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title: "ترجمة سورة الإنسان - الترجمة الهندية (الهندية)"
url: "https://quranpedia.net/surah/1/76/book/1986.md"
canonical: "https://quranpedia.net/surah/1/76/book/1986"
surah_id: "76"
book_id: "1986"
book_name: "الترجمة الهندية"
author: "مولانا عزيز الحق العمري"
type: "translation"
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# ترجمة سورة الإنسان - الترجمة الهندية (الهندية)

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## Citation

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Translation of Surah الإنسان from "الترجمة الهندية" in الهندية.

### الآية 76:1

> هَلْ أَتَىٰ عَلَى الْإِنْسَانِ حِينٌ مِنَ الدَّهْرِ لَمْ يَكُنْ شَيْئًا مَذْكُورًا [76:1]

क्या व्यतीत हुआ मनुष्य पर युग का एक समय, जब वह कोई विचर्चित\[1\] वस्तु न था?
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1\. अर्थात उस का कोई अस्तित्व न था।

### الآية 76:2

> ﻿إِنَّا خَلَقْنَا الْإِنْسَانَ مِنْ نُطْفَةٍ أَمْشَاجٍ نَبْتَلِيهِ فَجَعَلْنَاهُ سَمِيعًا بَصِيرًا [76:2]

हमने ही पैदा किया मनुष्य को मिश्रित (मिले हुए) वीर्य\[1\] से, ताकि उसकी परीक्षा लें और बनाया उसे सुनने तथा देखने वाला।
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1\. अर्थात नर-नारी के मिश्रित वीर्य से।

### الآية 76:3

> ﻿إِنَّا هَدَيْنَاهُ السَّبِيلَ إِمَّا شَاكِرًا وَإِمَّا كَفُورًا [76:3]

हमने उसे राह दर्शा दी।\[1\] (अब) वह चाहे तो कृतज्ञ बने अथवा कृतघ्न।
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1\. अर्थात नबियों तथा आकाशीय पुस्तकों द्वारा, और दोनों का परिणाम बता दिया गया।

### الآية 76:4

> ﻿إِنَّا أَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ سَلَاسِلَ وَأَغْلَالًا وَسَعِيرًا [76:4]

निःसंदेह, हमने तैयार की काफ़िरों (कृतघ्नों) के लिए ज़ंजीर तथा तौक़ और दहकती अग्नि।

### الآية 76:5

> ﻿إِنَّ الْأَبْرَارَ يَشْرَبُونَ مِنْ كَأْسٍ كَانَ مِزَاجُهَا كَافُورًا [76:5]

निश्चय सदाचारी (कृतज्ञ) पियेंगे ऐसे प्याले से जिसमें कपूर मिश्रित होगा।

### الآية 76:6

> ﻿عَيْنًا يَشْرَبُ بِهَا عِبَادُ اللَّهِ يُفَجِّرُونَهَا تَفْجِيرًا [76:6]

ये एक स्रोत होगा, जिससे अल्लाह के भक्त पियेंगे। उसे बहा ले जायेंगे (जहाँ चाहेंगे)।\[1\]
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1\. अर्थात उस को जिधर चाहेंगे मोड़ ले जायेंगे। जैसे घर, बैठक आदि।

### الآية 76:7

> ﻿يُوفُونَ بِالنَّذْرِ وَيَخَافُونَ يَوْمًا كَانَ شَرُّهُ مُسْتَطِيرًا [76:7]

जो (संसार में) पूरी करते रहे मनोतियाँ\[1\] और डरते रहे उस दिन से\[2\] जिसकी आपदा चारों ओर फैली हुई होगी।
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1\. नज़र (मनौती) का अर्थ है, अल्लाह के समिप्य के लिये कोई कर्म अपने ऊपर अनिवार्य कर लेना। और किसी देवी-देवता तथा पीर-फ़क़ीर के लिये मनौती मानना शिर्क है। जिस को अल्लाह कभी भी क्षमा नहीं करेगा। अर्थात अल्लाह के लिये जो मनौतियाँ मानते रहे उसे पूरी करते रहे। 2. अर्थात प्रलय और ह़िसाब के दिन से।

### الآية 76:8

> ﻿وَيُطْعِمُونَ الطَّعَامَ عَلَىٰ حُبِّهِ مِسْكِينًا وَيَتِيمًا وَأَسِيرًا [76:8]

और भोजन कराते रहे उस (भोजन) को प्रेम करने के बावजूद, निर्धन, अनाथ और बंदी को।

### الآية 76:9

> ﻿إِنَّمَا نُطْعِمُكُمْ لِوَجْهِ اللَّهِ لَا نُرِيدُ مِنْكُمْ جَزَاءً وَلَا شُكُورًا [76:9]

