ترجمة معاني سورة الزمر باللغة البنغالية من كتاب الترجمة البنغالية
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ترجمة معاني القرآن الكريم - عادل صلاحي
عادل صلاحي
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آية رقم 1
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এ কিতাব পরাক্রমশালী প্রজ্ঞাময় আল্লাহর কাছ থেকে নাযিল হওয়া।
آية رقم 2
নিশ্চয় আমরা আপনার কাছে এ কিতাব সত্যসহ নাযিল করেছি। কাজেই আল্লাহর 'ইবাদত করুন তাঁর আনুগত্যে একনিষ্ঠ হয়ে।
آية رقم 3
জেনে রাখুন, অবিমিশ্র আনুগত্য আল্লাহরই প্রাপ্য। আর যারা আল্লাহর পরিবর্তে অন্যদেরকে অভিভাবকরূপে গ্রহণ করে তারা বলে, 'আমরা তো এদের ইবাদত এ জন্যে করি যে, এরা আমাদেরকে পরিপূর্ণভাবে আল্লাহর সান্নিধ্যে এনে দেবে [১]।’ তারা যে বিষয়ে নিজেদের মধ্যে মতভেদ করছে নিশ্চয় আল্লাহ তাদের মধ্যে সে ব্যাপারে ফয়সালা করে দেবেন। যে মিথ্যাবাদী ও কাফির, নিশ্চয় আল্লাহ তাকে হিদায়াত দেন না।
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[১] মক্কার কাফের-মুশরিকরা অনুরূপ দুনিয়ার সব মুশরিকও একথাই বলে থাকে যে, আমরা স্রষ্টা মনে করে অন্যসব সত্তার ইবাদাত করি না। আমরা তো আল্লাহকেই প্রকৃত স্রষ্টা বলে মানি এবং সত্যিকার উপাস্য তাকেই মনে করি। যেহেতু তাঁর দরবার অনেক উঁচু। আমরা সেখানে কি করে পৌঁছতে পারি? তাই এসব বুজুর্গ সত্তাদেরকে আমরা মাধ্যম হিসেবে গ্রহণ করি যাতে তারা আমাদের প্রার্থনা ও আবেদন-নিবেদন আল্লাহর কাছে পৌঁছিয়ে দেন। অথচ তারা জানত যে, এসব মূর্তি তাদেরই হাতের তৈরি। এদের কোন বুদ্ধি-জ্ঞান, চেতনা-চৈতন্য, ও শক্তি-বল কিছুই নেই। তারা আল্লাহ তা’আলার দরবারকে দুনিয়ার রাজ-বাদশাহদের দরবারের মতই ধারনা করে নিয়েছিল। রাজ দরবারের নৈকট্যশীল ব্যক্তি কারও প্রতি প্ৰসন্ন হলে রাজার কাছে সুপারিশ করে তাকেও রাজার নৈকট্যশীল করে দিতে পারে। তারা মনে করত, ফেরেশতাগণও রাজকীয় সভাসদবর্গের ন্যায় যে কারও জন্যে সুপারিশ করতে পারে। কিন্তু তাদের এসব ধারণা শয়তানী, বিভ্ৰান্তি ও ভিত্তিহীন কল্পনা ছাড়া আর কিছুই নয়। প্রথমতঃ এসব মূর্তি-বিগ্রহ ফেরেশতাগণের আকৃতির অনুরূপ নয়। হলেও আল্লাহর নৈকট্যশীল ফেরেশতাগণ নিজেদের পূজা-অৰ্চনায় কিছুতেই সন্তুষ্ট হতে পারে না। আল্লাহর কাছে অপছন্দনীয় এমন যে কোন বিষয়কে তারা স্বভাবগতভাবে ঘূণা করে। এতদ্ব্যতীত তারা আল্লাহর দরবারে স্বতঃপ্রণোদিত হয়ে কোন সুপারিশ করতে পারে না, যে পর্যন্ত না তাদেরকে আল্লাহ তা’আলা কোন বিশেষ ব্যক্তির ব্যাপারে সুপারিশ করার অনুমতি দেন। সুতরাং তারা একদিকে আল্লাহর বান্দাদের ব্যাপারে বাড়াবাড়ি করেছে, অপরদিকে আল্লাহ সম্পর্কে খারাপ ধারণা করছে। তারা আল্লাহকে অত্যাচারী জালেম বাদশাদের মত মনে করছে, অথচ, আল্লাহ সবার ডাকেই সাড়া দেন। তাঁর কাছে কারও অভাব গোপন নাই যে তাকে মাধ্যম ধরে জানাতে হবে। তাছাড়া তারা এ সমস্ত উপাস্যদের ব্যাপারেও সুস্পষ্ট বিভ্রান্তিতে নিমজ্জিত। কোন কোন সত্তা আল্লাহর কাছে পৌঁছার মাধ্যম সে ব্যাপারে দুনিয়ার মুশরিকরা কখনো একমত হতে পারেনি। কেউ একজন মহাপুরুষকে মানলে আরেকজন অপর একজনকে মানছে। কেননা, কেবল তাওহীদের ব্যাপারেই ঐক্যমত হওয়া সম্ভব। শির্কের ব্যাপারে কোন প্রকার ঐক্যমত হতে পারে না। এর কারণ হচ্ছে, ভিন্ন ভিন্ন এসব মহাপুরুষ সম্পর্কে তাদের এই ধারণা কোন জ্ঞানের ভিত্তিতে গড়ে উঠেনি কিংবা আল্লাহর পক্ষ থেকে তাদের কাছে এমন কোন তালিকাও আসেনি যাতে বলা হয়েছে, অমুক ও অমুক ব্যক্তি আমার বিশেষ নৈকট্যপ্রাপ্ত সুতরাং আমাকে পেতে হলে তাদেরকে মাধ্যম হিসেবে গ্ৰহণ করো। এটা বরং এমন এক আকীদা যা কেবল কুসংস্কার ও অন্ধভক্তি এবং পুরনো দিনের লোকদেরকে অযৌক্তিক এবং অন্ধ অনুসরণের কারণে মানুষের মধ্যে বিস্তার লাভ করেছে। তাই এ ক্ষেত্রে মতের বিভিন্নতা অবশ্যম্ভাবী। [দেখুন, তাবারী; সা’দী; মাকরিযী, তাজরীদুত তাওহীদিল মুফীদ; ইবন তাইমিয়্যাহ, আল-ওয়াসিতা বাইনাল হাক্কি ওয়াল খালক, ১৫-১৮; ইবনুল কাইয়্যেম, ইগাসাতুল লাহফান, ৩৩৯-৩৪৪; আরও দেখুন, আশ-শির্ক ফিল কাদীম ওয়াল হাদীস, ১১৯৯-১২১১]
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[১] মক্কার কাফের-মুশরিকরা অনুরূপ দুনিয়ার সব মুশরিকও একথাই বলে থাকে যে, আমরা স্রষ্টা মনে করে অন্যসব সত্তার ইবাদাত করি না। আমরা তো আল্লাহকেই প্রকৃত স্রষ্টা বলে মানি এবং সত্যিকার উপাস্য তাকেই মনে করি। যেহেতু তাঁর দরবার অনেক উঁচু। আমরা সেখানে কি করে পৌঁছতে পারি? তাই এসব বুজুর্গ সত্তাদেরকে আমরা মাধ্যম হিসেবে গ্রহণ করি যাতে তারা আমাদের প্রার্থনা ও আবেদন-নিবেদন আল্লাহর কাছে পৌঁছিয়ে দেন। অথচ তারা জানত যে, এসব মূর্তি তাদেরই হাতের তৈরি। এদের কোন বুদ্ধি-জ্ঞান, চেতনা-চৈতন্য, ও শক্তি-বল কিছুই নেই। তারা আল্লাহ তা’আলার দরবারকে দুনিয়ার রাজ-বাদশাহদের দরবারের মতই ধারনা করে নিয়েছিল। রাজ দরবারের নৈকট্যশীল ব্যক্তি কারও প্রতি প্ৰসন্ন হলে রাজার কাছে সুপারিশ করে তাকেও রাজার নৈকট্যশীল করে দিতে পারে। তারা মনে করত, ফেরেশতাগণও রাজকীয় সভাসদবর্গের ন্যায় যে কারও জন্যে সুপারিশ করতে পারে। কিন্তু তাদের এসব ধারণা শয়তানী, বিভ্ৰান্তি ও ভিত্তিহীন কল্পনা ছাড়া আর কিছুই নয়। প্রথমতঃ এসব মূর্তি-বিগ্রহ ফেরেশতাগণের আকৃতির অনুরূপ নয়। হলেও আল্লাহর নৈকট্যশীল ফেরেশতাগণ নিজেদের পূজা-অৰ্চনায় কিছুতেই সন্তুষ্ট হতে পারে না। আল্লাহর কাছে অপছন্দনীয় এমন যে কোন বিষয়কে তারা স্বভাবগতভাবে ঘূণা করে। এতদ্ব্যতীত তারা আল্লাহর দরবারে স্বতঃপ্রণোদিত হয়ে কোন সুপারিশ করতে পারে না, যে পর্যন্ত না তাদেরকে আল্লাহ তা’আলা কোন বিশেষ ব্যক্তির ব্যাপারে সুপারিশ করার অনুমতি দেন। সুতরাং তারা একদিকে আল্লাহর বান্দাদের ব্যাপারে বাড়াবাড়ি করেছে, অপরদিকে আল্লাহ সম্পর্কে খারাপ ধারণা করছে। তারা আল্লাহকে অত্যাচারী জালেম বাদশাদের মত মনে করছে, অথচ, আল্লাহ সবার ডাকেই সাড়া দেন। তাঁর কাছে কারও অভাব গোপন নাই যে তাকে মাধ্যম ধরে জানাতে হবে। তাছাড়া তারা এ সমস্ত উপাস্যদের ব্যাপারেও সুস্পষ্ট বিভ্রান্তিতে নিমজ্জিত। কোন কোন সত্তা আল্লাহর কাছে পৌঁছার মাধ্যম সে ব্যাপারে দুনিয়ার মুশরিকরা কখনো একমত হতে পারেনি। কেউ একজন মহাপুরুষকে মানলে আরেকজন অপর একজনকে মানছে। কেননা, কেবল তাওহীদের ব্যাপারেই ঐক্যমত হওয়া সম্ভব। শির্কের ব্যাপারে কোন প্রকার ঐক্যমত হতে পারে না। এর কারণ হচ্ছে, ভিন্ন ভিন্ন এসব মহাপুরুষ সম্পর্কে তাদের এই ধারণা কোন জ্ঞানের ভিত্তিতে গড়ে উঠেনি কিংবা আল্লাহর পক্ষ থেকে তাদের কাছে এমন কোন তালিকাও আসেনি যাতে বলা হয়েছে, অমুক ও অমুক ব্যক্তি আমার বিশেষ নৈকট্যপ্রাপ্ত সুতরাং আমাকে পেতে হলে তাদেরকে মাধ্যম হিসেবে গ্ৰহণ করো। এটা বরং এমন এক আকীদা যা কেবল কুসংস্কার ও অন্ধভক্তি এবং পুরনো দিনের লোকদেরকে অযৌক্তিক এবং অন্ধ অনুসরণের কারণে মানুষের মধ্যে বিস্তার লাভ করেছে। তাই এ ক্ষেত্রে মতের বিভিন্নতা অবশ্যম্ভাবী। [দেখুন, তাবারী; সা’দী; মাকরিযী, তাজরীদুত তাওহীদিল মুফীদ; ইবন তাইমিয়্যাহ, আল-ওয়াসিতা বাইনাল হাক্কি ওয়াল খালক, ১৫-১৮; ইবনুল কাইয়্যেম, ইগাসাতুল লাহফান, ৩৩৯-৩৪৪; আরও দেখুন, আশ-শির্ক ফিল কাদীম ওয়াল হাদীস, ১১৯৯-১২১১]
آية رقم 4
আল্লাহ সন্তান গ্ৰহণ করতে চাইলে তিনি তাঁর সৃষ্টির মধ্যে যাকে ইচ্ছে বেছে নিতেন। পবিত্র ও মহান তিনি! তিনি আল্লাহ, এক, প্রবল প্রতাপশালী।
آية رقم 5
তিনি যথাযথভাবে আসমানসমূহ ও যমীন সৃষ্টি করেছেন। তিনি রাত দ্বারা দিনকে আচ্ছাদিত করেন এবং রাতকে আচ্ছাদিত করেন দিন দ্বারা [১]। সূর্য ও চাঁদকে তিনি করেছেন নিয়মাধীন। প্ৰত্যেকেই পরিক্রমণ করে এক নির্দিষ্ট কাল পর্যন্ত। জেনে রাখে, তিনি পরাক্রমশালী, ক্ষমাশীল।
____________________
[১] تكوير অর্থ এক বস্তুকে অপর বস্তুর উপর রেখে তাকে আচ্ছাদিত করে দেয়া। কুরআন পাক দিবারাত্রির পরিবর্তনকে এখানে সাধারণের জন্য تكوير শব্দ দ্বারা ব্যক্ত করেছে। রাত্রি আগমন করলে যেন দিনের আলোর উপর পর্দা রেখে দেয়া হয় এবং দিনের আগমনে রাত্রির অন্ধকার যেন যবনিকার অন্তরালে চলে যায়। [তাবারী।]
____________________
[১] تكوير অর্থ এক বস্তুকে অপর বস্তুর উপর রেখে তাকে আচ্ছাদিত করে দেয়া। কুরআন পাক দিবারাত্রির পরিবর্তনকে এখানে সাধারণের জন্য تكوير শব্দ দ্বারা ব্যক্ত করেছে। রাত্রি আগমন করলে যেন দিনের আলোর উপর পর্দা রেখে দেয়া হয় এবং দিনের আগমনে রাত্রির অন্ধকার যেন যবনিকার অন্তরালে চলে যায়। [তাবারী।]
آية رقم 6
তিনি তোমাদেরকে সৃষ্টি করেছেন একই ব্যক্তি হতে। তারপর তিনি তার থেকে জোড়া সৃষ্টি করেছেন [১]। আর তিনি তোমাদের জন্য নাযিল করেছেন আট জোড়া আন'আম [২]। তিনি তোমাদেরকে তোমাদের মাতৃগর্ভের ত্ৰিবিধ অন্ধকারে পর্যায়ক্রমে সৃষ্টি করেছেন। তিনিই আল্লাহ; তোমাদের রব; সর্বময় কর্তৃত্ব তাঁরই; তিনি ছাড়া কোন সত্য ইলাহ নেই। অতঃপর তোমাদেরকে কোথায় ফিরানো হচ্ছে?
