ترجمة معاني سورة الحاقة باللغة الهندية من كتاب الترجمة الهندية
مولانا عزيز الحق العمري
آية رقم 1
ﮯ
ﮰ
जिसका होना सच है।
آية رقم 2
ﮱﯓ
ﯔ
वह क्या है, जिसका होना सच है?
آية رقم 3
ﯕﯖﯗﯘ
ﯙ
तथा आप क्या जानें कि क्या है, जिसका होना सच है?
آية رقم 4
ﯚﯛﯜﯝ
ﯞ
झुठलाया समूद तथा आद (जाति) ने अचानक आ पड़ने वाली (प्रलय) को।
آية رقم 5
ﯟﯠﯡﯢ
ﯣ
फिर समूद, तो वे ध्वस्त कर दिये गये अति कड़ी ध्वनि से।
آية رقم 6
ﯤﯥﯦﯧﯨﯩ
ﯪ
तथा आद, तो वे ध्वस्त कर दिये गये एक तेज़ शीतल आँधी से।
آية رقم 7
लगाये रखा उसे उनपर सात रातें और आठ दिन निरन्तर, तो आप देखते कि वे जाति उसमें ऐसे पछाड़ी हुई है, जैसे खजूर के खोखले तने।[1]
1. उन के भारी और लम्बे होने की उपमा खजूर के तने से दी गई है।
آية رقم 8
ﯼﯽﯾﯿﰀ
ﰁ
तो क्या आप देखते हैं कि उनमें कोई शेष रह गया है?
آية رقم 9
ﭑﭒﭓﭔﭕﭖ
ﭗ
और किया यही पाप फ़िरऔन ने और जो उसके पूर्व थे तथा जिनकी बस्तियाँ औंधी कर दी गयीं।
آية رقم 10
ﭘﭙﭚﭛﭜﭝ
ﭞ
उन्होंने नहीं माना अपने पालनहार के रसूल को। अन्ततः, उसने पकड़ लिया उन्हें, कड़ी पकड़।
آية رقم 11
हमने, जब सीमा पार कर गया जल, तो तुम्हें सवार कर दिया नाव[1] में।
1. इस में नूह़ (अलैहिस्सलाम) के तूफ़ान की ओर संकेत है। और सभी मनुष्य उन की संतान हैं इस लिये यह दया सब पर हुई है।
آية رقم 12
ﭧﭨﭩﭪﭫﭬ
ﭭ
ताकि हम बना दें उसे तुम्हारे लिए एक शिक्षाप्रद यादगार और ताकि सुरक्षित रख लें इसे सुनने वाले कान।
آية رقم 13
ﭮﭯﭰﭱﭲﭳ
ﭴ
फिर जब फूँक दी जायेगी सूर (नरसिंघा) में एक फूँक।
آية رقم 14
ﭵﭶﭷﭸﭹﭺ
ﭻ
और उठाया जायेगा धरती तथा पर्वतों को, तो दोनों चूर-चूर कर दिये जायेंगे[1] एक ही बार में।
1. दोखियेः सूरह ताहा, आयतः 20, आयतः103, 108)
آية رقم 15
ﭼﭽﭾ
ﭿ
तो उसी दिन होनी हो जायेगी।
آية رقم 16
ﮀﮁﮂﮃﮄ
ﮅ
तथा फट जायेगा आकाश, तो वह उस दिन क्षीण निर्बल हो जायेगा।
آية رقم 17
और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे तथा उठाये होंगे आपके पालनहार के अर्श (सिंहासन) को अपने ऊपर उस दिन, आठ फ़रिश्ते।
آية رقم 18
ﮑﮒﮓﮔﮕﮖ
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उस दिन तुम अल्लाह के पास उपस्थित किये जाओगे, नहीं छुपा रह जायेगा तुममें से कोई।
آية رقم 19
फिर जिसे दिया जायेगा उसका कर्मपत्र दायें हाथ में, वह कहेगाः ये लो मेरा कर्मपत्र पढ़ो।
آية رقم 20
ﮢﮣﮤﮥﮦ
ﮧ
मुझे विश्वास था कि मैं मिलने वाला हूँ अपने ह़िसाब से।
آية رقم 21
ﮨﮩﮪﮫ
ﮬ
तो वह अपने मन चाहे सुख में होगा।
آية رقم 22
ﮭﮮﮯ
ﮰ
उच्च श्रेणी के स्वर्ग में।
آية رقم 23
ﮱﯓ
ﯔ
जिसके फलों के गुच्छे झुक रहे होंगे।
آية رقم 24
(उनसे कहा जायेगाः) खाओ तथा पियो आनन्द लेकर उसके बदले, जो तुमने किया है विगत दिनों (संसार) में।
آية رقم 25
और जिसे दिया जायेगा उसका कर्मपत्र उसके बायें हाथ में, तो वह कहेगाः हाय! मुझे मेरा कर्मपत्र दिया ही न जाता!
آية رقم 26
ﯩﯪﯫﯬ
ﯭ
तथा मैं न जानता कि क्या है मेरा ह़िसाब!
