الترجمة الهندية से الهندية में सूरह الصافات का अनुवाद
Verse 1
ﭑﭒ
ﭓ
शपथ है पंक्तिवध्द (फ़रिश्तों) की!
Verse 2
ﭔﭕ
ﭖ
फिर झिड़कियाँ देने वालों की!
Verse 3
ﭗﭘ
ﭙ
फिर स्मरण करके पढ़ने वालों[1] की!
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1. यह तीनों गुण फ़रिश्तों के हैं जो आकाशों में अल्लाह की इबादत के लिये पंक्तिवध्द रहते तथा बादलों को हाँकते और अल्लाह के स्मरण जैसे क़ुर्आन तथा नमाज़ पढ़ने और उस की पवित्रता का गान करने इत्यादि में लगे रहते हैं।
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1. यह तीनों गुण फ़रिश्तों के हैं जो आकाशों में अल्लाह की इबादत के लिये पंक्तिवध्द रहते तथा बादलों को हाँकते और अल्लाह के स्मरण जैसे क़ुर्आन तथा नमाज़ पढ़ने और उस की पवित्रता का गान करने इत्यादि में लगे रहते हैं।
Verse 4
ﭚﭛﭜ
ﭝ
निश्चय तुम्हारा पूज्य, एक ही है।
Verse 5
आकाशों तथा धरती का पालनहार तथा जो कुछ उनके मध्य है और सुर्योदय होने के स्थानों का रब।
Verse 6
ﭦﭧﭨﭩﭪﭫ
ﭬ
हमने अलंकृत किया है संसार (समीप) के आकाश को, तारों की शोभा से।
Verse 7
ﭭﭮﭯﭰﭱ
ﭲ
तथा रक्षा करने के लिए प्रत्येक उध्दत शैतान से।
Verse 8
वह नहीं सुन सकते (जाकर) उच्च सभा तक फ़रिश्तों की बात तथा मारे जाते हैं, प्रत्येक दिशा से।
Verse 9
ﭽﭾﭿﮀﮁ
ﮂ
राँदने के लिए तथा उनके लिए स्थायी यातना है।
Verse 10
परन्तु, जो ले उड़े कुछ, तो पीछा करती है उसका दहकती ज्वाला।[1]
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1. फिर यदि उस से बचा रह जाये तो आकाश की बात अपने नीचे के शैतानों तक पहूँचाता है और वह उसे काहिनों तथा ज्योतिषियों को बताते हैं। फिर वह उस में सौ झूठ मिला कर लोगों को बताते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारीः 6213, सह़ीह़ मुस्लिमः2228)
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1. फिर यदि उस से बचा रह जाये तो आकाश की बात अपने नीचे के शैतानों तक पहूँचाता है और वह उसे काहिनों तथा ज्योतिषियों को बताते हैं। फिर वह उस में सौ झूठ मिला कर लोगों को बताते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारीः 6213, सह़ीह़ मुस्लिमः2228)
Verse 11
तो आप इन (काफ़िरों) से प्रश्न करें कि क्या उन्हें पैदा करना अधिक कठिन है या जिन्हें[1] हमने पैदा किया है? हमने उन्हें[2] पैदा किया है, लेसदार मिट्टी से।
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1. अर्थात फ़रिश्तों तथा आकाशों को। 2. उन के पिता आदम (अलैहिस्सलाम) को।
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1. अर्थात फ़रिश्तों तथा आकाशों को। 2. उन के पिता आदम (अलैहिस्सलाम) को।
Verse 12
ﮙﮚﮛ
ﮜ
बल्कि आपने आश्चर्य किया (उनके अस्वीकार पर) तथा वे उपहास करते हैं।
Verse 13
ﮝﮞﮟﮠ
ﮡ
और जब शिक्षा दी जाये, तो वे शिक्षा ग्रहण नहीं करते।
Verse 14
ﮢﮣﮤﮥ
ﮦ
और जब देखते हैं कोई निशानी, तो उपहास करने लगते हैं।
Verse 15
ﮧﮨﮩﮪﮫﮬ
ﮭ
तथा कहते हें कि ये तो मात्र खुला जादू है।
Verse 16
(कहते हैं कि) क्या, जब हम मर जायेंगे तथा मिट्टी और हड्डियाँ हो जायेंगे, तो हम निश्चय पुनः जीवित किये जायेंगे?
Verse 17
ﯗﯘ
ﯙ
और क्या, हमारे पहले पूर्वज भी (जीवित किये जायेंगे)?
Verse 18
ﯚﯛﯜﯝ
ﯞ
आप कह दें कि हाँ तथा तुम अपमानित (भी) होगे!