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[১] একথার অর্থ এ নয় যে, প্রথমে আদম থেকে মানুষকে সৃষ্টি করেছেন এবং পরে তার স্ত্রী হাওয়াকে সৃষ্টি করেছেন। এখানে বক্তব্যের মধ্যে সময়ের পরম্পরার প্রতি গুরুত্ব না দিয়ে বর্ণনার পরম্পরার প্রতি গুরুত্ব আরোপ করা হয়েছে। প্রত্যেক ভাষায়ই এ ধরনের দৃষ্টান্ত বর্তমান। যেমন, আমরা বলি তুমি আজ যা করেছো তা জানি এবং গতকাল যা করেছো তাও আমার জানা আছে। এ ধরনের বর্ণনার অর্থ এ নয় যে, গতকালের ঘটনা আজকের পরে সংঘটিত হয়েছে। [দেখুন, তাবারী]
[২] আল-আন’আম বলতে গবাদি পশু বুঝানো হয়েছে। বলা হয়েছে যে আট জোড়া, কারণ; গবাদি পশু অর্থ উট, গরু, ভেড়া, বকরী। এ চারটি নর ও চারটি মাদি মিলে মোট আটটি নর ও মাদি হয়। [তাবারী, কুরতুবী]
____________________
[১] একথার অর্থ এ নয় যে, প্রথমে আদম থেকে মানুষকে সৃষ্টি করেছেন এবং পরে তার স্ত্রী হাওয়াকে সৃষ্টি করেছেন। এখানে বক্তব্যের মধ্যে সময়ের পরম্পরার প্রতি গুরুত্ব না দিয়ে বর্ণনার পরম্পরার প্রতি গুরুত্ব আরোপ করা হয়েছে। প্রত্যেক ভাষায়ই এ ধরনের দৃষ্টান্ত বর্তমান। যেমন, আমরা বলি তুমি আজ যা করেছো তা জানি এবং গতকাল যা করেছো তাও আমার জানা আছে। এ ধরনের বর্ণনার অর্থ এ নয় যে, গতকালের ঘটনা আজকের পরে সংঘটিত হয়েছে। [দেখুন, তাবারী]
[২] আল-আন’আম বলতে গবাদি পশু বুঝানো হয়েছে। বলা হয়েছে যে আট জোড়া, কারণ; গবাদি পশু অর্থ উট, গরু, ভেড়া, বকরী। এ চারটি নর ও চারটি মাদি মিলে মোট আটটি নর ও মাদি হয়। [তাবারী, কুরতুবী]
آية رقم 7
যদি তোমরা কুফরী কর তবে (জেনে রাখ) আল্লাহ তোমাদের মুখাপেক্ষী নন [১]। আর তিনি তাঁর বান্দাদের জন্য কুফরী পছন্দ করেন না। এবং যদি তোমরা কৃতজ্ঞ হও তবে তিনি তোমাদের জন্য তা-ই পছন্দ করেন। আর কোন বোঝা বহনকারী অপরের বোঝা বহন করবে না। তারপর তোমাদের রবের কাছেই তোমাদের ফিরে যাওয়া। তখন তোমরা যা আমল করতে তা তিনি তোমাদেরকে অবহিত করবেন। নিশ্চয় অন্তরে যা আছে তিনি তা সম্যক অবগত।
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[১] অর্থাৎ তোমাদের কুফরীর কারণে তাঁর প্রভুত্বের সামান্যতম ক্ষতিও হতে পারে না। তোমাদের ঈমান দ্বারাও আল্লাহর কোন উপকার হয় না তোমরা মানলেও তিনি আল্লাহ, না মানলেও তিনি আল্লাহ আছেন এবং থাকবেন। তাঁর নিজের ক্ষমতায় তাঁর কর্তৃত্ব চলছে। তোমাদের মানা বা না মানাতে কিছু আসে যায় না। হাদীসে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন যে, ‘আল্লাহ বলেন, হে আমার বান্দারা, যদি তোমরা আগের ও পরের সমস্ত মানুষ ও জিন তোমাদের মধ্যকার কোন সর্বাধিক পাপিষ্ঠ ব্যক্তির মত হয়ে যাও তাতেও আমার বাদশাহীর কোন ক্ষতি হবে না।’ [মুসলিম: ২৫৭৭]
____________________
[১] অর্থাৎ তোমাদের কুফরীর কারণে তাঁর প্রভুত্বের সামান্যতম ক্ষতিও হতে পারে না। তোমাদের ঈমান দ্বারাও আল্লাহর কোন উপকার হয় না তোমরা মানলেও তিনি আল্লাহ, না মানলেও তিনি আল্লাহ আছেন এবং থাকবেন। তাঁর নিজের ক্ষমতায় তাঁর কর্তৃত্ব চলছে। তোমাদের মানা বা না মানাতে কিছু আসে যায় না। হাদীসে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন যে, ‘আল্লাহ বলেন, হে আমার বান্দারা, যদি তোমরা আগের ও পরের সমস্ত মানুষ ও জিন তোমাদের মধ্যকার কোন সর্বাধিক পাপিষ্ঠ ব্যক্তির মত হয়ে যাও তাতেও আমার বাদশাহীর কোন ক্ষতি হবে না।’ [মুসলিম: ২৫৭৭]
آية رقم 8
আর মানুষকে যখন দুঃখ-দৈন্য স্পর্শ করে তখন সে একাগ্ৰচিত্তে তার রবকে ডাকে। তারপর যখন তিনি নিজের পক্ষ থেকে তার প্রতি অনুগ্রহ করেন তখন সে ভুলে যায় তার আগে যার জন্য সে ডেকেছিল তাঁকে এবং সে আল্লাহর সমকক্ষ দাঁড় করায়, অন্যকে তাঁর পথ থেকে বিভ্ৰান্ত করার জন্য। বলুন, ‘কুফরীর জীবন তুমি কিছুকাল উপভোগ করে নাও। নিশ্চয় তুমি আগুনের অধিবাসীদের অন্তর্ভুক্ত।'
آية رقم 9
যে ব্যক্তি রাতের বিভিন্ন প্রহরে [১] সিজ্দাবনত হয়ে ও দাঁড়িয়ে আনুগত্য প্রকাশ করে, আখিরাতকে ভয় করে [২] এবং তার রবের অনুগ্রহ প্রত্যাশা করে, (সে কি তার সমান, যে তা করে না?) বলুন, 'যারা জানে এবং যারা জানে না, তারা কি সমান?' বোধশক্তি সম্পন্ন লোকেরাই শুধু উপদেশ গ্ৰহণ করে।
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[১] اٰنَآءَالَّيْلِ এর অর্থ রাত্রির প্রহরসমূহ। অর্থাৎ রাত্রির শুরুভাগ, মধ্যবর্তী ও শেষাংশ। ইবন আব্বাস রাদিয়াল্লাহু আনহুমা বলেন: যে ব্যক্তি হাশরের ময়দানে সহজ হিসাব কামনা করে, তার উচিত হবে আল্লাহ যেন তাকে রাত্রির অন্ধকারে সেজদারত ও দাঁড়ানো অবস্থায় পান। তার মধ্যে আখেরাতের চিন্তা এবং রহমতের প্রত্যাশাও থাকা দরকার। কেউ কেউ মাগরিব ও এশার মধ্যবর্তী সময়কেও آناءاليل বলেছেন [ইবন কাসীর, তাবারী।]
[২] তবে মৃত্যুর সময় আশাকে প্রাধান্য দিতে হবে। রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এক ব্যাক্তির মৃত্যুর সময় তার কাছে প্রবেশ করে বললেন, তোমার কেমন লাগছে? লোকটি বলল, আমি আশা করছি এবং ভয়ও পাচ্ছি। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, এ দুটি বস্তু অর্থাৎ আশা এবং ভয় যে অন্তরে এ সময় একত্রিত হবে আল্লাহ তাকে তার আশার বিষয়টি দিবেন এবং ভয়ের বিষয়টি থেকে দূরে রাখবেন [তিরমিয়ী: ৯৮৩]
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[১] اٰنَآءَالَّيْلِ এর অর্থ রাত্রির প্রহরসমূহ। অর্থাৎ রাত্রির শুরুভাগ, মধ্যবর্তী ও শেষাংশ। ইবন আব্বাস রাদিয়াল্লাহু আনহুমা বলেন: যে ব্যক্তি হাশরের ময়দানে সহজ হিসাব কামনা করে, তার উচিত হবে আল্লাহ যেন তাকে রাত্রির অন্ধকারে সেজদারত ও দাঁড়ানো অবস্থায় পান। তার মধ্যে আখেরাতের চিন্তা এবং রহমতের প্রত্যাশাও থাকা দরকার। কেউ কেউ মাগরিব ও এশার মধ্যবর্তী সময়কেও آناءاليل বলেছেন [ইবন কাসীর, তাবারী।]
[২] তবে মৃত্যুর সময় আশাকে প্রাধান্য দিতে হবে। রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এক ব্যাক্তির মৃত্যুর সময় তার কাছে প্রবেশ করে বললেন, তোমার কেমন লাগছে? লোকটি বলল, আমি আশা করছি এবং ভয়ও পাচ্ছি। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, এ দুটি বস্তু অর্থাৎ আশা এবং ভয় যে অন্তরে এ সময় একত্রিত হবে আল্লাহ তাকে তার আশার বিষয়টি দিবেন এবং ভয়ের বিষয়টি থেকে দূরে রাখবেন [তিরমিয়ী: ৯৮৩]
آية رقم 10
বলুন, 'হে আমার মুমিন বান্দাগণ! তোমরা তোমাদের রবের তাকওয়া অবলম্বন কর। যারা এ দুনিয়াতে কল্যাণকর কাজ করে তাদের জন্য আছে কল্যাণ। আর আল্লাহর যমীন প্রশস্ত [১], ধৈর্যশীলদেরকেই তো তাদের পুরস্কার পূর্ণরূপে দেয়া হবে বিনা হিসেবে [২]।
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[১] মুজাহিদ বলেন, আল্লাহর যমীন যেহেতু প্রশস্ত সুতরাং তোমরা তাতে হিজরত কর, জিহাদ কর এবং মূর্তি থেকে দূরে থাক। আতা বলেন, আল্লাহর যমীন প্রশস্ত সুতরাং তোমাদেরকে গুনাহর দিকে ডাকা হয় তবে সেখান থেকে চলে যেও। [ইবন কাসীর]
[২] অর্থ সবরকারীদের সওয়াব কোন নির্ধারিত পরিমাণে নয়- অপরিসীম ও অগণিত দেয়া হবে। কেউ কেউ এর অর্থ বর্ণনা করেছেন যে, দুনিয়াতে কারও কারও কোন প্ৰাপ্য থাকলে তাকে নিজের প্রাপ্য দাবী করে আদায় করতে হয়। কিন্তু আল্লাহর কাছে দাবী ব্যতিরেকেই সবরকারীরা তাদের সওয়াব পাবে। ইমাম মালেক রাহেমাহুল্লাহ এ আয়াতে صَابِرِيْنَ এর অর্থ নিয়েছেন, যারা দুনিয়াতে বিপদাপদ ও দুঃখ-কষ্টে সবর করে। কেউ কেউ বলেন, যারা পাপকাজ থেকে সংযম অবলম্বন করে, আয়াতে তাদেরকে صابر বলা হয়েছে। কুরতুবী বলেন صَابِرِيْنَ শব্দকে অন্য কোন শব্দের সাথে সংযুক্ত না করে ব্যবহার করলে তার অর্থ হয় পাপকাজ থেকে নিজেকে বিরত রাখার কষ্ট সহ্যকারী। পক্ষান্তরে বিপদাপদে সবরকারী অর্থে ব্যবহার করা হলে তার সাথে সে বিপদও সংযুক্ত হয়ে উল্লেখিত হয়। তবে সত্যনিষ্ঠ একদল মুফাফসিরের মতে এখানে صابر বলে সাওম পালনকারীদের বোঝানো হয়েছে। [দেখুন, কুরতুবী, তাবারী]
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[১] মুজাহিদ বলেন, আল্লাহর যমীন যেহেতু প্রশস্ত সুতরাং তোমরা তাতে হিজরত কর, জিহাদ কর এবং মূর্তি থেকে দূরে থাক। আতা বলেন, আল্লাহর যমীন প্রশস্ত সুতরাং তোমাদেরকে গুনাহর দিকে ডাকা হয় তবে সেখান থেকে চলে যেও। [ইবন কাসীর]
