الترجمة الهندية से الهندية में सूरह الشعراء का अनुवाद
Verse 1
ﭑ
ﭒ
ता, सीन, मीम।
Verse 2
ﭓﭔﭕﭖ
ﭗ
ये प्रकाशमय पुस्तक की आयतें हैं।
Verse 3
ﭘﭙﭚﭛﭜﭝ
ﭞ
संभवतः, आप अपना प्राण[1] खो देने वाले हैं कि वे ईमान लाने वाले नहीं हैं?
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1. अर्थात उन के ईमान न लाने के शोक में।
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1. अर्थात उन के ईमान न लाने के शोक में।
Verse 4
यदि हम चाहें, तो उतार दें उनपर आकाश से ऐसी निशानी कि उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी की झुकी रह जायें[1]।
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1. परन्तु ऐसा नहीं किया, क्यों कि दबाव का ईमान स्वीकार्य तथा मान्य नहीं होता।
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1. परन्तु ऐसा नहीं किया, क्यों कि दबाव का ईमान स्वीकार्य तथा मान्य नहीं होता।
Verse 5
और नहीं आती है उनके पालनहार, अति दयावान् की ओर से कोई नई शिक्षा, परन्तु वे उससे मुख फेरने वाले बन जाते हैं।
Verse 6
तो उन्होंने झुठला दिया! अब उनके पास शीघ्र ही उसकी सूचनाएँ आ जायेंगी, जिसका उपहास वे कर रहे थे।
Verse 7
और क्या उन्होंने धरती की ओर नहीं देखा कि हमने उसमें उगाई हैं, बहुत-सी प्रत्येक प्रकार की अच्छी वनस्पतियाँ?
Verse 8
निश्चय ही, इसमें बड़ी निशानी (लक्षण)[1] है। फिर उनमें अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं हैं।
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1. अर्थात अल्लाह के सामर्थ्य की।
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1. अर्थात अल्लाह के सामर्थ्य की।
Verse 9
ﮖﮗﮘﮙﮚ
ﮛ
तथा वास्तव में, आपका पालनहार ही प्रभुत्वशाली, अति दयावान् है।
Verse 10
(उन्हें उस समय की कथा सुनाओ) जब पुकारा आपके पालनहार ने मूसा को कि जाओ अत्याचारी जाति[1] के पास!
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1. यह उस समय की बात है जब मूसा (अलैहिस्सलाम) दस वर्ष मद्यन में रह कर मिस्र वापिस आ रहे थे।
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1. यह उस समय की बात है जब मूसा (अलैहिस्सलाम) दस वर्ष मद्यन में रह कर मिस्र वापिस आ रहे थे।
Verse 11
ﮥﮦﮧﮨﮩ
ﮪ
फ़िरऔन की जाति के पास, क्या वे डरते नहीं?
Verse 12
ﮫﮬﮭﮮﮯﮰ
ﮱ
उसने कहाः मेरे पालनहार! वास्तव में, मुझे भय है कि वे मुझे झुठला देंगे।
Verse 13
और संकुचित हो रहा है मेरा सीना और नहीं चल रही है मेरी ज़ुबान, अतः वह़्यी भेज दे हारून की ओर (भी)।
Verse 14
ﯜﯝﯞﯟﯠﯡ
ﯢ
और उनका मुझपर एक अपराध भी है। अतः, मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार डालेंगे।
Verse 15
अल्लाह ने कहाः कदापि ऐसा नहीं होगा। तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ, हम तुम्हारे साथ सुनने[1] वाले हैं।
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1. अर्थात तुम दोनों की सहायता करते रहेंगे।
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1. अर्थात तुम दोनों की सहायता करते रहेंगे।
Verse 16
तो तुम दोनों जाओ और कहो कि हम विश्व के पालनहार के भेजे हुए (रसूल) हैं।
Verse 17
ﯵﯶﯷﯸﯹ
ﯺ
कि तू हमारे साथ बनी इस्राईल को जाने दे।
Verse 18
(फ़िरऔन ने) कहाः क्या हमने तेरा पालन नहीं किया है, अपने यहाँ बाल्यवस्था में और तू (नहीं) रहा है, हममें अपनी आयु के कई वर्ष?
Verse 19
और तू कर गया वह कार्य,[1] जो किया और तू कृतघनों में से है!
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1. यह उस हत्या काण्ड की ओर संकेत है जो मूसा (अलैहिस्सलाम) से नबी होने से पहले हो गया था। (देखियेः सूरह क़स़स़)
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1. यह उस हत्या काण्ड की ओर संकेत है जो मूसा (अलैहिस्सलाम) से नबी होने से पहले हो गया था। (देखियेः सूरह क़स़स़)
Verse 20
ﭑﭒﭓﭔﭕﭖ
ﭗ
(मूसा ने) कहाः मैंने ऐसा उस समय कर दिया, जबकि मैं अनजान था।
Verse 21
फिर मैं तुमसे भाग गया, जब तुमसे भय हुआ। फिर प्रदान कर दिया मुझे, मेरे पालनहार ने तत्वदर्शिता और मुझे बना दिया रसूलों में से।
Verse 22
और ये कोई उपकार है, जो तू मुझे जता रहा है कि तूने दास बना लिया है, इस्राईल के पुत्रों को।
Verse 23
ﭭﭮﭯﭰﭱ
ﭲ
फ़िरऔन ने कहाः विश्व का पालनहार क्या है?
Verse 24
(मूसा ने) कहाः आकाशों तथा धरती और उसका पालनहार, जो कुछ दोनों के बीच है, यदि तुम विश्वास रखने वाले हो।
Verse 25
ﭾﭿﮀﮁﮂ
ﮃ
उसने उनसे कहा, जो उसके आस-पास थेः क्या तुम सुन नहीं रहे हो?
Verse 26
ﮄﮅﮆﮇﮈ
ﮉ
(मुसा ने) कहाः तुम्हारा पालनहार तथा तुम्हारे पूर्वोजों का पालनहार है।
Verse 27
(फ़िरऔन ने) कहाः वास्तव में, तुम्हारा रसूल, जो तुम्हारी ओर भेजा गया है, पागल है।
Verse 28
(मूसा ने) कहाः वह, पूर्व तथा पश्चिम तथा दोनों के मध्य जो कुछ है, सबका पालनहार है।
Verse 29
(फ़िरऔन ने) कहाः यदि तूने कोई पूज्य बना लिया मेरे अतिरिक्त, तो तुझे बंदियों में कर दूँगा।
Verse 30
ﮦﮧﮨﮩﮪ
ﮫ
(मूसा ने) कहाः क्या यद्यपि मैं ले आऊँ तेरे पास एक खुली चीज़?