Verse 19
वो तो बस एक झिड़की होगी, फिर सहसा वे देख रहे होंगे।
Verse 20
ﯧﯨﯩﯪﯫ
ﯬ
तथा कहेंगेः हाय हमारा विनाश! ये तो बदले (प्रलय) का दिन है।
Verse 21
यही निर्णय का दिन है, जिसे तुम झुठला रहे थे।
Verse 22
(आदेश होगा कि) घेर लाओ सब अत्याचारियों को तथा उनके साथियों को और जिसकी वे इबादत (वंदना) कर रहे थे।
Verse 23
अल्लाह के सिवा। फिर दिखा दो उन्हें नरक की राह।
Verse 24
ﰆﰇﰈﰉ
ﰊ
और उन्हें रोक[1] लो। उनसे प्रश्न किया जाये।
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1. नरक में झोंकने से पहले।
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1. नरक में झोंकने से पहले।
Verse 25
ﭑﭒﭓﭔ
ﭕ
क्या हो गया है तुम्हें कि एक-दूसरे की सहायता नहीं करते?
Verse 26
ﭖﭗﭘﭙ
ﭚ
बल्कि वे उस दिन, सिर झुकाये खड़े होंगे।
Verse 27
ﭛﭜﭝﭞﭟ
ﭠ
और एक-दूसरे के सम्मुख होकर परस्पर प्रश्न करेंगेः[1]
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1. अर्थात एक-दूसरे को धिक्कारेंगे।
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1. अर्थात एक-दूसरे को धिक्कारेंगे।
Verse 28
ﭡﭢﭣﭤﭥﭦ
ﭧ
कहेंगे कि तुम हमारे पास आया करते थे दायें[1] से।
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1. इस से अभिप्राय यह है कि धर्म तथा सत्य के नाम से आते थे अर्थात यह विश्वास दिलाते थे कि यही मिश्रणवाद मूल तथा सत्धर्म है।
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1. इस से अभिप्राय यह है कि धर्म तथा सत्य के नाम से आते थे अर्थात यह विश्वास दिलाते थे कि यही मिश्रणवाद मूल तथा सत्धर्म है।
Verse 29
ﭨﭩﭪﭫﭬ
ﭭ
वे[1] कहेंगेः बल्कि तुम स्वयं ईमान वाले न थे।
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1. इस से अभिप्राय उन के प्रमुख लोग हैं।
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1. इस से अभिप्राय उन के प्रमुख लोग हैं।
Verse 30
तथा नहीं था हमारा तुमपर कोई अधिकार,[1] बल्कि तुम सवंय अवज्ञाकारी थे।
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1. देखियेः सूरह इब्राहीम, आयतः22
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1. देखियेः सूरह इब्राहीम, आयतः22
Verse 31
तो सिध्द हो गया हमपर हमारे पालनहार का कथन कि हम (यातना) चखने वाले हैं।
Verse 32
ﮂﮃﮄﮅ
ﮆ
तो हमने तुम्हें कुपथ कर दिया। हम तो स्वयं कुपथ थे।
Verse 33
ﮇﮈﮉﮊﮋ
ﮌ
फिर वे सभी, उस दिन यातना में साझी होंगे।
Verse 34
ﮍﮎﮏﮐ
ﮑ
हम, इसी प्रकार, किया करते हैं अपराधियों के साथ।
Verse 35
ये वो हैं कि जब कहा जाता था उनसे कि कोई पूज्य (वंदनीय) नहीं अल्लाह के अतिरिक्त, तो वे अभिमान करते थे।
Verse 36
ﮝﮞﮟﮠﮡﮢ
ﮣ
तथा कह रहे थेः क्या हम त्याग देने वाले हैं अपने पूज्यों को, एक उन्मत कवि के कारण?