آية رقم 27
ﯮﯯﯰ
ﯱ
काश मेरी मौत ही निर्णायक[1] होती!
1. अर्थात उस के पश्चात् मैं फिर जीवित न किया जाता।
آية رقم 28
ﯲﯳﯴﯵﯶ
ﯷ
नहीं काम आया मेरा धन।
آية رقم 29
ﯸﯹﯺ
ﯻ
मुझसे समाप्त हो गया, मेरा प्रभुत्व।[1]
1. इस का दूसरा अर्थ यह भी हो सकता है कि परलोक के इन्कार पर जितने तर्क दिया करता था आज सब निष्फल हो गये।
آية رقم 30
ﯼﯽ
ﯾ
(आदेश होगा कि) उसे पकड़ो और उसके गले में तौक़ डाल दो।
آية رقم 31
ﯿﰀﰁ
ﰂ
फिर नरक में उसे झोंक दो।
آية رقم 32
फिर उसे एक जंजीर जिसकी लम्बाई सत्तर गज़ है, में जकड़ दो।
آية رقم 33
ﰋﰌﰍﰎﰏﰐ
ﰑ
वह ईमान नहीं रखता था महिमाशाली अल्लाह पर।
آية رقم 34
ﰒﰓﰔﰕﰖ
ﰗ
और न प्रेरणा देता था दरिद्र को भोजन कराने की।
آية رقم 35
ﰘﰙﰚﰛﰜ
ﰝ
अतः, नहीं है उसका आज यहाँ कोई मित्र।
آية رقم 36
ﭑﭒﭓﭔﭕ
ﭖ
और न कोई भोजन, पीप के सिवा।
آية رقم 37
ﭗﭘﭙﭚ
ﭛ
जिसे पापी ही खायेंगे।
آية رقم 38
ﭜﭝﭞﭟ
ﭠ
तो मैं शपथ लेता हूँ उसकी, जो तुम देखते हो।
آية رقم 39
ﭡﭢﭣ
ﭤ
तथा जो तुम नहीं देखते हो।
آية رقم 40
ﭥﭦﭧﭨ
ﭩ
निःसंदेह, ये (क़ुर्आन) आदरणीय रसूल का कथन[1] है।
1. यहाँ आदरणीय रसूल से अभिप्राय मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हैं। तथा सूरह तक्वीर आयतः 19 में फ़रिश्ते जिब्रील (अलैहिस्सलाम) जो वह़्यी लाते थे वह अभिप्राय हैं। यहाँ क़ुर्आन को आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का कथन इस अर्थ में कहा गया है कि लोग उसे आप से सुन रहे थे। और इसी प्रकार आप जिब्रील (अलैहिस्सलाम) से सुन रहे थे। अन्यथा वास्तव में क़ुर्आन अल्लाह ही का कथन है जैसा कि आगामी आयतः 43 में आ रहा है।
آية رقم 41
और वह किसी कवि का कथन नहीं है। तुम लोग कम ही विश्वास करते हो।
آية رقم 42
और न वह किसी ज्योतिषी का कथन है, तुम कम की शिक्षा ग्रहण करते हो।
آية رقم 43
ﭻﭼﭽﭾ
ﭿ
सर्वलोक के पालनहार का उतारा हुआ है।
آية رقم 44
ﮀﮁﮂﮃﮄ
ﮅ
और यदि इसने (नबी ने) हमपर कोई बात बनाई[1] होती।
1. इस आयत का भावार्थ यह कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अपनी ओर से वह़्यी (प्रकाशना) में कुछ अधिक या कम करने का अधिकार नहीं है। यदि वह ऐसा करेंगे तो उन्हें कड़ी यातना दी जायेगी।
آية رقم 45
ﮆﮇﮈ
ﮉ
तो अवश्य हम पकड़ लेते उसका सीधा हाथ।
آية رقم 46
ﮊﮋﮌﮍ
ﮎ
फिर अवश्य काट देते उसके गले की रग।
آية رقم 47
ﮏﮐﮑﮒﮓﮔ
ﮕ
फिर तुममें से कोई (मुझे) उससे रोकने वाला न होता।
آية رقم 48
ﮖﮗﮘ
ﮙ
निःसंदेह, ये एक शिक्षा है सदाचारियों के लिए।
آية رقم 49
ﮚﮛﮜﮝﮞ
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तथा वास्तव में हम जानते हैं कि तुममें कुछ झुठलाने वाले हैं।
آية رقم 50
ﮠﮡﮢﮣ
ﮤ
और निश्चय ये पछतावे का कारण होगा काफ़िरों[1] के लिए।
1. अर्थात जो क़ुर्आन को नहीं मानते वह अन्ततः पछतायेंगे।
آية رقم 51
ﮥﮦﮧ
ﮨ
वस्तुतः, ये विश्वसनीय सत्य है।
آية رقم 52
ﮩﮪﮫﮬ
ﮭ
अतः, आप पवित्रता का वर्णन करें अपने महिमावान पालनहार के नाम की।
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