Verse 31
उसने कहाः तू उसे ले आ, यदि सच्चा है।
Verse 32
ﯕﯖﯗﯘﯙﯚ
ﯛ
फिर उसने अपनी लाठी फेंक दी, तो अकस्मात वह एक प्रत्यक्ष अजगर बन गयी।
Verse 33
ﯜﯝﯞﯟﯠﯡ
ﯢ
तथा अपना हाथ निकाला, तो अकस्मात वह उज्ज्वल था, देखने वालों के लिए।
Verse 34
उसने अपने प्रमुखों से कहा, जो उसके पास थेः वास्तव में, ये तो बड़ा दक्ष जादूगर है।
Verse 35
ये चाहता है कि तुम्हें, तुम्हारी धरती से निकाल[1] दे, अपने जादू के बल से, तो अब तुम क्या आदेश देते हो?
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1. अर्थात यह उग्रवाद कर के हमारे देश पर अधिकार कर ले।
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1. अर्थात यह उग्रवाद कर के हमारे देश पर अधिकार कर ले।
Verse 36
सबने कहाः अवसर (समय) दो मूसा और उसके भाई (के विषय) को और भेज दो नगरों में एकत्र करने वालों को।
Verse 37
ﯼﯽﯾﯿ
ﰀ
वे तुम्हारे पास प्रत्येक बड़े दक्ष जादूगर को लायें।
Verse 38
ﰁﰂﰃﰄﰅ
ﰆ
तो एकत्र कर लिए गये जादूगर एक निश्चित दिन के समय के लिए।
Verse 39
ﰇﰈﰉﰊﰋ
ﰌ
तथा लोगों से कहा गया कि क्या तुम एकत्र होने वाले[1] हो?
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1. अर्थात लोगों को प्रेरणा दी जा रही है कि इस प्रतियोगिता में अवश्य उपस्थित हों।
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1. अर्थात लोगों को प्रेरणा दी जा रही है कि इस प्रतियोगिता में अवश्य उपस्थित हों।
Verse 40
ताकि हम पीछे चलें जादूगरों के यदि वही प्रभुत्वशाली (विजयी) हो जायें।
Verse 41
और जब जादूगर आये, तो फ़िरऔन से कहाः क्या हमें कुछ पुरस्कार मिलेगा, यदि हम ही प्रभुत्वशाली होंगे?
Verse 42
ﭦﭧﭨﭩﭪﭫ
ﭬ
उसने कहाः हाँ! और तुम उस समय (मेरे) समीपवर्तियों में हो जाओगे।
Verse 43
मूसा ने उनसे कहाः फेंको, जो कुछ तुम फेंकने वाले हो।
Verse 44
तो उन्होंने फेंक दी उपनी रस्सियाँ तथा अपनी लाठियाँ तथा कहाः फ़िरऔन के प्रभुत्व की शपथ! हम ही अवश्य प्रभुत्वशाली (विजयी) होंगे।
Verse 45
अब मूसा ने फेंक दी अपनी लाठी, तो तत्क्षण वह निगलने लगी (उसे), जो झूठ वे बना रहे थे।
Verse 46
ﮈﮉﮊ
ﮋ
तो गिर गये सभी जादूगर[1] सज्दा करते हुए।
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1. क्यों कि उन्हें विश्वास हो गया कि मूसा (अलैहिस्सलाम) जादूगर नहीं, बल्कि वह सत्य के उपदेशक हैं।
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1. क्यों कि उन्हें विश्वास हो गया कि मूसा (अलैहिस्सलाम) जादूगर नहीं, बल्कि वह सत्य के उपदेशक हैं।
Verse 47
ﮌﮍﮎﮏ
ﮐ
और सबने कह दियाः हम विश्व के पालनहार पर ईमान लाये।
Verse 48
ﮑﮒﮓ
ﮔ
मूसा तथा हारून के पालनहार पर।
Verse 49
(फ़िरऔन ने) कहाः तुम उसका विश्वास कर बैठे, इससे पहले कि मैं तुम्हें आज्ञा दूँ? वास्तव में, वह तुम्हारा बड़ा (गुरू) है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है, तो तुम्हें शीघ्र ज्ञान हो जायेगा, मैं अवश्य तुम्हारे हाथों तथा पैरों को विपरीत दिशा[1] से काट दूँगा तथा तुम सभी को फाँसी दे दूँगा!
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1. अर्थात दाँया हाथ और बायाँ पैर या बायाँ हाथ और दायाँ पैर।
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1. अर्थात दाँया हाथ और बायाँ पैर या बायाँ हाथ और दायाँ पैर।
Verse 50
सबने कहाः कोई चिन्ता नहीं, हमतो अपने पालनहार हीकी ओर फिरकर जाने वाले हैं।
Verse 51
हम आशा रखते हैं कि क्षमा कर देगा, हमारे लिए, हमारा पालनहार, हमारे पापों को, क्योंकि हम सबसे पहले ईमान लाने वाले हैं।
Verse 52
और हमने मूसा की ओर वह़्यी की कि रातों-रात निकल जा मेरे भक्तों को लेकर, तुम सबका पीछा किया जायेगा।
Verse 53
ﯭﯮﯯﯰﯱ
ﯲ
तो फ़िरऔन ने भेज दिया नगरों में (सेना) एकत्र करने[1] वालों को।
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1. जब मूसा (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के आदेशानुसार अपने साथियों को ले कर निकल गये तो फ़िरऔन ने उन का पीछा करने के लिये नगरों में हरकारे भेजे।
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1. जब मूसा (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के आदेशानुसार अपने साथियों को ले कर निकल गये तो फ़िरऔन ने उन का पीछा करने के लिये नगरों में हरकारे भेजे।
Verse 54
ﯳﯴﯵﯶ
ﯷ
कि वे बहुत थोड़े लोग हैं।
Verse 55
ﯸﯹﯺ
ﯻ
और (इसपर भी) वे हमें अति क्रोधित कर रहे हैं।
Verse 56
ﯼﯽﯾ
ﯿ
और वास्तव में, हम एक गिरोह हैं सावधान रहने वाले।
Verse 57
ﰀﰁﰂﰃ
ﰄ
अन्ततः, हमने निकाल दिया उन्हें, बागों तथा स्रोतों से।
Verse 58
ﰅﰆﰇ
ﰈ
तथा कोषों और उत्तम निवास स्थानों से।
Verse 59
ﰉﰊﰋﰌﰍ
ﰎ
इसी प्रकार हुआ और हमने उनका उत्तराधिकारी बना दिया, इस्राईल की संतान को।
Verse 60
ﰏﰐ
ﰑ
तो उन्होंने उनका पीछा किया, प्रातः होते ही।
Verse 61
और जब दोनों गिरोहों ने एक-दूसरे को देख लिया, तो मूसा के साथियों ने कहाः हमतो निश्चय ही पकड़ लिए[1] गये।
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1. क्यों कि अब सामने सागर और पीछे फ़िरऔन की सेना थी।
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1. क्यों कि अब सामने सागर और पीछे फ़िरऔन की सेना थी।
Verse 62
(मूसा ने) कहाः कदापि नहीं, निश्चय मेरे साथ मेरा पालनहार है।
Verse 63
तो हमने मूसा को वह़्यी की कि मार अपनी लाठी से सागर को, अकस्मात् सागर फट गया तथा प्रत्येक भाग, भारी पर्वत के समान[1] हो गया।
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1. अर्थात बीच से मार्ग बन गया और दोनों ओर पानी पर्वत के समान खड़ा हो गया।
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1. अर्थात बीच से मार्ग बन गया और दोनों ओर पानी पर्वत के समान खड़ा हो गया।
Verse 64
ﭱﭲﭳ
ﭴ
तथा हमने समीप कर दिया उसी स्थान के, दूसरे गिरोह को।
Verse 65
ﭵﭶﭷﭸﭹ
ﭺ
और मुक्ति प्रदान कर दी मूसा और उसके सब साथियों को।
Verse 66
ﭻﭼﭽ
ﭾ
फिर हमने डुबो दिया दूसरों को।
Verse 67
वास्तव में, इसमें बड़ी शिक्षा है और उनमें से अधिक्तर लोग ईमान वाले नहीं थे।
Verse 68
ﮉﮊﮋﮌﮍ
ﮎ
तथा वास्तव में, आपका पालनहार निश्चय अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
Verse 69
ﮏﮐﮑﮒ
ﮓ
तथा आप, उन्हें सुना दें, इब्राहीम का समाचार (भी)।
Verse 70
ﮔﮕﮖﮗﮘﮙ
ﮚ
जब उसने कहा, अपने बाप तथा अपनी जाति से कि तुम क्या पूज रहे हो?