Verse 37
ﮤﮥﮦﮧﮨ
ﮩ
बल्कि वह (नबी) सच लाये हैं तथा पुष्टि की है, सब रसूलों की।
Verse 38
ﮪﮫﮬﮭ
ﮮ
निश्चय तुम दुःखदायी यातना चखने वाले हो।
Verse 39
ﮯﮰﮱﯓﯔﯕ
ﯖ
तथा तुम उसका प्रतिकार (बदला) दिये जाओगे, जो तुम कर रहे थे।
Verse 40
ﯗﯘﯙﯚ
ﯛ
परन्तु अल्लाह के शुध्द भक्त।
Verse 41
ﯜﯝﯞﯟ
ﯠ
यही हैं, जिनके लिए विदित जीविका है।
Verse 42
ﯡﯢﯣ
ﯤ
प्रत्येक प्रकार के फल तथा यही आदरणीय होंगे।
Verse 43
ﯥﯦﯧ
ﯨ
सुख के स्वर्गों में।
Verse 44
ﯩﯪﯫ
ﯬ
आसनों पर एक-दूसरे के सम्मुख असीन होंगे।
Verse 45
ﯭﯮﯯﯰﯱ
ﯲ
फिराये जायेंगे इनपर प्याले, प्रवाहित पेय के।
Verse 46
ﯳﯴﯵ
ﯶ
श्वेत आस्वात पीने वालों के लिए।
Verse 47
नहीं होगी उसमें शारिरिक पीड़ा, न वे उसमें बहकेंगे।
Verse 48
ﯿﰀﰁﰂ
ﰃ
तथा उनके पास आँखे झुकाये, (सति) बड़ी आँखों वाली (नारियाँ) होंगी।
Verse 49
ﰄﰅﰆ
ﰇ
वह छुपाये हुए अन्डों के मानिन्द होंगी।[1]
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1. अर्थात जिस प्रकार पक्षी के पंखों के नीचे छुपे हुये अन्डे सुरक्षित होते हैं वैसे ही वह नारियाँ सुरक्षित, सुन्दर रंग और रूप की होंगी।
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1. अर्थात जिस प्रकार पक्षी के पंखों के नीचे छुपे हुये अन्डे सुरक्षित होते हैं वैसे ही वह नारियाँ सुरक्षित, सुन्दर रंग और रूप की होंगी।
Verse 50
ﰈﰉﰊﰋﰌ
ﰍ
वह एक-दूसरे से सम्मुख होकर प्रश्न करेंगे।
Verse 51
तो कहेगा एक कहने वाला उनमें सेः मेरा एक साथी था।
Verse 52
ﭑﭒﭓﭔ
ﭕ
जो कहता था कि क्या तुम (प्रलय का) विश्वास करने वालों में से हो?
Verse 53
क्या जब हम, मर जायेंगे तथा मिट्टी और अस्थियाँ हो जायेंगे, तो क्या हमें (कर्मों) का प्रतिफल दिया जायेगा?
Verse 54
ﭞﭟﭠﭡ
ﭢ
वह कहेगाः क्या तुम झाँककर देखने वाले हो?
Verse 55
ﭣﭤﭥﭦﭧ
ﭨ
फिर झाँकते ही उसे देख लेगा, नरक के बीच।
Verse 56
ﭩﭪﭫﭬﭭ
ﭮ
उससे कहेगाः अल्लाह की शपथ! तुम तो मेरा विनाश कर देने के समीप थे।
Verse 57
ﭯﭰﭱﭲﭳﭴ
ﭵ
और यदि मेरे पालनहार का अनुग्रह न होता, तो मैं (नरक के) उपस्थितों में होता।
Verse 58
ﭶﭷﭸ
ﭹ
फिर वह कहेगाः क्या (ये सही नहीं है कि) हम मरने वाले नहीं हैं?
Verse 59
ﭺﭻﭼﭽﭾﭿ
ﮀ
सिवाय अपनी प्रथम मौत के और न हमें यातना दी जायेगी।
Verse 60
ﮁﮂﮃﮄﮅ
ﮆ
वास्तव में, यही बड़ी सफलता है।
Verse 61
ﮇﮈﮉﮊ
ﮋ
इसी (जैसी सफलता) के लिए चाहिये कि कर्म करें, कर्म करने वाले।
Verse 62
ﮌﮍﮎﮏﮐﮑ
ﮒ
क्या ये आतिथ्य उत्तम है अथवा थोहड़ का वृक्ष?
Verse 63
ﮓﮔﮕﮖ
ﮗ
हमने उसे अत्याचारियों के लिए एक परीक्षा बनाया है।
Verse 64
ﮘﮙﮚﮛﮜﮝ
ﮞ
वह एक वृक्ष है, जो नरक की जड़ (तह) से निकलता है।
Verse 65
ﮟﮠﮡﮢ
ﮣ
उसके गुच्छे शैतानों के सिरों के समान हैं।
Verse 66
ﮤﮥﮦﮧﮨﮩ
ﮪ
तो वे (नरक वासी) खाने वाले हैं, उससे। फिर भरने वाले हैं, उससे अपने पेट।
Verse 67
फिर उनके लिए उसके ऊपर से खौलता गरम पानी है।
Verse 68
ﯔﯕﯖﯗﯘ
ﯙ
फिर उन्हें प्रत्यागत होना है, नरक की ओर।
Verse 69
ﯚﯛﯜﯝ
ﯞ
वास्तव में, उन्होंने पाया अपने पूर्वजों को कुपथ।
Verse 70
ﯟﯠﯡﯢ
ﯣ
फिर वे उन्हीं के पद्चिन्हों पर[1] दौड़े चले जा रहे हैं।
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1. इस में नरक में जाने का जो सब से बड़ा कारण बताया गया है वह है नबी को न मानना, और अपने पूर्वजों के पंथ पर ही चलते रहना।
