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title: "ترجمة سورة المعارج - الترجمة الهندية (الهندية)"
url: "https://quranpedia.net/surah/1/70/book/1986.md"
canonical: "https://quranpedia.net/surah/1/70/book/1986"
surah_id: "70"
book_id: "1986"
book_name: "الترجمة الهندية"
author: "مولانا عزيز الحق العمري"
type: "translation"
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# ترجمة سورة المعارج - الترجمة الهندية (الهندية)

📖 **[اقرأ النسخة التفاعلية الكاملة على Quranpedia](https://quranpedia.net/surah/1/70/book/1986)** — مع التلاوات الصوتية، البحث، والربط بين المصادر.

## Citation

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Translation of Surah المعارج from "الترجمة الهندية" in الهندية.

### الآية 70:1

> سَأَلَ سَائِلٌ بِعَذَابٍ وَاقِعٍ [70:1]

प्रश्न किया एक प्रश्न करने\[1\] वाले ने उस यातना के बारे में, जो आने वाली है।
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1\. कहा जाता है नज़्र पुत्र ह़ारिस अथवा अबू जह्ल ने यह माँग की थी कि "हे अल्लाह! यदि यह सत्य है तेरी ओर से तू हम पर आकाश से पत्थर बरसा दे।" (देखियेः सूरह अन्फाल, आयतः 32)

### الآية 70:2

> ﻿لِلْكَافِرِينَ لَيْسَ لَهُ دَافِعٌ [70:2]

काफ़िरों पर। नहीं है जिसे कोई दूर करने वाला।

### الآية 70:3

> ﻿مِنَ اللَّهِ ذِي الْمَعَارِجِ [70:3]

अल्लाह ऊँचाईयों वाले की ओर से।

### الآية 70:4

> ﻿تَعْرُجُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ إِلَيْهِ فِي يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهُ خَمْسِينَ أَلْفَ سَنَةٍ [70:4]

चढ़ते हैं फ़रिश्ते तथा रूह़\[1\] जिसकी ओर, एक दिन में, जिसका माप पचास हज़ार वर्ष है।
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1\. रूह़ से अभिप्राय फ़रिश्ता जिब्रील (अलैहिस्सलाम) है।

### الآية 70:5

> ﻿فَاصْبِرْ صَبْرًا جَمِيلًا [70:5]

अतः, (हे नबी!) आप सहन\[1\] करें अच्छे प्रकार से।
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1\. अर्थात संसार में सत्य को स्वीकार करने से।

### الآية 70:6

> ﻿إِنَّهُمْ يَرَوْنَهُ بَعِيدًا [70:6]

वे समझते हैं उसे दूर।

### الآية 70:7

> ﻿وَنَرَاهُ قَرِيبًا [70:7]

और हम देख रहे हैं उसे समीप।

### الآية 70:8

> ﻿يَوْمَ تَكُونُ السَّمَاءُ كَالْمُهْلِ [70:8]

जिस दिन हो जायेगा आकाश पिघली हुई धातु के समान।

### الآية 70:9

> ﻿وَتَكُونُ الْجِبَالُ كَالْعِهْنِ [70:9]

तथा हो जायेंगे पर्वत, रंगारंग धुने हुए ऊन के समान।\[1\]
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1\. देखियेः सूरह क़ारिआ।

### الآية 70:10

> ﻿وَلَا يَسْأَلُ حَمِيمٌ حَمِيمًا [70:10]

और नहीं पूछेगा कोई मित्र किसी मित्र को।

### الآية 70:11

> ﻿يُبَصَّرُونَهُمْ ۚ يَوَدُّ الْمُجْرِمُ لَوْ يَفْتَدِي مِنْ عَذَابِ يَوْمِئِذٍ بِبَنِيهِ [70:11]

(जबकि) वे उन्हें दिखाये जायेंगे। कामना करेगा पापी कि दण्ड के रूप में दे दे, उस दिन की यातना के, अपने पुत्रों को।

### الآية 70:12

> ﻿وَصَاحِبَتِهِ وَأَخِيهِ [70:12]

तथा अपनी पत्नी और अपने भाई को।

### الآية 70:13

> ﻿وَفَصِيلَتِهِ الَّتِي تُؤْوِيهِ [70:13]

तथा अपने समीपवर्ती परिवार को, जो उसे शरण देता था।

### الآية 70:14

> ﻿وَمَنْ فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا ثُمَّ يُنْجِيهِ [70:14]

और जो धरती में है, सभी\[1\] को, फिर वह उसे यातना से बचा ले।
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1\. ह़दीस में है कि जिस नारकी को सब से सरल यातना दी जायेगी, उस से अल्लाह कहेगाः क्या धरती का सब कुछ तुम्हें मिल जाये तो उसे इस के दण्ड में दे दोगे? वह कहेगाः हाँ। अल्लाह कहेगाः तुम आदम की पीठ में थे, तो मैं ने तुम से इस से सरल की माँग की थी कि मेरा किसी को साझी न बनाना तो तुमने इन्कार किया और शिर्क किया। (सह़ीह़ बुख़ारीः 6557, सह़ीह़ मुस्लिमः 2805)

