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title: "ترجمة سورة النبأ - الترجمة الهندية (الهندية)"
url: "https://quranpedia.net/surah/1/78/book/1986.md"
canonical: "https://quranpedia.net/surah/1/78/book/1986"
surah_id: "78"
book_id: "1986"
book_name: "الترجمة الهندية"
author: "مولانا عزيز الحق العمري"
type: "translation"
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# ترجمة سورة النبأ - الترجمة الهندية (الهندية)

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## Citation

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Translation of Surah النبأ from "الترجمة الهندية" in الهندية.

### الآية 78:1

> عَمَّ يَتَسَاءَلُونَ [78:1]

वे आपस में किस विषय में प्रश्न कर रहे हैं?

### الآية 78:2

> ﻿عَنِ النَّبَإِ الْعَظِيمِ [78:2]

बहुत बड़ी सूचना के विषय में।

### الآية 78:3

> ﻿الَّذِي هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ [78:3]

जिसमें मतभेद कर रहे हैं।

### الآية 78:4

> ﻿كَلَّا سَيَعْلَمُونَ [78:4]

निश्चय वे जान लेंगे।

### الآية 78:5

> ﻿ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَ [78:5]

फिर निश्चय वे जान लेंगे।\[1\]
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1\. (1-5) इन आयतों में उन को धिक्कारा गया है, जो प्रलय की हँसी उड़ाते हैं। जैसे उन के लिये प्रलय की सूचना किसी गंभीर चिन्ता के योग्य नहीं। परन्तु वह दिन दूर नहीं जब प्रलय उन के आगे आ जायेगी और वे विश्व विधाता के सामने उत्तरदायित्व के लिये उपस्थित होंगे।

### الآية 78:6

> ﻿أَلَمْ نَجْعَلِ الْأَرْضَ مِهَادًا [78:6]

क्या हमने धरती को पालना नहीं बनाया?

### الآية 78:7

> ﻿وَالْجِبَالَ أَوْتَادًا [78:7]

और पर्वतों को मेख?

### الآية 78:8

> ﻿وَخَلَقْنَاكُمْ أَزْوَاجًا [78:8]

तथा तुम्हें जोड़े-जोड़े पैदा किया।

### الآية 78:9

> ﻿وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتًا [78:9]

तथा तुम्हारी निद्रा को स्थिरता (आराम) बनाया।

### الآية 78:10

> ﻿وَجَعَلْنَا اللَّيْلَ لِبَاسًا [78:10]

और रात को वस्त्र बनाया।

### الآية 78:11

> ﻿وَجَعَلْنَا النَّهَارَ مَعَاشًا [78:11]

और दिन को कमाने के लिए बनाया।

### الآية 78:12

> ﻿وَبَنَيْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعًا شِدَادًا [78:12]

तथा हमने तुम्हारे ऊपर सात दृढ़ आकाश बनाये।

### الآية 78:13

> ﻿وَجَعَلْنَا سِرَاجًا وَهَّاجًا [78:13]

और एक दमकता दीप (सूर्य) बनाया।

### الآية 78:14

> ﻿وَأَنْزَلْنَا مِنَ الْمُعْصِرَاتِ مَاءً ثَجَّاجًا [78:14]

और बादलों से मूसलाधार वर्षा की।

### الآية 78:15

> ﻿لِنُخْرِجَ بِهِ حَبًّا وَنَبَاتًا [78:15]

ताकि उससे अन्न और वनस्पति उपजायें।

### الآية 78:16

> ﻿وَجَنَّاتٍ أَلْفَافًا [78:16]

और घने-घने बाग़।\[1\]
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1\. (6-16) इन आयतों में अल्लाह की शक्ति प्रतिपालन (रूबूबिय्यत) और प्रज्ञा के लक्षण दर्शाये गये हैं जो यह साक्ष्य देते हैं कि प्रतिकार (बदले) का दिन आवश्यक है, क्योंकि जिस के लिये इतनी बड़ी व्यवस्था की गई हो और उसे कर्मों के अधिकार भी दिये गये हों तो उस के कर्मों का पुरस्कार या दण्ड तो मिलना ही चाहिये।

