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title: "ترجمة سورة المدّثر - الترجمة الهندية (الهندية)"
url: "https://quranpedia.net/surah/1/74/book/1986.md"
canonical: "https://quranpedia.net/surah/1/74/book/1986"
surah_id: "74"
book_id: "1986"
book_name: "الترجمة الهندية"
author: "مولانا عزيز الحق العمري"
type: "translation"
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# ترجمة سورة المدّثر - الترجمة الهندية (الهندية)

📖 **[اقرأ النسخة التفاعلية الكاملة على Quranpedia](https://quranpedia.net/surah/1/74/book/1986)** — مع التلاوات الصوتية، البحث، والربط بين المصادر.

## Citation

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Translation of Surah المدّثر from "الترجمة الهندية" in الهندية.

### الآية 74:1

> يَا أَيُّهَا الْمُدَّثِّرُ [74:1]

हे चादर ओढ़ने\[1\] वाले! 
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1\. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर प्रथम वह़्यी के पश्चात् कुछ दिनों तक वह़्यी नहीं आई। फिर एक बार आप जा रहे थे कि आकाश से एक आवाज़ सुनी। ऊपर देखा तो वही फ़रिश्ता जो आप के पास 'ह़िरा' गुफ़ा में आया था आकाश तथा धरती के बीच एक कुर्सी पर विराजमान था। जिस से आप डर गये। और धरती पर गिर गये। फिर घर आये और अपनी पत्नी से कहाः मुझे चादर ओढ़ा दो, मुझे चादर ओढ़ा दो। उस ने चादर ओढ़ा दी। और अल्लाह ने यह सूरह उतारी। फिर निरन्तर वह़्यी आने लगी। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4925, 4926, सह़ीह़ मुस्लिमः 161) प्रथम वह़्यी से आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को नबी बनाया गया। और अब आप पर धर्म के प्रचार का भार रख दिया गया। इन आयतों में आप के माध्यम से मुसलमानों को पवित्र रहने के निर्देश दिये गये हैं।

### الآية 74:2

> ﻿قُمْ فَأَنْذِرْ [74:2]

खड़े हो जाओ, फिर सावधान करो।

### الآية 74:3

> ﻿وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ [74:3]

तथा अपने पालनहार की महिमा का वर्णन करो।

### الآية 74:4

> ﻿وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ [74:4]

तथा अपने कपड़ों को पवित्र रखो।

### الآية 74:5

> ﻿وَالرُّجْزَ فَاهْجُرْ [74:5]

और मलीनता को त्याग दो।

### الآية 74:6

> ﻿وَلَا تَمْنُنْ تَسْتَكْثِرُ [74:6]

तथा उपकार न करो इसलिए कि उसके द्वारा अधिक लो।

### الآية 74:7

> ﻿وَلِرَبِّكَ فَاصْبِرْ [74:7]

और अपने पालनहार ही के लिए सहन करो।

### الآية 74:8

> ﻿فَإِذَا نُقِرَ فِي النَّاقُورِ [74:8]

फिर जब फूँका जायेगा\[1\] नरसिंघा में।
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1\. अर्थात प्रलय के दिन।

### الآية 74:9

> ﻿فَذَٰلِكَ يَوْمَئِذٍ يَوْمٌ عَسِيرٌ [74:9]

तो उस दिन अति भीषण दिन होगा।

### الآية 74:10

> ﻿عَلَى الْكَافِرِينَ غَيْرُ يَسِيرٍ [74:10]

काफ़िरों पर सरल न होगा।

### الآية 74:11

> ﻿ذَرْنِي وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيدًا [74:11]

आप छोड़ दें मुझे और उसे, जिसे मैंने पैदा किया अकेला।

### الآية 74:12

> ﻿وَجَعَلْتُ لَهُ مَالًا مَمْدُودًا [74:12]

फिर दे दिया उसे अत्यधिक धन।

### الآية 74:13

> ﻿وَبَنِينَ شُهُودًا [74:13]

और पुत्र उपस्थित रहने\[1\] वाले।
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1\. जो उस की सेवा में उपस्थित रहते हैं। कहा गया है कि इस से अभिप्राय वलीद पुत्र मुग़ीरह है जिस के दस पुत्र थे।

### الآية 74:14

> ﻿وَمَهَّدْتُ لَهُ تَمْهِيدًا [74:14]

