سورة التكوير

الترجمة الهندية

الترجمة الهندية से الهندية में सूरह التكوير का अनुवाद

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مجمع الملك فهد

Verse 1
जब सूर्य लपेट दिया जायेगा।
Verse 2
और जब तारे धुमिल हो जायेंगे।
Verse 3
जब पर्वत चलाये जायेंगे।
Verse 4
और जब दस महीने की गाभिन ऊँटनियाँ छोड़ दी जायेंगी।
Verse 5
और जब वन् पशु एकत्र कर दिये जायेंगे।
Verse 6
और जब सागर भड़काये जायेंगे।[1]
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1. (1-6) इन में प्रलय के प्रथम चरण में विश्व में जो उथल पुथल होगी उस को दिखाया गया है कि आकाश, धरती और पर्वत, सागर तथा जीव जन्तुओं की क्या दशा होगी। और माया मोह में पड़ा इन्सान इसी संसार में अपने प्रियवर धन से कैसा बेपरवाह हो जायेगा। वन पशु भी भय के मारे एकत्र हो जायेंगे। सागरों के जल-पलावन से धरती जल थल हो जायेगी।
Verse 7
और जब प्राण जोड़ दिये जायेंगे।
Verse 8
और जब जीवित गाड़ी गयी कन्या से प्रश्न किया जायेगाः
Verse 9
कि वह किस अपराध के कारण वध की गयी।
Verse 10
तथा जब कर्मपत्र फैला दिये जायेंगे।
Verse 11
और जब आकाश की खाल उतार दी जायेगी।
Verse 12
और जब नरक दहकाई जायेगी।
Verse 13
और जब स्वर्ग समीप लाई जायेगी।
Verse 14
तो प्रत्येक प्राणी जान लेगा कि वह क्या लेकर आया है।[1]
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1. (7-14) इन आयतों में प्रलय के दूसरे चरण की दशा को दर्शाया गया है कि इन्सानों की आस्था और कर्मों के अनुसार श्रेणियाँ बनेंगी। नृशंसितों (मज़लूमों) के साथ न्याय किया जायेगा। कर्म पत्र खोल दिये जायेंगे। नरक भड़काई जायेगी। स्वर्ग सामने कर दी जायेगी। और उस समय सभी को वास्तविक्ता का ज्ञान हो जायेगा। इस्लाम के उदय के समय अरब में कुछ लोग पुत्रियों को जन्म लेते ही जीवित गाड़ दिया करते थे। इस्लाम ने नारियों को जीवन प्रदान किया। और उन्हें जीवित गाड़ देने को घोर अपराध घोषित किया। आयत संख्या 8 में उन्हीं नृशंस अपराधियों को धिक्कारा गया है।
Verse 15
मैं शपथ लेता हूँ उन तारों की, जो पीछे हट जाते हैं।
Verse 16
जो चलते-चलते छुप जाते हैं।
Verse 17
और रात की (शपथ), जब समाप्त होने लगती है।
Verse 18
तथा भोर की, जब उजाला होने लगता है।
Verse 19
ये (क़ुर्आन) एक मान्यवर स्वर्ग दूत का लाया हुआ कथन है।
जो शक्तिशाली है। अर्श (सिंहासन) के मालिक के पास उच्च पद वाला है।
Verse 21
जिसकी बात मानी जाती है और बड़ा अमानतदार है।[1]
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1. (15-21) तारों की व्यवस्था गति तथा अंधेरे के पश्चात् नियमित रूप से उजाला की शपथ इस बात की गवाही है कि क़ुर्आन ज्योतिष की बकवास नहीं। बल्कि यह ईश वाणी है। जिस को एक शक्तिशाली तथा सम्मान वाला फ़रिश्ता ले कर मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया। और अमानतदारी से इसे पहुँचाया।
Verse 22
और तुम्हारा साथी उन्मत नहीं है।
Verse 23
उसने उसे आकाश में खुले रूप से देखा है।
वह परोक्ष (ग़ैब) की बात बताने में प्रलोभी नहीं है।[1]
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1. (22-24) इन में यह चेतावनी दी गई है कि महा ईशदूत (मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जो सुना रहे हैं, और जो फ़रिश्ता वह़्यी (प्रकाशना) लाता है उन्हों ने उसे देखा है। वह परोक्ष की बातें प्रस्तुत कर रहे हैं कोई ज्योतिष की बात नहीं, जो धिक्कारे शौतान ज्योतिषियों को दिया करते हैं।
ये धिक्कारी शैतान का कथन नहीं है।
Verse 26
फिर तुम कहाँ जा रहे हो?
ये संसार वासियों के लिए एक स्मृति (शास्त्र) है।
तुममें से उसके लिए, जो सुधरना चाहता हो।
तथा तुम विश्व के पालनहार के चाहे बिना कुछ नहीं कर सकते।[1]
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1. (27-29) इन साक्ष्यों के पश्चात सावधान किया गया है कि क़ुर्आन मात्र याद दहानी है। इस विश्व में इस के सत्य होने के सभी लक्षण सबके सामने हैं। इन का अध्ययन कर के स्वयं सत्य की राह अपना लो अन्यथा अपना ही बिगाड़ोगे।
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