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title: "ترجمة سورة الواقعة - الترجمة الهندية (الهندية)"
url: "https://quranpedia.net/surah/1/56/book/1986.md"
canonical: "https://quranpedia.net/surah/1/56/book/1986"
surah_id: "56"
book_id: "1986"
book_name: "الترجمة الهندية"
author: "مولانا عزيز الحق العمري"
type: "translation"
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# ترجمة سورة الواقعة - الترجمة الهندية (الهندية)

📖 **[اقرأ النسخة التفاعلية الكاملة على Quranpedia](https://quranpedia.net/surah/1/56/book/1986)** — مع التلاوات الصوتية، البحث، والربط بين المصادر.

## Citation

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Translation of Surah الواقعة from "الترجمة الهندية" in الهندية.

### الآية 56:1

> إِذَا وَقَعَتِ الْوَاقِعَةُ [56:1]

जब होने वाली, हो जायेगी।

### الآية 56:2

> ﻿لَيْسَ لِوَقْعَتِهَا كَاذِبَةٌ [56:2]

उसका होना कोई झूठ नहीं है।

### الآية 56:3

> ﻿خَافِضَةٌ رَافِعَةٌ [56:3]

नीचा-ऊँचा करने\[1\] वाली।
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1. इस से अभिप्राय प्रलय है। जो सत्य के विरोधियों को नीचा कर के नरक तक पहुँचायेगी। तथा आज्ञाकारियों को स्वर्ग के ऊँचे स्थान तक पहुँचायेगी। आरंभिक आयतों में प्रलय के होने की चर्चा, फिर उस दिन लोगों के तीन भागों में विभाजित होने का वर्णन किया गया है।

### الآية 56:4

> ﻿إِذَا رُجَّتِ الْأَرْضُ رَجًّا [56:4]

जब धरती तेज़ी से डोलने लगेगी।

### الآية 56:5

> ﻿وَبُسَّتِ الْجِبَالُ بَسًّا [56:5]

और चूर-चूर कर दिये जायेंगे पर्वत।

### الآية 56:6

> ﻿فَكَانَتْ هَبَاءً مُنْبَثًّا [56:6]

फिर हो जायेंगे बिखरी हुई धूल।

### الآية 56:7

> ﻿وَكُنْتُمْ أَزْوَاجًا ثَلَاثَةً [56:7]

तथा तुम हो जाओगे तीन समूह।

### الآية 56:8

> ﻿فَأَصْحَابُ الْمَيْمَنَةِ مَا أَصْحَابُ الْمَيْمَنَةِ [56:8]

तो दायें वाले, तो क्या हैं दायें वाले!\[1\]
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1\. दायें वाले से अभिप्राय वह हैं जिन का कर्मपत्र दायें हाथ में दिया जायेगा। तथा बायें वाले वह दुराचारी होंगे जिन का कर्मपत्र बायें हाथ में दिया जायेगा।

### الآية 56:9

> ﻿وَأَصْحَابُ الْمَشْأَمَةِ مَا أَصْحَابُ الْمَشْأَمَةِ [56:9]

और बायें वाले, तो क्या हैं बायें वाले!

### الآية 56:10

> ﻿وَالسَّابِقُونَ السَّابِقُونَ [56:10]

और अग्रगामी तो अग्रगामी ही हैं।

### الآية 56:11

> ﻿أُولَٰئِكَ الْمُقَرَّبُونَ [56:11]

वही समीप किये\[1\] हुए हैं।
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1\. अर्थात अल्लाह के प्रियवर और उस के समीप होंगे।

### الآية 56:12

> ﻿فِي جَنَّاتِ النَّعِيمِ [56:12]

वे सुखों के स्वर्गों में होंगे।

### الآية 56:13

> ﻿ثُلَّةٌ مِنَ الْأَوَّلِينَ [56:13]

बहुत-से अगले लोगों में से।

### الآية 56:14

> ﻿وَقَلِيلٌ مِنَ الْآخِرِينَ [56:14]

तथा कुछ पिछले लोगों में से होंगे।

### الآية 56:15

> ﻿عَلَىٰ سُرُرٍ مَوْضُونَةٍ [56:15]

स्वर्ण से बुने हुए तख़्तों पर।

### الآية 56:16

> ﻿مُتَّكِئِينَ عَلَيْهَا مُتَقَابِلِينَ [56:16]

तकिये लगाये उनपर, एक-दूसरे के सम्मुख (आसीन) होंगे।

### الآية 56:17

> ﻿يَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَانٌ مُخَلَّدُونَ [56:17]

