محاسن التأويل — جمال الدين القاسمي
عن الكتاب
[ ١٣٤ ] ﴿إن ما توعدون لآت وما أنتم بمعجزين ( ١٣٤ )﴾.
﴿إن ما توعدون﴾ أي : من البعث وأحواله ﴿لآت﴾ أي : لكائن لا محالة :﴿وما أنتم بمعجزين﴾ أي : بفائتين يعجز عنكم. وهذا رد لقولهم : من مات فقد فات. أي : هو قادر على إعادتكم، وإن صرتم رفاتا.
﴿إن ما توعدون﴾ أي : من البعث وأحواله ﴿لآت﴾ أي : لكائن لا محالة :﴿وما أنتم بمعجزين﴾ أي : بفائتين يعجز عنكم. وهذا رد لقولهم : من مات فقد فات. أي : هو قادر على إعادتكم، وإن صرتم رفاتا.