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1. इस में नरक में जाने का जो सब से बड़ा कारण बताया गया है वह है नबी को न मानना, और अपने पूर्वजों के पंथ पर ही चलते रहना।
Verse 71
ﯤﯥﯦﯧﯨ
ﯩ
और कुपथ हो चुके हैं, इनसे पूर्व अगले लोगों में से अधिक्तर।
Verse 72
ﯪﯫﯬﯭ
ﯮ
तथा हम भेज चुके हैं उनमें, सचेत (सावधान) करने वाले।
Verse 73
ﯯﯰﯱﯲﯳ
ﯴ
तो देखो कि कैसा रहा सावधान किये हुए लोगों का परिणाम?[1]
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1. अतः उन के दुष्परिणाम से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिये।
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1. अतः उन के दुष्परिणाम से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिये।
Verse 74
ﯵﯶﯷﯸ
ﯹ
हमारे शुध्द भक्तों के सिवा।
Verse 75
ﯺﯻﯼﯽﯾ
ﯿ
तथा हमें पुकारा नूह़ नेः तो हम क्या ही अच्छे प्रार्थना स्वीकार करने वाले हैं।
Verse 76
ﰀﰁﰂﰃﰄ
ﰅ
और हमने बचा लिया उसे और उसके परिजनों को, घोर आपदा से।
Verse 77
ﭑﭒﭓﭔ
ﭕ
तथा कर दिया हमने उसकी संतति को, शेष[1] रह जाने वालों में से।
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1. उस की जाति के जलमग्न हो जाने के पश्चात्।
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1. उस की जाति के जलमग्न हो जाने के पश्चात्।
Verse 78
ﭖﭗﭘﭙ
ﭚ
तथा शेष रखा हमने उसकी सराहना तथा प्रशंसा को पिछलों में।
Verse 79
ﭛﭜﭝﭞﭟ
ﭠ
सलाम (सुरक्षा)[1] है नूह़ के लिए समस्त विश्ववासियों में।
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1. अर्थात उस की बुरी चर्चा से।
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1. अर्थात उस की बुरी चर्चा से।
Verse 80
ﭡﭢﭣﭤ
ﭥ
इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।
Verse 81
ﭦﭧﭨﭩ
ﭪ
वास्तव में, वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।
Verse 82
ﭫﭬﭭ
ﭮ
फिर हमने जलमगन कर दिया दूसरों को।
Verse 83
ﭯﭰﭱﭲﭳ
ﭴ
और उसके अनुयायियों में निश्चय इब्राहीम है।
Verse 84
ﭵﭶﭷﭸﭹ
ﭺ
जब लाया वह अपने पालनहार के पास स्वच्छ दिल।
Verse 85
ﭻﭼﭽﭾﭿﮀ
ﮁ
जब कहा उसने अपने पिता तथा अपनी जाति सेः तुम किसकी इबादत (वंदना) कर रहे हो?
Verse 86
ﮂﮃﮄﮅﮆ
ﮇ
क्या अपने बनाये हुए पूज्यों को अल्लाह के सिवा चाहते हो?
Verse 87
ﮈﮉﮊﮋ
ﮌ
तो तुम्हारा क्या विचार है, विश्व के पालनहार के विषय में?
Verse 88
ﮍﮎﮏﮐ
ﮑ
फिर उसने देखा तोरों की[1] ओर।
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1. यह सोचते हुये कि इन के उत्सव में न जाने के लिये क्या बहाना करूँ।
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1. यह सोचते हुये कि इन के उत्सव में न जाने के लिये क्या बहाना करूँ।
Verse 89
ﮒﮓﮔ
ﮕ
तथा उनसे कहाः मैं रोगी हूँ।
Verse 90
ﮖﮗﮘ
ﮙ
तो उसे छोड़कर चले गये।
Verse 91
ﮚﮛﮜﮝﮞﮟ
ﮠ
फिर वह जा पहुँचा, उनके उपास्यों (पूज्यों) की ओर। कहा कि (वे प्रसाद) क्यों नहीं खाते?
Verse 92
ﮡﮢﮣﮤ
ﮥ
तुम्हें क्या हुआ है कि बोलते नहीं?
Verse 93
ﮦﮧﮨﮩ
ﮪ
फिर पिल पड़ा उनपर मारते हुए, दायें हाथ से।
Verse 94
ﮫﮬﮭ
ﮮ
तो वे आये उसकी ओर दौड़ते हुए।
Verse 95
ﮯﮰﮱﯓ
ﯔ
इब्राहीम ने कहाः क्या तुम इबादत (वंदना) करते हो उसकी जिसे, पत्थरों से तराश्ते हो?
