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title: "ترجمة سورة عبس - الترجمة الهندية (الهندية)"
url: "https://quranpedia.net/surah/1/80/book/1986.md"
canonical: "https://quranpedia.net/surah/1/80/book/1986"
surah_id: "80"
book_id: "1986"
book_name: "الترجمة الهندية"
author: "مولانا عزيز الحق العمري"
type: "translation"
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# ترجمة سورة عبس - الترجمة الهندية (الهندية)

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## Citation

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Translation of Surah عبس from "الترجمة الهندية" in الهندية.

### الآية 80:1

> عَبَسَ وَتَوَلَّىٰ [80:1]

(नबी ने) त्योरी चढ़ाई तथा मुँह फेर लिया।

### الآية 80:2

> ﻿أَنْ جَاءَهُ الْأَعْمَىٰ [80:2]

इस कारण कि उसके पास एक अँधा आया।

### الآية 80:3

> ﻿وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّهُ يَزَّكَّىٰ [80:3]

और तुम क्या जानो शायद वह पवित्रता प्राप्त करे।

### الآية 80:4

> ﻿أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنْفَعَهُ الذِّكْرَىٰ [80:4]

या नसीह़त ग्रहण करे, जो उसे लाभ देती।

### الآية 80:5

> ﻿أَمَّا مَنِ اسْتَغْنَىٰ [80:5]

परन्तु, जो विमुख (निश्चिन्त) है।

### الآية 80:6

> ﻿فَأَنْتَ لَهُ تَصَدَّىٰ [80:6]

तुम उनकी ओर ध्यान दे रहे हो।

### الآية 80:7

> ﻿وَمَا عَلَيْكَ أَلَّا يَزَّكَّىٰ [80:7]

जबकि तुमपर कोई दोष नहीं, यदि वह पवित्रता ग्रहण न करे।

### الآية 80:8

> ﻿وَأَمَّا مَنْ جَاءَكَ يَسْعَىٰ [80:8]

तथा जो तुम्हारे पास दौड़ता आया।

### الآية 80:9

> ﻿وَهُوَ يَخْشَىٰ [80:9]

और वह डर भी रहा है।

### الآية 80:10

> ﻿فَأَنْتَ عَنْهُ تَلَهَّىٰ [80:10]

तुम उसकी ओर ध्यान नहीं देते।\[1\]
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1\. (1-10) भावार्थ यह है कि सत्य के प्रचारक का यह कर्तव्य है कि जो सत्य की खोज में हो भले ही वह दरिद्र हो उसी के सुधार पर ध्यान दे। और जो अभिमान के कारण सत्य की परवाह नहीं करते उन के पीछे समय न गवायें। आप का यह दायित्व भी नहीं है कि उन्हें अपनी बात मनवा दें।

### الآية 80:11

> ﻿كَلَّا إِنَّهَا تَذْكِرَةٌ [80:11]

कदापि ये न करो, ये (अर्थात क़ुर्आन) एक स्मृति (याद दहानी) है।

### الآية 80:12

> ﻿فَمَنْ شَاءَ ذَكَرَهُ [80:12]

अतः, जो चाहे स्मरण (याद) करे।

### الآية 80:13

> ﻿فِي صُحُفٍ مُكَرَّمَةٍ [80:13]

माननीय शास्त्रों में है।

### الآية 80:14

> ﻿مَرْفُوعَةٍ مُطَهَّرَةٍ [80:14]

जो ऊँचे तथा पवित्र हैं।

### الآية 80:15

> ﻿بِأَيْدِي سَفَرَةٍ [80:15]

ऐसे लेखकों (फ़रिश्तों) के हाथों में है।

### الآية 80:16

> ﻿كِرَامٍ بَرَرَةٍ [80:16]

जो सम्मानित और आदरणीय हैं।\[1\]
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1\. (11-16) इन में क़ुर्आन की महानता को बताया गया है कि यह एक स्मृति (याद दहानी) है। किसी पर थोपने के लिये नहीं आया है। बल्कि वह तो फ़रिश्तों के हाथों में स्वर्ग में एक पवित्र शास्त्र के अन्दर सूरक्षित है। और वहीं से वह (क़ुर्आन) इस संसार में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारा जा रहा है।

### الآية 80:17

> ﻿قُتِلَ الْإِنْسَانُ مَا أَكْفَرَهُ [80:17]

इन्सान मारा जाये, वह कितना कृतघ्न (नाशुक्रा) है।

### الآية 80:18

> ﻿مِنْ أَيِّ شَيْءٍ خَلَقَهُ [80:18]

उसे किस वस्तु से (अल्लाह) ने पैदा किया?

