क्या वे लोग इसी बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि उनके पास फ़रिश्ते आ जायें, या स्वयं उनका पालनहार आ जाये या आपके पालनहार की कोई आयत (निशानी) आ जाये?[1] जिस दिन आपके पालनहार की कोई निशानी आ जायेगी, तो किसी प्राणी को उसका ईमान लाभ नहीं देगा, जो पहले ईमान न लाया हो या अपने ईमान की स्थिति में कोई सत्कर्म न किया हो। आप कह दें कि तुम प्रतीक्षा करो, हम भी प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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1. आयत का भावार्थ यह है कि इन सभी तर्कों के परस्तुत किये जाने पर भी यदि यह ईमान नहीं लाते तो क्या उस समय ईमान लायेंगे जब फ़रिश्ते उन के प्राण निकालने आयेंगे? या प्रलय के दिन जब अल्लाह इन का निर्णय करने आयेगा? या जब प्रलय की कुछ निशानियाँ आ जायेंगी? जैसे सूर्य का पश्चिम से निकल आना। सह़ीह़ बुखारी की ह़दीस है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा कि प्रलय उस समय तक नहीं आयेगी जब तक कि सूर्य पश्चिम से नहीं निकलेगा। और जब निकलेगा तो जो देखेंगे सभी ईमान ले आयेंगे। और यह वह समय होगा कि किसी प्रणी को उस का ईमान लाभ नहीं देगा। फिर आप ने यही आयत पढ़ी। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीसः4636)
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1. आयत का भावार्थ यह है कि इन सभी तर्कों के परस्तुत किये जाने पर भी यदि यह ईमान नहीं लाते तो क्या उस समय ईमान लायेंगे जब फ़रिश्ते उन के प्राण निकालने आयेंगे? या प्रलय के दिन जब अल्लाह इन का निर्णय करने आयेगा? या जब प्रलय की कुछ निशानियाँ आ जायेंगी? जैसे सूर्य का पश्चिम से निकल आना। सह़ीह़ बुखारी की ह़दीस है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा कि प्रलय उस समय तक नहीं आयेगी जब तक कि सूर्य पश्चिम से नहीं निकलेगा। और जब निकलेगा तो जो देखेंगे सभी ईमान ले आयेंगे। और यह वह समय होगा कि किसी प्रणी को उस का ईमान लाभ नहीं देगा। फिर आप ने यही आयत पढ़ी। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीसः4636)
الترجمة الهندية