتَانِ [55:46]

और उसके लिए, जो डरा अपने पालनहार के समक्ष खड़े होने से, दो बाग़ हैं।

### الآية 55:47

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:47]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:48

> ﻿ذَوَاتَا أَفْنَانٍ [55:48]

दो बाग़, हरी-भरी शाखाओं वाले।

### الآية 55:49

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:49]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:50

> ﻿فِيهِمَا عَيْنَانِ تَجْرِيَانِ [55:50]

उन दोनों में, दो जल स्रोत बहते होंगे।

### الآية 55:51

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:51]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:52

> ﻿فِيهِمَا مِنْ كُلِّ فَاكِهَةٍ زَوْجَانِ [55:52]

उनमें, प्रत्येक फल के दो प्रकार होंगे।

### الآية 55:53

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:53]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:54

> ﻿مُتَّكِئِينَ عَلَىٰ فُرُشٍ بَطَائِنُهَا مِنْ إِسْتَبْرَقٍ ۚ وَجَنَى الْجَنَّتَيْنِ دَانٍ [55:54]

वे ऐसे बिस्तरों पर तकिये लगाये हुए होंगे, जिनके स्तर दबीज़ रेशम के होंगे और दोनों बाग़ों (की शाखायें) फलों से झुकी हुई होंगी।

### الآية 55:55

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:55]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:56

> ﻿فِيهِنَّ قَاصِرَاتُ الطَّرْفِ لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنْسٌ قَبْلَهُمْ وَلَا جَانٌّ [55:56]

उनमें लजीली आँखों वाली स्त्रियाँ होंगी, जिन्हें हाथ नहीं लगाया होगा किसी मनुष्य ने इससे पूर्व और न किसी जिन्न ने।

### الآية 55:57

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:57]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:58

> ﻿كَأَنَّهُنَّ الْيَاقُوتُ وَالْمَرْجَانُ [55:58]

जैसे वह हीरे और मोंगे हों।

### الآية 55:59

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:59]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:60

> ﻿هَلْ جَزَاءُ الْإِحْسَانِ إِلَّا الْإِحْسَانُ [55:60]

उपकार का बदला उपकार ही है।

### الآية 55:61

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:61]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:62

> ﻿وَمِنْ دُونِهِمَا جَنَّتَانِ [55:62]

तथा उन दोनों के सिवा\[1\] दो बाग़ होंगे।
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1\. ह़दीस में है कि दो स्वर्ग चाँदी की हैं। जिन के बर्तन तथा सब कुछ चाँदी के हैं। और दो स्वर्ग सोने की, जिन के बर्तन तथा सब कुछ सोने का है। और स्वर्ग वासियों तथा अल्लाह के दर्शन के बीच अल्लाह के मुख पर महिमा के पर्दे के सिवा कुछ नहीं होगा। (सह़ीह बुख़ारीः 4878)

### الآية 55:63

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:63]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:64

> ﻿مُدْهَامَّتَانِ [55:64]

दोनों हरे-भरे होंगे।

### الآية 55:65

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:65]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:66

> ﻿فِيهِمَا عَيْنَانِ نَضَّاخَتَانِ [55:66]

उन दोनों में, दो जल स्रोत होंगे उबलते हुए।

### الآية 55:67

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:67]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:68

> ﻿فِيهِمَا فَاكِهَةٌ وَنَخْلٌ وَرُمَّانٌ [55:68]

उनमें, फल तथा खजूर और अनार होंगे।

### الآية 55:69

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:69]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:70

> ﻿فِيهِنَّ خَيْرَاتٌ حِسَانٌ [55:70]

उनमें, सुचरिता सुन्दरियाँ होंगी।

### الآية 55:71

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:71]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:72

> ﻿حُورٌ مَقْصُورَاتٌ فِي الْخِيَامِ [55:72]

गोरियाँ सुरक्षित होंगी ख़ेमों में।

### الآية 55:73

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:73]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:74

> ﻿لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنْسٌ قَبْلَهُمْ وَلَا جَانٌّ [55:74]

नहीं हाथ लगाया होगा\[1\] उन्हें किसी मनुष्य ने इससे पूर्व और न किसी जिन्न ने।
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1\. ह़दीस में है कि यदि स्वर्ग की कोई सुन्दरी संसार वासियों की ओर झाँक दे, तो दोनों के बीच उजाला हो जाये। और सुगंध से भर जायें। (सह़ीह़ बुख़ारी शरीफ़ः 2796)

### الآية 55:75

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:75]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:76

> ﻿مُتَّكِئِينَ عَلَىٰ رَفْرَفٍ خُضْرٍ وَعَبْقَرِيٍّ حِسَانٍ [55:76]

वे तकिये लगाये हुए होंगे हरे ग़लीचों तथा सुन्दर बिस्तरों पर।

### الآية 55:77

> ﻿فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ [55:77]

तो तुम दोनों अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे?

### الآية 55:78

> ﻿تَبَارَكَ اسْمُ رَبِّكَ ذِي الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ [55:78]

शुभ है आपके प्रतापी सम्मानित पालनहार का नाम।

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- [المؤلف: مولانا عزيز الحق العمري](https://quranpedia.net/person/1761.md)

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