### الآية 80:19

> ﻿مِنْ نُطْفَةٍ خَلَقَهُ فَقَدَّرَهُ [80:19]

उसे वीर्य से पैदा किया, फिर उसका भाग्य बनाया।

### الآية 80:20

> ﻿ثُمَّ السَّبِيلَ يَسَّرَهُ [80:20]

फिर उसके लिए मार्ग सरल किया।

### الآية 80:21

> ﻿ثُمَّ أَمَاتَهُ فَأَقْبَرَهُ [80:21]

फिर मौत दी, फिर समाधि में डाल दिया।

### الآية 80:22

> ﻿ثُمَّ إِذَا شَاءَ أَنْشَرَهُ [80:22]

फिर जब चाहेगा, उसे जीवित कर लेगा।

### الآية 80:23

> ﻿كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَا أَمَرَهُ [80:23]

वस्तुतः, उसने उसकी आज्ञा का पालन नहीं किया।\[1\]
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1\. (17-23) तक विश्वासहीनों पर धिक्कार है कि यदि वह अपने अस्तित्व पर विचार करें कि हम ने कितनी तुच्छ वीर्य की बूँद से उस की रचना की तथा अपनी दया से उसे चेतना और समझ दी। परन्तु इन सब उपकारों को भूल कर कृतघ्न बना हुआ है, और पूजा उपासना अन्य की करता है।

### الآية 80:24

> ﻿فَلْيَنْظُرِ الْإِنْسَانُ إِلَىٰ طَعَامِهِ [80:24]

इन्सान अपने भोजन की ओर ध्यान दे।

### الآية 80:25

> ﻿أَنَّا صَبَبْنَا الْمَاءَ صَبًّا [80:25]

हमने मूसलाधार वर्षा की।

### الآية 80:26

> ﻿ثُمَّ شَقَقْنَا الْأَرْضَ شَقًّا [80:26]

फिर धरती को चीरा फाड़ा।

### الآية 80:27

> ﻿فَأَنْبَتْنَا فِيهَا حَبًّا [80:27]

फिर उससे अन्न उगाया।

### الآية 80:28

> ﻿وَعِنَبًا وَقَضْبًا [80:28]

तथा अंगूर और तरकारियाँ।

### الآية 80:29

> ﻿وَزَيْتُونًا وَنَخْلًا [80:29]

तथा ज़ैतून एवं खजूर।

### الآية 80:30

> ﻿وَحَدَائِقَ غُلْبًا [80:30]

तथा घने बाग़।

### الآية 80:31

> ﻿وَفَاكِهَةً وَأَبًّا [80:31]

एवं फल तथा वनस्पतियाँ।

### الآية 80:32

> ﻿مَتَاعًا لَكُمْ وَلِأَنْعَامِكُمْ [80:32]

तुम्हारे तथा तुम्हारे पशुओं के लिए।\[1\]
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1\. (24-32) इन आयतों में इन्सान के जीवन साधनों को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो अल्लाह की अपार दया की परिचायक हैं। अतः जब सारी व्यवस्था वही करता है तो फिर उस के इन उपकारों पर इन्सान के लिये उचित था कि उसी की बात माने और उसी के आदेशों का पालन करे जो क़ुर्आन के माध्यम से अन्तिम नबी मूह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्म) द्वारा परस्तुत किया जा रहा है। (दावतुल क़ुर्आन)

### الآية 80:33

> ﻿فَإِذَا جَاءَتِ الصَّاخَّةُ [80:33]

तो जब कान फाड़ देने वाली (प्रलय) आ जायेगी।

### الآية 80:34

> ﻿يَوْمَ يَفِرُّ الْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِ [80:34]

उस दिन इन्सान अपने भाई से भागेगा।

### الآية 80:35

> ﻿وَأُمِّهِ وَأَبِيهِ [80:35]

तथा अपने माता और पिता से।

### الآية 80:36

> ﻿وَصَاحِبَتِهِ وَبَنِيهِ [80:36]

एवं अपनी पत्नी तथा अपने पुत्रों से।

### الآية 80:37

> ﻿لِكُلِّ امْرِئٍ مِنْهُمْ يَوْمَئِذٍ شَأْنٌ يُغْنِيهِ [80:37]

प्रत्येक व्यक्ति को उस दिन अपनी पड़ी होगी।

### الآية 80:38

> ﻿وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ مُسْفِرَةٌ [80:38]

उस दिन बहुत से चेहरे उज्ज्वल होंगे।

### الآية 80:39

> ﻿ضَاحِكَةٌ مُسْتَبْشِرَةٌ [80:39]

हंसते एवं प्रसन्न होंगे।

### الآية 80:40

> ﻿وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ عَلَيْهَا غَبَرَةٌ [80:40]

तथा बहुत-से चेहरों पर धूल पड़ी होगी।

### الآية 80:41

> ﻿تَرْهَقُهَا قَتَرَةٌ [80:41]

उनपर कालिमा छाई होगी।

### الآية 80:42

> ﻿أُولَٰئِكَ هُمُ الْكَفَرَةُ الْفَجَرَةُ [80:42]

वही काफ़िर और कुकर्मी लोग हैं।\[1\]
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1\. (33-42) इन आयतों का भावार्थ यह है कि संसार में किसी पर कोई आपदा आती है तो उस के अपने लोग उस की सहायता और रक्षा करते हैं। परन्तु प्रलय के दिन सब को अपनी अपनी पड़ी होगी और उस के कर्म ही उस की रक्षा करेंगे।

## روابط ذات صلة

- [النص القرآني للسورة](https://quranpedia.net/surah/1/80.md)
- [كل تفاسير سورة عبس
](https://quranpedia.net/surah-tafsir/80.md)
- [ترجمات سورة عبس
](https://quranpedia.net/translations/80.md)
- [صفحة الكتاب: الترجمة الهندية](https://quranpedia.net/book/1986.md)
- [المؤلف: مولانا عزيز الحق العمري](https://quranpedia.net/person/1761.md)

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