Verse 71
ﮛﮜﮝﮞﮟﮠ
ﮡ
उन्होंने कहाः हम मूर्तियों की पूजा कर रहे हैं और उन्हीं की सेवा में लगे रहते हैं।
Verse 72
ﮢﮣﮤﮥﮦ
ﮧ
उसने कहाः क्या वे तुम्हारी सुनती हैं, जब तुम पुकारते हो?
Verse 73
ﮨﮩﮪﮫ
ﮬ
या तुम्हें लाभ पहुँचाती या हानि पहुँचाती हैं?
Verse 74
ﮭﮮﮯﮰﮱﯓ
ﯔ
उन्होंने कहाः बल्कि हमने अपने पूर्वोजों को ऐसा ही करते हुए पाया है।
Verse 75
ﯕﯖﯗﯘﯙ
ﯚ
उसने कहाः क्या तुमने कभी (आँख खोलकर) उसे देखा, जिसे तुम पूज रहे हो।
Verse 76
ﯛﯜﯝ
ﯞ
तुम तथा तुम्हारे पहले पूर्वज?
Verse 77
ﯟﯠﯡﯢﯣﯤ
ﯥ
क्योंकि ये सब मेरे शत्रु हैं, पूरे विश्व के पालनहार के सिवा।
Verse 78
ﯦﯧﯨﯩ
ﯪ
जिसने मुझे पैदा किया, फिर वही मुझे मार्ग दर्शा रहा है।
Verse 79
ﯫﯬﯭﯮ
ﯯ
और जो मुझे खिलाता और पिलाता है।
Verse 80
ﯰﯱﯲﯳ
ﯴ
और जब रोगी होता हूँ, तो वही मुझे स्वस्थ करता है।
Verse 81
ﯵﯶﯷﯸ
ﯹ
तथा वही मुझे मारेगा, फिर[1] मुझे जीवित करेगा।
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1. अर्थात प्रलय के दिन अपने कर्मों का फल भोगने के लिये।
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1. अर्थात प्रलय के दिन अपने कर्मों का फल भोगने के लिये।
Verse 82
तथा मैं आशा रखता हूँ कि क्षमा कर देगा, मेरे लिए, मेरे पाप, प्रतिकार (प्रलय) के दिन।
Verse 83
ﰃﰄﰅﰆﰇﰈ
ﰉ
हे मेरे पालनहार! प्रदान कर दे मुझे तत्वदर्शिता और मुझे सम्मिलित कर सदाचारियों में।
Verse 84
ﭑﭒﭓﭔﭕﭖ
ﭗ
और मुझे सच्ची ख्याति प्रदान कर, आगामी लोगों में।
Verse 85
ﭘﭙﭚﭛﭜ
ﭝ
और बना दे मुझे, सुख के स्वर्ग का उत्तराधिकारी।
Verse 86
ﭞﭟﭠﭡﭢﭣ
ﭤ
तथा मेरे बाप को क्षमा कर दे,[1] वास्तव में, वह कुपथों में से है।
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1. (देखियेः सूरह तौबा, आयतः114)
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1. (देखियेः सूरह तौबा, आयतः114)
Verse 87
ﭥﭦﭧﭨ
ﭩ
तथा मुझे निरादर न कर, जिस दिन सब जीवित किये[1] जायेंगे।
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1. ह़दीस में वर्णित है कि प्रलय के दिन इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपने बाप से मिलेंगे। और कहेंगेः हे मेरे पालनहार! तू ने मुझे वचन दिया था कि मुझे पुनः जीवित होने के दिन अपमानित नहीं करेगा। तो अल्लाह कहेगाः मैं ने स्वर्ग को काफ़िरों के लिये अवैध कर दिया है। (सह़ीह़ बुख़ारीः4769)
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1. ह़दीस में वर्णित है कि प्रलय के दिन इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपने बाप से मिलेंगे। और कहेंगेः हे मेरे पालनहार! तू ने मुझे वचन दिया था कि मुझे पुनः जीवित होने के दिन अपमानित नहीं करेगा। तो अल्लाह कहेगाः मैं ने स्वर्ग को काफ़िरों के लिये अवैध कर दिया है। (सह़ीह़ बुख़ारीः4769)
Verse 88
ﭪﭫﭬﭭﭮﭯ
ﭰ
जिस दिन, लाभ नहीं देगा कोई धन और न संतान।
Verse 89
ﭱﭲﭳﭴﭵﭶ
ﭷ
परन्तु, जो अल्लाह के पास स्वच्छ दिल लेकर आयेगा।
Verse 90
ﭸﭹﭺ
ﭻ
और समीप कर दी जायेगी स्वर्ग आज्ञाकारियों के लिए।
Verse 91
ﭼﭽﭾ
ﭿ
तथा खोल दी जायेगी नरक कुपथों के लिए।
Verse 92
ﮀﮁﮂﮃﮄﮅ
ﮆ
तथा कहा जायेगाः कहाँ हैं वे, जिन्हें तुम पूज रहे थे?