### الآية 78:17

> ﻿إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ كَانَ مِيقَاتًا [78:17]

निश्चय निर्णय (फ़ैसले) का दिन निश्चित है।

### الآية 78:18

> ﻿يَوْمَ يُنْفَخُ فِي الصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًا [78:18]

जिस दिन सूर में फूँका जायेगा। फिर तुम दलों ही दलों में चले आओगे।

### الآية 78:19

> ﻿وَفُتِحَتِ السَّمَاءُ فَكَانَتْ أَبْوَابًا [78:19]

और आकाश खोल दिया जायेगा, तो उसमें द्वार ही द्वार हो जायेंगे।

### الآية 78:20

> ﻿وَسُيِّرَتِ الْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا [78:20]

और पर्वत चला दिये जायेंगे, तो वे मरिचिका बन जायेंगे।\[1\]
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1\. (17-20) इन आयतों में बताया जा रहा है कि निर्णय का दिन अपने निश्चित समय पर आकर रहेगा, उस दिन आकाश तथा धरती में एक बड़ी उथल पुथल होगी। इस के लिये सूर में एक फूँक मारने की देर है। फिर जिस की सूचना दी जा रही है तुम्हारे सामने आ जायेगी। तुम्हारे मानने या न मानने का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। और सब अपना ह़िसाब देने के लिये अल्लाह के न्यायालय की ओर चल पड़ेंगे।

### الآية 78:21

> ﻿إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَادًا [78:21]

वास्तव में, नरक घात में है।

### الآية 78:22

> ﻿لِلطَّاغِينَ مَآبًا [78:22]

जो दुराचारियों का स्थान है।

### الآية 78:23

> ﻿لَابِثِينَ فِيهَا أَحْقَابًا [78:23]

जिसमें वे असंख्य वर्षों तक रहेंगे।

### الآية 78:24

> ﻿لَا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًا وَلَا شَرَابًا [78:24]

उसमें ठणडी तथा पेय (पीने की चीज़) नहीं चखेंगे।

### الآية 78:25

> ﻿إِلَّا حَمِيمًا وَغَسَّاقًا [78:25]

सिवाये गर्म पानी और पीप रक्त के।

### الآية 78:26

> ﻿جَزَاءً وِفَاقًا [78:26]

ये पूरा-पूरा प्रतिफल है।

### الآية 78:27

> ﻿إِنَّهُمْ كَانُوا لَا يَرْجُونَ حِسَابًا [78:27]

निःसंदेह वे ह़िसाब की आशा नहीं रखते थे।

### الآية 78:28

> ﻿وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا كِذَّابًا [78:28]

तथा वे हमारी आयतों को झुठलाते थे।

### الآية 78:29

> ﻿وَكُلَّ شَيْءٍ أَحْصَيْنَاهُ كِتَابًا [78:29]

और हमने सब विषय लिखकर सुरक्षित कर लिये हैं।

### الآية 78:30

> ﻿فَذُوقُوا فَلَنْ نَزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًا [78:30]

तो चखो, हम तुम्हारी यातना अधिक ही करते रहेंगे।\[1\]
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1\. (21-30) इन आयतों में बताया गया है कि जो ह़िसाब की आशा नहीं रखते और हमारी आयतों को नहीं मानते हम ने उन के एक एक कर्तूत को गिन कर अपने यहाँ लिख रखा है। और उन की ख़बर लेने के लिये नरक घात लगाये तैयार है, जहाँ उन के कुकर्मों का भरपूर बदला दिया जायेगा।

### الآية 78:31

> ﻿إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًا [78:31]

वास्तव में, जो डरते हैं उन्हीं के लिए सफलता है।

### الآية 78:32

> ﻿حَدَائِقَ وَأَعْنَابًا [78:32]

बाग़ तथा अँगूर हैं।

### الآية 78:33

> ﻿وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًا [78:33]

