سورة المرسلات

الترجمة الهندية

ترجمة معاني سورة المرسلات باللغة الهندية من كتاب الترجمة الهندية

مولانا عزيز الحق العمري

الترجمة الهندية

مولانا عزيز الحق العمري

الناشر

مجمع الملك فهد

آية رقم 1
शपथ है भेजी हुई निरन्तर धीमी वायुओं की!
آية رقم 2
फिर झक्कड़ वाली हवाओं की!
آية رقم 3
और बादलों को फैलाने वालियों की![1]
1. अर्थात जो हवायें अल्लाह के आदेशानुसार बादलों को फैलाती हैं।
آية رقم 4
फिर अन्तर करने[1] वालों की!
1. अर्थात सत्योसत्य तथा वैध और अवैध के बीच अन्तर करने के लिये आदेश लाते हैं।
آية رقم 5
फिर पहुँचाने वालों की वह़्यी (प्रकाशना[1]) को!
1. अर्थात जो वह़्यी (प्रकाशना) ग्रहण कर के उसे रसूलों तक पहुँचाते हैं।
آية رقم 6
क्षमा के लिए अथवा चेतावनी[1] के लिए!
1. अर्थात ईमान लाने वालों के लिये क्षमा का वचन तथा काफ़िरों के लिये यातना की सूचना लाते हैं।
آية رقم 7
निश्चय जिसका वचन तुम्हें दिया जा रहा है, वह अवश्य आनी है।
آية رقم 8
फिर जब तारे धुमिल हो जायेंगे।
آية رقم 9
तथा जब आकाश खोल दिया जायेगा।
آية رقم 10
तथा जब पर्वत चूर-चूर करके उड़ा दिये जायेंगे।
آية رقم 11
और जब रसूलों का एक समय निर्धारित किया जायेगा।[1]
1. उन के तथा उन के समुदायों के बीच निर्णय करने के लिये। और रसूल गवाही देंगे।
آية رقم 12
किस दिन के लिए इसे निलम्बित रखा गया है?
آية رقم 13
निर्णय के दिन के लिए।
آية رقم 14
आप क्या जानें कि क्या है वह निर्णय का दिन?
آية رقم 15
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
آية رقم 16
क्या हमने विनाश नहीं कर दिया (अवज्ञा के कारण) अगली जातियों का?
آية رقم 17
फिर पीछे लगा[1] देंगे उनके पिछलों को।
1. अर्थात उन्हीं के समान यातना ग्रस्त कर देंगे।
آية رقم 18
इसी प्रकार, हम करते हैं अपराधियों के साथ।
آية رقم 19
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
آية رقم 20
क्या हमने पैदा नहीं किया है तुम्हें तुच्छ जल (वीर्य) से?
آية رقم 21
फिर हमने रख दिया उसे एक सुदृढ़ स्थान (गर्भाशय) में।
آية رقم 22
एक निश्चित अवधि तक।[1]
1. अर्थात गर्भ की अवधि तक।
آية رقم 23
तो हमने सामर्थ्य[1] रखा, अतः हम अच्छा सामर्थ्य रखने वाले हैं।
1. अर्थात उसे पैदा करने पर।
آية رقم 24
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
آية رقم 25
क्या हमने नहीं बनाया धरती को समेटकर[1] रखने वाली?
1. अर्थात जब तक लोग जीवित रहते हैं तो उस के ऊपर रहते तथा बसते हैं। और मरण के पश्चात उसी में चले जाते हैं।
آية رقم 26
जीवित तथा मुर्दों को।
آية رقم 27
तथा बना दिये हमने उसमें बहुत-से ऊँचे पर्वत और पिलाया हमने तुम्हें मीठा जल।
آية رقم 28
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
آية رقم 29
(कहा जायेगाः) चलो उस (नरक) की ओर जिसे तुम झुठलाते रहे।
آية رقم 30
चलो ऐसी छाया[1] की ओर जो तीन शाखाओं वाली है।
1. छाया से अभिप्राय, नरक के धुवें की छाया है। जो तीन दिशाओं में फैला होगा।
آية رقم 31
जो न छाया देगी और न ज्वाला से बचायेगी।
آية رقم 32
वह (अग्नि) फेंकती होगी चिँगारियाँ भवन के समान।
آية رقم 33
जैसे वह पीले ऊँट हों।
آية رقم 34
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
آية رقم 35
ये वो दिन है कि वे बोल[1] नहीं सकेंगे।
1. अर्थात उन के विरुध्द ऐसे तर्क परस्तुत कर दिये जायेंगे कि वह अवाक रह जायेंगे।
آية رقم 36
और न उन्हें अनुमति दी जायेगी कि वे बहाने बना सकें।
آية رقم 37
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
آية رقم 38
ये निर्णय का दिन है, हमने एकत्र कर लिया है तुम्हें तथा पूर्व के लोगों को।
آية رقم 39
तो यदि तुम्हारे पास कोई चाल[1] हो, तो चल लो।
1. अर्थात मेरी पकड़ से बचने की।
آية رقم 40
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
آية رقم 41
निःसंदेह, आज्ञाकारी उस दिन छाँव तथा जल स्रोतों में होंगे।
آية رقم 42
तथा मन चाहे फलों में।
آية رقم 43
खाओ तथा पिओ मनमानी उन कर्मों के बदले, जो तुम करते रहे।
آية رقم 44
हम इसी प्रकार प्रतिफल देते हैं।
آية رقم 45
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
آية رقم 46
(हे झुठलाने वालो!) तुम खा लो तथा आनन्द ले लो कुछ[1] दिन। वास्तव में, तुम अपराधी हो।
1. अर्थात संसारिक जीवन में।
آية رقم 47
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
آية رقم 48
जब उनसे कहा जाता है कि (अल्लाह के समक्ष) झुको, तो झुकते नहीं।
آية رقم 49
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
آية رقم 50
तो (अब) वे किस बात पर इस (क़ुर्आन) के पश्चात् ईमान[1] लायेंगे?
1. अर्थात जब अल्लाह की अन्तिम पुस्तक पर ईमान नहीं लाते तो फिर कोई दूसरी पुस्तक नहीं हो सकती जिस पर वह ईमान लायें। इसलिये कि अब और कोई पुस्तक आसमान से आने वाली नहीं है।
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