[২] অর্থ সবরকারীদের সওয়াব কোন নির্ধারিত পরিমাণে নয়- অপরিসীম ও অগণিত দেয়া হবে। কেউ কেউ এর অর্থ বর্ণনা করেছেন যে, দুনিয়াতে কারও কারও কোন প্ৰাপ্য থাকলে তাকে নিজের প্রাপ্য দাবী করে আদায় করতে হয়। কিন্তু আল্লাহর কাছে দাবী ব্যতিরেকেই সবরকারীরা তাদের সওয়াব পাবে। ইমাম মালেক রাহেমাহুল্লাহ এ আয়াতে صَابِرِيْنَ এর অর্থ নিয়েছেন, যারা দুনিয়াতে বিপদাপদ ও দুঃখ-কষ্টে সবর করে। কেউ কেউ বলেন, যারা পাপকাজ থেকে সংযম অবলম্বন করে, আয়াতে তাদেরকে صابر বলা হয়েছে। কুরতুবী বলেন صَابِرِيْنَ শব্দকে অন্য কোন শব্দের সাথে সংযুক্ত না করে ব্যবহার করলে তার অর্থ হয় পাপকাজ থেকে নিজেকে বিরত রাখার কষ্ট সহ্যকারী। পক্ষান্তরে বিপদাপদে সবরকারী অর্থে ব্যবহার করা হলে তার সাথে সে বিপদও সংযুক্ত হয়ে উল্লেখিত হয়। তবে সত্যনিষ্ঠ একদল মুফাফসিরের মতে এখানে صابر বলে সাওম পালনকারীদের বোঝানো হয়েছে। [দেখুন, কুরতুবী, তাবারী]
آية رقم 11
বলুন, 'আমি তো আদেশপ্রাপ্ত হয়েছি, আল্লাহর আনুগত্যে একনিষ্ঠ হয়ে তাঁর ইবাদাত করতে;
آية رقم 12
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‘আরও আদেশপ্ৰাপ্ত হয়েছি, আমি যেন প্রথম মুসলিম হই।'
آية رقم 13
বলুন, 'আমি যদি আমার রবের অবাধ্য হই, তবে আমি ভয় করি মহাদিনের শাস্তির।'
آية رقم 14
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বলুন, 'আমি ইবাদাত করি আল্লাহরই তাঁর প্রতি আমার আনুগত্যকে একনিষ্ঠ রেখে |
آية رقم 15
‘অতএব তোমরা আল্লাহর পরিবর্তে যার ইচ্ছে তার ইবাদত কর।' 'বলুন, ‘ক্ষতিগ্রস্ত তারাই যারা কিয়ামতের দিন নিজেদের ও নিজেদের পরিজনবর্গের ক্ষতিসাধন করে [১]। জেনে রাখ, এটাই সুস্পষ্ট ক্ষতি।'
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[১] কারণ তারা এবং তাদের পরিবারের মধ্যে স্থায়ী বিচ্ছেদ হয়ে গেছে। এরা আর কোন দিন একত্রিত হতে পারবে না। চাই তাদের পরিবার জান্নাতে যাক বা তারা সবাই জাহান্নামে যাক। কোন অবস্থাতেই তাদের আর একসাথে হওয়া ও আনন্দিত হওয়া সম্ভব নয়। [ইবন কাসীর]
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[১] কারণ তারা এবং তাদের পরিবারের মধ্যে স্থায়ী বিচ্ছেদ হয়ে গেছে। এরা আর কোন দিন একত্রিত হতে পারবে না। চাই তাদের পরিবার জান্নাতে যাক বা তারা সবাই জাহান্নামে যাক। কোন অবস্থাতেই তাদের আর একসাথে হওয়া ও আনন্দিত হওয়া সম্ভব নয়। [ইবন কাসীর]
آية رقم 16
তাদের জন্য থাকবে তাদের উপরের দিকে আগুনের আচ্ছাদন এবং নিচের দিকেও আচ্ছাদন। এ দ্বারা আল্লাহ তাঁর বান্দাদেরকে সতর্ক করেন। হে আমার বান্দাগণ! তোমরা আমারই তাকওয়া অবলম্বন কর।
آية رقم 17
আর যারা তাগুতের ইবাদাত থেকে দূরে থাকে এবং আল্লাহর অভিমুখী হয় তাদের জন্য আছে সুসংবাদ। অতএব সুসংবাদ দিন আমার বান্দাদেরকে---
آية رقم 18
যারা মনোযোগের সাথে কথা শোনে এবং তার মধ্যে যা উত্তম তা অনুসরণ করে। তাদেরকেই আল্লাহ্ হিদায়াত দান করেছেন আর তারাই বোধশক্তি সম্পন্ন।
آية رقم 19
যার উপর শাস্তির আদেশ অবধারিত হয়েছে; আপনি কি রক্ষা করতে পারবেন সে ব্যক্তিকে, যে আগুনে (জাহান্নামে) আছে?
آية رقم 20
তবে যারা তাদের রবের তাকওয়া অবলম্বন করে, তাদের জন্য আছে বহু প্ৰাসাদ যার উপর নির্মিত আরো প্রাসাদ [১], যার পাদদেশে নদী প্রবাহিত; এটা আল্লাহর প্রতিশ্রুতি, আল্লাহ প্রতিশ্রুতির বিপরীত করেন না।
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[১] রাসূল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন, জান্নাতিরা জান্নাতে উঁচু কামরা সমূহ দেখবে, যেমন দেখা যায় আকাশের প্রান্তদেশে উজ্জ্বল তারকা ৷ [বুখারী: ৩২৫৬; মুসলিম: ২৮৩১]
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[১] রাসূল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন, জান্নাতিরা জান্নাতে উঁচু কামরা সমূহ দেখবে, যেমন দেখা যায় আকাশের প্রান্তদেশে উজ্জ্বল তারকা ৷ [বুখারী: ৩২৫৬; মুসলিম: ২৮৩১]
آية رقم 21
আপনি কি দেখেন না, আল্লাহ আকাশ হতে বারি বর্ষণ করেন, অতঃপর তা ভূমিতে নির্ঝররূপে প্রবাহিত করেন তারপর তা দ্বারা বিবিধ বর্ণের ফসল উৎপন্ন করেন, তারপর তা শুকিয়ে যায়। ফলে আপনি তা হলুদ বর্ণ দেখতে পান, অবশেষে তিনি সেটাকে খড়-কুটোয় পরিণত করেন? এতে অবশ্যই উপদেশ রয়েছে বোধশক্তিসম্পন্নদের জন্য।
آية رقم 22
আল্লাহ ইসলামের জন্য যার বক্ষ উন্মুক্ত করে দিয়েছেন ফলে সে তার রবের দেয়া নূরের উপর রয়েছে, সে কি তার সমান যে এরূপ নয়? অতএব দুর্ভোগ সে কঠোর হৃদয় ব্যক্তিদের জন্য, যারা আল্লাহর স্মরণ বিমুখ! তারা স্পষ্ট বিভ্ৰান্তিতে আছে।
آية رقم 23
আল্লাহ নাযিল করেছেন উত্তম বাণী সম্বলিত কিতাব যা সুসামঞ্জস্য [১] এবং যা পুনঃ পুনঃ আবৃত্তি করা হয়। এতে, যারা তাদের রবকে ভয় করে, তাদের শরীর শিউরে ওঠে, তারপর তাদের দেহমন বিনম্র হয়ে আল্লাহর স্মরণে ঝুঁকে পড়ে। এটাই আল্লাহর হিদায়াত, তিনি তা দ্বারা যাকে ইচ্ছে হিদায়াত করেন। আল্লাহ যাকে বিভ্রান্ত করেন তার কোন হেদায়াতকারী নেই।
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[১] মুজাহিদ বলেন, পুরো কুরআনই সামঞ্জস্যপূর্ণ পুনঃ পুনঃ পঠিত। কাতাদাহ বলেন, এক আয়াত অন্য আয়াতের মত। দাহহাক বলেন, কুরআনে কোন কথাকে বারবার বলা হয়েছে যাতে করে তাদের রবের কথা বুঝা সহজ হয়। হাসান বসরী বলেন, কোন সুরায় একটি আয়াত আসলে অন্য সুরায় অনুরূপ আয়াত পাওয়া যায়। আব্দুর রহমান ইবন যায়েদ ইবন আসলাম বলেন, বারবার নিয়ে আসা হয়েছে যেমন মূসাকে কুরআনে বারবার উল্লেখ করা হয়েছে, অনুরূপ সালেহ, হূদ ও অন্যান্য নবীদেরকেও ৷ [ইবন কাসীর] কাতাদা বলেন, এখানে ফরয বিষয়াদি, বিচারিক বিষয়াদি ও শরীআত নির্ধারিত সীমারেখার কথা বারবার এসেছে। [তাবারী।]
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[১] মুজাহিদ বলেন, পুরো কুরআনই সামঞ্জস্যপূর্ণ পুনঃ পুনঃ পঠিত। কাতাদাহ বলেন, এক আয়াত অন্য আয়াতের মত। দাহহাক বলেন, কুরআনে কোন কথাকে বারবার বলা হয়েছে যাতে করে তাদের রবের কথা বুঝা সহজ হয়। হাসান বসরী বলেন, কোন সুরায় একটি আয়াত আসলে অন্য সুরায় অনুরূপ আয়াত পাওয়া যায়। আব্দুর রহমান ইবন যায়েদ ইবন আসলাম বলেন, বারবার নিয়ে আসা হয়েছে যেমন মূসাকে কুরআনে বারবার উল্লেখ করা হয়েছে, অনুরূপ সালেহ, হূদ ও অন্যান্য নবীদেরকেও ৷ [ইবন কাসীর] কাতাদা বলেন, এখানে ফরয বিষয়াদি, বিচারিক বিষয়াদি ও শরীআত নির্ধারিত সীমারেখার কথা বারবার এসেছে। [তাবারী।]
آية رقم 24
যে ব্যক্তি কিয়ামতের দিন তার মুখমণ্ডল দ্বারা কঠিন শাস্তি ঠেকাতে চাইবে, (সে কি তার মত যে নিরাপদ?) আর যালিমদেরকে বলা হবে, 'তোমরা যা অর্জন করতে তা আস্বাদন কর [১]।'
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[১] যেমন অন্য আয়াতে এসেছে, “যে ব্যক্তি ঝুঁকে মুখে ভর দিয়ে চলে, সে-ই কি ঠিক পথে চলে, না কি সে ব্যক্তি যে সোজা হয়ে সরল পথে চলে?” [সূরা আল-মুলকঃ ২২] আরও এসেছে, “যেদিন তাদেরকে উপুড় করে টেনে নিয়ে যাওয়া হবে জাহান্নামের দিকে; সেদিন বলা হবে, জাহান্নামের যন্ত্রণা আস্বাদন কর।” [সূরা আল-কামার: ৪৮] আরও এসেছে, “যে অগ্নিতে নিক্ষিপ্ত হবে সে কি শ্রেষ্ঠ, না যে কিয়ামতের দিন নিরাপদে উপস্থিত হবে সে? তোমরা যা ইচ্ছে আমল কর।” [সূরা ফুসসিলাত: ৪০]
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[১] যেমন অন্য আয়াতে এসেছে, “যে ব্যক্তি ঝুঁকে মুখে ভর দিয়ে চলে, সে-ই কি ঠিক পথে চলে, না কি সে ব্যক্তি যে সোজা হয়ে সরল পথে চলে?” [সূরা আল-মুলকঃ ২২] আরও এসেছে, “যেদিন তাদেরকে উপুড় করে টেনে নিয়ে যাওয়া হবে জাহান্নামের দিকে; সেদিন বলা হবে, জাহান্নামের যন্ত্রণা আস্বাদন কর।” [সূরা আল-কামার: ৪৮] আরও এসেছে, “যে অগ্নিতে নিক্ষিপ্ত হবে সে কি শ্রেষ্ঠ, না যে কিয়ামতের দিন নিরাপদে উপস্থিত হবে সে? তোমরা যা ইচ্ছে আমল কর।” [সূরা ফুসসিলাত: ৪০]
آية رقم 25
তাদের পূর্ববর্তীগণও মিথ্যারোপ করেছিল, ফলে শাস্তি এমনভাবে তাদেরকে গ্রাস করল যে, তারা অনুভবও করতে পারেনি।
آية رقم 26
ফলে আল্লাহ্ তাদেরকে দুনিয়ার জীবনে লাঞ্ছনা ভোগ করালেন, আর আখিরাতের শাস্তি তো আরো কঠিন। যদি তারা জানত!