Verse 93
अल्लाह के सिवा, क्या वे तुम्हारी सहायता करेंगे अथवा स्वयं अपनी सहायता कर सकते हैं?
Verse 94
ﮏﮐﮑﮒ
ﮓ
फिर उसमें औंधे झोंक दिये जायेंगे वे और सभी कुपथ।
Verse 95
ﮔﮕﮖ
ﮗ
और इब्लीस की सेना सभी।
Verse 96
ﮘﮙﮚﮛ
ﮜ
और वे उसमें आपस में झगड़ते हुए कहंगेः
Verse 97
ﮝﮞﮟﮠﮡﮢ
ﮣ
अल्लाह की शपथ! वास्तव में, हम खुले कुपथ में थे।
Verse 98
ﮤﮥﮦﮧ
ﮨ
जब हम तुम्हें, बराबर समझ रहे थे विश्व के पालनहार के।
Verse 99
ﮩﮪﮫﮬ
ﮭ
और हमें कुपथ नहीं किया, परन्तु अपराधियों ने।
Verse 100
ﮮﮯﮰﮱ
ﯓ
तो हमारा कोई अभिस्तावक (सिफ़ारिशी) नहीं रह गया।
Verse 101
ﯔﯕﯖ
ﯗ
तथा न कोई प्रेमी मित्र।
Verse 102
तो यदि हमें पुनः संसार में जाना होता,[1] तो हम ईमान वालों में हो जाते।
____________________
1. इस आयत में संकेत है कि संसार में एक ही जीवन कर्म के लिये मिलता है। और दूसरा जीवन प्रलोक में कर्मों के फल के लिये मिलेगा।
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1. इस आयत में संकेत है कि संसार में एक ही जीवन कर्म के लिये मिलता है। और दूसरा जीवन प्रलोक में कर्मों के फल के लिये मिलेगा।
Verse 103
निःसंदेह, इसमें बड़ी निशानी है और उनमें से अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं हैं।
Verse 104
ﯪﯫﯬﯭﯮ
ﯯ
और वास्तव में, आपका पालनहार ही अति प्रभुत्वशाली,[1] दयावान् है।
____________________
1. परन्तु लोग स्वयं अत्याचार कर के नरक के भागी बन रहे हैं।
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1. परन्तु लोग स्वयं अत्याचार कर के नरक के भागी बन रहे हैं।
Verse 105
ﯰﯱﯲﯳ
ﯴ
नूह़ की जाति ने भी रसूलों को झुठलाया।
Verse 106
जब उनसे उनके भाई नूह़ ने कहाः क्या तुम (अल्लाह से) डरते नहीं हो?
Verse 107
ﯽﯾﯿﰀ
ﰁ
वास्तव में, मैं तुम्हारे लिए एक[1] रसूल हूँ।
____________________
1. अल्लाह का संदेश बिना कमी और अधिक्ता के तुम्हें पहूँचा रहा हूँ।
____________________
1. अल्लाह का संदेश बिना कमी और अधिक्ता के तुम्हें पहूँचा रहा हूँ।
Verse 108
ﰂﰃﰄ
ﰅ
अतः, तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।
Verse 109
मैं नहीं माँगता इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला), मेरा बदला तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।
Verse 110
ﰓﰔﰕ
ﰖ
अतः, तुम अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा का पालन करो।
Verse 111
ﰗﰘﰙﰚﰛﰜ
ﰝ
उन्होंने कहाः क्या हम तुझे मान लें, जबकि तेरा अनुसरण पतित (नीच) लोग[1] कर रहे हैं?
____________________
1. अर्थात धनी नहीं, निर्धन लोग कर रहे हैं।
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1. अर्थात धनी नहीं, निर्धन लोग कर रहे हैं।
Verse 112
ﭑﭒﭓﭔﭕﭖ
ﭗ
(नूह़ ने) कहाः मूझे क्य ज्ञान कि वे क्या कर्म करते रहे हैं?
Verse 113
उनका ह़िसाब तो बस मेरे पालनहार के ऊपर है, यदि तुम समझो।
Verse 114
ﭡﭢﭣﭤ
ﭥ
और मैं धुतकारने वाला[1] नहीं हूँ, ईमान वालों को।
____________________
1. अर्थात मैं हीन वर्ग के लोगों को जो ईमान लाये हैं अपने से दूर नहीं कर सकता जैसा कि तुम चाहते हो।
____________________
1. अर्थात मैं हीन वर्ग के लोगों को जो ईमान लाये हैं अपने से दूर नहीं कर सकता जैसा कि तुम चाहते हो।
Verse 115
ﭦﭧﭨﭩﭪ
ﭫ
मैं तो बस खुला सावधान करने वाला हूँ।
Verse 116
उन्होंने कहाः यदि रुका नहीं, हे नूह़! तो तू अवश्य पथराव करके मारे हुओं में होगा।
Verse 117
ﭵﭶﭷﭸﭹ
ﭺ
उसने कहाः मेरे पालनहार! मेरी जाति ने मुझे झुठला दिया।
Verse 118
अतः, तू निर्णय कर दे मेरे और उनके बीच और मुक्त कर दे मुझे तथा उन्हें जो मेरे साथ हैं, ईमान वालों में से।
Verse 119
ﮅﮆﮇﮈﮉﮊ
ﮋ
तो हमने उसे मुक्त कर दिया तथा उन्हें जो उसके साथ भरी नाव में थे।
Verse 120
ﮌﮍﮎﮏ
ﮐ
फिर हमने डुबो दिया उसके पश्चात्, शेष लोगों को।
Verse 121
वास्तव में, इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है तथा उनमें से अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं।
Verse 122
ﮛﮜﮝﮞﮟ
ﮠ
और निश्चय आपका पालनहार ही अति प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
Verse 123
ﮡﮢﮣ
ﮤ
झुठला दिया आद (जाति) ने (भी) रसूलों को।
Verse 124
जब कहा उनसे, उनके भाई हूद[1] नेः क्या तुम डरते नहीं हो?
____________________
1. आद जाति के नबी हूद (अलैहिस्सलाम) को उन का भाई कहा गया है क्यों कि वह भी उन्हीं के समुदाय में से थे।
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1. आद जाति के नबी हूद (अलैहिस्सलाम) को उन का भाई कहा गया है क्यों कि वह भी उन्हीं के समुदाय में से थे।
Verse 125
ﮭﮮﮯﮰ
ﮱ
वस्तुतः, मैं तुम्हारे लिए एक न्यासिक (अमानतदार) रसूल हूँ।
Verse 126
ﯓﯔﯕ
ﯖ
अतः, अल्लाह से डरो और मेरा अनुपालन करो।
Verse 127
और मैं तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।
Verse 128
ﯤﯥﯦﯧﯨ
ﯩ
क्यों तुम बना लेते हो, हर ऊँचे स्थान पर एक यादगार भवन, व्यर्थ में?