फिरते होंगे उनकी सेवा के लिए बालक, जो सदा (बालक) रहेंगे।

### الآية 56:18

> ﻿بِأَكْوَابٍ وَأَبَارِيقَ وَكَأْسٍ مِنْ مَعِينٍ [56:18]

प्याले तथा सुराह़ियाँ लेकर तथा मदिरा के छलकते प्याले।

### الآية 56:19

> ﻿لَا يُصَدَّعُونَ عَنْهَا وَلَا يُنْزِفُونَ [56:19]

न तो सिर चकरायेगा उनसे, न वे निर्बोध होंगे।

### الآية 56:20

> ﻿وَفَاكِهَةٍ مِمَّا يَتَخَيَّرُونَ [56:20]

तथा जो फल वे चाहेंगे।

### الآية 56:21

> ﻿وَلَحْمِ طَيْرٍ مِمَّا يَشْتَهُونَ [56:21]

तथा पक्षी का जो मांस वे चाहेंगे।

### الآية 56:22

> ﻿وَحُورٌ عِينٌ [56:22]

और गोरियाँ बड़े नैनों वाली।

### الآية 56:23

> ﻿كَأَمْثَالِ اللُّؤْلُؤِ الْمَكْنُونِ [56:23]

छुपाकर रखी हुईं मोतियों के समान।

### الآية 56:24

> ﻿جَزَاءً بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ [56:24]

उसके बदले, जो वे (संसार में) करते रहे।

### الآية 56:25

> ﻿لَا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا تَأْثِيمًا [56:25]

नहीं सुनेंगे उनमें व्यर्थ बात और न पाप की बात।

### الآية 56:26

> ﻿إِلَّا قِيلًا سَلَامًا سَلَامًا [56:26]

केवल सलाम ही सलाम की ध्वनि होगी।

### الآية 56:27

> ﻿وَأَصْحَابُ الْيَمِينِ مَا أَصْحَابُ الْيَمِينِ [56:27]

और दायें वाले, क्या (ही भाग्यशाली) हैं दायें वाले!

### الآية 56:28

> ﻿فِي سِدْرٍ مَخْضُودٍ [56:28]

बिन काँटे की बैरी में होंगे।

### الآية 56:29

> ﻿وَطَلْحٍ مَنْضُودٍ [56:29]

तथा तह पर तह केलों में।

### الآية 56:30

> ﻿وَظِلٍّ مَمْدُودٍ [56:30]

फैली हुई छाया\[1\] में।
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1\. ह़दीस में है कि स्वर्ग में एक वृक्ष है जिस की छाया में सवार सौ वर्ष चलेगा फिर भी वह समाप्त नहीं होगा। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4881)

### الآية 56:31

> ﻿وَمَاءٍ مَسْكُوبٍ [56:31]

और प्रवाहित जल में।

### الآية 56:32

> ﻿وَفَاكِهَةٍ كَثِيرَةٍ [56:32]

तथा बहुत-से फलों में।

### الآية 56:33

> ﻿لَا مَقْطُوعَةٍ وَلَا مَمْنُوعَةٍ [56:33]

जो न समाप्त होंगे, न रोके जायेंगे।

### الآية 56:34

> ﻿وَفُرُشٍ مَرْفُوعَةٍ [56:34]

और ऊँचे बिस्तर पर।

### الآية 56:35

> ﻿إِنَّا أَنْشَأْنَاهُنَّ إِنْشَاءً [56:35]

हमने बनाया है (उनकी) पत्नियों को एक विशेष रूप से।

### الآية 56:36

> ﻿فَجَعَلْنَاهُنَّ أَبْكَارًا [56:36]

हमने बनाय है उन्हें कुमारियाँ।

### الآية 56:37

> ﻿عُرُبًا أَتْرَابًا [56:37]

प्रेमिकायें समायु।

### الآية 56:38

> ﻿لِأَصْحَابِ الْيَمِينِ [56:38]

दाहिने वालों के लिए।

### الآية 56:39

> ﻿ثُلَّةٌ مِنَ الْأَوَّلِينَ [56:39]

बहुत-से अगलों में से होंगे।

### الآية 56:40

> ﻿وَثُلَّةٌ مِنَ الْآخِرِينَ [56:40]

तथा बहुत-से पिछलों में से।

### الآية 56:41

> ﻿وَأَصْحَابُ الشِّمَالِ مَا أَصْحَابُ الشِّمَالِ [56:41]

और बायें वाले, तो क्या हैं बायें वाले!

