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title: "ترجمة سورة الحاقة - الترجمة الهندية (الهندية)"
url: "https://quranpedia.net/surah/1/69/book/1986.md"
canonical: "https://quranpedia.net/surah/1/69/book/1986"
surah_id: "69"
book_id: "1986"
book_name: "الترجمة الهندية"
author: "مولانا عزيز الحق العمري"
type: "translation"
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# ترجمة سورة الحاقة - الترجمة الهندية (الهندية)

📖 **[اقرأ النسخة التفاعلية الكاملة على Quranpedia](https://quranpedia.net/surah/1/69/book/1986)** — مع التلاوات الصوتية، البحث، والربط بين المصادر.

## Citation

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Translation of Surah الحاقة from "الترجمة الهندية" in الهندية.

### الآية 69:1

> الْحَاقَّةُ [69:1]

जिसका होना सच है।

### الآية 69:2

> ﻿مَا الْحَاقَّةُ [69:2]

वह क्या है, जिसका होना सच है?

### الآية 69:3

> ﻿وَمَا أَدْرَاكَ مَا الْحَاقَّةُ [69:3]

तथा आप क्या जानें कि क्या है, जिसका होना सच है?

### الآية 69:4

> ﻿كَذَّبَتْ ثَمُودُ وَعَادٌ بِالْقَارِعَةِ [69:4]

झुठलाया समूद तथा आद (जाति) ने अचानक आ पड़ने वाली (प्रलय) को।

### الآية 69:5

> ﻿فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهْلِكُوا بِالطَّاغِيَةِ [69:5]

फिर समूद, तो वे ध्वस्त कर दिये गये अति कड़ी ध्वनि से।

### الآية 69:6

> ﻿وَأَمَّا عَادٌ فَأُهْلِكُوا بِرِيحٍ صَرْصَرٍ عَاتِيَةٍ [69:6]

तथा आद, तो वे ध्वस्त कर दिये गये एक तेज़ शीतल आँधी से।

### الآية 69:7

> ﻿سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍ وَثَمَانِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًا فَتَرَى الْقَوْمَ فِيهَا صَرْعَىٰ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍ [69:7]

लगाये रखा उसे उनपर सात रातें और आठ दिन निरन्तर, तो आप देखते कि वे जाति उसमें ऐसे पछाड़ी हुई है, जैसे खजूर के खोखले तने।\[1\]
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1\. उन के भारी और लम्बे होने की उपमा खजूर के तने से दी गई है।

### الآية 69:8

> ﻿فَهَلْ تَرَىٰ لَهُمْ مِنْ بَاقِيَةٍ [69:8]

तो क्या आप देखते हैं कि उनमें कोई शेष रह गया है?

### الآية 69:9

> ﻿وَجَاءَ فِرْعَوْنُ وَمَنْ قَبْلَهُ وَالْمُؤْتَفِكَاتُ بِالْخَاطِئَةِ [69:9]

और किया यही पाप फ़िरऔन ने और जो उसके पूर्व थे तथा जिनकी बस्तियाँ औंधी कर दी गयीं।

### الآية 69:10

> ﻿فَعَصَوْا رَسُولَ رَبِّهِمْ فَأَخَذَهُمْ أَخْذَةً رَابِيَةً [69:10]

उन्होंने नहीं माना अपने पालनहार के रसूल को। अन्ततः, उसने पकड़ लिया उन्हें, कड़ी पकड़।

### الآية 69:11

> ﻿إِنَّا لَمَّا طَغَى الْمَاءُ حَمَلْنَاكُمْ فِي الْجَارِيَةِ [69:11]

हमने, जब सीमा पार कर गया जल, तो तुम्हें सवार कर दिया नाव\[1\] में।
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1\. इस में नूह़ (अलैहिस्सलाम) के तूफ़ान की ओर संकेत है। और सभी मनुष्य उन की संतान हैं इस लिये यह दया सब पर हुई है।

### الآية 69:12

> ﻿لِنَجْعَلَهَا لَكُمْ تَذْكِرَةً وَتَعِيَهَا أُذُنٌ وَاعِيَةٌ [69:12]

ताकि हम बना दें उसे तुम्हारे लिए एक शिक्षाप्रद यादगार और ताकि सुरक्षित रख लें इसे सुनने वाले कान।

### الآية 69:13

> ﻿فَإِذَا نُفِخَ فِي الصُّورِ نَفْخَةٌ وَاحِدَةٌ [69:13]

फिर जब फूँक दी जायेगी सूर (नरसिंघा) में एक फूँक।

### الآية 69:14

> ﻿وَحُمِلَتِ الْأَرْضُ وَالْجِبَالُ فَدُكَّتَا دَكَّةً وَاحِدَةً [69:14]

और उठाया जायेगा धरती तथा पर्वतों को, तो दोनों चूर-चूर कर दिये जायेंगे\[1\] एक ही बार में।
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1\. दोखियेः सूरह ताहा, आयतः 20, आयतः103, 108)

### الآية 69:15

> ﻿فَيَوْمَئِذٍ وَقَعَتِ الْوَاقِعَةُ [69:15]