آية رقم 27
আর অবশ্যই আমরা এ কুরআনে মানুষের জন্য সর্বপ্রকার দৃষ্টান্ত উপস্থিত করেছি, যাতে তারা উপদেশ গ্ৰহণ করে,
آية رقم 28
আরবী ভাষায় এ কুরআন বক্রতামুক্ত, যাতে তারা তাকওয়া অবলম্বন করে।
آية رقم 29
আল্লাহ্ একটি দৃষ্টান্ত পেশ করছেনঃ এক ব্যক্তির প্রভু অনেক, যারা পরস্পর বিরুদ্ধভাবাপন্ন এবং আরেক ব্যক্তি, যে এক প্রভুর অনুগত; এ দু'জনের অবস্থা কি সমান? সমস্ত প্ৰশংসা আল্লাহরই; কিন্তু তাদের অধিকাংশই জানে না [১]।
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[১] মুজাহিদ বলেন, এটা বাতিল ইলাহ ও সত্য ইলাহের জন্য দেয়া উদাহরণ। [তাবারী] অর্থাৎ মুশরিক ও প্রকৃত মুমিন। [আত-তাফসীরুস সহীহ]
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[১] মুজাহিদ বলেন, এটা বাতিল ইলাহ ও সত্য ইলাহের জন্য দেয়া উদাহরণ। [তাবারী] অর্থাৎ মুশরিক ও প্রকৃত মুমিন। [আত-তাফসীরুস সহীহ]
آية رقم 30
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আপনি তো মরণশীল এবং তারাও মরণশীল।
آية رقم 31
তারপর কিয়ামতের দিন নিশ্চয় তোমরা তোমাদের রবের সামনে পরস্পর বাক-বিতণ্ডা করবে [১]।
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[১] এ আয়াত নাযিল হলে যুবাইর রাদিয়াল্লাহু আনহু বলেন, হে আল্লাহর রাসূল! দুনিয়াতে আমরা যে ঝগড়া করছি সেটা কি আবার আখেরাতেও হবে? রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, হ্যাঁ, তখন যুবাইর বললেন, বিষয়টি তাহলে ভয়াবহ। [তিরমিয়ী: ৩২৩৬] ইবন উমর বলেন, আমরা এ আয়াত নাযিল হয়েছে জানতাম কিন্তু কেন নাযিল হলো বুঝতে পারিনি। আমরা বলতাম, কার সাথে আমরা ঝগড়া করব? আমাদের মধ্যে এবং আহলে কিতাবদের মধ্যে তো কোন ঝগড়া নেই। অবশেষে যখন মুসলিমদের মাঝে ফেতনা শুরু হলো তখনই বুঝতে পারলাম যে, এটাই আমাদের রবের পক্ষ থেকে যে ঝগড়ার ওয়াদা করা হয়েছিল তা। [আত-তাফসীরুস সহীহ]
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[১] এ আয়াত নাযিল হলে যুবাইর রাদিয়াল্লাহু আনহু বলেন, হে আল্লাহর রাসূল! দুনিয়াতে আমরা যে ঝগড়া করছি সেটা কি আবার আখেরাতেও হবে? রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, হ্যাঁ, তখন যুবাইর বললেন, বিষয়টি তাহলে ভয়াবহ। [তিরমিয়ী: ৩২৩৬] ইবন উমর বলেন, আমরা এ আয়াত নাযিল হয়েছে জানতাম কিন্তু কেন নাযিল হলো বুঝতে পারিনি। আমরা বলতাম, কার সাথে আমরা ঝগড়া করব? আমাদের মধ্যে এবং আহলে কিতাবদের মধ্যে তো কোন ঝগড়া নেই। অবশেষে যখন মুসলিমদের মাঝে ফেতনা শুরু হলো তখনই বুঝতে পারলাম যে, এটাই আমাদের রবের পক্ষ থেকে যে ঝগড়ার ওয়াদা করা হয়েছিল তা। [আত-তাফসীরুস সহীহ]
آية رقم 32
সুতরাং যে ব্যক্তি আল্লাহ সম্বন্ধে মিথ্যা বলে এবং সত্য আসার পর তাতে মিথ্যারোপ করে তার চেয়ে বেশী যালিম আর কে? কাফিরদের আবাসস্থল কি জাহান্নাম নয়?
آية رقم 33
আর যে সত্য নিয়ে এসেছে এবং যে তা সত্য বলে মেনেছে তারাই তো মুত্তাকী।
آية رقم 34
তাদের জন্য তা-ই থাকবে যা চাইবে তারা তাদের রবের নিকট। এটাই মুহসিনদের পুরস্কার।
آية رقم 35
যাতে এরা যেসব মন্দকাজ করেছে আল্লাহ্ তা ক্ষমা করে দেন এবং এদেরকে এদের সর্বোত্তম কাজের জন্য পুরস্কৃত করেন।
آية رقم 36
আল্লাহ কি তার বান্দার জন্য যথেষ্ট নন? অথচ তারা আপনাকে আল্লাহর পরিবর্তে অন্যের ভয় দেখায় [১]। আর আল্লাহ্ যাকে পথভ্রষ্ট করেন তার জন্য কোন হেদায়াতকারী নেই।
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[১] অর্থাৎ তারা আপনাকে তাদের উপাস্য মা’বুদদের ভয় দেখায়। [তাবারী।]
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[১] অর্থাৎ তারা আপনাকে তাদের উপাস্য মা’বুদদের ভয় দেখায়। [তাবারী।]
آية رقم 37
আর যাকে আল্লাহ্ হেদায়াত করেন তার জন্য কোন পথভ্ৰষ্টকারী নেই; আল্লাহ কি পরাক্রমশালী, প্রতিশোধ গ্ৰহণকারী নন?
آية رقم 38
আর আপনি যদি তাদেরকে জিজ্ঞেস করেন, আসমানসমূহ ও যমীন কে সৃষ্টি করেছেন? তারা অবশ্যই বলবে, 'আল্লাহ্।' বলুন, 'তোমরা ভেবে দেখেছ কি, আল্লাহ্ আমার অনিষ্ট করতে চাইলে তোমরা আল্লাহর পরিবর্তে যাদেরকে ডাক তারা কি সে অনিষ্ট দূর করতে পারবে? অথবা তিনি আমার প্রতি অনুগ্রহ করতে চাইলে তারা কি সে অনুগ্রহকে রোধ করতে পারবে?' বলুন, 'আমার জন্য আল্লাহই যথেষ্ট।' নির্ভরকারীগণ তাঁর উপরই নির্ভর করে।
آية رقم 39
বলুন, 'হে আমার সম্প্রদায়! তোমরা স্ব স্ব অবস্থানে কাজ করতে থাক, নিশ্চয় আমি আমার কাজ করব [১]। অতঃপর শীঘ্রই তোমরা জানতে পারবে [২]---
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[১] মুজাহিদ বলেন, অর্থাৎ আমিও আমার পূর্ববর্তী নবীদের মত করে ধীরে ধীরে কাজ যাব। [তাবারী]
[২] অর্থাৎ যখন আল্লাহর আযাব আসবে, তখন আমাদের মধ্যে কে হকপথে আছে আর কে বাতিল পথে আছে, কে পথভ্রষ্ট আর কে সঠিক পথে আছে তা তখনই জানা যাবে। [তাবারী]
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[১] মুজাহিদ বলেন, অর্থাৎ আমিও আমার পূর্ববর্তী নবীদের মত করে ধীরে ধীরে কাজ যাব। [তাবারী]
[২] অর্থাৎ যখন আল্লাহর আযাব আসবে, তখন আমাদের মধ্যে কে হকপথে আছে আর কে বাতিল পথে আছে, কে পথভ্রষ্ট আর কে সঠিক পথে আছে তা তখনই জানা যাবে। [তাবারী]
آية رقم 40
'কার উপর আসবে লাঞ্ছনাদায়ক শাস্তি আর আপতিত হবে তার উপর স্থায়ী শান্তি।'
آية رقم 41
নিশ্চয় আমরা আপনার প্রতি সত্যসহ কিতাব নাযিল করেছি মানুষের জন্য; তারপর যে সৎপথ অবলম্বন করে সে তা করে নিজেরই কল্যাণের জন্য এবং যে বিপথগামী হয় সে তো বিপথগামী হয় নিজেরই ধ্বংসের জন্য, আর আপনি তাদের তত্ত্বাবধায়ক নন [১]।
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[১] অনুরূপ আয়াত দেখুন, সূরা আল-ইসরা: ১৫।
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[১] অনুরূপ আয়াত দেখুন, সূরা আল-ইসরা: ১৫।
آية رقم 42
আল্লাহ্ই জীবসমূহের প্রাণ হরণ করেন তাদের মৃত্যুর সময় এবং যাদের মৃত্যু আসেনি তাদের প্রাণও নিদ্রার সময়। তারপর তিনি যার জন্য মৃত্যুর সিদ্ধান্ত করেন তার প্রাণ তিনি রেখে দেন এবং অন্যগুলো ফিরিয়ে দেন, এক নির্দিষ্ট সময়ের জন্য [১]। নিশ্চয় এতে নিদর্শন রয়েছে এমন সম্প্রদায়ের জন্য, যারা চিন্তা করে।
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[১] توفى এর শাব্দিক অর্থ লওয়া ও করায়ত্ত করা। আলোচ্য আয়াতে আল্লাহ বলেন, প্রাণীদের প্রাণ সর্বাবস্থায় ও সর্বক্ষণই আল্লাহ্ তা'আলার আয়ত্ত্বাধীন। তিনি যখন ইচ্ছা তা হরণ করতে বা ফিরিয়ে নিতে পারেন। আল্লাহ তা'আলার এ কুদরত প্রত্যেক প্রাণীই প্রত্যহ দেখে ও অনুভব করে। নিদ্রার সময় তার প্রাণ আল্লাহ তা'আলার করায়ত্তে চলে যায় এবং ফিরিয়ে দেয়ার পর জাগ্রত হয়। অবশেষে এমন এক সময় আসবে, যখন তা সম্পূর্ণ করায়ত্ত হয়ে যাবে এবং ফিরে পাওয়া যাবে না। প্রাণ হরণ করা অর্থ তার সম্পর্ক দেহ থেকে বিচ্ছিন্ন করে দেয়া। কখনও বাহ্যিক ও আভ্যন্তরীণ সবদিক দিয়ে বিচ্ছিন্ন করে দেয়া হয়, এরই নাম মৃত্যু। আবার কখনও শুধু বাহিকভাবে বিচ্ছিন্ন করা হয়। আভ্যন্তরীণভাবে যোগাযোগ থাকে। এর ফলে কেবল বাহ্যিকভাবে জীবনের লক্ষণ, চেতনা ও ইচ্ছাভিত্তিক নড়াচড়ার শক্তি বিচ্ছিন্ন করে দেয়া হয় এবং আভ্যন্তরীণ দিক দিয়ে দেহের সাথে প্ৰাণের সম্পর্ক বাকী থাকে। ফলে সে শ্বাস গ্রহণ করে ও জীবিত থাকে। আলোচ্য আয়াতে توفى শব্দটি উপরোক্ত উভয় প্রকার প্রাণ হরণের অর্থকেই অন্তর্ভুক্ত করে। এখানে প্রথমে বড় মৃত্যুর কথা পরে ছাোট মৃত্যু বা ঘুমের কথা উল্লেখ করা হয়েছে। পবিত্র কুরআনের অন্যত্রও দু'ধরনের মৃত্যুর উল্লেখ করা হয়েছে। বলা হয়েছে,
وَهُوَ الَّذِي يَتَوَفَّاكُم بِاللَّيْلِ وَيَعْلَمُ مَا جَرَحْتُم بِالنَّهَارِ ثُمَّ يَبْعَثُكُمْ فِيهِ لِيُقْضَىٰ أَجَلٌ مُّسَمًّى ۖ ثُمَّ إِلَيْهِ مَرْجِعُكُمْ ثُمَّ يُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
“তিনিই রাতে তোমাদের মৃত্যু ঘটান এবং দিনে তোমরা যা কর তা তিনি জানেন। তারপর দিনে তোমাদেরকে তিনি আবার জীবিত করেন যাতে নির্ধারিত সময় পূর্ণ হয়। তারপর তাঁর দিকেই তোমাদের ফিরে যাওয়া। তারপর তোমরা যা কর সে সম্বন্ধে তিনি তোমাদেরকে অবহিত করবেন।" [সূরা আল-আন’আম: ৬০] এখানে প্রথমে ছোট মৃত্যু বা ঘুমের কথা, পরে বড় মৃত্যুর কথা বলা হয়েছে। [ইবন কাসীর]