### الآية 56:42

> ﻿فِي سَمُومٍ وَحَمِيمٍ [56:42]

वे गर्म वायु तथा खौलते जल में (होंगे)।

### الآية 56:43

> ﻿وَظِلٍّ مِنْ يَحْمُومٍ [56:43]

तथा काले धुवें की छाया में।

### الآية 56:44

> ﻿لَا بَارِدٍ وَلَا كَرِيمٍ [56:44]

जो न शीतल होगा और न सुखद।

### الآية 56:45

> ﻿إِنَّهُمْ كَانُوا قَبْلَ ذَٰلِكَ مُتْرَفِينَ [56:45]

वास्तव में, वे इससे पहले (संसार में) सम्पन्न (सुखी) थे।

### الآية 56:46

> ﻿وَكَانُوا يُصِرُّونَ عَلَى الْحِنْثِ الْعَظِيمِ [56:46]

तथा दुराग्रह करते थे महा पापों पर।

### الآية 56:47

> ﻿وَكَانُوا يَقُولُونَ أَئِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ [56:47]

तथा कहा करते थे कि क्या जब हम मर जायेंगे तथा हो जायेंगे धूल और अस्थियाँ, तो क्या हम अवश्य पुनः जीवित होंगे?

### الآية 56:48

> ﻿أَوَآبَاؤُنَا الْأَوَّلُونَ [56:48]

और क्या हमारे पूर्वज (भी)?

### الآية 56:49

> ﻿قُلْ إِنَّ الْأَوَّلِينَ وَالْآخِرِينَ [56:49]

आप कह दें कि निःसंदेह सब अगले तथा पिछले।

### الآية 56:50

> ﻿لَمَجْمُوعُونَ إِلَىٰ مِيقَاتِ يَوْمٍ مَعْلُومٍ [56:50]

अवश्य एकत्र किये जायेंगे एक निर्धारित दिन के समय।

### الآية 56:51

> ﻿ثُمَّ إِنَّكُمْ أَيُّهَا الضَّالُّونَ الْمُكَذِّبُونَ [56:51]

फिर तुम, हे कुपथो! झुठलाने वालो!

### الآية 56:52

> ﻿لَآكِلُونَ مِنْ شَجَرٍ مِنْ زَقُّومٍ [56:52]

अवश्य खाने वाले हो ज़क़्क़ूम (थोहड़) के वृक्ष से।\[1\]
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1\. (देखियेः सूरह साफ़्फ़ात, आयतः62)

### الآية 56:53

> ﻿فَمَالِئُونَ مِنْهَا الْبُطُونَ [56:53]

तथा भरने वाले हो उससे (अपने) उदर।

### الآية 56:54

> ﻿فَشَارِبُونَ عَلَيْهِ مِنَ الْحَمِيمِ [56:54]

तथा पीने वाले हो उसपर से खौलता जल।

### الآية 56:55

> ﻿فَشَارِبُونَ شُرْبَ الْهِيمِ [56:55]

फिर पीने वाले हो प्यासे\[1\] ऊँट के समान।
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1\. आयत में प्यासे ऊँटों के लिये 'ह़ीम' शब्द प्रयुक्त हुआ है। यह ऊँट में एक विशेष रोग होता है जिस से उस की प्यास नहीं जाती।

### الآية 56:56

> ﻿هَٰذَا نُزُلُهُمْ يَوْمَ الدِّينِ [56:56]

यही उनका अतिथि सत्कार है, प्रतिकार (प्रलय) के दिन।

### الآية 56:57

> ﻿نَحْنُ خَلَقْنَاكُمْ فَلَوْلَا تُصَدِّقُونَ [56:57]

हमने ही उत्पन्न किया है तुम्हें, फिर तुम विश्वास क्यों नहीं करते?

### الآية 56:58

> ﻿أَفَرَأَيْتُمْ مَا تُمْنُونَ [56:58]

क्या तुमने ये विचार किया कि जो वीर्य तुम (गर्भाशयों में) गिराते हो।

### الآية 56:59

> ﻿أَأَنْتُمْ تَخْلُقُونَهُ أَمْ نَحْنُ الْخَالِقُونَ [56:59]

क्या तुम उसे शिशु बनाते हो या हम बनाने वाले हैं?