तो उसी दिन होनी हो जायेगी।

### الآية 69:16

> ﻿وَانْشَقَّتِ السَّمَاءُ فَهِيَ يَوْمَئِذٍ وَاهِيَةٌ [69:16]

तथा फट जायेगा आकाश, तो वह उस दिन क्षीण निर्बल हो जायेगा।

### الآية 69:17

> ﻿وَالْمَلَكُ عَلَىٰ أَرْجَائِهَا ۚ وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ فَوْقَهُمْ يَوْمَئِذٍ ثَمَانِيَةٌ [69:17]

और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे तथा उठाये होंगे आपके पालनहार के अर्श (सिंहासन) को अपने ऊपर उस दिन, आठ फ़रिश्ते।

### الآية 69:18

> ﻿يَوْمَئِذٍ تُعْرَضُونَ لَا تَخْفَىٰ مِنْكُمْ خَافِيَةٌ [69:18]

उस दिन तुम अल्लाह के पास उपस्थित किये जाओगे, नहीं छुपा रह जायेगा तुममें से कोई।

### الآية 69:19

> ﻿فَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِيَمِينِهِ فَيَقُولُ هَاؤُمُ اقْرَءُوا كِتَابِيَهْ [69:19]

फिर जिसे दिया जायेगा उसका कर्मपत्र दायें हाथ में, वह कहेगाः ये लो मेरा कर्मपत्र पढ़ो।

### الآية 69:20

> ﻿إِنِّي ظَنَنْتُ أَنِّي مُلَاقٍ حِسَابِيَهْ [69:20]

मुझे विश्वास था कि मैं मिलने वाला हूँ अपने ह़िसाब से।

### الآية 69:21

> ﻿فَهُوَ فِي عِيشَةٍ رَاضِيَةٍ [69:21]

तो वह अपने मन चाहे सुख में होगा।

### الآية 69:22

> ﻿فِي جَنَّةٍ عَالِيَةٍ [69:22]

उच्च श्रेणी के स्वर्ग में।

### الآية 69:23

> ﻿قُطُوفُهَا دَانِيَةٌ [69:23]

जिसके फलों के गुच्छे झुक रहे होंगे।

### الآية 69:24

> ﻿كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا أَسْلَفْتُمْ فِي الْأَيَّامِ الْخَالِيَةِ [69:24]

(उनसे कहा जायेगाः) खाओ तथा पियो आनन्द लेकर उसके बदले, जो तुमने किया है विगत दिनों (संसार) में।

### الآية 69:25

> ﻿وَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِشِمَالِهِ فَيَقُولُ يَا لَيْتَنِي لَمْ أُوتَ كِتَابِيَهْ [69:25]

और जिसे दिया जायेगा उसका कर्मपत्र उसके बायें हाथ में, तो वह कहेगाः हाय! मुझे मेरा कर्मपत्र दिया ही न जाता!

### الآية 69:26

> ﻿وَلَمْ أَدْرِ مَا حِسَابِيَهْ [69:26]

तथा मैं न जानता कि क्या है मेरा ह़िसाब!

### الآية 69:27

> ﻿يَا لَيْتَهَا كَانَتِ الْقَاضِيَةَ [69:27]

काश मेरी मौत ही निर्णायक\[1\] होती!
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1\. अर्थात उस के पश्चात् मैं फिर जीवित न किया जाता।

### الآية 69:28

> ﻿مَا أَغْنَىٰ عَنِّي مَالِيَهْ ۜ [69:28]

नहीं काम आया मेरा धन।

### الآية 69:29

> ﻿هَلَكَ عَنِّي سُلْطَانِيَهْ [69:29]

मुझसे समाप्त हो गया, मेरा प्रभुत्व।\[1\]
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1\. इस का दूसरा अर्थ यह भी हो सकता है कि परलोक के इन्कार पर जितने तर्क दिया करता था आज सब निष्फल हो गये।

### الآية 69:30

> ﻿خُذُوهُ فَغُلُّوهُ [69:30]

(आदेश होगा कि) उसे पकड़ो और उसके गले में तौक़ डाल दो।

### الآية 69:31

> ﻿ثُمَّ الْجَحِيمَ صَلُّوهُ [69:31]

फिर नरक में उसे झोंक दो।

### الآية 69:32

> ﻿ثُمَّ فِي سِلْسِلَةٍ ذَرْعُهَا سَبْعُونَ ذِرَاعًا فَاسْلُكُوهُ [69:32]

फिर उसे एक जंजीर जिसकी लम्बाई सत्तर गज़ है, में जकड़ दो।

### الآية 69:33

> ﻿إِنَّهُ كَانَ لَا يُؤْمِنُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ [69:33]

वह ईमान नहीं रखता था महिमाशाली अल्लाह पर।

### الآية 69:34

> ﻿وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ الْمِسْكِينِ [69:34]

और न प्रेरणा देता था दरिद्र को भोजन कराने की।

### الآية 69:35

> ﻿فَلَيْسَ لَهُ الْيَوْمَ هَاهُنَا حَمِيمٌ [69:35]