মোটকথা: এ আয়াতে আল্লাহ তা'আলা প্রত্যেক মানুষকে এ অনুভূতি দিতে চাচ্ছেন যে, জীবন ও মৃত্যু কিভাবে তাঁর অসীম ক্ষমতার করায়ত্ব। শয়নে, জাগরণে, ঘরে অবস্থানের সময় কিংবা কোথাও চলাফেরা করার সময় মানব দেহের আভ্যন্তরীণ কোন ক্ৰটি অথবা বাইরের অজানা কোন বিপদ অকস্মাৎ এমন মোড় নিতে পারে যা তার মৃত্যু ঘটাতে পারে। যে মানুষ আল্লাহর হাতে এতটা অসহায় সে যদি সেই আল্লাহ সম্পর্কে এতটা অমনোযোগী ও বিদ্রোহী হয় তাহলে সে কত অজ্ঞ। সে জন্যই রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম ঘুমাবার আগে এবং ঘুম থেকে উঠে যে দো'আ করতেন তাতে রূহ ফেরত পাওয়ায় আল্লাহর শুকরিয়া আদায় করতেন। হাদীসে এসেছে, তিনি ঘুমাবার সময় বলতেন:
بِاسْمِكَ اللّٰهُمَّ أَمُوْتُ وَ أَخْيَا
“হে আল্লাহ! আপনার নামেই আমি মারা যাই এবং জীবিত হই।” আর যখন ঘুম থেকে জাগতেন তখন বলতেন:
الْحَمْدُللّٰهِ الَّذِيْ أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُوْرُ
“সকল প্রশংসা আল্লাহর জন্য যিনি আমাদেরকে আমাদের মৃত্যুর পর পুনরায় জীবিত করেছেন। আর তাঁর কাছেই আমরা উত্থিত হবো।” [বুখারী: ৬৩১২]
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[১] توفى এর শাব্দিক অর্থ লওয়া ও করায়ত্ত করা। আলোচ্য আয়াতে আল্লাহ বলেন, প্রাণীদের প্রাণ সর্বাবস্থায় ও সর্বক্ষণই আল্লাহ্ তা'আলার আয়ত্ত্বাধীন। তিনি যখন ইচ্ছা তা হরণ করতে বা ফিরিয়ে নিতে পারেন। আল্লাহ তা'আলার এ কুদরত প্রত্যেক প্রাণীই প্রত্যহ দেখে ও অনুভব করে। নিদ্রার সময় তার প্রাণ আল্লাহ তা'আলার করায়ত্তে চলে যায় এবং ফিরিয়ে দেয়ার পর জাগ্রত হয়। অবশেষে এমন এক সময় আসবে, যখন তা সম্পূর্ণ করায়ত্ত হয়ে যাবে এবং ফিরে পাওয়া যাবে না। প্রাণ হরণ করা অর্থ তার সম্পর্ক দেহ থেকে বিচ্ছিন্ন করে দেয়া। কখনও বাহ্যিক ও আভ্যন্তরীণ সবদিক দিয়ে বিচ্ছিন্ন করে দেয়া হয়, এরই নাম মৃত্যু। আবার কখনও শুধু বাহিকভাবে বিচ্ছিন্ন করা হয়। আভ্যন্তরীণভাবে যোগাযোগ থাকে। এর ফলে কেবল বাহ্যিকভাবে জীবনের লক্ষণ, চেতনা ও ইচ্ছাভিত্তিক নড়াচড়ার শক্তি বিচ্ছিন্ন করে দেয়া হয় এবং আভ্যন্তরীণ দিক দিয়ে দেহের সাথে প্ৰাণের সম্পর্ক বাকী থাকে। ফলে সে শ্বাস গ্রহণ করে ও জীবিত থাকে। আলোচ্য আয়াতে توفى শব্দটি উপরোক্ত উভয় প্রকার প্রাণ হরণের অর্থকেই অন্তর্ভুক্ত করে। এখানে প্রথমে বড় মৃত্যুর কথা পরে ছাোট মৃত্যু বা ঘুমের কথা উল্লেখ করা হয়েছে। পবিত্র কুরআনের অন্যত্রও দু'ধরনের মৃত্যুর উল্লেখ করা হয়েছে। বলা হয়েছে,
وَهُوَ الَّذِي يَتَوَفَّاكُم بِاللَّيْلِ وَيَعْلَمُ مَا جَرَحْتُم بِالنَّهَارِ ثُمَّ يَبْعَثُكُمْ فِيهِ لِيُقْضَىٰ أَجَلٌ مُّسَمًّى ۖ ثُمَّ إِلَيْهِ مَرْجِعُكُمْ ثُمَّ يُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
“তিনিই রাতে তোমাদের মৃত্যু ঘটান এবং দিনে তোমরা যা কর তা তিনি জানেন। তারপর দিনে তোমাদেরকে তিনি আবার জীবিত করেন যাতে নির্ধারিত সময় পূর্ণ হয়। তারপর তাঁর দিকেই তোমাদের ফিরে যাওয়া। তারপর তোমরা যা কর সে সম্বন্ধে তিনি তোমাদেরকে অবহিত করবেন।" [সূরা আল-আন’আম: ৬০] এখানে প্রথমে ছোট মৃত্যু বা ঘুমের কথা, পরে বড় মৃত্যুর কথা বলা হয়েছে। [ইবন কাসীর]
মোটকথা: এ আয়াতে আল্লাহ তা'আলা প্রত্যেক মানুষকে এ অনুভূতি দিতে চাচ্ছেন যে, জীবন ও মৃত্যু কিভাবে তাঁর অসীম ক্ষমতার করায়ত্ব। শয়নে, জাগরণে, ঘরে অবস্থানের সময় কিংবা কোথাও চলাফেরা করার সময় মানব দেহের আভ্যন্তরীণ কোন ক্ৰটি অথবা বাইরের অজানা কোন বিপদ অকস্মাৎ এমন মোড় নিতে পারে যা তার মৃত্যু ঘটাতে পারে। যে মানুষ আল্লাহর হাতে এতটা অসহায় সে যদি সেই আল্লাহ সম্পর্কে এতটা অমনোযোগী ও বিদ্রোহী হয় তাহলে সে কত অজ্ঞ। সে জন্যই রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম ঘুমাবার আগে এবং ঘুম থেকে উঠে যে দো'আ করতেন তাতে রূহ ফেরত পাওয়ায় আল্লাহর শুকরিয়া আদায় করতেন। হাদীসে এসেছে, তিনি ঘুমাবার সময় বলতেন:
بِاسْمِكَ اللّٰهُمَّ أَمُوْتُ وَ أَخْيَا
“হে আল্লাহ! আপনার নামেই আমি মারা যাই এবং জীবিত হই।” আর যখন ঘুম থেকে জাগতেন তখন বলতেন:
الْحَمْدُللّٰهِ الَّذِيْ أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُوْرُ
“সকল প্রশংসা আল্লাহর জন্য যিনি আমাদেরকে আমাদের মৃত্যুর পর পুনরায় জীবিত করেছেন। আর তাঁর কাছেই আমরা উত্থিত হবো।” [বুখারী: ৬৩১২]
آية رقم 43
তবে কি তারা আল্লাহ্ ছাড়া অন্যকে সুপারিশকারী ধরেছে? বলুন, 'তারা কোন কিছুর মালিক না হলেও এবং তারা না বুঝলেও?’
آية رقم 44
বলুন, 'সকল সুপারিশ আল্লাহরই মালিকানাধীন, আসমানসমূহ ও যমীনের মালিকানা তাঁরই, তারপর তাঁরই কাছে তোমাদেরকে প্রত্যাবর্তন করা হবে।'
آية رقم 45
আর যখন শুধু এক আল্লাহর কথা বলা হয় তখন যারা আখিরাতে বিশ্বাস করে না, তাদের অন্তর বিতৃষ্ণায় সংকুচিত হয়। আর আল্লাহর পরিবর্তে অন্য মাবুদগুলোর উল্লেখ করা হলে তখনই তারা আনন্দে উল্লসিত হয়।
آية رقم 46
বলুন, 'হে আল্লাহ, আসমানসমূহ ও যমীনের স্রষ্টা, গায়েব ও উপস্থিত বিষয়াদির জ্ঞানী, আপনিই আপনার বান্দাদের মধ্যে সে বিষয়ের ফয়সালা করে দিবেন যাতে তারা মতবিরোধ করছে [১]।'
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[১] আব্দুর রহমান ইবন আওফ রাদিয়াল্লাহু ‘আনহু বলেন, আমি আয়েশা রাদিয়াল্লাহু ‘আনহাকে জিজ্ঞেস করলাম, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম তাহাজ্জদের সালাত কি দ্বারা শুরু করতেন? তিনি বললেন, তিনি যখন তাহাজ্জদের জন্যে উঠতেন, তখন এ দো’আ পাঠ করতেন:
اللَّهُمَّ رَبَّ جِبْرَائِيلَ وَمِيكَائِيلَ وَإِسْرَافِيلَ فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ أَنْتَ تَحْكُمُ بَيْنَ عِبَادِكَ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ اهْدِنِي لِمَا اخْتُلِفَ فِيهِ مِنَ الْحَقِّ بِإِذْنِكَ إِنَّكَ تَهْدِي مَنْ تَشَاءُ إِلَى صِرَاطٍ مُسْتَقِيمٍ
হে আল্লাহ! জিবরীল, মীকাইল ও ঈসরাফীলের প্রভু, আসমানসমূহ ও যমীনের প্রভু, গায়েব ও প্রত্যক্ষ সবকিছুর জ্ঞানী, আপনিই আপনার বান্দারা যে সব বিষয়ে মতবিরোধ করছে তাতে ফয়সালা করবেন। যে ব্যাপারে মতবিরোধ করা হয়েছে তাতে আপনার অনুমতিক্রমে আমাকে সত্য-সঠিক পথ দিন। নিশ্চয় আপনি যাকে ইচ্ছা তাকে সরল সোজা পথের হেদায়েত করেন। [মুসলিম: ৭৭০]
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[১] আব্দুর রহমান ইবন আওফ রাদিয়াল্লাহু ‘আনহু বলেন, আমি আয়েশা রাদিয়াল্লাহু ‘আনহাকে জিজ্ঞেস করলাম, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম তাহাজ্জদের সালাত কি দ্বারা শুরু করতেন? তিনি বললেন, তিনি যখন তাহাজ্জদের জন্যে উঠতেন, তখন এ দো’আ পাঠ করতেন:
اللَّهُمَّ رَبَّ جِبْرَائِيلَ وَمِيكَائِيلَ وَإِسْرَافِيلَ فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ أَنْتَ تَحْكُمُ بَيْنَ عِبَادِكَ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ اهْدِنِي لِمَا اخْتُلِفَ فِيهِ مِنَ الْحَقِّ بِإِذْنِكَ إِنَّكَ تَهْدِي مَنْ تَشَاءُ إِلَى صِرَاطٍ مُسْتَقِيمٍ
হে আল্লাহ! জিবরীল, মীকাইল ও ঈসরাফীলের প্রভু, আসমানসমূহ ও যমীনের প্রভু, গায়েব ও প্রত্যক্ষ সবকিছুর জ্ঞানী, আপনিই আপনার বান্দারা যে সব বিষয়ে মতবিরোধ করছে তাতে ফয়সালা করবেন। যে ব্যাপারে মতবিরোধ করা হয়েছে তাতে আপনার অনুমতিক্রমে আমাকে সত্য-সঠিক পথ দিন। নিশ্চয় আপনি যাকে ইচ্ছা তাকে সরল সোজা পথের হেদায়েত করেন। [মুসলিম: ৭৭০]
آية رقم 47
আর যারা যুলুম করেছে, যদি যমীনে যা আছে তা সম্পূর্ণ এবং তার সাথে এর সমপরিমাণও তাদের হয়, তবে কিয়ামতের দিন কঠিন শাস্তি হতে মুক্তিপণস্বরূপ তার সবটুকুই তারা দিয়ে দেবে এবং তাদের জন্য আল্লাহর কাছ থেকে এমন কিছু প্ৰকাশিত হবে যা তারা ধারণাও করেনি।
آية رقم 48
আর তারা যা অর্জন করেছিল তার মন্দ ফল তাদের কাছে প্ৰকাশ হয়ে পড়বে এবং তারা যা নিয়ে ঠাট্টা-বিদ্রুপ করত তা তাদেরকে পরিবেষ্টন করবে।
آية رقم 49