और दिया मैंने उसे प्रत्येक प्रकार का संसाधन।

### الآية 74:15

> ﻿ثُمَّ يَطْمَعُ أَنْ أَزِيدَ [74:15]

फिर भी वह लोभ रखता है कि उसे और अधिक दूँ।

### الآية 74:16

> ﻿كَلَّا ۖ إِنَّهُ كَانَ لِآيَاتِنَا عَنِيدًا [74:16]

कदापि नहीं। वह हमारी आयतों का विरोधी है।

### الآية 74:17

> ﻿سَأُرْهِقُهُ صَعُودًا [74:17]

मैं उसे चढ़ाऊँगा कड़ी\[1\] चढ़ाई।
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1\. अर्थात कड़ी यातना दूँगा। (इब्ने कसीर)

### الآية 74:18

> ﻿إِنَّهُ فَكَّرَ وَقَدَّرَ [74:18]

उसने विचार किया और अनुमान लगाया।\[1\]
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1\. क़ुर्आन के संबंध में प्रश्न किया गया तो वह सोचने लगा कि कौन सी बात बनाये, और उस के बारे में क्या कहे? (इब्ने कसीर)

### الآية 74:19

> ﻿فَقُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ [74:19]

वह मारा जाये! फिर उसने कैसा अनुमान लगाया?

### الآية 74:20

> ﻿ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ [74:20]

फिर (उसपर अल्लाह की) मार! उसने कैसा अनुमान लगाया?

### الآية 74:21

> ﻿ثُمَّ نَظَرَ [74:21]

फिर पुनः विचार किया।

### الآية 74:22

> ﻿ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَ [74:22]

फिर माथे पर बल दिया और मुँह बिदोरा।

### الآية 74:23

> ﻿ثُمَّ أَدْبَرَ وَاسْتَكْبَرَ [74:23]

फिर (सत्य से) पीछे फिरा और घमंड किया।

### الآية 74:24

> ﻿فَقَالَ إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ يُؤْثَرُ [74:24]

और बोला कि ये तो पहले से चला आ रहा है, एक जादू है।\[1\]
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1\. अर्थात मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने यह किसी से सीख लिया है। कहा जाता है कि वलीद पुत्र मुग़ीरह ने अबू जह्ल से कहा था कि लोगों में क़ुर्आन के जादू होने का प्रचार किया जाये।

### الآية 74:25

> ﻿إِنْ هَٰذَا إِلَّا قَوْلُ الْبَشَرِ [74:25]

ये तो बस मनुष्य\[1\] का कथन है।
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1\. अर्थात अल्लाह की वाणी नहीं है।

### الآية 74:26

> ﻿سَأُصْلِيهِ سَقَرَ [74:26]

मैं उसे शीघ्र ही नरक में झोंक दूँगा।

### الآية 74:27

> ﻿وَمَا أَدْرَاكَ مَا سَقَرُ [74:27]

और आप क्या जानें कि नरक क्या है।

### الآية 74:28

> ﻿لَا تُبْقِي وَلَا تَذَرُ [74:28]

न शेष रखेगी और न छोड़ेगी।

### الآية 74:29

> ﻿لَوَّاحَةٌ لِلْبَشَرِ [74:29]

वह खाल झुलसा देने वाली।

### الآية 74:30

> ﻿عَلَيْهَا تِسْعَةَ عَشَرَ [74:30]

नियुक्त हैं उनपर उन्नीस (रक्षख फ़रिश्ते)।

### الآية 74:31

> ﻿وَمَا جَعَلْنَا أَصْحَابَ النَّارِ إِلَّا مَلَائِكَةً ۙ وَمَا جَعَلْنَا عِدَّتَهُمْ إِلَّا فِتْنَةً لِلَّذِينَ كَفَرُوا لِيَسْتَيْقِنَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ وَيَزْدَادَ الَّذِينَ آمَنُوا إِيمَانًا ۙ وَلَا يَرْتَابَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ وَالْمُؤْمِنُونَ ۙ وَلِيَقُولَ الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِمْ مَرَضٌ وَالْكَافِرُونَ مَاذَا أَرَادَ اللَّهُ بِهَٰذَا مَثَلًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ مَنْ يَشَاءُ وَيَهْدِي مَنْ يَشَاءُ ۚ وَمَا يَعْلَمُ جُنُودَ رَبِّكَ إِلَّا هُوَ ۚ وَمَا هِيَ إِلَّا ذِكْرَىٰ لِلْبَشَرِ [74:31]