अतः, नहीं है उसका आज यहाँ कोई मित्र।

### الآية 69:36

> ﻿وَلَا طَعَامٌ إِلَّا مِنْ غِسْلِينٍ [69:36]

और न कोई भोजन, पीप के सिवा।

### الآية 69:37

> ﻿لَا يَأْكُلُهُ إِلَّا الْخَاطِئُونَ [69:37]

जिसे पापी ही खायेंगे।

### الآية 69:38

> ﻿فَلَا أُقْسِمُ بِمَا تُبْصِرُونَ [69:38]

तो मैं शपथ लेता हूँ उसकी, जो तुम देखते हो।

### الآية 69:39

> ﻿وَمَا لَا تُبْصِرُونَ [69:39]

तथा जो तुम नहीं देखते हो।

### الآية 69:40

> ﻿إِنَّهُ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍ [69:40]

निःसंदेह, ये (क़ुर्आन) आदरणीय रसूल का कथन\[1\] है।
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1\. यहाँ आदरणीय रसूल से अभिप्राय मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हैं। तथा सूरह तक्वीर आयतः 19 में फ़रिश्ते जिब्रील (अलैहिस्सलाम) जो वह़्यी लाते थे वह अभिप्राय हैं। यहाँ क़ुर्आन को आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का कथन इस अर्थ में कहा गया है कि लोग उसे आप से सुन रहे थे। और इसी प्रकार आप जिब्रील (अलैहिस्सलाम) से सुन रहे थे। अन्यथा वास्तव में क़ुर्आन अल्लाह ही का कथन है जैसा कि आगामी आयतः 43 में आ रहा है।

### الآية 69:41

> ﻿وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَاعِرٍ ۚ قَلِيلًا مَا تُؤْمِنُونَ [69:41]

और वह किसी कवि का कथन नहीं है। तुम लोग कम ही विश्वास करते हो।

### الآية 69:42

> ﻿وَلَا بِقَوْلِ كَاهِنٍ ۚ قَلِيلًا مَا تَذَكَّرُونَ [69:42]

और न वह किसी ज्योतिषी का कथन है, तुम कम की शिक्षा ग्रहण करते हो।

### الآية 69:43

> ﻿تَنْزِيلٌ مِنْ رَبِّ الْعَالَمِينَ [69:43]

सर्वलोक के पालनहार का उतारा हुआ है।

### الآية 69:44

> ﻿وَلَوْ تَقَوَّلَ عَلَيْنَا بَعْضَ الْأَقَاوِيلِ [69:44]

और यदि इसने (नबी ने) हमपर कोई बात बनाई\[1\] होती।
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1\. इस आयत का भावार्थ यह कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अपनी ओर से वह़्यी (प्रकाशना) में कुछ अधिक या कम करने का अधिकार नहीं है। यदि वह ऐसा करेंगे तो उन्हें कड़ी यातना दी जायेगी।

### الآية 69:45

> ﻿لَأَخَذْنَا مِنْهُ بِالْيَمِينِ [69:45]

तो अवश्य हम पकड़ लेते उसका सीधा हाथ।

### الآية 69:46

> ﻿ثُمَّ لَقَطَعْنَا مِنْهُ الْوَتِينَ [69:46]

फिर अवश्य काट देते उसके गले की रग।

### الآية 69:47

> ﻿فَمَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ عَنْهُ حَاجِزِينَ [69:47]

फिर तुममें से कोई (मुझे) उससे रोकने वाला न होता।

### الآية 69:48

> ﻿وَإِنَّهُ لَتَذْكِرَةٌ لِلْمُتَّقِينَ [69:48]

निःसंदेह, ये एक शिक्षा है सदाचारियों के लिए।

### الآية 69:49

> ﻿وَإِنَّا لَنَعْلَمُ أَنَّ مِنْكُمْ مُكَذِّبِينَ [69:49]

तथा वास्तव में हम जानते हैं कि तुममें कुछ झुठलाने वाले हैं।

### الآية 69:50

> ﻿وَإِنَّهُ لَحَسْرَةٌ عَلَى الْكَافِرِينَ [69:50]

और निश्चय ये पछतावे का कारण होगा काफ़िरों\[1\] के लिए।
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1\. अर्थात जो क़ुर्आन को नहीं मानते वह अन्ततः पछतायेंगे।

### الآية 69:51

> ﻿وَإِنَّهُ لَحَقُّ الْيَقِينِ [69:51]

वस्तुतः, ये विश्वसनीय सत्य है।

### الآية 69:52

> ﻿فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ الْعَظِيمِ [69:52]

अतः, आप पवित्रता का वर्णन करें अपने महिमावान पालनहार के नाम की।

## روابط ذات صلة

- [النص القرآني للسورة](https://quranpedia.net/surah/1/69.md)
- [كل تفاسير سورة الحاقة
](https://quranpedia.net/surah-tafsir/69.md)
- [ترجمات سورة الحاقة
](https://quranpedia.net/translations/69.md)
- [صفحة الكتاب: الترجمة الهندية](https://quranpedia.net/book/1986.md)
- [المؤلف: مولانا عزيز الحق العمري](https://quranpedia.net/person/1761.md)

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