### الآية 70:15

> ﻿كَلَّا ۖ إِنَّهَا لَظَىٰ [70:15]

कदापि (ऐसा) नहीं (होगा)।

### الآية 70:16

> ﻿نَزَّاعَةً لِلشَّوَىٰ [70:16]

वह अग्नि की ज्वाला होगी।

### الآية 70:17

> ﻿تَدْعُو مَنْ أَدْبَرَ وَتَوَلَّىٰ [70:17]

खाल उधेड़ने वाली।

### الآية 70:18

> ﻿وَجَمَعَ فَأَوْعَىٰ [70:18]

वह पुकारेगी उसे, जिसने पीछा दिखाया\[1\] तथा मुँह फेरा।
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1\. अर्थात सत्य से।

### الآية 70:19

> ﻿۞ إِنَّ الْإِنْسَانَ خُلِقَ هَلُوعًا [70:19]

तथा (धन) एकत्र किया, फिर सौंत कर रखा।

### الآية 70:20

> ﻿إِذَا مَسَّهُ الشَّرُّ جَزُوعًا [70:20]

वास्तव में, मनुष्य अत्यंत कच्चे दिल का पैदा किया गया है।

### الآية 70:21

> ﻿وَإِذَا مَسَّهُ الْخَيْرُ مَنُوعًا [70:21]

जब उसे पहुँचता है दुःख, तो उद्विग्न हो जाता है।

### الآية 70:22

> ﻿إِلَّا الْمُصَلِّينَ [70:22]

और जब उसे धन मिलता है, तो कंजूसी करने लगता है।

### الآية 70:23

> ﻿الَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ دَائِمُونَ [70:23]

परन्तु, जो नमाज़ी हैं।

### الآية 70:24

> ﻿وَالَّذِينَ فِي أَمْوَالِهِمْ حَقٌّ مَعْلُومٌ [70:24]

जो अनपी नमाज़ का सदा पालन\[1\] करते हैं।
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1\. अर्थात बड़ी पाबंदी से नमाज़ पढ़ते हों।

### الآية 70:25

> ﻿لِلسَّائِلِ وَالْمَحْرُومِ [70:25]

और जिनके धनों में निश्चित भाग है, याचक (माँगने वाला) तथा वंचित\[1\] का।
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1\. अर्थात जो न माँगने के कारण वंचित रह जाता है।

### الآية 70:26

> ﻿وَالَّذِينَ يُصَدِّقُونَ بِيَوْمِ الدِّينِ [70:26]

तथा जो सत्य मानते हैं प्रतिकार (प्रलय) के दिन को।

### الآية 70:27

> ﻿وَالَّذِينَ هُمْ مِنْ عَذَابِ رَبِّهِمْ مُشْفِقُونَ [70:27]

तथा जो अपने पालनहार की यातना से डरते हैं।

### الآية 70:28

> ﻿إِنَّ عَذَابَ رَبِّهِمْ غَيْرُ مَأْمُونٍ [70:28]

वास्तव में, आपके पालनहार की यातना निर्भय रहने योग्य नहीं है।

### الآية 70:29

> ﻿وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ [70:29]

तथा जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करने वाले हैं।

### الآية 70:30

> ﻿إِلَّا عَلَىٰ أَزْوَاجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ [70:30]

सिवाय अपनी पत्नियों और अपने स्वामित्व में आये दासियों\[1\] के, तो वही निन्दित नहीं हैं।
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1\. इस्लाम में उसी दासी से संभोग उचित है जिसे सेनापति ने ग़नीमत (परिहार) के दूसरे धनों के समान किसी मुजाहिद के स्वामित्व में दे दिया हो। इस से पूर्व किसी बंदी स्त्री से संभोग पाप तथा व्यभिचार है। और उस से संभोग भी उस समय वैध है जब उसे एक बार मासिक धर्म आ जाये। अथवा गर्भवती हो तो प्रसव के पश्चात् ही संभोग किया जा सकता है। इसी प्रकार जिस के स्वामित्व में आई हो उस के सिवा और कोई उस से संभोग नहीं कर सकता।

### الآية 70:31

> ﻿فَمَنِ ابْتَغَىٰ وَرَاءَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْعَادُونَ [70:31]

और जो चाहे इसके अतिरिक्त, तो वही सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।

### الآية 70:32

> ﻿وَالَّذِينَ هُمْ لِأَمَانَاتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَاعُونَ [70:32]