Verse 129
ﯪﯫﯬﯭ
ﯮ
तथा बनाते हो, बड़े-बड़े भवन, जैसे कि तुम सदा रहोगे।
Verse 130
ﯯﯰﯱﯲ
ﯳ
और जबकिसी को पकड़ते हो, तो पकड़ते हो, महा अत्याचारी बनकर।
Verse 131
ﯴﯵﯶ
ﯷ
तो अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा का पालन करो।
Verse 132
ﯸﯹﯺﯻﯼ
ﯽ
तथा उससे भय रखो, जिसने तुम्हारी सहायता की है उससे, जो तुम जानते हो।
Verse 133
ﯾﯿﰀ
ﰁ
उसने सहायता की है तुम्हारी चौपायों तथा संतान से।
Verse 134
ﰂﰃ
ﰄ
तथा बाग़ों (उद्यानो) तथा जल स्रोतों से।
Verse 135
ﰅﰆﰇﰈﰉﰊ
ﰋ
मैं तुमपर डरता हूँ, भीषण दिन की यातना से।
Verse 136
उन्होंने कहाः नसीह़त करो या न करो, हमपर सब समान है।
Verse 137
ﭑﭒﭓﭔﭕ
ﭖ
ये बात तो बस प्राचीन लोगों की नीति[1] है।
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1. अर्थात प्राचीन युग से होती चली आ रही है।
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1. अर्थात प्राचीन युग से होती चली आ रही है।
Verse 138
ﭗﭘﭙ
ﭚ
और हम उनमें से नहीं हैं, जिन्हें यातना दी जायेगी।
Verse 139
अन्ततः, उन्होंने हमें झुठला दिया, तो हमने उन्हें ध्वस्त कर दिया। निश्चय इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है और लोगों में अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं हैं।
Verse 140
ﭨﭩﭪﭫﭬ
ﭭ
और वास्तव में, आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
Verse 141
ﭮﭯﭰ
ﭱ
झुठला दिया समूद ने (भी)[1] रसूलों को।
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1. यहाँ यह बात याद रखने की है कि एक रसूल का इन्कार सभी रसूलों का इन्कहार है क्यों कि सब का उपदेश एक ही था।
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1. यहाँ यह बात याद रखने की है कि एक रसूल का इन्कार सभी रसूलों का इन्कहार है क्यों कि सब का उपदेश एक ही था।
Verse 142
जब कहा उनसे उनके भाई सालेह़ नेः क्या तुम डरते नहीं हो?
Verse 143
ﭺﭻﭼﭽ
ﭾ
वास्तव में, मैं तुम्हारा विश्वसनीय रसूल हूँ।
Verse 144
ﭿﮀﮁ
ﮂ
तो तुम अल्लाह से डरो और मेरा कहा मानो।
Verse 145
तथा मैं नहीं माँगता इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक, मेरा पारिश्रमिक तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।
Verse 146
ﮐﮑﮒﮓﮔ
ﮕ
क्या तुम छोड़ दिये जाओगे उसमें, जो यहाँ हैं निश्चिन्त रहकर?
Verse 147
ﮖﮗﮘ
ﮙ
बाग़ों तथा स्रोतों में।
Verse 148
ﮚﮛﮜﮝ
ﮞ
तथा खेतों और खजूरों में, जिनके गुच्छे रस भरे हैं।
Verse 149
ﮟﮠﮡﮢﮣ
ﮤ
तथा तुमपर्वतों को तराशकर घर बनाते हो, गर्व करते हुए।
Verse 150
ﮥﮦﮧ
ﮨ
अतः, अल्लाह से डरो और मेरा अनुपालन करो।
Verse 151
ﮩﮪﮫﮬ
ﮭ
और पालन न करो उल्लंघनकारियों के आदेश का।
Verse 152
ﮮﮯﮰﮱﯓﯔ
ﯕ
जो उपद्रव करते हैं धरती में और सुधार नहीं करते।
Verse 153
ﯖﯗﯘﯙﯚ
ﯛ
उन्होंने कहाः वास्तव में, तू उनमें से है, जिनपर जादू कर दिया गया है।
Verse 154
तू तो बस हमारे समान एक मानव है। तो कोई चमत्कार ले आ, यदि तू सच्चा है।
Verse 155
कहाः ये ऊँटनी है,[1] इसके लिए पानी पीने का एक दिन है और तुम्हारे लिए पानी लेने का निश्चित दिन है।
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1. अर्थता यह ऊँटनी चमत्कार है जो उन की माँग पर पत्थर से निकली थी।
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1. अर्थता यह ऊँटनी चमत्कार है जो उन की माँग पर पत्थर से निकली थी।
Verse 156
तथा उसे हाथ न लगाना बुराई से, अन्यथा तुम्हें पकड़ लेगी एक भीषण दिन की यातना।
Verse 157
ﯺﯻﯼ
ﯽ
तो उन्होंने वध कर दिया उसे, अन्ततः, पछताने वाले हो गये।
Verse 158
और पकड़ लिया उन्हें यातना ने। वस्तुतः, इसमें बड़ी निशानी है और नहीं थे उनमें से अधिक्तर ईमान वाले।
Verse 159
ﰋﰌﰍﰎﰏ
ﰐ
और निश्चय आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
Verse 160
ﭑﭒﭓﭔ
ﭕ
झुठला दिया लूत की जाति ने (भी) रसूलों को।
Verse 161
जब कहा उनसे उनके भाई लूत नेः क्या तुम डरते नहीं हो?