और नवयुवति कुमारियाँ।

### الآية 78:34

> ﻿وَكَأْسًا دِهَاقًا [78:34]

और छलकते प्याले।

### الآية 78:35

> ﻿لَا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا كِذَّابًا [78:35]

उसमें बकवास और मिथ्या बातें नहीं सुनेंगे।

### الآية 78:36

> ﻿جَزَاءً مِنْ رَبِّكَ عَطَاءً حِسَابًا [78:36]

ये तुम्हारे पालनहार की ओर से भरपूर पुरस्कार है।

### الآية 78:37

> ﻿رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الرَّحْمَٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًا [78:37]

जो आकाश, धरती तथा जो उनके बीच है, सबका अति करुणामय पालनहार है। जिससे बात करने का वे साहस नहीं कर सकेंगे।

### الآية 78:38

> ﻿يَوْمَ يَقُومُ الرُّوحُ وَالْمَلَائِكَةُ صَفًّا ۖ لَا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ الرَّحْمَٰنُ وَقَالَ صَوَابًا [78:38]

जिस दिन रूह़ (जिब्रील) तथा फ़रिश्ते पंक्तियों में खड़े होंगे, वही बात कर सकेगा जिसे रहमान (अल्लाह) आज्ञा देगा और सह़ीह़ बात करेगा।

### الآية 78:39

> ﻿ذَٰلِكَ الْيَوْمُ الْحَقُّ ۖ فَمَنْ شَاءَ اتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِ مَآبًا [78:39]

वह दिन निःसंदेह होना ही है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर (जाने का) ठिकाना बना ले।\[1\]
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1\. (37-39) इन आयतों में अल्लाह के न्यायालय में उपस्थिति (ह़ाज़िरी) का चित्र दिखाया गया है। और जो इस भ्रम में पड़े हैं कि उन के देवी देवता आदि अभिस्तावना करेंगे उन को सावधान किया गया है कि उस दिन कोई बिना उस की आज्ञा के मुँह नहीं खोलेगा और अल्लाह की आज्ञा से अभिस्तावना भी करेगा तो उसी के लिये जो संसार में सत्य वचन "ला इलाहा इल्लल्लाह" को मानता हो। अल्लाह के द्रोही और सत्य के विरोधी किसी अभिस्तावना के योग्य नगीं होंगे।

### الآية 78:40

> ﻿إِنَّا أَنْذَرْنَاكُمْ عَذَابًا قَرِيبًا يَوْمَ يَنْظُرُ الْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ الْكَافِرُ يَا لَيْتَنِي كُنْتُ تُرَابًا [78:40]

हमने तुम्हें समीप यातना से सावधान कर दिया, जिस दिन इन्सान अपना करतूत देखेगा और काफ़िर (विश्वासहीन) कहेगा कि काश मैं मिट्टी हो जाता!\[1\]
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1\. (40) बात को इस चेतावनी पर समाप्त किया गया है कि जिस दिन के आने की सूचना दी जा रही है, उस का आना सत्य है, उसे दूर न समझो। अब जिस का दिल चाहे इसे मान कर अपने पालनहार की ओर मार्ग बना ले। परन्तु इस चेतावनी के होते जो इन्कार करेगा उस का किया धरा सामने आयेगा तो पछता-पछता कर यह कामना करेगा कि मैं संसार में पैदा ही न होता। उस समय इस संसार के बारे में उस का यह विचार होगा जिस के प्रेम में आज वह परलोक से अंधा बना हुआ है।

## روابط ذات صلة

- [النص القرآني للسورة](https://quranpedia.net/surah/1/78.md)
- [كل تفاسير سورة النبأ
](https://quranpedia.net/surah-tafsir/78.md)
- [ترجمات سورة النبأ
](https://quranpedia.net/translations/78.md)
- [صفحة الكتاب: الترجمة الهندية](https://quranpedia.net/book/1986.md)
- [المؤلف: مولانا عزيز الحق العمري](https://quranpedia.net/person/1761.md)

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