### الآية 56:60

> ﻿نَحْنُ قَدَّرْنَا بَيْنَكُمُ الْمَوْتَ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ [56:60]

हमने निर्धारित किया है तुम्हारे बीच मरण को तथा हम विवश होने वाले नहीं हैं।

### الآية 56:61

> ﻿عَلَىٰ أَنْ نُبَدِّلَ أَمْثَالَكُمْ وَنُنْشِئَكُمْ فِي مَا لَا تَعْلَمُونَ [56:61]

कि बदल दें तुम्हारे रूप और तुम्हें बना दें उस रूप में, जिसे तुम नहीं जानते।

### الآية 56:62

> ﻿وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ النَّشْأَةَ الْأُولَىٰ فَلَوْلَا تَذَكَّرُونَ [56:62]

तथा तुमने तो जान लिया है प्रथम उत्पत्ति को फिर तुम शिक्षा ग्रहण क्यों नहीं करते?

### الآية 56:63

> ﻿أَفَرَأَيْتُمْ مَا تَحْرُثُونَ [56:63]

फिर क्या तुमने विचार किया कि उसमें जो तुम बोते हो?

### الآية 56:64

> ﻿أَأَنْتُمْ تَزْرَعُونَهُ أَمْ نَحْنُ الزَّارِعُونَ [56:64]

क्या तुम उसे उगाते हो या हम उसे उगाने वाले हैं?

### الآية 56:65

> ﻿لَوْ نَشَاءُ لَجَعَلْنَاهُ حُطَامًا فَظَلْتُمْ تَفَكَّهُونَ [56:65]

यदि हम चाहें, तो उसे भुस बना दें, फिर तुम बातें बनाते रह जाओ।

### الآية 56:66

> ﻿إِنَّا لَمُغْرَمُونَ [56:66]

वस्तुतः, हम दण्डित कर दिये गये।

### الآية 56:67

> ﻿بَلْ نَحْنُ مَحْرُومُونَ [56:67]

बल्कि हम (जीविका से) वंचित कर दिये गये।

### الآية 56:68

> ﻿أَفَرَأَيْتُمُ الْمَاءَ الَّذِي تَشْرَبُونَ [56:68]

फिर तुमने विचार किया उस पानी में, जो तुम पीते हो?

### الآية 56:69

> ﻿أَأَنْتُمْ أَنْزَلْتُمُوهُ مِنَ الْمُزْنِ أَمْ نَحْنُ الْمُنْزِلُونَ [56:69]

क्या तुमने उसे बरसाया है बादल से अथवा हम उसे बरसाने वाले हैं।?

### الآية 56:70

> ﻿لَوْ نَشَاءُ جَعَلْنَاهُ أُجَاجًا فَلَوْلَا تَشْكُرُونَ [56:70]

यदि हम चाहें, तो उसे खारी कर दें, फिर तुम आभारी (कृतज्ञ) क्यों नहीं होते?

### الآية 56:71

> ﻿أَفَرَأَيْتُمُ النَّارَ الَّتِي تُورُونَ [56:71]

क्या तुमने उस अग्नि को देखा, जिसे तुम सुलगाते हो।

### الآية 56:72

> ﻿أَأَنْتُمْ أَنْشَأْتُمْ شَجَرَتَهَا أَمْ نَحْنُ الْمُنْشِئُونَ [56:72]

क्या तुमने उत्पन्न किया है उसके वृक्ष को या हम उत्पन्न करने वाले हैं?

### الآية 56:73

> ﻿نَحْنُ جَعَلْنَاهَا تَذْكِرَةً وَمَتَاعًا لِلْمُقْوِينَ [56:73]

हमने ही बनाया उसे शिक्षाप्रद तथा यात्रियों के लाभदायक।

### الآية 56:74

> ﻿فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ الْعَظِيمِ [56:74]

अतः, (हे नबी!) आप पवित्रता का वर्णन करें अपने महा पालनहार के नाम की।

### الآية 56:75

> ﻿۞ فَلَا أُقْسِمُ بِمَوَاقِعِ النُّجُومِ [56:75]

मैं शपथ लेता हूँ सितारों के स्थानों की!

### الآية 56:76

> ﻿وَإِنَّهُ لَقَسَمٌ لَوْ تَعْلَمُونَ عَظِيمٌ [56:76]

और ये निश्चय एक बड़ी शपथ है, यदि तुम समझो।

### الآية 56:77

> ﻿إِنَّهُ لَقُرْآنٌ كَرِيمٌ [56:77]

वास्तव में, ये आदरणीय\[1\] क़ुर्आन है।
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1\. तारों की शपथ का अर्थ यह है कि जिस प्रकार आकाश के तारों की एक दृढ़ व्यवस्था है उसी प्रकार यह क़ुर्आन भी अति ऊँचा तथा सुदृढ़ है।

### الآية 56:78

> ﻿فِي كِتَابٍ مَكْنُونٍ [56:78]