Verse 162
ﭞﭟﭠﭡ
ﭢ
वास्तव में, मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
Verse 163
ﭣﭤﭥ
ﭦ
अतः अल्लाह से डरो और मेरा अनुपालन करो।
Verse 164
और मैं तुमसे प्रश्न नहीं करता, इसपर किसी पारिश्रमिक (बदले) का। मेरा बदला तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।
Verse 165
ﭴﭵﭶﭷ
ﭸ
क्या तुम जाते[1] हो पुरुषों के पास, संसार वासियों में से।
____________________
1. इस कुकर्म का आरंभ संसार में लूत (अलैहिस्सलाम) की जाति से हुआ। और अब यह कुकर्म पूरे विश्व में विशेष रूप से यूरोपीय सभ्य देशों में व्यापक है। और समलैंगिक विवाह को यूरोप के बहुत से देशों में वैध मान लिया गया है। जिस के कारण कभी भी उन पर अल्लाह की यातना आ सकती है।
____________________
1. इस कुकर्म का आरंभ संसार में लूत (अलैहिस्सलाम) की जाति से हुआ। और अब यह कुकर्म पूरे विश्व में विशेष रूप से यूरोपीय सभ्य देशों में व्यापक है। और समलैंगिक विवाह को यूरोप के बहुत से देशों में वैध मान लिया गया है। जिस के कारण कभी भी उन पर अल्लाह की यातना आ सकती है।
Verse 166
तथा छोड़ देते हो उसे, जिसे पैदा किया है तुम्हारे पालनहार ने, अर्थात अपनी प्तनियों को, बल्कि तुम एक जाति हो, सीमा का उल्लंघन करने वाली।
Verse 167
उन्होंने कहाः यदि तू नहीं रुका, हे लूत! तो अवश्य तेरा बहिष्कार कर दिया जायेगा।
Verse 168
ﮏﮐﮑﮒﮓ
ﮔ
उसने कहाः वास्तव में, मैं तुम्हारे करतूत से बहुत अप्रसन्न हूँ।
Verse 169
ﮕﮖﮗﮘﮙ
ﮚ
मेरे पालनहार! मुझे बचा ले तथा मेरे परिवार को उससे, जो वे कर रहे हैं।
Verse 170
ﮛﮜﮝ
ﮞ
तो हमने उसे बचा लिया तथा उसके सभी परिवार को।
Verse 171
ﮟﮠﮡﮢ
ﮣ
परन्तु, एक बुढ़िया[1] को, जो पीछे रह जाने वालों में थी।
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1. इस से अभिप्रेत लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नी थी।
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1. इस से अभिप्रेत लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नी थी।
Verse 172
ﮤﮥﮦ
ﮧ
फिर हमने विनाश कर दिया दूसरों का।
Verse 173
और वर्षा की उनपर, एक घोर[1] वर्षा। तो बुरी हो गयी डराये हुए लोगों की वर्षा।
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1. अर्थात पत्थरों की वर्षा। (देखियेः सूरह हूद, आयतः82-83)
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1. अर्थात पत्थरों की वर्षा। (देखियेः सूरह हूद, आयतः82-83)
Verse 174
वास्तव में, इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है और उनमें से अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं थे।
Verse 175
ﯛﯜﯝﯞﯟ
ﯠ
और निश्चय आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
Verse 176
ﯡﯢﯣﯤ
ﯥ
झुठला दिया ऐय्का[1] वालों ने रसूलों को।
____________________
1. ऐय्का का अर्थ झाड़ी है। यह मद्यन का क्षेत्र है जिस में शोऐब अलैहिस्सलाम को भेजा गया था।
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1. ऐय्का का अर्थ झाड़ी है। यह मद्यन का क्षेत्र है जिस में शोऐब अलैहिस्सलाम को भेजा गया था।
Verse 177
ﯦﯧﯨﯩﯪﯫ
ﯬ
जब कहा उनसे शोऐब नेः क्या तुम डरते नहीं हो?
Verse 178
ﯭﯮﯯﯰ
ﯱ
मैं तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूँ।
Verse 179
ﯲﯳﯴ
ﯵ
अतः, अल्लाह से डरो तथा मेरी आज्ञा का पालन करो।
Verse 180
और मैं नहीं माँगता तुमसे इसपर कोई पारिश्रमिक, मेरा पारिश्रमिक तो बस समस्त विश्व के पालनहार पर है।
Verse 181
तुम नाप-तोल पूरा करो और न बनो कम देने वालों में।
Verse 182
ﰋﰌﰍ
ﰎ
और तोलो सीधी तराज़ू से।
Verse 183
और मत कम दो लोगों को उनकी चीज़ें और मत फिरो धरती में उपद्रव फैलाते।
Verse 184
ﭑﭒﭓﭔﭕ
ﭖ
और डरो उससे, जिसने पैदा किया है तुम्हें तथा अगले लोगों को।
Verse 185
ﭗﭘﭙﭚﭛ
ﭜ
उन्होंने कहाःवास्तव में, तू उनमें से है, जिनपर जादू कर दिया गया है।
Verse 186
और तू तो बस एक पुरुष[1] है, हमारे समान और हम तो तुझे झूठों में समझते हैं।
____________________
1. यहाँ यह बात विचारणीय है कि सभी विगत जातियों ने अपने रसूलों को उन के मानव होने के कारण नकार दिया। और जिस ने स्वीकार भी किया तो उस ने कुछ युग व्यतीत होने के पश्चात् अति कर के अपने रसूलों को प्रभु अथवा प्रभु का अंश बना कर उन्हीं को पूज्य बना लिया। तथा एकेश्वरवाद को कड़ा आघात पहुँचा कर मिश्रणवाद का द्वार खोल लिया और कुपथ हो गये। वर्तमान युग में भी इसी का प्रचलन है और इस का आधार अपने पूर्वजों की रीतियों को बनाया जाता है। इस्लाम इसी कुपथ का निवारण कर के एकेश्वरवाद की स्थापना के लिये आया है और वास्तव में यही सत्धर्म है। ह़दीस में है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः मूझे वैसे न बढ़ा चढ़ाना जैसे ईसाईयों ने मर्यम के पुत्र (ईसा) को बढ़ा चढ़ा दिया। वास्तव में मैं उस का दास हूँ। अतः मुझे अल्लाह का दास और उस का रसूल कहो। (देखिये सह़ीह़ बुख़ारीः 3445)
