سورة الجمعة

الترجمة الهندية

ترجمة معاني سورة الجمعة باللغة الهندية من كتاب الترجمة الهندية

مولانا عزيز الحق العمري

الترجمة الهندية

مولانا عزيز الحق العمري

الناشر

مجمع الملك فهد

अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करती हैं, वह सब चीज़ें, जो आकाशों तथा धरती में हैं। जो अधिपति, अति पवित्र, प्रभावशाली, गुणी (दक्ष) है।
वही है, जिसने निरक्षरों[1] में एक रसूल भेजा उन्हीं में से। जो पढ़कर सुनाते हैं उन्हें अल्लाह की आयतें और पवित्र करते हैं उन्हें तथा शिक्षा देते हैं उन्हें पुस्तक (क़ुर्आन) तथा तत्वदर्शिता (सुन्नत)[2] की। यद्यपि वे इससे पूर्व खुले कुपथ में थे।
1. अनभिज्ञों से अभिप्राय, अरब हैं। अर्थात जो अह्ले किताब नहीं हैं। भावार्थ यह है कि पहले रसूल इस्राईल की संतति में आते रहे। और अब अन्तिम रसूल इस्माईल की संतति में आया है। जो अल्लाह की पुस्तक क़ुर्आन पढ़ कर सुनाते हैं। यह केवल अरबों के नबी नहीं पूरे मनुष्य जाति के नबी हैं। 2. सुन्नत जिस के लिये ह़िक्मत शब्द आया है उस से अभिप्राय साधारण परिभाषा में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ह़दीस, अर्थात आप का कथन और कर्म इत्यादि है।
तथा दूसरों के लिए भी उनमें से, जो उनसे अभी नहीं[1] मिले हैं। वह अल्लाह प्रभुत्वशाली, गुणी है।
1. अर्थात आप अरब के सिवा प्रलय तक के लिये पूरे मानव संसार के लिये भी रसूल बना कर भेजे गये हैं। ह़दीस में है कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से प्रश्न किया गया कि वह कौन हैं? तो आप ने अपना हाथ सलमान फ़ारसी के ऊपर रख दिया। और कहाः यदि ईमान सुरैया (आकाश के कुछ तारों का नाम) के पास भी हो तो कुछ लोग उस को वहाँ से भी प्राप्त कर लेंगे। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4897)
ये[1] अल्लाह का अनुग्रह है, जिसे वह प्रदान करता है उसे, जिसे वह चाहता है और अल्लाह बड़े अनुग्रह वाला है।
1. अर्थात आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अरबों तथा पूरे मानव संसार के लिये रसूल बनाना।
उनकी दशा जिनपर तौरात का भार रखा गया, फिर तदानुसार कर्म नहीं किया, उस गधे के समान है, जिसके ऊपर पुस्तकें[1] लदी हुई हों। बुरा है उस जाति का उदाहरण, जिन्होंने झुठला दिया अल्लाह की आयतों को और अल्लाह मार्गदर्शन नहीं देता अत्याचारियों को।
1. अर्थात जैसे गधे को अपने ऊपर लादी हुई पुस्तकों का ज्ञान नहीं होता कि उन में क्या लिखा है वैसे ही यह यहूदी तोरात के अनुसार कर्म न कर के गधे के समान हो गये हैं।
आप कह दें कि हे यहूदियो! यदि तुम समझते हो कि तुम ही अल्लाह के मित्र हो अन्य लोगों के अतिरिक्त, तो कामना करो मरण की यदि तुन सच्चे[1] हो?
1. यहूदियों का दावा था कि वही अल्लाह के प्रियवर हैं। (देखियेः सूरह बक़रह, आयतः 111, तथा सूरह माइदा, आयतः 18) इस लिये कहा जा रहा है स्वर्ग में पहुँचने कि लिये मौत की कामना करो।
तथा वे अपने किये हुए करतूतों के कारण, कदापि उसकी कामना नहीं करेंगे और अल्लाह भली-भाँति अवगत है अत्याचारियों से।
आप कह दें कि जिस मौत से तुम भाग रहे हो, वह अवश्य तुमसे मिलकर रहेगी। फिर तुम अवश्य फेर दिये जाओगे परोक्ष (छुपे) तथा प्रत्यक्ष (खुले) के ज्ञानी की ओर। फिर वह तुम्हें सूचित कर देगा उससे, जो तुम करते हो।[1]
1. अर्थात तुम्हारे दुष्कर्मों के परिणाम से।
हे ईमान वालो! जब अज़ान दी जाये नमाज़ के लिए जुमुआ के दिन, तो दौड़[1] जाओ अल्लाह की याद की ओर तथा त्याग दो क्रय-विक्रय।[2] ये उत्तम है तुम्हारे लिए, यदि तुम जानो।
1. अर्थ यह है जुमुआ की अज़ान हो जाये तो अपने सारे कारोबार बंद कर के जुमुआ का ख़ुत्बा सुनने, और जुमुआ की नमाज़ पढ़ने के लिये चल पड़ो। 2. इस से अभिप्राय संसारिक कारोबार है।
फिर जब नमाज़ हो जाये, तो फैल जाओ धरती में तथा खोज करो अल्लाह के अनुग्रह की तथा वर्णन करते रहो अल्लाह का अत्यधिक, ताकि तुम सफल हो जाओ।
और जब वे देख लेते हैं कोई व्यापार अथवा खेल, तो उसकी ओर दौड़ पड़ते हैं।[1] तथा आपको छोड़ देते हैं खड़े। आप कह दें कि जो कुछ अल्लाह के पास है, वह उत्तम है खेल तथा व्यापार से और अल्लाह सर्वोत्तम जीविका प्रदान करने वाला है।
1. ह़दीस में है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जुमुआ का ख़ुत्बा (भाषण) दे रहे थे कि एक कारवाँ ग़ल्ला ले कर आ गया। और सब लोग उस की ओर दौड़ पड़े। बारह व्यक्ति ही आप के साथ रह गये। उसी पर अल्लाह ने यह आयत उतारी। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4899)
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