सुरक्षित\[1\] पुस्तक में।
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1\. इस से अभिप्राय 'लौह़े मह़फ़ूज़' है।

### الآية 56:79

> ﻿لَا يَمَسُّهُ إِلَّا الْمُطَهَّرُونَ [56:79]

इसे पवित्र लोग ही छूते हैं।\[1\]
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1\. पवित्र लोगों से अभिप्राय फ़रिश्तें हैं। (देखियेः सूरह अबस, आयतः15-16)

### الآية 56:80

> ﻿تَنْزِيلٌ مِنْ رَبِّ الْعَالَمِينَ [56:80]

अवतरित किया गया है सर्वलोक के पालनहार की ओर से।

### الآية 56:81

> ﻿أَفَبِهَٰذَا الْحَدِيثِ أَنْتُمْ مُدْهِنُونَ [56:81]

फिर क्या तुम इस वाणि (क़ुर्आन) की अपेक्षा करते हो?

### الآية 56:82

> ﻿وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمْ أَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَ [56:82]

तथा बनाते हो अपना भाग कि इसे तुम झुठलाते हो?

### الآية 56:83

> ﻿فَلَوْلَا إِذَا بَلَغَتِ الْحُلْقُومَ [56:83]

फिर क्यों नहीं जब प्राण गले को पहुँचते हैं।

### الآية 56:84

> ﻿وَأَنْتُمْ حِينَئِذٍ تَنْظُرُونَ [56:84]

और तुम उस समय देखते रहते हो।

### الآية 56:85

> ﻿وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنْكُمْ وَلَٰكِنْ لَا تُبْصِرُونَ [56:85]

तथा हम अधिक समीप होते हैं उसके तुमसे, परन्तु तुम नहीं देख सकते।

### الآية 56:86

> ﻿فَلَوْلَا إِنْ كُنْتُمْ غَيْرَ مَدِينِينَ [56:86]

तो यदि तुम किसी के आधीन न हो।

### الآية 56:87

> ﻿تَرْجِعُونَهَا إِنْ كُنْتُمْ صَادِقِينَ [56:87]

तो उस (प्राण) को फेर क्यों नहीं लाते, यदि तुम सच्चे हो?

### الآية 56:88

> ﻿فَأَمَّا إِنْ كَانَ مِنَ الْمُقَرَّبِينَ [56:88]

फिर यदि वह (प्राणी) समीपवर्तियों में है।

### الآية 56:89

> ﻿فَرَوْحٌ وَرَيْحَانٌ وَجَنَّتُ نَعِيمٍ [56:89]

तो उसके लिए सुख तथा उत्तम जीविका तथा सुख भरा स्वर्ग है।

### الآية 56:90

> ﻿وَأَمَّا إِنْ كَانَ مِنْ أَصْحَابِ الْيَمِينِ [56:90]

और यदि वह दायें वालों में से है।

### الآية 56:91

> ﻿فَسَلَامٌ لَكَ مِنْ أَصْحَابِ الْيَمِينِ [56:91]

तो सलाम है तेरे लिए दायें वालों में होने के कारण।\[1\]
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1\. अर्थात उस का स्वागत सलाम से होगा।

### الآية 56:92

> ﻿وَأَمَّا إِنْ كَانَ مِنَ الْمُكَذِّبِينَ الضَّالِّينَ [56:92]

और यदि वह है झुठलाने वाले कुपथों में से।

### الآية 56:93

> ﻿فَنُزُلٌ مِنْ حَمِيمٍ [56:93]

तो अतिथि सत्कार है खौलते पानी से।

### الآية 56:94

> ﻿وَتَصْلِيَةُ جَحِيمٍ [56:94]

तथा नरक में प्रवेश।

### الآية 56:95

> ﻿إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ حَقُّ الْيَقِينِ [56:95]

वास्तव में, यही निश्चय सत्य है।

### الآية 56:96

> ﻿فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ الْعَظِيمِ [56:96]

अतः, (हे नबी!) आप पवित्रता का वर्णन करें अपने महा पालनहार के नाम की।

## روابط ذات صلة

- [النص القرآني للسورة](https://quranpedia.net/surah/1/56.md)
- [كل تفاسير سورة الواقعة
](https://quranpedia.net/surah-tafsir/56.md)
- [ترجمات سورة الواقعة
](https://quranpedia.net/translations/56.md)
- [صفحة الكتاب: الترجمة الهندية](https://quranpedia.net/book/1986.md)
- [المؤلف: مولانا عزيز الحق العمري](https://quranpedia.net/person/1761.md)

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