অতঃপর যখন কোন বিপদ-আপদ মানুষকে স্পর্শ করে, তখন সে আমাদেরকে ডাকে; তারপর যখন তাকে আমরা আমাদের কোন নিয়ামতের অধিকারী করি তখন সে বলে, 'আমাকে এটা দেয়া হয়েছে কেবল আমার জ্ঞানের কারণে।' বরং এটা এক পরীক্ষা, কিন্তু তাদের বেশীর ভাগই তা জানে না।
آية رقم 50
অবশ্যই তাদের পূর্ববর্তীরা এটা বলত, কিন্তু তারা যা অর্জন করেছে তা তাদের কোন কাজে আসেনি।
آية رقم 51
সুতরাং তাদের কৃতকর্মের মন্দ ফল তাদের উপর আপতিত হয়েছে, তাদের মধ্যে যারা যুলুম করে তাদের উপরও শীঘ্রই আপতিত হবে তারা যা অর্জন করেছে তার মন্দ ফল এবং তারা অপারগ করতে পারবে না।
آية رقم 52
তারা কি জানে না, আল্লাহ যার জন্য ইচ্ছে রিযিক প্রশস্ত করেন, আর সীমিত করেন? নিশ্চয় এতে নিদর্শনাবলী রয়েছে এমন সম্প্রদায়ের জন্য, যারা ঈমান আনে।
آية رقم 53
বলুন, 'হে আমার বান্দাগণ! তোমরা যারা নিজেদের প্রতি অবিচার করেছ---আল্লাহর অনুগ্রহ হতে নিরাশ হয়ো না; নিশ্চয় আল্লাহ সমস্ত গোনাহ ক্ষমা করে দেবেন। নিশ্চয় তিনি ক্ষমাশীল, পরম দয়ালু [১]।'
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[১] ইবনে আব্বাস রাদিয়াল্লাহু ‘আনহুমা বলেন, কিছু লোক ছিল, যারা অন্যায় হত্যা করেছিল এবং অনেক করেছিল। আরও কিছু লোক ছিল, যারা ব্যভিচার করেছিল এবং অনেক করেছিল। তারা এসে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম এর কাছে আরজ করল: আপনি যে ধর্মের দাওয়াত দেন, তা তো খুবই উত্তম, কিন্তু চিন্তার বিষয় হল এই যে, আমরা অনেক জঘন্য গোনাহ করে ফেলেছি। আমরা যদি ইসলাম গ্রহণ করি, তবে আমাদের তওবা কবুল হবে কি? এর পরিপ্রেক্ষিতেই আলোচ্য আয়াত অবতীর্ণ হয় ৷ [বুখারী: ৪৮১০, মুসলিম: ১২২]
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[১] ইবনে আব্বাস রাদিয়াল্লাহু ‘আনহুমা বলেন, কিছু লোক ছিল, যারা অন্যায় হত্যা করেছিল এবং অনেক করেছিল। আরও কিছু লোক ছিল, যারা ব্যভিচার করেছিল এবং অনেক করেছিল। তারা এসে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম এর কাছে আরজ করল: আপনি যে ধর্মের দাওয়াত দেন, তা তো খুবই উত্তম, কিন্তু চিন্তার বিষয় হল এই যে, আমরা অনেক জঘন্য গোনাহ করে ফেলেছি। আমরা যদি ইসলাম গ্রহণ করি, তবে আমাদের তওবা কবুল হবে কি? এর পরিপ্রেক্ষিতেই আলোচ্য আয়াত অবতীর্ণ হয় ৷ [বুখারী: ৪৮১০, মুসলিম: ১২২]
آية رقم 54
আর তোমরা তোমাদের রবের অভিমুখী হও এবং তাঁর কাছে আত্মসমর্পণ কর তোমাদের কাছে শাস্তি আসার আগে; তার পরে তোমাদেরকে সাহায্য করা হবে না।
آية رقم 55
আর তোমরা তোমাদের প্রতি তোমাদের রবের কাছ থেকে উত্তম যা নাযিল করা হয়েছে তার অনুসরণ কর [১], তোমাদের উপর অতর্কিতভাবে শাস্তি আসার আগে, অথচ তোমরা উপলব্ধিও করতে পারবে না।
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[১] এখানে উত্তম অবতীর্ণ বিষয়’ বলে কুরআনকে বোঝানো হয়েছে। সমগ্র কুরআনই উত্তম। একে এদিক দিয়েও উত্তম বলা যায় যে, আল্লাহর পক্ষ থেকে তওরাত, ইঞ্জীল, যাবুর ইত্যাদি যত কিতাব অবতীর্ণ হয়েছে, তন্মধ্যে উত্তম ও পূর্ণতম কিতাব হচ্ছে কুরআন। অথবা, আল্লাহর কিতাবের সর্বোত্তম দিকসমূহ অনুসরণ করার অর্থ হচ্ছে, আল্লাহ তা'আলা যেসব কাজের নির্দেশ দিয়েছেন মানুষ তা পালন করবে। তিনি যেসব কাজ করতে নিষেধ করেছেন তা থেকে বিরত থাকবে এবং উপমা ও কিস্সা-কাহিনীতে যা বলেছেন তা থেকে শিক্ষা ও উপদেশ গ্ৰহণ করবে। অপরদিকে যে ব্যক্তি তাঁর নির্দেশ থেকে মুখ ফিরিয়ে নেয়, নিষিদ্ধ কাজসমূহ করে এবং আল্লাহর উপদেশ বাণীর কানা কড়িও মূল্য দেয় না, সে আল্লাহর কিতাবের এমন দিক গ্ৰহণ করে যাকে আল্লাহর কিতাব নিকৃষ্টতম দিক বলে আখ্যায়িত করে। [মুয়াসসার]
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[১] এখানে উত্তম অবতীর্ণ বিষয়’ বলে কুরআনকে বোঝানো হয়েছে। সমগ্র কুরআনই উত্তম। একে এদিক দিয়েও উত্তম বলা যায় যে, আল্লাহর পক্ষ থেকে তওরাত, ইঞ্জীল, যাবুর ইত্যাদি যত কিতাব অবতীর্ণ হয়েছে, তন্মধ্যে উত্তম ও পূর্ণতম কিতাব হচ্ছে কুরআন। অথবা, আল্লাহর কিতাবের সর্বোত্তম দিকসমূহ অনুসরণ করার অর্থ হচ্ছে, আল্লাহ তা'আলা যেসব কাজের নির্দেশ দিয়েছেন মানুষ তা পালন করবে। তিনি যেসব কাজ করতে নিষেধ করেছেন তা থেকে বিরত থাকবে এবং উপমা ও কিস্সা-কাহিনীতে যা বলেছেন তা থেকে শিক্ষা ও উপদেশ গ্ৰহণ করবে। অপরদিকে যে ব্যক্তি তাঁর নির্দেশ থেকে মুখ ফিরিয়ে নেয়, নিষিদ্ধ কাজসমূহ করে এবং আল্লাহর উপদেশ বাণীর কানা কড়িও মূল্য দেয় না, সে আল্লাহর কিতাবের এমন দিক গ্ৰহণ করে যাকে আল্লাহর কিতাব নিকৃষ্টতম দিক বলে আখ্যায়িত করে। [মুয়াসসার]
آية رقم 56
যাতে কাউকেও বলতে না হয়, ‘হায় আফসোস! আল্লাহর প্রতি আমার কর্তব্যে আমি যে শৈথিল্য করেছি তার জন্য [১]! আর আমি তো ঠাট্টাকারীদের অন্তর্ভুক্ত ছিলাম।'
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[১] হাদীসে এসেছে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন, ‘প্রত্যেক জাহান্নামবাসীকেই জান্নাতে তার যে স্থানটি ছিল তা দেখানো হবে, তখন সে বলবে, হায় যদি আল্লাহ আমাকে হিদায়াত করত! ফলে তা তার জন্য আফসোসের কারণ হবে। আর প্রত্যেক জান্নাতবাসীকেই জাহান্নামে তার যে স্থানটি ছিল তা দেখানো হবে; তখন সে বলবে, হায় যদি আল্লাহ আমাকে হিদায়াত না করত তবে আমার কি হতো! ফলে সেটা তার জন্য কৃতজ্ঞতা প্রকাশ হিসেবে দেখা দিবে। তারপর রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম এ আয়াতটি তেলাওয়াত করলেন।’ [মুস্তাদরাকে হাকিম: ২/৪৩৫]
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[১] হাদীসে এসেছে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন, ‘প্রত্যেক জাহান্নামবাসীকেই জান্নাতে তার যে স্থানটি ছিল তা দেখানো হবে, তখন সে বলবে, হায় যদি আল্লাহ আমাকে হিদায়াত করত! ফলে তা তার জন্য আফসোসের কারণ হবে। আর প্রত্যেক জান্নাতবাসীকেই জাহান্নামে তার যে স্থানটি ছিল তা দেখানো হবে; তখন সে বলবে, হায় যদি আল্লাহ আমাকে হিদায়াত না করত তবে আমার কি হতো! ফলে সেটা তার জন্য কৃতজ্ঞতা প্রকাশ হিসেবে দেখা দিবে। তারপর রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম এ আয়াতটি তেলাওয়াত করলেন।’ [মুস্তাদরাকে হাকিম: ২/৪৩৫]
آية رقم 57
অথবা কেউ যেন না বলে, ‘হায়! আল্লাহ আমাকে হিদায়াত করলে আমি তো অবশ্যই মুত্তাকীদের অন্তর্ভুক্ত হতাম।'
آية رقم 58
অথবা শাস্তি দেখতে পেলে যেন কাউকেও বলতে না হয়, ‘হায়! যদি একবার আমি ফিরে যেতে পারতাম তবে আমি মুহসিনদের অন্তর্ভুক্ত হতাম!'
آية رقم 59
হ্যাঁ, অবশ্যই আমার নিদর্শন তোমার কাছে এসেছিল, কিন্তু তুমি এগুলোতে মিথ্যারোপ করেছিলে এবং অহংকার করেছিলে; আর তুমি ছিলে কাফিরদের অন্তর্ভুক্ত।
آية رقم 60
আর যারা আল্লাহর প্রতি মিথ্যা আরোপ করে, আপনি কিয়ামতের দিন তাদের চেহারাসমূহ কালো দেখবেন। অহংকারীদের আবাসস্থল কি জাহান্নাম নয়?
آية رقم 61
আর যারা তাকওয়া অবলম্বন করেছে, আল্লাহ্ তাদেরকে উদ্ধার করবেন তাদের সাফল্যসহ; তাদেরকে অমঙ্গল স্পর্শ করবে না এবং তারা চিন্তিতও হবে না।
آية رقم 62
আল্লাহ সব কিছুর স্রষ্টা এবং তিনি সমস্ত কিছুর তত্ত্বাবধায়ক।
آية رقم 63
আসমানসমূহ ও যমীনের চাবিসমূহ তাঁরই কাছে [১]। আর যারা আল্লাহর আয়াতসমূহকে অস্বীকার করে তারাই ক্ষতিগ্রস্ত।
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[১] চাবি কারও হাতে থাকা তার মালিক ও নিয়ন্ত্রক হওয়ার লক্ষণ। তাই আয়াতের মর্মার্থ দাঁড়ায় এই যে, আকাশে ও পৃথিবীতে লুকায়িত সকল ভাণ্ডারের চাবি আল্লাহর হাতে। তিনিই এগুলোর রক্ষক, তিনিই নিয়ন্ত্রক, যখন ইচ্ছা যাকে ইচ্ছা যে পরিমাণ ইচ্ছা দান করেন এবং যাকে ইচ্ছা দান করবেন আর যাকে ইচ্ছা দান করেন না [মুয়াসসার, তাবারী]
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[১] চাবি কারও হাতে থাকা তার মালিক ও নিয়ন্ত্রক হওয়ার লক্ষণ। তাই আয়াতের মর্মার্থ দাঁড়ায় এই যে, আকাশে ও পৃথিবীতে লুকায়িত সকল ভাণ্ডারের চাবি আল্লাহর হাতে। তিনিই এগুলোর রক্ষক, তিনিই নিয়ন্ত্রক, যখন ইচ্ছা যাকে ইচ্ছা যে পরিমাণ ইচ্ছা দান করেন এবং যাকে ইচ্ছা দান করবেন আর যাকে ইচ্ছা দান করেন না [মুয়াসসার, তাবারী]
آية رقم 64
বলুন, 'হে অজ্ঞরা! তোমরা কি আমাকে আল্লাহ ছাড়া অন্যের ইবাদাত করতে নির্দেশ দিচ্ছ?'