और जो अपनी अमानतों तथा अपने वचन का पालन करते हैं।

### الآية 70:33

> ﻿وَالَّذِينَ هُمْ بِشَهَادَاتِهِمْ قَائِمُونَ [70:33]

और जो अपने साक्ष्यों (गवाहियों) पर स्थित रहने वाले हैं।

### الآية 70:34

> ﻿وَالَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ [70:34]

तथा जो अपनी नमाज़ों की रक्षा करते हैं।

### الآية 70:35

> ﻿أُولَٰئِكَ فِي جَنَّاتٍ مُكْرَمُونَ [70:35]

वही स्वर्गों में सम्मानित होंगे।

### الآية 70:36

> ﻿فَمَالِ الَّذِينَ كَفَرُوا قِبَلَكَ مُهْطِعِينَ [70:36]

तो क्या हो गया है उनकाफ़िरों को कि आपकी ओर दौड़े चले आ रहे हैं?

### الآية 70:37

> ﻿عَنِ الْيَمِينِ وَعَنِ الشِّمَالِ عِزِينَ [70:37]

दायें तथा बायें समूहों में होकर।\[1\] 
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1\. अर्थात जब आप क़ुर्आन सुनाते हैं तो उस का उपहास करने के लिये समूहों में हो कर आ जाते हैं। और इन का दावा यह है कि स्वर्ग में जायेंगे।

### الآية 70:38

> ﻿أَيَطْمَعُ كُلُّ امْرِئٍ مِنْهُمْ أَنْ يُدْخَلَ جَنَّةَ نَعِيمٍ [70:38]

क्या उनमें से प्रत्येक व्यक्ति लोभ (लालच) रखता है कि उसे प्रवेश दे दिया जायेगा सुख के स्वर्गों में?

### الآية 70:39

> ﻿كَلَّا ۖ إِنَّا خَلَقْنَاهُمْ مِمَّا يَعْلَمُونَ [70:39]

कदापि ऐसा न होगा, हमने उनकी उत्पत्ति उस चीज़ से की है, जिसे वे\[1\] जानते हैं।
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1\. अर्थात हीन जल (वीर्य) से। फिर भी घमण्ड करते हैं। तथा अल्लाह और उस के रसूल को नहीं मानते।

### الآية 70:40

> ﻿فَلَا أُقْسِمُ بِرَبِّ الْمَشَارِقِ وَالْمَغَارِبِ إِنَّا لَقَادِرُونَ [70:40]

तो मैं शपथ लेता हूँ पूर्वों (सूर्योदय के स्थानों) तथा पश्चिमों (सूर्यास्त के स्थानों) की, वास्तव में हम अवश्य सामर्थ्यवान हैं।

### الآية 70:41

> ﻿عَلَىٰ أَنْ نُبَدِّلَ خَيْرًا مِنْهُمْ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ [70:41]

इस बात पर कि बदल दें उनसे उत्तम (उत्पत्ति) को तथा हम विवश नहीं हैं।

### الآية 70:42

> ﻿فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا وَيَلْعَبُوا حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي يُوعَدُونَ [70:42]

अतः, आप उन्हें झगड़ते तथा खेलते छोड़ दें, यहाँ तक कि वे मिल जायें अपने उस दिन से, जिसका उन्हें वचन दिया जा रहा है।

### الآية 70:43

> ﻿يَوْمَ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ سِرَاعًا كَأَنَّهُمْ إِلَىٰ نُصُبٍ يُوفِضُونَ [70:43]

जिस दिन वे निकलेंगे क़ब्रों (और समाधियों) से, दौड़ते हुए, जैसे वे अपनी मूर्तियों की ओर दौड़ रहे हों।\[1\]
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1\. या उन के थानों की ओर। क्योंकि संसार में वे सूर्योदय के समय बड़ी तीव्र गति से अपनी मूर्तियों की ओर दौड़ते थे।

### الآية 70:44

> ﻿خَاشِعَةً أَبْصَارُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۚ ذَٰلِكَ الْيَوْمُ الَّذِي كَانُوا يُوعَدُونَ [70:44]

झुकी होंगी उनकी आँखें, छाया होगा उनपर अपमान, यही वह दिन है जिसका वचन उन्हें दिया जा\[1\] रहा था।
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1\. अर्थात रसूलों तथा धर्मशास्त्रों के माध्यम से।

## روابط ذات صلة

- [النص القرآني للسورة](https://quranpedia.net/surah/1/70.md)
- [كل تفاسير سورة المعارج
](https://quranpedia.net/surah-tafsir/70.md)
- [ترجمات سورة المعارج
](https://quranpedia.net/translations/70.md)
- [صفحة الكتاب: الترجمة الهندية](https://quranpedia.net/book/1986.md)
- [المؤلف: مولانا عزيز الحق العمري](https://quranpedia.net/person/1761.md)

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