(तथा कहेगाः) हे जिन्नों तथा मनुष्यों के (मुश्रिक) समुदाय! क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल नहीं आये,[1] जो तुम्हें हमारी आयतें सुनाते और तुम्हें तुम्हारे इस दिन (के आने) से सावधान करते? वे कहेंगेः हम स्वयं अपने ही विरुध्द गवाह हैं। उन्हें सांसारिक जीवन ने धोखे में रखा था और अपने ही विरुध्द गवाह हो गये कि वास्तव में वही काफ़िर थे।
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1. क़ुर्आन की अनेक आयतों से यह विध्दित होता है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जिन्नों के भी नबी थे, जैसा कि सूरह जिन्न आयत 1, 2 में उन के क़ुर्आन सुनने और ईमान लाने का वर्णन है। ऐसे ही सूरह अह़क़ाफ़ में है कि जिन्नों ने कहाः हम ने ऐसी पुस्तक सुनी जो मूसा के पश्चात् उतरी है। इसी प्रकार वह सुलैमान के अधीन थे। परन्तु क़ुर्आन और ह़दीस से जिन्नों में नबी होने का कोई संकेत नहीं मिलता। एक विचार यह भी है कि जिन्न आदम (अलैहिस्सलाम) से पहले के हैं, इस लिये हो सकता है कि पहले उन में भी नबी आये हों।
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1. क़ुर्आन की अनेक आयतों से यह विध्दित होता है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जिन्नों के भी नबी थे, जैसा कि सूरह जिन्न आयत 1, 2 में उन के क़ुर्आन सुनने और ईमान लाने का वर्णन है। ऐसे ही सूरह अह़क़ाफ़ में है कि जिन्नों ने कहाः हम ने ऐसी पुस्तक सुनी जो मूसा के पश्चात् उतरी है। इसी प्रकार वह सुलैमान के अधीन थे। परन्तु क़ुर्आन और ह़दीस से जिन्नों में नबी होने का कोई संकेत नहीं मिलता। एक विचार यह भी है कि जिन्न आदम (अलैहिस्सलाम) से पहले के हैं, इस लिये हो सकता है कि पहले उन में भी नबी आये हों।
الترجمة الهندية