(अपने मन में ये सोचकर) हम तुम्हें भोजन कराते हैं केवल अल्लाह की प्रसन्नता के लिए। तुमसे नहीं चाहते हैं कोई बदला और न कोई कृतज्ञता।

### الآية 76:10

> ﻿إِنَّا نَخَافُ مِنْ رَبِّنَا يَوْمًا عَبُوسًا قَمْطَرِيرًا [76:10]

हम डरते हैं अपने पालनहार से, उस दिन से, जो अति भीषण तथा घोर होगा।

### الآية 76:11

> ﻿فَوَقَاهُمُ اللَّهُ شَرَّ ذَٰلِكَ الْيَوْمِ وَلَقَّاهُمْ نَضْرَةً وَسُرُورًا [76:11]

तो बचा लिया अल्लाह ने उन्हें उस दिन की आपदा से और प्रदान कर दिया प्रफुल्लता तथा प्रसन्नता।

### الآية 76:12

> ﻿وَجَزَاهُمْ بِمَا صَبَرُوا جَنَّةً وَحَرِيرًا [76:12]

और उन्हें प्रतिफल दिया उनके धैर्य के बदले स्वर्ग तथा रेशमी वस्त्र।

### الآية 76:13

> ﻿مُتَّكِئِينَ فِيهَا عَلَى الْأَرَائِكِ ۖ لَا يَرَوْنَ فِيهَا شَمْسًا وَلَا زَمْهَرِيرًا [76:13]

वे तकिये लगाये उसमें तख़्तों पर बैठे होंगे। न उसमें धूप देखेंगे न कड़ा शीत।

### الآية 76:14

> ﻿وَدَانِيَةً عَلَيْهِمْ ظِلَالُهَا وَذُلِّلَتْ قُطُوفُهَا تَذْلِيلًا [76:14]

और झुके होंगे उनपर उस (स्वर्ग) के साये और बस में किये होंगे उसके फलों के गुच्छे पूर्णतः।

### الآية 76:15

> ﻿وَيُطَافُ عَلَيْهِمْ بِآنِيَةٍ مِنْ فِضَّةٍ وَأَكْوَابٍ كَانَتْ قَوَارِيرَا [76:15]

तथा फिराये जायेंगे उनपर चाँदी के बर्तन तथा प्याले जो शीशों के होंगे।

### الآية 76:16

> ﻿قَوَارِيرَ مِنْ فِضَّةٍ قَدَّرُوهَا تَقْدِيرًا [76:16]

चाँदी के शीशों के, जो एक अनुमान से भरेंगे।\[1\]
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1\. अर्थात सेवक उसे ऐसे अनुमान से भरेंगे कि न आवश्यक्ता से कम होंगे न अधिक।

### الآية 76:17

> ﻿وَيُسْقَوْنَ فِيهَا كَأْسًا كَانَ مِزَاجُهَا زَنْجَبِيلًا [76:17]

और पिलाये जायेंगे उसमें ऐसे भरे प्याले, जिसमें सोंठ मिली होगी।

### الآية 76:18

> ﻿عَيْنًا فِيهَا تُسَمَّىٰ سَلْسَبِيلًا [76:18]

ये एक स्रोत है उस (स्वर्ग) में, जिसका नाम सलसबील है।

### الآية 76:19

> ﻿۞ وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَانٌ مُخَلَّدُونَ إِذَا رَأَيْتَهُمْ حَسِبْتَهُمْ لُؤْلُؤًا مَنْثُورًا [76:19]

और (सेवा के लिए) फिर रहे होंगे उनपर सदावासी बालक, जब तुम उन्हें देखोगे, तो उन्हें समझोगे कि बिखरे हुए मोती हैं।

### الآية 76:20

> ﻿وَإِذَا رَأَيْتَ ثَمَّ رَأَيْتَ نَعِيمًا وَمُلْكًا كَبِيرًا [76:20]

तथा जब तुम वहाँ देखोगे, तो देखोगे बड़ा सुख तथा भारी राज्य।

### الآية 76:21

> ﻿عَالِيَهُمْ ثِيَابُ سُنْدُسٍ خُضْرٌ وَإِسْتَبْرَقٌ ۖ وَحُلُّوا أَسَاوِرَ مِنْ فِضَّةٍ وَسَقَاهُمْ رَبُّهُمْ شَرَابًا طَهُورًا [76:21]

उनके ऊपर रेशमी हरे महीन तथा दबीज वस्त्र होंगे और पहनाये जायेंगे उन्हें चाँदी के कंगन और पिलायेगा उन्हें उनका पालनहार पवित्र पेय।