Verse 96
ﯕﯖﯗﯘ
ﯙ
जबकि अल्लाह ने पैदा किया है तुम्हें तथा जो तुम करते हो।
Verse 97
उन्होंने कहाः इसके लिए एक (अग्निशाला का) निर्माण करो और उसे झोंक दो दहकती अग्नि में।
Verse 98
ﯢﯣﯤﯥﯦ
ﯧ
तो उन्होंने उसके साथ षड्यंत्र रचा, तो हमने उन्हीं को नीचा कर दिया।
Verse 99
ﯨﯩﯪﯫﯬﯭ
ﯮ
तथा उसने कहाः मैं जाने वाला हूँ अपने पालनहार की[1] ओर। वह मुझे सुपथ दर्शायेगा।
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1. अर्थात ऐसे स्थान की ओर जहाँ अपने पालनहार की इबादत कर सकूँ।
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1. अर्थात ऐसे स्थान की ओर जहाँ अपने पालनहार की इबादत कर सकूँ।
Verse 100
ﯯﯰﯱﯲﯳ
ﯴ
हे मेरे पालनहार! प्रदान कर मुझे, एक सदाचारी (पुनीत) पुत्र।
Verse 101
ﯵﯶﯷ
ﯸ
तो हमने शुभ सूचना दी उसे, एक सहनशील पुत्र की।
Verse 102
फिर जब वह पहुँचा उसके साथ चलने-फिरने की आयु को, तो इब्राहीम ने कहाः हे मेरे प्रिय पुत्र! मैं देख रहा हूँ स्वप्न में कि मैं तुझे वध कर रहा हूँ। अब, तू बता कि तेरा क्या विचार है? उसने कहाः हे पिता! पालन करें, जिसका आदेश आपको दिया जा रहा है। आप पायेंगे मुझे सहनशीलों में से, यदि अल्लाह की इच्छा हूई।
Verse 103
ﭑﭒﭓﭔ
ﭕ
अन्ततः, जब दोनों ने स्वयं को अर्पित कर दिया और उस (पिता) ने उसे गिरा दिया माथे के बल।
Verse 104
ﭖﭗﭘ
ﭙ
तब हमने उसे आवाज़ दी कि हे इब्राहीम!
Verse 105
तूने सच कर दिया अपना स्वप्न। इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।
Verse 106
ﭣﭤﭥﭦﭧ
ﭨ
वास्तव में, ये खुली परीक्षा थी।
Verse 107
ﭩﭪﭫ
ﭬ
और हमने उसके मुक्ति-प्रतिदान के रूप में, प्रदान कर दी एक महान[1] बली।
____________________
1. यह महान बलि एक मेंढा था। जिसे जिब्रील (अलाहिस्सलाम) द्वारा स्वर्ग से भेजा गया। जो आप के प्रिय पुत्र इस्माईल (अलैहिस्सलाम) के स्थान पर बलि दिया गया। फिर इस विधि को प्रलय तक के लिये अल्लाह के सामिप्य का एक साधन तथा ईदुल अज़्ह़ा (बक़रईद) का प्रियवर कर्म बना दिया गया। जिसे संसार के सभी मुसलमान ईदुल अज़्ह़ा में करते हैं।
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1. यह महान बलि एक मेंढा था। जिसे जिब्रील (अलाहिस्सलाम) द्वारा स्वर्ग से भेजा गया। जो आप के प्रिय पुत्र इस्माईल (अलैहिस्सलाम) के स्थान पर बलि दिया गया। फिर इस विधि को प्रलय तक के लिये अल्लाह के सामिप्य का एक साधन तथा ईदुल अज़्ह़ा (बक़रईद) का प्रियवर कर्म बना दिया गया। जिसे संसार के सभी मुसलमान ईदुल अज़्ह़ा में करते हैं।
Verse 108
ﭭﭮﭯﭰ
ﭱ
तथा हमने शेष रखी उसकी शुभ चर्चा पिछलों में।
Verse 109
ﭲﭳﭴ
ﭵ
सलाम है इब्रीम पर।
Verse 110
ﭶﭷﭸ
ﭹ
इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।
Verse 111
ﭺﭻﭼﭽ
ﭾ
निश्चय ही वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।
Verse 112
ﭿﮀﮁﮂﮃ
ﮄ
तथा हमने उसे शुभसूचना दी इस्ह़ाक़ नबी की, जो सदाचारियों में[1] होगा।
____________________
1. इस आयत से विद्वत होता है कि इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को इस बलि के पश्चात् दूसरे पुत्र आदरणीय इस्ह़ाक़ की शुभ सूचना दी गई। इस से ज्ञान हुआ की बलि इस्माईल (अलैहिस्सलाम) की दी गई थी। और दोनों की आयु में लग-लग चौदह वर्ष का अन्तर है।