और हमने नरक के रक्षक फ़रिश्ते ही बनाये हैं और उनकी संख्या को काफ़िरों के लिए परीक्षा बना दिया गया है। ताकि विश्वास कर लें अह्ले\[1\] किताब और बढ़ें जो ईमान लाये हैं ईमान में और संदेह न करें जो पुस्तक दिये गये हैं और ईमान वाले और ताकि कहें वे जिनके दिलों में (द्विधा का) रोग है तथा काफ़िर\[2\] कि क्या तात्पर्य है अल्लाह का इस उदाहरण से? ऐसे ही कुपथ करता है अल्लाह जिसे चाहता है और संमार्ग दर्शाता है, जिसे चाहता है और नहीं जानता है आपके पालनहार की सेनाओं को उसके सिवा कोई और तथा नहीं है ये नरक की चर्चा, किन्तु मनुष्य की शिक्षा के लिए।
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1\. क्योंकि यहूदियों तथा ईसाईयों की पुस्तकों में भी नरक के अधिकारियों की यही संख्या बताई गई है। 2. जब क़ुरैश ने नरक के अधिकारियों की चर्चा सुनी तो अबू जह्ल ने कहाः हे क़ुरैश के समूह! क्या तुम में से दस-दस लोग, एक-एक फ़रिश्ते के लिये काफ़ी नहीं हैं? और एक व्यक्ति ने जिसे अपने बल पर बड़ा गर्व था कहा कि 17 को मैं अक्ला देख लूँगा। और तुम सब मिल कर दो को देख लेना। (इब्ने कसीर)

### الآية 74:32

> ﻿كَلَّا وَالْقَمَرِ [74:32]

ऐसी बात नहीं, शपथ है चाँद की!

### الآية 74:33

> ﻿وَاللَّيْلِ إِذْ أَدْبَرَ [74:33]

तथा रात्रि की, जब व्यतीत होने लगे!

### الآية 74:34

> ﻿وَالصُّبْحِ إِذَا أَسْفَرَ [74:34]

और प्रातः की, जब प्रकाशित हो जाये!

### الآية 74:35

> ﻿إِنَّهَا لَإِحْدَى الْكُبَرِ [74:35]

वास्तव में, (नरक) एक\[1\] बहुत बड़ी चीज़ है।
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1\. अर्थात जैसे रात्री के पश्चात दिन होता है उसी प्रकार कर्मों का भी परिणाम सामने आना है। और दुष्कर्मों का परिणाम नरक है।

### الآية 74:36

> ﻿نَذِيرًا لِلْبَشَرِ [74:36]

डराने के लिए लोगों को।

### الآية 74:37

> ﻿لِمَنْ شَاءَ مِنْكُمْ أَنْ يَتَقَدَّمَ أَوْ يَتَأَخَّرَ [74:37]

उसके लिए तुममें से, जो चाहे\[1\] आगे होना अथवा पीछे रहना।
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1\. अर्थात आज्ञा पालन द्वारा अग्रसर हो जाये, अथवा अवैज्ञा कर के पीछे रह जाये।

### الآية 74:38

> ﻿كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ رَهِينَةٌ [74:38]

प्रत्येक प्राणी अपने कर्मों के बदले में बंधक है।\[1\]
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1\. यदि सत्कर्म किया तो मुक्त हो जायेगा।

### الآية 74:39

> ﻿إِلَّا أَصْحَابَ الْيَمِينِ [74:39]

दाहिने वालों के सिवा।

### الآية 74:40

> ﻿فِي جَنَّاتٍ يَتَسَاءَلُونَ [74:40]

वे स्वर्गों में होंगे। वे प्रश्न करेंगे।

### الآية 74:41

> ﻿عَنِ الْمُجْرِمِينَ [74:41]

अपराधियों से।

### الآية 74:42

> ﻿مَا سَلَكَكُمْ فِي سَقَرَ [74:42]

तुम्हें क्या चीज़ ले गयी नरक में।

### الآية 74:43

> ﻿قَالُوا لَمْ نَكُ مِنَ الْمُصَلِّينَ [74:43]