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1. यहाँ यह बात विचारणीय है कि सभी विगत जातियों ने अपने रसूलों को उन के मानव होने के कारण नकार दिया। और जिस ने स्वीकार भी किया तो उस ने कुछ युग व्यतीत होने के पश्चात् अति कर के अपने रसूलों को प्रभु अथवा प्रभु का अंश बना कर उन्हीं को पूज्य बना लिया। तथा एकेश्वरवाद को कड़ा आघात पहुँचा कर मिश्रणवाद का द्वार खोल लिया और कुपथ हो गये। वर्तमान युग में भी इसी का प्रचलन है और इस का आधार अपने पूर्वजों की रीतियों को बनाया जाता है। इस्लाम इसी कुपथ का निवारण कर के एकेश्वरवाद की स्थापना के लिये आया है और वास्तव में यही सत्धर्म है। ह़दीस में है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः मूझे वैसे न बढ़ा चढ़ाना जैसे ईसाईयों ने मर्यम के पुत्र (ईसा) को बढ़ा चढ़ा दिया। वास्तव में मैं उस का दास हूँ। अतः मुझे अल्लाह का दास और उस का रसूल कहो। (देखिये सह़ीह़ बुख़ारीः 3445)
Verse 187
तो हमपर गिरा दे कोई खण्ड आकाश का, यदि तू सच्चा है।
Verse 188
ﭱﭲﭳﭴﭵ
ﭶ
उसने कहाः मेरा पालनहार भली प्रकार जानता है उसे, जो कुछ तुम कर रहे हो।
Verse 189
तो उन्होंने उसे झुठला दिया। अन्ततः, पकड़ लिया उन्हें छाया के[1] दिन की यातना ने। वस्तुतः, वह एक भीषण दिन की यातना थी।
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1. अर्थात उन की यातना के दिन उन पर बादल छा गया। फिर आग बरसने लगी और धरती कंपित हो गई। फिर एक कड़ी ध्वनि ने उन की जानें ले लीं। (इब्ने कसीर)
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1. अर्थात उन की यातना के दिन उन पर बादल छा गया। फिर आग बरसने लगी और धरती कंपित हो गई। फिर एक कड़ी ध्वनि ने उन की जानें ले लीं। (इब्ने कसीर)
Verse 190
निश्चय ही, इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है और नहीं थे उनमें अधिक्तर ईमान लाने वाले।
Verse 191
ﮍﮎﮏﮐﮑ
ﮒ
और वास्तव में, आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
Verse 192
ﮓﮔﮕﮖ
ﮗ
तथा निःसंदेह, ये (क़ुर्आन) पूरे विश्व के पालनहार का उतारा हुआ है।
Verse 193
ﮘﮙﮚﮛ
ﮜ
इसे लेकर रूह़ुल अमीन[1] उतरा।
____________________
1. रूह़ुल अमीन से अभिप्राय आदरणीय फ़रिश्ता जिब्रील (अलैहिस्सलाम) हैं। जो मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अल्लाह की ओर से वह़्यी ले कर उतरते थे जिस के कारण आप रसूलों की और उन की जातियों की दशा से अवगत हुये। अतः यह आप के सत्य रसूल होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
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1. रूह़ुल अमीन से अभिप्राय आदरणीय फ़रिश्ता जिब्रील (अलैहिस्सलाम) हैं। जो मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अल्लाह की ओर से वह़्यी ले कर उतरते थे जिस के कारण आप रसूलों की और उन की जातियों की दशा से अवगत हुये। अतः यह आप के सत्य रसूल होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
Verse 194
ﮝﮞﮟﮠﮡ
ﮢ
आपके दिल पर, ताकि आप हो जायें सावधान करने वालों में।
Verse 195
ﮣﮤﮥ
ﮦ
खुली अरबी भाषा में।
Verse 196
ﮧﮨﮩﮪ
ﮫ
तथा इसकी चर्चा[1] अगले रसूलों की पुस्तकों में (भी) है।
____________________
1. अर्थात सभी आकाशीय ग्रन्थों में अन्तिम नबी मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आगमन तथा आप पर पुस्तक क़ुर्आन के अवतरित होने की भविष्वाणी की गई है। और सब नबियों ने इस की शुभ सूचना दी है।
____________________
1. अर्थात सभी आकाशीय ग्रन्थों में अन्तिम नबी मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आगमन तथा आप पर पुस्तक क़ुर्आन के अवतरित होने की भविष्वाणी की गई है। और सब नबियों ने इस की शुभ सूचना दी है।
Verse 197
क्या और उनके लिए ये निशानी नहीं है कि इस्राईलियों के विद्वान[1] इसे जानते हैं।
____________________
1. बनी इस्राईल के विद्वान अब्दुल्लाह बिन सलाम आदि जो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और क़ुर्आन पर ईमान लाये वह इस के सत्य होने का खुला प्रमाण हैं।
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1. बनी इस्राईल के विद्वान अब्दुल्लाह बिन सलाम आदि जो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और क़ुर्आन पर ईमान लाये वह इस के सत्य होने का खुला प्रमाण हैं।
Verse 198
ﯗﯘﯙﯚﯛ
ﯜ
और यदि हम इसे उतार देते किसी अजमी[1] पर।
____________________
1. अर्थात ऐसे व्यक्ति पर जो अरब देश और जाति के अतिरिक्त किसी अन्य जाति का हो।
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1. अर्थात ऐसे व्यक्ति पर जो अरब देश और जाति के अतिरिक्त किसी अन्य जाति का हो।
Verse 199
ﯝﯞﯟﯠﯡﯢ
ﯣ
और वह, इसे उनके समक्ष पढ़ता, तो वे उसपर ईमान लाने वाले न होते[1]।
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1. अर्थात अर्बी भाषा में न होता तो कहते कि यह हमारी समझ में नहीं आता। (देखियेः सूरह ह़ा, मीम, सज्दा, आयतः44)
____________________
1. अर्थात अर्बी भाषा में न होता तो कहते कि यह हमारी समझ में नहीं आता। (देखियेः सूरह ह़ा, मीम, सज्दा, आयतः44)
Verse 200
ﯤﯥﯦﯧﯨ
ﯩ
इसी प्रकार, हमने घुसा दिया है इस (क़ुर्आन के इन्कार) को पापियों के दिलों में।
Verse 201
वे नहीं ईमान लायेंगे उसपर, जब तक देख नहीं लेंगे दुःखदायी यातना।
Verse 202
ﯲﯳﯴﯵﯶ
ﯷ
फिर, वह उनपर सहसा आ जायेगी और वे समझ भी नहीं पायेंगे।
Verse 203
ﯸﯹﯺﯻ
ﯼ
तो कहेंगेः क्या हमें अवसर दिया जायेगा?
Verse 204
ﯽﯾ
ﯿ
तो क्या वे हमारी यातना की जल्दी मचा रहे हैं?
Verse 205
ﰀﰁﰂﰃ
ﰄ
(हे नबी!) तो क्या आपने विचार किया कि यदि हम लाभ पहुँचायें इन्हें वर्षों।
Verse 206
ﰅﰆﰇﰈﰉ
ﰊ
फिर आ जाये उनपर वह, जिसकी उन्हें धमकी दी जा रही थी।
Verse 207
ﭑﭒﭓﭔﭕﭖ
ﭗ
तो कुछ काम नहीं आयेगा उनके, जो उन्हें लाभ पहुँचाया जाता रहा?