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1. इस आयत से विद्वत होता है कि इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को इस बलि के पश्चात् दूसरे पुत्र आदरणीय इस्ह़ाक़ की शुभ सूचना दी गई। इस से ज्ञान हुआ की बलि इस्माईल (अलैहिस्सलाम) की दी गई थी। और दोनों की आयु में लग-लग चौदह वर्ष का अन्तर है।
Verse 113
तथा हमने बरकत (विभूति) अवतरिक की उसपर तथा इस्ह़ाक़ पर और उन दोनों की संतति में से कोई सदाचारी है और कोई अपने लिए खुला अत्याचारी।
Verse 114
ﮑﮒﮓﮔﮕ
ﮖ
तथा हमने उपकार किया मूसा और हारून पर।
Verse 115
ﮗﮘﮙﮚﮛ
ﮜ
तथा मुक्त किया दोनों को और उनकी जाति को, घोर व्यग्रता से।
Verse 116
ﮝﮞﮟﮠ
ﮡ
तथा हमने सहायता की उनकी, तो वही प्रभावशाली हो गये।
Verse 117
ﮢﮣﮤ
ﮥ
तथा हमने प्रदान की दोनों को प्रकाशमय पुस्तक (तौरात)।
Verse 118
ﮦﮧﮨ
ﮩ
और हमने दर्शाई दोनों को सीधी डगर।
Verse 119
ﮪﮫﮬﮭ
ﮮ
तथा शेष रखी दोनों की शुभ चर्चा, पिछलों में।
Verse 120
ﮯﮰﮱﯓ
ﯔ
सलाम है मूसा तथा हारून पर।
Verse 121
ﯕﯖﯗﯘ
ﯙ
हम इसी प्रकार प्रतिफल प्रदान करते हैं, सदाचारियों को।
Verse 122
ﯚﯛﯜﯝ
ﯞ
वस्तुतः, वे दोनों हमारे ईमान वाले भक्तों में थे।
Verse 123
ﯟﯠﯡﯢ
ﯣ
तथा निश्चय इल्यास, नबियों में से था।
Verse 124
ﯤﯥﯦﯧﯨ
ﯩ
जब कहा उसने अपनी जाति सेः क्या तुम डरते नहीं हो?
Verse 125
ﯪﯫﯬﯭﯮ
ﯯ
क्या तुम बअल ( नामक मूर्ति) को पुकारते हो? तथा त्याग रहे हो सर्वोत्तम उत्पत्तिकर्ता को?
Verse 126
ﯰﯱﯲﯳﯴ
ﯵ
अल्लाह ही तुम्हारा पालनहार है तथा तुम्हारे प्रथम पूर्वजों का पालनहार है।
Verse 127
ﭑﭒﭓ
ﭔ
अन्ततः, उन्होंने झुठला दिया उसे। तो निश्चय वही (नरक में) उपस्थित होंगे।
Verse 128
ﭕﭖﭗﭘ
ﭙ
किन्तु, अल्लाह के शुध्द भक्त।
Verse 129
ﭚﭛﭜﭝ
ﭞ
तथा शेष रखी हमने उसकी शुभ चर्चा पिछलों में।
Verse 130
ﭟﭠﭡﭢ
ﭣ
सलाम है इल्यासीन[1] पर।
____________________
1. इल्यासीन इल्यास ही का एक उच्चारण है। उन्हें अन्य धर्म ग्रन्थों में इलया भी कहा गया है।
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1. इल्यासीन इल्यास ही का एक उच्चारण है। उन्हें अन्य धर्म ग्रन्थों में इलया भी कहा गया है।
Verse 131
ﭤﭥﭦﭧ
ﭨ
वास्तव में, हम इसी प्रकार प्रतिफल प्रदान करते हैं, सदाचारियों को।
Verse 132
ﭩﭪﭫﭬ
ﭭ
वस्तुतः, वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।
Verse 133
ﭮﭯﭰﭱ
ﭲ
तथा निश्चय लूत नबियों में से था।
Verse 134
ﭳﭴﭵﭶ
ﭷ
जब हमने मुक्त किया उसे तथा उसके सबपरिजनों को।
Verse 135
ﭸﭹﭺﭻ
ﭼ
एक बुढ़िया[1] के सिवा, जो पीछे रह जाने वालों में थी।
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1. यह लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नि थी।
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1. यह लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नि थी।
Verse 136
ﭽﭾﭿ
ﮀ
फिर हमने अन्यों को तहस-नहस कर दिया।
Verse 137
ﮁﮂﮃﮄ
ﮅ
तथा तुम[1] ग़ुज़रते हो उन (की निर्जीव बस्तियों) पर, प्रातः के समय।
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1. मक्का वासियों को संबोधित किया गया है।
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1. मक्का वासियों को संबोधित किया गया है।
Verse 138
ﮆﮇﮈﮉ
ﮊ
तथा रात्रि में। तो क्या तुम समझते नहीं हो?