वे कहेंगेः हम नहीं थे नमाज़ियों में से।

### الآية 74:44

> ﻿وَلَمْ نَكُ نُطْعِمُ الْمِسْكِينَ [74:44]

और नहीं भोजन कराते थे निर्धन को।

### الآية 74:45

> ﻿وَكُنَّا نَخُوضُ مَعَ الْخَائِضِينَ [74:45]

तथा कुरेद करते थे कुरेद करने वालों के साथ।

### الآية 74:46

> ﻿وَكُنَّا نُكَذِّبُ بِيَوْمِ الدِّينِ [74:46]

और हम झुठलाया करते थे प्रतिफल के दिन (प्रलय) को।

### الآية 74:47

> ﻿حَتَّىٰ أَتَانَا الْيَقِينُ [74:47]

यहाँ तक कि हमारी मौत आ गई।

### الآية 74:48

> ﻿فَمَا تَنْفَعُهُمْ شَفَاعَةُ الشَّافِعِينَ [74:48]

तो उन्हें लाभ नहीं देगी शिफ़ारिशियों (अभिस्तावकों) की शिफ़ारिश।\[1\]
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1\. अर्थात नबियों और फ़रिश्तों इत्यादि की। किन्तु जिस से अल्लाह प्रसन्न हो और उस के लिये सिफ़ारिश की अनुमति दे।

### الآية 74:49

> ﻿فَمَا لَهُمْ عَنِ التَّذْكِرَةِ مُعْرِضِينَ [74:49]

तो उन्हें क्या हो गया है कि इस शिक्षा (क़ुर्आन) से मुँह फेर रहे हैं?

### الآية 74:50

> ﻿كَأَنَّهُمْ حُمُرٌ مُسْتَنْفِرَةٌ [74:50]

मानो वे (जंगली) गधे हैं, बिदकाये हुए।

### الآية 74:51

> ﻿فَرَّتْ مِنْ قَسْوَرَةٍ [74:51]

जो शिकारी से भागे हैं।

### الآية 74:52

> ﻿بَلْ يُرِيدُ كُلُّ امْرِئٍ مِنْهُمْ أَنْ يُؤْتَىٰ صُحُفًا مُنَشَّرَةً [74:52]

बल्कि चाहता है प्रत्येक व्यक्ति उनमें से कि उसे खुली\[1\] पुस्तक दी जाये।
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1\. अर्थात वे चाहते हैं कि प्रत्येक के ऊपर वैसे ही पुस्तक उतारी जाये जैसे मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारी गई है। तब वे ईमान लायेंगे। (इब्ने कसीर)

### الآية 74:53

> ﻿كَلَّا ۖ بَلْ لَا يَخَافُونَ الْآخِرَةَ [74:53]

कदापि ये नहीं (हो सकता) बल्कि वे आख़िरत (परलोक) से नहीं डरते हैं।

### الآية 74:54

> ﻿كَلَّا إِنَّهُ تَذْكِرَةٌ [74:54]

निश्चय ये (क़ुर्आन) तो एक शिक्षा है।

### الآية 74:55

> ﻿فَمَنْ شَاءَ ذَكَرَهُ [74:55]

अब जो चाहे, शिक्षा ग्रहण करे।

### الآية 74:56

> ﻿وَمَا يَذْكُرُونَ إِلَّا أَنْ يَشَاءَ اللَّهُ ۚ هُوَ أَهْلُ التَّقْوَىٰ وَأَهْلُ الْمَغْفِرَةِ [74:56]

और वे शिक्षा ग्रहण नहीं कर सकते, परन्तु ये कि अल्लाह चाह ले। वही योग्य है कि उससे डरा जाये और योग्य है कि क्षमा कर दे।

## روابط ذات صلة

- [النص القرآني للسورة](https://quranpedia.net/surah/1/74.md)
- [كل تفاسير سورة المدّثر
](https://quranpedia.net/surah-tafsir/74.md)
- [ترجمات سورة المدّثر
](https://quranpedia.net/translations/74.md)
- [صفحة الكتاب: الترجمة الهندية](https://quranpedia.net/book/1986.md)
- [المؤلف: مولانا عزيز الحق العمري](https://quranpedia.net/person/1761.md)

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