### الآية 76:22

> ﻿إِنَّ هَٰذَا كَانَ لَكُمْ جَزَاءً وَكَانَ سَعْيُكُمْ مَشْكُورًا [76:22]

(तथा कहा जायेगाः) यही है तुम्हारे लिए प्रतिफल और तुम्हारे प्रयास का आदर किया गया।

### الآية 76:23

> ﻿إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا عَلَيْكَ الْقُرْآنَ تَنْزِيلًا [76:23]

वास्तव में, हमने ही उतारा है आपपर क़ुर्आन थोड़ा-थोड़ा करके।\[1\] 
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1\. अर्थात नबूवत की तेईस वर्ष की अवधि में, और ऐसा क्यों किया गया इस के लिये देखियेः सूरह बनी इस्राईल, आयतः 106।

### الآية 76:24

> ﻿فَاصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تُطِعْ مِنْهُمْ آثِمًا أَوْ كَفُورًا [76:24]

अतः, आप धैर्य से काम लें अपने पालनहार के आदेशानुसार और बात न मानें, उनमें से किसी पापी तथा कृतघ्न की।

### الآية 76:25

> ﻿وَاذْكُرِ اسْمَ رَبِّكَ بُكْرَةً وَأَصِيلًا [76:25]

तथा स्मरण करें अपने पालनहार के नाम का, प्रातः तथा संध्या (के समय)।

### الآية 76:26

> ﻿وَمِنَ اللَّيْلِ فَاسْجُدْ لَهُ وَسَبِّحْهُ لَيْلًا طَوِيلًا [76:26]

तथा रात्रि में सज्दा करें उसके समक्ष और उसकी पवित्रता का वर्णन करें, रात्रि के लम्बे समय तक।

### الآية 76:27

> ﻿إِنَّ هَٰؤُلَاءِ يُحِبُّونَ الْعَاجِلَةَ وَيَذَرُونَ وَرَاءَهُمْ يَوْمًا ثَقِيلًا [76:27]

वास्तव में, ये लोग मोह रखते हैं संसार से और छोड़ रहे हैं अपने पीछे एक भारी दिन\[1\] को।
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1\. इस से अभिप्राय प्रलय का दिन है।

### الآية 76:28

> ﻿نَحْنُ خَلَقْنَاهُمْ وَشَدَدْنَا أَسْرَهُمْ ۖ وَإِذَا شِئْنَا بَدَّلْنَا أَمْثَالَهُمْ تَبْدِيلًا [76:28]

हमने ही उन्हें पैदा किया है और सुदृढ़ किये हैं उनके जोड़-बंद तथा जब हम चाहें बदला दें उनके\[1\] जैसे (दूसरों को)।
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1\. अर्थात इन का विनाश कर के इन के स्थान पर दूसरों को पैदा कर दें।

### الآية 76:29

> ﻿إِنَّ هَٰذِهِ تَذْكِرَةٌ ۖ فَمَنْ شَاءَ اتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِ سَبِيلًا [76:29]

निश्चय ये (सूरह) एक शिक्षा है। अतः, जो चाहे अपने पालनहार की ओर (जाने की) राह बना ले।

### الآية 76:30

> ﻿وَمَا تَشَاءُونَ إِلَّا أَنْ يَشَاءَ اللَّهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًا [76:30]

और तुम अल्लाह की इच्छा के बिना कुछ भी नहीं चाह सकते।\[1\] वास्तव में, अल्लाह सब चीज़ों और गुणों को जानने वाला है।
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1\. अर्थात कोई इस बात पर समर्थ नहीं कि जो चाहे कर ले। जो भलाई चाहता है तो अल्लाह उसे भलाई की राह दिखा देता है।

### الآية 76:31

> ﻿يُدْخِلُ مَنْ يَشَاءُ فِي رَحْمَتِهِ ۚ وَالظَّالِمِينَ أَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا [76:31]

वह प्रवेश देता है जिसे चाहे अपनी दया में और अत्याचारियों के लिए उसने तैयार की है दुःखदायी यातना।

## روابط ذات صلة

- [النص القرآني للسورة](https://quranpedia.net/surah/1/76.md)
- [كل تفاسير سورة الإنسان
](https://quranpedia.net/surah-tafsir/76.md)
- [ترجمات سورة الإنسان
](https://quranpedia.net/translations/76.md)
- [صفحة الكتاب: الترجمة الهندية](https://quranpedia.net/book/1986.md)
- [المؤلف: مولانا عزيز الحق العمري](https://quranpedia.net/person/1761.md)

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