Verse 139
ﮋﮌﮍﮎ
ﮏ
तथा निश्चय यूनुस नबियों में से था।
Verse 140
ﮐﮑﮒﮓﮔ
ﮕ
जब वह भाग[1] गया भरी नाव की ओर।
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1. अल्लाह की अनुमति के बिना अपने नगर से नगर वासियों को यातना के आन की सूचना दे कर निकल गये। और नाव पर सवार हो गये। नाव सागर की लहरों में घिर गई। इस लिये बोझ कम करने के लिये नाम निकाला गया। तो यूनुस अलैहिस्सलाम का नाम निकला और उन्हें समुद्र में फेंक दिया गया।
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1. अल्लाह की अनुमति के बिना अपने नगर से नगर वासियों को यातना के आन की सूचना दे कर निकल गये। और नाव पर सवार हो गये। नाव सागर की लहरों में घिर गई। इस लिये बोझ कम करने के लिये नाम निकाला गया। तो यूनुस अलैहिस्सलाम का नाम निकला और उन्हें समुद्र में फेंक दिया गया।
Verse 141
ﮖﮗﮘﮙ
ﮚ
फिर नाम निकाला गया, तो वह हो गया फेंके हुओं में से।
Verse 142
ﮛﮜﮝﮞ
ﮟ
तो निगल लिया उसे मछली ने और वह निन्दित था।
Verse 143
ﮠﮡﮢﮣﮤ
ﮥ
तो यदि न होता अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करने वालों में।
Verse 144
ﮦﮧﮨﮩﮪﮫ
ﮬ
तो वह रह जाता उसके उदर में उस दिन तक, जब सब पुनः जीवित किये[1] जायेंगे।
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1. अर्थात प्रयल के दिन तक। (देखियेः सूरह अम्बिया, आयतः87)
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1. अर्थात प्रयल के दिन तक। (देखियेः सूरह अम्बिया, आयतः87)
Verse 145
ﮭﮮﮯﮰﮱ
ﯓ
तो हमने फेंक दिया उसे खुले मैदान में और वह रोगी[1] था।
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1. अर्थात निर्बल नवजात शिशु के समान।
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1. अर्थात निर्बल नवजात शिशु के समान।
Verse 146
ﯔﯕﯖﯗﯘ
ﯙ
और उगा दिया उस[1] पर लताओं का एक वृक्ष।
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1. रक्षा के लिये।
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1. रक्षा के लिये।
Verse 147
ﯚﯛﯜﯝﯞﯟ
ﯠ
तथा हमने उसे रसूल बनाकर भेजा एक लाख, बल्कि अधिक की ओर।
Verse 148
ﯡﯢﯣﯤ
ﯥ
तो वे ईमान लाये। फिर हमने उन्हें सुख-सुविधा प्रदान की एक समय[1] तक।
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1. देखियेः सूरह यूनुस।
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1. देखियेः सूरह यूनुस।
Verse 149
ﯦﯧﯨﯩﯪ
ﯫ
तो (हे नबी!) आप उनसे प्रश्न करें कि क्या आपके पालनहार के लिए तो पुत्रियाँ हों और उनके लिए पुत्र?
Verse 150
ﯬﯭﯮﯯﯰﯱ
ﯲ
अथवा किया हमने पैदा किया है फ़रिश्तों को नारियाँ और वे उस समय उपस्थित[1] थे?
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1. इस में मक्का के मिश्रणवादियों का खण्डन किया जा रहा है जो फ़रिश्तों को देवियाँ तथा अल्लाह की पुत्रियाँ कहते थे। जब कि वह स्वयं पुत्रियों के जन्म को अप्रिय मानते थे।
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1. इस में मक्का के मिश्रणवादियों का खण्डन किया जा रहा है जो फ़रिश्तों को देवियाँ तथा अल्लाह की पुत्रियाँ कहते थे। जब कि वह स्वयं पुत्रियों के जन्म को अप्रिय मानते थे।
Verse 151
ﯳﯴﯵﯶﯷ
ﯸ
सावधान! वास्तव में, वे अपने मन से बनाकर ये बात कह रहे हैं।
Verse 152
ﯹﯺﯻﯼ
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कि अल्लाह ने संतान बनाई है और निश्चय ये मिथ्या भाषी हैं।
Verse 153
ﯾﯿﰀﰁ
ﰂ
क्या अल्लाह ने प्राथमिक्ता दी है पुत्रियों को, पुत्रों पर?
Verse 154
ﭑﭒﭓﭔ
ﭕ
तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा निर्णय दे रहे हो?
Verse 155
ﭖﭗ
ﭘ
तो क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते?
Verse 156
ﭙﭚﭛﭜ
ﭝ
अथवा तुम्हारे पास कोई प्रत्यक्ष प्रमाण है?