Verse 208
और हमने किसी बस्ती का विनाश नहीं किया, परन्तु उसके लिए सावधान करने वाले थे।
Verse 209
ﭠﭡﭢﭣ
ﭤ
शिक्षा देने के लिए और हम अत्याचारी नहीं हैं।
Verse 210
ﭥﭦﭧﭨ
ﭩ
तथा नहीं उतरे हैं (इस क़ुर्आन) को लेकर शैतान।
Verse 211
ﭪﭫﭬﭭﭮ
ﭯ
और न योग्य है उनके लिए और न वे इसकी शक्ति रखते हैं।
Verse 212
ﭰﭱﭲﭳ
ﭴ
वास्तव में, वे तो (इसके) सुनने से भी दूर[1] कर दिये गये हैं।
____________________
1. अर्थात इस के अवतरित होने के समय शैतान आकाश की ओर जाते हैं तो उल्का उन्हें भष्म कर देते हैं।
____________________
1. अर्थात इस के अवतरित होने के समय शैतान आकाश की ओर जाते हैं तो उल्का उन्हें भष्म कर देते हैं।
Verse 213
अतः, आप न पुकारें अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य को, अन्यथा आप दण्डितों में हो जायेंगे।
Verse 214
ﭿﮀﮁ
ﮂ
और आप सावधान कर दें अपने समीपवर्ती[1] संबंधियों को।
____________________
1. आदरणीय इब्ने अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि जब यह आयत उतरी तो आप सफ़ा पर्वत पर चढ़े। और क़ुरैश के परिवारों को पुकरा। और जब सब एकत्र हो गये, और जो स्वयं नहीं आ सका तो उस ने किसी प्रतिनिधि को भेज दिया। और अबू लहब तथा क़ुरैश आ गये तो आप ने फ़रमायाः यदि मैं तुम से कहूँ कि उस वादी में एक सेना है जो तुम पर आक्रमण करने वाली है, तो क्या तुम मुझे सच्चा मानोगे? सब ने कहाः हाँ। हम ने आप को सदा ही सच्चा पाया है। आप ने कहाः मैं तुम्हें आगामी कड़ी यातना से सावधान कर रहा हूँ। इस पर अबू लहब ने कहाः तेरा पूरे दिन नाश हो! क्या हमें इसी के लिये एकत्र किया है? और इसी पर सूरह लह्ब उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारीः4770)
____________________
1. आदरणीय इब्ने अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि जब यह आयत उतरी तो आप सफ़ा पर्वत पर चढ़े। और क़ुरैश के परिवारों को पुकरा। और जब सब एकत्र हो गये, और जो स्वयं नहीं आ सका तो उस ने किसी प्रतिनिधि को भेज दिया। और अबू लहब तथा क़ुरैश आ गये तो आप ने फ़रमायाः यदि मैं तुम से कहूँ कि उस वादी में एक सेना है जो तुम पर आक्रमण करने वाली है, तो क्या तुम मुझे सच्चा मानोगे? सब ने कहाः हाँ। हम ने आप को सदा ही सच्चा पाया है। आप ने कहाः मैं तुम्हें आगामी कड़ी यातना से सावधान कर रहा हूँ। इस पर अबू लहब ने कहाः तेरा पूरे दिन नाश हो! क्या हमें इसी के लिये एकत्र किया है? और इसी पर सूरह लह्ब उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारीः4770)
Verse 215
ﮃﮄﮅﮆﮇﮈ
ﮉ
और झुका दें अपना बाहु[1] उसके लिए, जो आपका अनुयायी हो, ईमान वालों में से।
____________________
1. अर्थात उस के साथ विनम्रता का व्यवहार करें।
____________________
1. अर्थात उस के साथ विनम्रता का व्यवहार करें।
Verse 216
और यदि वे आपकी अवज्ञा करें, तो आप कह दें कि मैं निर्दोष हूँ उससे, जो तुम कर रहे हो।
Verse 217
ﮒﮓﮔﮕ
ﮖ
तथा आप भरोसा करें अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् पर।
Verse 218
ﮗﮘﮙﮚ
ﮛ
जो देखता है आपको, जिस समय (नमाज़) में खड़े होते हैं।
Verse 219
ﮜﮝﮞ
ﮟ
और आपके फिरने को सज्दा करने[1] वालों में।
____________________
1. अर्थात प्रत्येक समय अकेले हों या लोगों के बीच हों।
____________________
1. अर्थात प्रत्येक समय अकेले हों या लोगों के बीच हों।
Verse 220
ﮠﮡﮢﮣ
ﮤ
निःसंदेह, वही सब कुछ सुनने-जानने वाला है।
Verse 221
ﮥﮦﮧﮨﮩﮪ
ﮫ
क्या मैं तुम सबको बताऊँ कि किसपर शैतान उतरते हैं?
Verse 222
ﮬﮭﮮﮯﮰ
ﮱ
वे उतरते हैं, प्रत्येक झूठे पापी[1] पर।
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1. ह़दीस में है कि फ़रिश्ते बादल में उतरते हैं, और आकाश के निर्णय की बात करते हैं, जिसे शैतान चोरी से सुन लेते हैं। और ज्योतिषियों को पहुँचा देते हैं। फिर वह उस में सौ झूठ मिलाते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारीः3210)
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1. ह़दीस में है कि फ़रिश्ते बादल में उतरते हैं, और आकाश के निर्णय की बात करते हैं, जिसे शैतान चोरी से सुन लेते हैं। और ज्योतिषियों को पहुँचा देते हैं। फिर वह उस में सौ झूठ मिलाते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारीः3210)
Verse 223
ﯓﯔﯕﯖ
ﯗ
वे पहुँचा देते हैं, सुनी सुनाई बातों को और उनमें अधिक्तर झूठे हैं।
Verse 224
ﯘﯙﯚ
ﯛ
और कवियों का अनुसरण बहके हुए लोग करते हैं।
Verse 225
क्या आप नहीं देखते कि वे प्रत्येक वादी में फिरते[1] हैं।
____________________
1. अर्थात कल्पना की उड़ान में रहते हैं।
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1. अर्थात कल्पना की उड़ान में रहते हैं।
Verse 226
ﯤﯥﯦﯧﯨ
ﯩ
और ऐसी बात कहते हैं, जो करते नहीं।
Verse 227
परन्तु वो (कवि), जो[1] ईमान लाये, सदाचार किये, अल्लाह का बहुत स्मरण किया तथा बदला लिया इसके पश्चात् कि उनके ऊपर अत्याचार किया गया! तथा शीघ्र ही जान लेंगे, जिन्होंने अत्याचार किया है कि व किस दुष्परिणाम की ओर फिरते हैं!
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1. इन से अभिप्रेत ह़स्सान बिन साबित आदि कवि हैं जो क़ुरैश के कवियों की भर्त्सना किया करते थे। (देखियेः सह़ीह़ बुख़ारीः4124)
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1. इन से अभिप्रेत ह़स्सान बिन साबित आदि कवि हैं जो क़ुरैश के कवियों की भर्त्सना किया करते थे। (देखियेः सह़ीह़ बुख़ारीः4124)
تقدم القراءة