آية رقم 65
আর আপনার প্রতি ও আপনার পুর্ববর্তীদের প্রতি অবশ্যই ওহী করা হয়েছে যে, 'যদি আপনি শির্ক করেন তবে আপনার সমস্ত আমল তো নিষ্ফল হবে এবং অবশ্যই আপনি হবেন ক্ষতিগ্রস্তদের অন্তর্ভুক্ত।
آية رقم 66
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'বরং আপনি আল্লাহরই ইবাদাত করুন এবং কৃতজ্ঞদের অন্তর্ভুক্ত হোন।'
آية رقم 67
আর তারা আল্লাহকে যথোচিত সম্মান করেনি অথচ কিয়ামতের দিন সমস্ত যমীন থাকবে তাঁর হাতের মুঠিতে এবং আসমানসমূহ থাকবে ভাঁজ করা অবস্থায় তাঁর ডান হাতে [১]। পবিত্র ও মহান তিনি, তারা যাদেরকে শরীক করে তিনি তাদের উর্ধ্বে।
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[১] কেয়ামতের দিন পৃথিবী আল্লাহর মুঠোতে থাকবে এবং আকাশ ভাঁজ করা অবস্থায় তার ডান হাতে থাকবে। আলেমগণের মতে আক্ষরিক অর্থেই এমনটি হবে। যার স্বরূপ আল্লাহ ব্যতীত অন্য কেউ জানে না। এ আয়াতের ভাষ্য থেকে জানা যায় যে, আল্লাহ তা'আলার মুঠি” ও “ডান হাত’ আছে। এ দুটি আল্লাহর অন্যান্য গুণাগুণের মতই দুটি গুণ। এগুলোতে বিশ্বাস করতে হবে। এগুলোর অর্থ সাব্যস্ত করতে হবে। কিন্তু পরিচিত কোন অবয়ব দেয়া যাবে না। একথা মানতে হবে যে, আল্লাহর সত্ত্বা যেমন আমরা না দেখে সাব্যস্ত করছি তেমনিভাবে তার গুণও নাদেখে সাব্যস্ত করব। যমীন আল্লাহ তা'আলার হাতের মুঠিতে থাকা এবং আসমান ডান হাতে পেঁচানো থাকার মাধ্যমে মহান আল্লাহর সঠিক মর্যাদা, বড়ত্ব ও সম্মান সম্পর্কে মানুষকে কিছুটা ধারণা দেয়া হয়েছে। কিয়ামতের দিন সমস্ত মানুষ (যারা আজ আল্লাহর বড়ত্ব ও মহত্বের অনুমান করতেও অক্ষম) নিজ চোখে দেখতে পাবে যমীন ও আসমান আল্লাহর হাতে একটা নগণ্যতম বল ও ছোট একটি রুমালের মত। হাদীসে এসেছে, একবার নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম মিম্বরে উঠে খুতবা দিচ্ছিলেন। খুতবা দানের সময় তিনি এ আয়াতটি তিলাওয়াত করলেন এবং বললেনঃ আল্লাহ তা'আলা আসমান ও যমীনকে (অর্থাৎ গ্রহসমূহকে) তাঁর মুষ্ঠির মধ্যে নিয়ে এমনভাবে ঘুরাবেন যেমন শিশুরা বল ঘুরিয়ে থাকে। এবং বলবেনঃ আমি একমাত্র আল্লাহ। আমি বাদশাহ। আমি সর্বশক্তিমান। আমি বড়ত্ব ও শ্রেষ্ঠত্বের মালিক। কোথায় পৃথিবীর বাদশাহ? কোথায় শক্তিমানরা? কোথায় অহংকারীরা? এভাবে বলতে বলতে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম এমনভাবে কাঁপতে থাকলেন যে, তিনি মিম্বারসহ পড়ে না যান আমাদের সে ভয় হতে লাগলো। [মুসলিম:২৭৮৮] অপর হাদীসে এসেছে, ইয়াহুদী এক আলেম এসে রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামকে বললেন: হে মুহাম্মাদ! আমরা আমাদের কিতাবে পাই যে, আল্লাহ তা’আলা আসমানসমূহকে এক আঙ্গুলো রাখবেন, যমীনসমূহকে অপর আঙ্গুলো রাখবেন, গাছ-গাছালীকে এক আঙ্গুলে রাখবেন, পানি ও মাটিকে এক আঙ্গুলো রাখবেন আর সমস্ত সৃষ্টিকে অপর আঙ্গুলে রাখবেন, তারপর বলবেন; আমিই বাদশাহ্! তখন রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম এই ইয়াহুদী আলেমের বক্তব্যের সমর্থনে এমনভাবে হাসলেন যে, তার মাড়ির দাঁত পর্যন্ত দেখা গিয়েছিল। অতঃপর রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম এ আয়াত তেলাওয়াত করলেন। [বুখারী: ৪৮১১] অন্য এক হাদীসে এসেছে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: আল্লাহ তা’আলা যমীনকে মুষ্ঠিবদ্ধ করবেন। আর আসমানসমূহকে ডানহাতে গুটিয়ে রাখবেন তারপর বলবেন; আমিই বাদশাহ! কোথায় দুনিয়ার বাদশাহরা? [বুখারী: ৪৮১২, মুসলিম: ২৭৮১] অপর এক হাদীসে এসেছে, আয়েশা রাদিয়াল্লাহু আনহা বলেন: আমি রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামকে বললাম, হে আল্লাহর রাসূল! “কিয়ামতের দিন সমস্ত যমীন থাকবে তাঁর হাতের মুঠিতে এবং আসমানসমূহ থাকবে ভাঁজ করা অবস্থায় তাঁর ডান হাতে।” সেদিন ঈমানদারগণ কোথায় থাকবে? তিনি বললেন: হে আয়েশা! সিরাতের (পুলসিরাতের) উপরে থাকবে। [তিরমিয়ী: ৩২৪২]
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[১] কেয়ামতের দিন পৃথিবী আল্লাহর মুঠোতে থাকবে এবং আকাশ ভাঁজ করা অবস্থায় তার ডান হাতে থাকবে। আলেমগণের মতে আক্ষরিক অর্থেই এমনটি হবে। যার স্বরূপ আল্লাহ ব্যতীত অন্য কেউ জানে না। এ আয়াতের ভাষ্য থেকে জানা যায় যে, আল্লাহ তা'আলার মুঠি” ও “ডান হাত’ আছে। এ দুটি আল্লাহর অন্যান্য গুণাগুণের মতই দুটি গুণ। এগুলোতে বিশ্বাস করতে হবে। এগুলোর অর্থ সাব্যস্ত করতে হবে। কিন্তু পরিচিত কোন অবয়ব দেয়া যাবে না। একথা মানতে হবে যে, আল্লাহর সত্ত্বা যেমন আমরা না দেখে সাব্যস্ত করছি তেমনিভাবে তার গুণও নাদেখে সাব্যস্ত করব। যমীন আল্লাহ তা'আলার হাতের মুঠিতে থাকা এবং আসমান ডান হাতে পেঁচানো থাকার মাধ্যমে মহান আল্লাহর সঠিক মর্যাদা, বড়ত্ব ও সম্মান সম্পর্কে মানুষকে কিছুটা ধারণা দেয়া হয়েছে। কিয়ামতের দিন সমস্ত মানুষ (যারা আজ আল্লাহর বড়ত্ব ও মহত্বের অনুমান করতেও অক্ষম) নিজ চোখে দেখতে পাবে যমীন ও আসমান আল্লাহর হাতে একটা নগণ্যতম বল ও ছোট একটি রুমালের মত। হাদীসে এসেছে, একবার নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম মিম্বরে উঠে খুতবা দিচ্ছিলেন। খুতবা দানের সময় তিনি এ আয়াতটি তিলাওয়াত করলেন এবং বললেনঃ আল্লাহ তা'আলা আসমান ও যমীনকে (অর্থাৎ গ্রহসমূহকে) তাঁর মুষ্ঠির মধ্যে নিয়ে এমনভাবে ঘুরাবেন যেমন শিশুরা বল ঘুরিয়ে থাকে। এবং বলবেনঃ আমি একমাত্র আল্লাহ। আমি বাদশাহ। আমি সর্বশক্তিমান। আমি বড়ত্ব ও শ্রেষ্ঠত্বের মালিক। কোথায় পৃথিবীর বাদশাহ? কোথায় শক্তিমানরা? কোথায় অহংকারীরা? এভাবে বলতে বলতে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম এমনভাবে কাঁপতে থাকলেন যে, তিনি মিম্বারসহ পড়ে না যান আমাদের সে ভয় হতে লাগলো। [মুসলিম:২৭৮৮] অপর হাদীসে এসেছে, ইয়াহুদী এক আলেম এসে রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামকে বললেন: হে মুহাম্মাদ! আমরা আমাদের কিতাবে পাই যে, আল্লাহ তা’আলা আসমানসমূহকে এক আঙ্গুলো রাখবেন, যমীনসমূহকে অপর আঙ্গুলো রাখবেন, গাছ-গাছালীকে এক আঙ্গুলে রাখবেন, পানি ও মাটিকে এক আঙ্গুলো রাখবেন আর সমস্ত সৃষ্টিকে অপর আঙ্গুলে রাখবেন, তারপর বলবেন; আমিই বাদশাহ্! তখন রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম এই ইয়াহুদী আলেমের বক্তব্যের সমর্থনে এমনভাবে হাসলেন যে, তার মাড়ির দাঁত পর্যন্ত দেখা গিয়েছিল। অতঃপর রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম এ আয়াত তেলাওয়াত করলেন। [বুখারী: ৪৮১১] অন্য এক হাদীসে এসেছে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: আল্লাহ তা’আলা যমীনকে মুষ্ঠিবদ্ধ করবেন। আর আসমানসমূহকে ডানহাতে গুটিয়ে রাখবেন তারপর বলবেন; আমিই বাদশাহ! কোথায় দুনিয়ার বাদশাহরা? [বুখারী: ৪৮১২, মুসলিম: ২৭৮১] অপর এক হাদীসে এসেছে, আয়েশা রাদিয়াল্লাহু আনহা বলেন: আমি রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামকে বললাম, হে আল্লাহর রাসূল! “কিয়ামতের দিন সমস্ত যমীন থাকবে তাঁর হাতের মুঠিতে এবং আসমানসমূহ থাকবে ভাঁজ করা অবস্থায় তাঁর ডান হাতে।” সেদিন ঈমানদারগণ কোথায় থাকবে? তিনি বললেন: হে আয়েশা! সিরাতের (পুলসিরাতের) উপরে থাকবে। [তিরমিয়ী: ৩২৪২]
آية رقم 68
আর শিংগায় ফুঁক দেয়া হবে [১], ফলে আসমানসমূহে যারা আছে ও যমীনে যারা আছে তারা সবাই বেহুশ হয়ে পড়বে, যাদেরকে আল্লাহ ইচ্ছা করেন তারা ছাড়া [২]। তারপর আবার শিংগায় ফুঁক দেয়া হবে [৩], ফলে তৎক্ষণাৎ তারা দাঁড়িয়ে তাকাতে থাকবে।
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[১] হাদীসে এসেছে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন, কিভাবে আমি শান্তিতে থাকিব অথচ শিঙ্গাওয়ালা (ইসরাফীল) শিঙ্গা মুখে পুরে আছে, তার কপাল টান করে আছে এবং কান খাড়া করে আছে, অপেক্ষা করছে কখন তাকে ফুঁক দেয়ার নির্দেশ দেয়া হবে আর সে ফুঁক দিবে। তখন মুসলিমরা বললো, হে আল্লাহ্র রাসূল! তাহলে আমরা কি বলবো? তিনি বললেন, তোমরা বলো,
حَسْبُنَا اللهُ وَنبعْمَ الْوَكِيْلُ، تَوَكَّلْنَا عِلٰى اللهِ رَبِّنَا
“আমাদের জন্য আল্লাহই যথেষ্ঠ; আর তিনি কতইনা উত্তম কর্মবিধায়ক, আমরা আমাদের রব আল্লাহর উপরই তাওয়াকুল করছি।’ [তিরমিয়ী: ৩২৪৩]
[২] হাদীসে এসেছে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: শিঙ্গায় ফুঁক দেয়ার পর প্রথম আমি মাথা উঠাবো তখন দেখতে পাবো যে, মূসা ‘আরশ ধরে আছেন। আমি জানিনা তিনি কি এভাবেই ছিলেন নাকি শিঙ্গায় ফুঁক দেয়ার পরে হুশে এসে এরূপ করেছেন ৷ [বুখারী: ৪৮১৩]
[৩] প্রথম ও দ্বিতীয় ফুঁক দেয়ার মধ্যবর্তী সময়ের ব্যবধান বর্ণনায় এক হাদীসে এসেছে যে, তা চল্লিশ হবে। বর্ণনাকারী আবু হুরাইরা রাদিয়াল্লাহু আনহুকে জিজ্ঞেস করলেন: চল্লিশ দিন? তিনি বললেন: আমি তা বলতে অস্বীকার করছি। তারা বললো: চল্লিশ বছর? তিনি বললেন: আমি তাও বলতে অস্বীকার করছি। তারা বললো: চল্লিশ মাস? তিনি বললেন: আমি তাও অস্বীকার করছি। আর মানুষের সবকিছুই পঁচে যাবে তবে তার নিম্নাংশের এক টুকরো ছাড়া। যার উপর মানুষ পুনরায় সংযোজিত হবে। [বুখারী: ৪৮১৪]
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[১] হাদীসে এসেছে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন, কিভাবে আমি শান্তিতে থাকিব অথচ শিঙ্গাওয়ালা (ইসরাফীল) শিঙ্গা মুখে পুরে আছে, তার কপাল টান করে আছে এবং কান খাড়া করে আছে, অপেক্ষা করছে কখন তাকে ফুঁক দেয়ার নির্দেশ দেয়া হবে আর সে ফুঁক দিবে। তখন মুসলিমরা বললো, হে আল্লাহ্র রাসূল! তাহলে আমরা কি বলবো? তিনি বললেন, তোমরা বলো,
حَسْبُنَا اللهُ وَنبعْمَ الْوَكِيْلُ، تَوَكَّلْنَا عِلٰى اللهِ رَبِّنَا