Verse 157
ﭞﭟﭠﭡﭢ
ﭣ
तो अपनी पुस्तक लाओ, यदि तुम सत्यवादी हो?
Verse 158
और उन्होंने बना दिया अल्लाह तथा जिन्नों के मध्य, वंश-संबंध। जबकि जिन्न स्वयं जानते हैं कि वे अल्लाह के समक्ष निश्चय उपस्थित किये[1] जायेंगे।
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1. अर्थात यातना के लिये। तो यदि वे उस के संबंधी होते तो उन्हें यातना क्यों देता?
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1. अर्थात यातना के लिये। तो यदि वे उस के संबंधी होते तो उन्हें यातना क्यों देता?
Verse 159
ﭰﭱﭲﭳ
ﭴ
अल्लाह पवित्र है उन गुणों से, जिनका वे वर्णन कर रहे हैं।
Verse 160
ﭵﭶﭷﭸ
ﭹ
परन्तु, अल्लाह के शुध्द भक्त।[1]
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1. वह अल्लाह को ऐसे दुर्गुणों से युक्त नहीं करते।
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1. वह अल्लाह को ऐसे दुर्गुणों से युक्त नहीं करते।
Verse 161
ﭺﭻﭼ
ﭽ
तो निश्चय तुम तथा तुम्हारे पूज्य।
Verse 162
ﭾﭿﮀﮁ
ﮂ
तुम सब किसी एक को भी कुपथ नहीं कर सकते।
Verse 163
ﮃﮄﮅﮆﮇ
ﮈ
उसके सिवा, जो नरक में झोंका जाने वाला है।
Verse 164
ﮉﮊﮋﮌﮍﮎ
ﮏ
और नहीं है हम (फ़रिश्तों) में से कोई, परन्तु उसका एक नियमित स्थान है।
Verse 165
ﮐﮑﮒ
ﮓ
तथा हम ही (आज्ञापालन के लिए) पंक्तिवध्द हैं।
Verse 166
ﮔﮕﮖ
ﮗ
और हम ही तस्बीह़ (पवित्रता गान) करने वाले हैं।
Verse 167
ﮘﮙﮚ
ﮛ
तथा वे (मुश्रिक) तो कहा करते थे किः
Verse 168
ﮜﮝﮞﮟﮠﮡ
ﮢ
यदि हमारे पास कोई स्मृति (पुस्तक) होती, जो पहले लोगों में आई......
Verse 169
ﮣﮤﮥﮦ
ﮧ
तो हम अवश्य अल्लाह के शुध्द भक्तों में हो जाते।
Verse 170
ﮨﮩﮪﮫﮬ
ﮭ
(फिर जब आ गयी) तो उन्होंने क़ुर्आन के साथ कुफ़्र कर दिया, अतः, शीघ्र ही उन्हें ज्ञान हो जायेगा।
Verse 171
ﮮﮯﮰﮱﯓ
ﯔ
और पहले ही हमारा वचन हो चुका है अपने भेजे हुए भक्तों के लिए।
Verse 172
ﯕﯖﯗ
ﯘ
कि निश्चय उन्हीं की सहायता की जायेगी।
Verse 173
ﯙﯚﯛﯜ
ﯝ
तथा वास्तव में हमारी सेना ही प्रभावशाली (विजयी) होने वाली है।
Verse 174
ﯞﯟﯠﯡ
ﯢ
तो आप मुँह फेर लें उनसे, कुछ समय तक।
Verse 175
ﯣﯤﯥ
ﯦ
तथा उन्हें देखते रहें। वे भी शीघ्र ही देख लेंगे।
Verse 176
ﯧﯨ
ﯩ
तो क्या, वे हमारी यातना की शीघ्र माँग कर रहे हैं।
Verse 177
ﯪﯫﯬﯭﯮﯯ
ﯰ
तो जब वह उतर आयेगी उनके मैदानों में, तो बुरा हो जायेगा सावधान किये हुओं का सवेरा।
Verse 178
ﯱﯲﯳﯴ
ﯵ
और आप मुँह फेर लें उनसे, कुछ समय तक।
Verse 179
ﯶﯷﯸ
ﯹ
तथा देखते रहें, अन्ततः वे (भी) देख लेंगे।
Verse 180
ﯺﯻﯼﯽﯾﯿ
ﰀ
पवित्र है आपका पालनहार, गौरव का स्वामी, उस बात से, जो वे बना रहे हैं।
Verse 181
ﰁﰂﰃ
ﰄ
तथा सलाम है रसूलों पर।
Verse 182
ﰅﰆﰇﰈ
ﰉ
तथा सभी प्रशंसा, अल्लाह, सर्वलोक के पालनहार के लिए है।
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