“আমাদের জন্য আল্লাহই যথেষ্ঠ; আর তিনি কতইনা উত্তম কর্মবিধায়ক, আমরা আমাদের রব আল্লাহর উপরই তাওয়াকুল করছি।’ [তিরমিয়ী: ৩২৪৩]
[২] হাদীসে এসেছে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: শিঙ্গায় ফুঁক দেয়ার পর প্রথম আমি মাথা উঠাবো তখন দেখতে পাবো যে, মূসা ‘আরশ ধরে আছেন। আমি জানিনা তিনি কি এভাবেই ছিলেন নাকি শিঙ্গায় ফুঁক দেয়ার পরে হুশে এসে এরূপ করেছেন ৷ [বুখারী: ৪৮১৩]
[৩] প্রথম ও দ্বিতীয় ফুঁক দেয়ার মধ্যবর্তী সময়ের ব্যবধান বর্ণনায় এক হাদীসে এসেছে যে, তা চল্লিশ হবে। বর্ণনাকারী আবু হুরাইরা রাদিয়াল্লাহু আনহুকে জিজ্ঞেস করলেন: চল্লিশ দিন? তিনি বললেন: আমি তা বলতে অস্বীকার করছি। তারা বললো: চল্লিশ বছর? তিনি বললেন: আমি তাও বলতে অস্বীকার করছি। তারা বললো: চল্লিশ মাস? তিনি বললেন: আমি তাও অস্বীকার করছি। আর মানুষের সবকিছুই পঁচে যাবে তবে তার নিম্নাংশের এক টুকরো ছাড়া। যার উপর মানুষ পুনরায় সংযোজিত হবে। [বুখারী: ৪৮১৪]
آية رقم 69
আর যমীন তার প্রভুর নূরে উদ্ভাসিত হবে এবং আমলনামা পেশ করা হবে। আর নবীগণকে ও সাক্ষীগণকে উপস্থিত করা হবে [১] এবং সকলের মধ্যে ন্যায় বিচার করা হবে এমতাবস্থায় যে, তাদের প্রতি যুলুম করা হবে না।
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[১] অর্থাৎ হাশরের ময়দানে হিসাব-নিকাশের সময় সমস্ত নবী-রাসুলগণও উপস্থিত থাকবেন এবং অন্যান্য সাক্ষীও উপস্থিত থাকবে। সাক্ষীগণের এ তালিকায় থাকবেন মুহাম্মাদ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম। যেমন অন্য আয়াতে এসেছে,
فَكَيْفَ إِذَا جِئْنَا مِن كُلِّ أُمَّةٍ بِشَهِيدٍ وَجِئْنَا بِكَ عَلَىٰ هَٰؤُلَاءِ شَهِيدًا
“অতঃপর যখন আমরা প্রত্যেক উম্মত হতে একজন সাক্ষী উপস্থিত করব এবং আপনাকে তাদের বিরুদ্ধে সাক্ষীরূপে উপস্থিত করব তখন কি অবস্থা হবে ?” [সূরা আন-নিসা: ৪১] অনুরূপভাবে ফেরেশতাগণও। যেমন, এক আয়াতে আছে,
وَجَاءَتْ كُلُّ نَفْسٍ مَّعَهَا سَائِقٌ وَشَهِيدٌ
“আর সেদিন প্রত্যেক ব্যক্তি উপস্থিত হবে, তার সঙ্গে থাকবে চালক ও সাক্ষী ৷” [সূরা ক্বাফ: ২১]। তদ্রুপ উম্মতে মোহাম্মদীও থাকবে। যেমন, এক আয়াতে বলা হয়েছে,
وَتَكُوْنُوْ اشُهَدَآءَعَلَى النَّاسِ
“এবং তোমরা সাক্ষীস্বরূপ হও মানুষের জন্য।” [সূরা আল-হাজ: ৭৮] কোন কোন মুফাসসিরের মতে, আল্লাহর পথে যারা শহীদ হয়েছেন তারাও থাকবেন এবং স্বয়ং মানুষের অঙ্গ-প্রত্যঙ্গও থাকবে। যেমন, কুরআনে বলা হয়েছে,
وَتُكَلِّمُنَا أَيْدِيهِمْ وَتَشْهَدُ أَرْجُلُهُم بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
“আর এদের হাত কথা বলবে আমাদের সাথে এবং এদের পা সাক্ষ্য দেবে এদের কৃতকর্মের।” [সূরা ইয়াসীন: ৬৫] [আরো দেখুন-কুরতুবী]
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[১] অর্থাৎ হাশরের ময়দানে হিসাব-নিকাশের সময় সমস্ত নবী-রাসুলগণও উপস্থিত থাকবেন এবং অন্যান্য সাক্ষীও উপস্থিত থাকবে। সাক্ষীগণের এ তালিকায় থাকবেন মুহাম্মাদ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম। যেমন অন্য আয়াতে এসেছে,
فَكَيْفَ إِذَا جِئْنَا مِن كُلِّ أُمَّةٍ بِشَهِيدٍ وَجِئْنَا بِكَ عَلَىٰ هَٰؤُلَاءِ شَهِيدًا
“অতঃপর যখন আমরা প্রত্যেক উম্মত হতে একজন সাক্ষী উপস্থিত করব এবং আপনাকে তাদের বিরুদ্ধে সাক্ষীরূপে উপস্থিত করব তখন কি অবস্থা হবে ?” [সূরা আন-নিসা: ৪১] অনুরূপভাবে ফেরেশতাগণও। যেমন, এক আয়াতে আছে,
وَجَاءَتْ كُلُّ نَفْسٍ مَّعَهَا سَائِقٌ وَشَهِيدٌ
“আর সেদিন প্রত্যেক ব্যক্তি উপস্থিত হবে, তার সঙ্গে থাকবে চালক ও সাক্ষী ৷” [সূরা ক্বাফ: ২১]। তদ্রুপ উম্মতে মোহাম্মদীও থাকবে। যেমন, এক আয়াতে বলা হয়েছে,
وَتَكُوْنُوْ اشُهَدَآءَعَلَى النَّاسِ
“এবং তোমরা সাক্ষীস্বরূপ হও মানুষের জন্য।” [সূরা আল-হাজ: ৭৮] কোন কোন মুফাসসিরের মতে, আল্লাহর পথে যারা শহীদ হয়েছেন তারাও থাকবেন এবং স্বয়ং মানুষের অঙ্গ-প্রত্যঙ্গও থাকবে। যেমন, কুরআনে বলা হয়েছে,
وَتُكَلِّمُنَا أَيْدِيهِمْ وَتَشْهَدُ أَرْجُلُهُم بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
“আর এদের হাত কথা বলবে আমাদের সাথে এবং এদের পা সাক্ষ্য দেবে এদের কৃতকর্মের।” [সূরা ইয়াসীন: ৬৫] [আরো দেখুন-কুরতুবী]
آية رقم 70
আর প্রত্যেককে তার আমলের পূর্ণ প্রতিফল দেয়া হবে এবং তারা যা করে সে সম্পর্কে আল্লাহ্ সর্বাধিক অবগত।
آية رقم 71
আর কাফিরদেরকে জাহান্নামের দিকে দলে দলে হাঁকিয়ে নিয়ে যাওয়া হবে [১]। অবশেষে যখন তারা জাহান্নামের কাছে আসবে তখন এর দরজাগুলো খুলে দেওয়া হবে এবং জাহান্নামের রক্ষীরা তাদেরকে বলবে, 'তোমাদের কাছে কি তোমাদের মধ্য থেকে রাসূল আসেনি যারা তোমাদের কাছে তোমাদের রবের আয়াতসমূহ তেলাওয়াত করত এবং এ দিনের সাক্ষাত সম্বন্ধে তোমাদেরকে সতর্ক করত?' তারা বলবে, 'অবশ্যই হ্যাঁ।' কিন্তু শাস্তির বাণী কাফিরদের উপর বাস্তবায়িত হয়েছে।
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[১] আল্লাহ্ তা'আলা কাফের দূর্ভাগাদের অবস্থা বর্ণনা করছেন, কিভাবে তাদেরকে জাহান্নামের দিকে হাঁকিয়ে নিয়ে যাওয়া হবে। তাদেরকে সেদিকে অত্যন্ত কঠোর, ধমক ও কর্কশভাবে নেয়া হবে। যেমন অন্যত্র বলেছেন, "যেদিন তাদেরকে ধাক্কা মারতে মারতে নিয়ে যাওয়া হবে জাহান্নামের আগুনের দিকে" [সূরা আত-তুর: ১৩] এমতাবস্থায় যে, তারা থাকবে পিপাসার্ত ও ক্ষুধার্তা। যেমন অন্য আয়াতে এসেছে, “এবং অপরাধীদেরকে তৃষ্ণাতুর অবস্থায় জাহান্নামের দিকে হাঁকিয়ে নিয়ে যাব।” [সূরা মারইয়াম: ৮৬] তাদের অবস্থা হবে এমন যে, তারা বোবা, বধির ও অন্ধ হবে। তাদের মধ্যে কেউ কেউ মুখের উপর ভর দিয়ে চলবে। আল্লাহ বলেন, “আর আল্লাহ যাদেরকে পথনির্দেশ করেন তারা তো পথপ্রাপ্ত এবং যাদেরকে তিনি পথভ্রষ্ট করেন আপনি কখনো তাদের জন্য তাঁকে ছাড়া অন্য কাউকে অভিভাবক পাবেন না। আর কিয়ামতের দিন আমরা তাদেরকে সমবেত করব তাদের মুখে ভর দিয়ে চলা অবস্থায় অন্ধ, মূক ও বধির করে। তাদের আবাসস্থল জাহান্নাম; যখনই তা স্তিমিত হবে তখনই আমরা তাদের জন্য আগুনের শিখা বৃদ্ধি করে দেব।" [সূরা আল-ইসরা: ৯৭]
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[১] আল্লাহ্ তা'আলা কাফের দূর্ভাগাদের অবস্থা বর্ণনা করছেন, কিভাবে তাদেরকে জাহান্নামের দিকে হাঁকিয়ে নিয়ে যাওয়া হবে। তাদেরকে সেদিকে অত্যন্ত কঠোর, ধমক ও কর্কশভাবে নেয়া হবে। যেমন অন্যত্র বলেছেন, "যেদিন তাদেরকে ধাক্কা মারতে মারতে নিয়ে যাওয়া হবে জাহান্নামের আগুনের দিকে" [সূরা আত-তুর: ১৩] এমতাবস্থায় যে, তারা থাকবে পিপাসার্ত ও ক্ষুধার্তা। যেমন অন্য আয়াতে এসেছে, “এবং অপরাধীদেরকে তৃষ্ণাতুর অবস্থায় জাহান্নামের দিকে হাঁকিয়ে নিয়ে যাব।” [সূরা মারইয়াম: ৮৬] তাদের অবস্থা হবে এমন যে, তারা বোবা, বধির ও অন্ধ হবে। তাদের মধ্যে কেউ কেউ মুখের উপর ভর দিয়ে চলবে। আল্লাহ বলেন, “আর আল্লাহ যাদেরকে পথনির্দেশ করেন তারা তো পথপ্রাপ্ত এবং যাদেরকে তিনি পথভ্রষ্ট করেন আপনি কখনো তাদের জন্য তাঁকে ছাড়া অন্য কাউকে অভিভাবক পাবেন না। আর কিয়ামতের দিন আমরা তাদেরকে সমবেত করব তাদের মুখে ভর দিয়ে চলা অবস্থায় অন্ধ, মূক ও বধির করে। তাদের আবাসস্থল জাহান্নাম; যখনই তা স্তিমিত হবে তখনই আমরা তাদের জন্য আগুনের শিখা বৃদ্ধি করে দেব।" [সূরা আল-ইসরা: ৯৭]
آية رقم 72
বলা হবে, 'তোমরা জাহান্নামের দরজাসমূহে প্রবেশ কর তাতে স্থায়ীভাবে অবস্থিতির জন্য। অতএব অহংকারীদের আবাসস্থল কত নিকৃষ্ট!'
آية رقم 73
আর যারা তাদের রবের তাকওয়া অবলম্বন করেছে তাদেরকে দলে দলে জান্নাতের দিকে নিয়ে যাওয়া হবে। অবশেষে যখন তারা জান্নাতের কাছে আসবে এবং এর দরজাসমূহ খুলে দেয়া হবে এবং জান্নাতের রক্ষীরা তাদেরকে বলবে, 'তোমাদের প্রতি সালাম’, তোমরা ভাল ছিলে [১] সুতরাং জান্নাতে প্রবেশ কর স্থায়ীভাবে অবস্থিতির জন্য। '
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[১] মুজাহিদ বলেন, অর্থাৎ তোমরা আল্লাহর আনুগত্য অত্যন্ত সুন্দরভাবে করতে। [তাবারী]
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[১] মুজাহিদ বলেন, অর্থাৎ তোমরা আল্লাহর আনুগত্য অত্যন্ত সুন্দরভাবে করতে। [তাবারী]
آية رقم 74
আর তারা (প্ৰবেশ করে) বলবে, ‘সকল প্ৰশংসা আল্লাহর, যিনি আমাদের প্রতি তাঁর প্রতিশ্রুতি সত্য করেছেন [১] এবং আমাদেরকে অধিকারী করেছেন এ যমীনের; আমরা জান্নাতে যেখানে ইচ্ছে বসবাসের জায়গা করে নেব।' অতএব নেক আমলকারীদের পুরস্কার কত উত্তম!
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[১] অর্থাৎ যে ওয়াদা তিনি তার সম্মানিত রাসূলদের মাধ্যমে ঈমানদারদেরকে দিয়েছেন। যেমন তারা দুনিয়াতেও এ দো'আ করেছিল “হে আমাদের রব! আপনার রাসূলগণের মাধ্যমে আমাদেরকে যা দিতে প্ৰতিশ্রুতি দিয়েছেন তা আমাদেরকে দান করুন এবং কেয়ামতের দিন আমাদেরকে হেয় করবেন না। নিশ্চয় আপনি প্রতিশ্রুতির ব্যতিক্রম করেন না।” [সূরা আলে ইমরান: ১৯৪]
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[১] অর্থাৎ যে ওয়াদা তিনি তার সম্মানিত রাসূলদের মাধ্যমে ঈমানদারদেরকে দিয়েছেন। যেমন তারা দুনিয়াতেও এ দো'আ করেছিল “হে আমাদের রব! আপনার রাসূলগণের মাধ্যমে আমাদেরকে যা দিতে প্ৰতিশ্রুতি দিয়েছেন তা আমাদেরকে দান করুন এবং কেয়ামতের দিন আমাদেরকে হেয় করবেন না। নিশ্চয় আপনি প্রতিশ্রুতির ব্যতিক্রম করেন না।” [সূরা আলে ইমরান: ১৯৪]
آية رقم 75
আর আপনি ফেরেশতাদেরকে দেখতে পাবেন যে, তারা 'আরশের চারপাশে ঘিরে তাদের রবের সপ্ৰশংস পবিত্ৰতা ও মহিমা ঘোষণা করছে। আর তাদের মধ্যে বিচার করা হবে ন্যায়ের সাথে এবং বলা হবে, সকল প্রশংসা সৃষ্টিকুলের রব আল্লাহর প্রাপ্য।
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