ترجمة معاني سورة النحل باللغة البنغالية من كتاب الترجمة البنغالية للمختصر في تفسير القرآن الكريم

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عادل صلاحي

الترجمة البنغالية للمختصر في تفسير القرآن الكريم

১. হে কাফিররা! আল্লাহ তা‘আলা তোমাদেরকে শাস্তি দেয়ার যে ফায়সালা করেছেন তা নিকটবর্তী। তাই তোমরা সময়ের আগে তা দ্রæত কামনা করো না। মুশরিকরা আল্লাহর যে অংশীদার সাব্যস্ত করেছে তা থেকে তিনি পূত-পবিত্র।
২. আল্লাহ তা‘আলা তাঁর ফায়সালার ওহী নিয়ে তাঁর রাসূলদের মধ্যকার যাকে চান তাঁর নিকট ফিরিশতা নাযিল করেন। হে রাসূলগণ! আপনারা মানুষদেরকে আল্লাহর সাথে শিরক করা থেকে ভীতি প্রদর্শন করুন। কারণ, আমি ছাড়া সত্য কোন মা’বূদ নেই। তাই হে মানুষ! তোমরা আমার আদেশ-নিষেধ মেনে আমাকেই ভয় করো।
آية رقم 3
৩. আল্লাহ তা‘আলা আকাশ ও জমিনকে পূর্বের বিনা নমুনায় সত্যিকারার্থেই তৈরি করেছেন। এগুলোকে তিনি অনর্থক তৈরি করেননি। বরং তিনি এগুলোকে সৃষ্টি করেছেন তাঁর মহত্তে¡র ব্যাপারে প্রমাণ গ্রহণের জন্য। তাঁর সাথে তারা যে অন্যকে শরীক করে তা থেকে তিনি পবিত্র।
آية رقم 4
৪. তিনি নগণ্য বীর্য থেকে মানুষকে সৃষ্টি করেছেন। অতঃপর এক সৃষ্টির পর আরেক সৃষ্টিতে তার উন্নতি হয়েছে। অথচ সে আজ সত্যকে মুছে দেয়ার জন্য বাতিলের পক্ষে প্রকাশ্যে কঠিন ঝগড়াটে সেজে বসেছে।
৫. হে মানুষ! তিনি উট, গরু ও ছাগল জাতীয় চতুষ্পদ জন্তুকে তোমাদের উপকারের জন্য সৃষ্টি করেছেন। সুবিধাগুলোর একটি হলো সেগুলোর পশম দিয়ে উষ্ণতা গ্রহণ করা। এ ছাড়াও সেগুলোর দুধে, চামড়ায় ও পৃষ্ঠদেশে অনেক উপকার রয়েছে। এমনকি সেগুলো তোমরা খেতেও পারো।
آية رقم 6
৬. তাতে তোমাদের জন্য সৌন্দর্যও রয়েছে যখন তোমরা সকালে উপনীত হও এবং যখন তোমরা সেগুলোকে সকালে চরানোর জন্য বের করে নাও।
৭. তোমাদের জন্য সৃষ্ট এ চতুষ্পদ জন্তুগুলো সফরের সময় তোমাদের ভারী সামানগুলো এমন এলাকায় নিয়ে যায় যেখানে তোমরা নিজেদেরকে ভীষণ কষ্ট দেয়া ছাড়া পৌঁছুতে পারতে না। হে মানুষ! নিশ্চয়ই তোমাদের প্রতিপালক বড়ই দয়ালু ও মেহেরবান। যেহেতু তিনি এ পশুগুলোকে তোমাদের অধীন করেছেন।
৮. তেমনিভাবে আল্লাহ তা‘আলা তোমাদের আরোহণ, সামান বহন করা ও মানুষের মাঝে তোমাদের সৌন্দর্য বিকাশের জন্য ঘোড়া, খচ্চর ও গাধা সৃষ্টি করেছেন। তিনি আরো বিভিন্ন আরোহণের মাধ্যম সৃষ্টি করবেন যা তোমরা জানো না।
৯. আল্লাহরই দায়িত্ব সঠিক পথের বর্ণনা দেয়া। যা তাঁর সন্তুষ্টির দিকে পৌঁছিয়ে দিবে। তা হলো ইসলাম। আর কিছু পথ রয়েছে মূলতঃ শয়তানের পথ। যা সত্যভ্রষ্ট। ইসলামের পথ ছাড়া সকল পথই মূলতঃ বাঁকা। আল্লাহ যদি চাইতেন তোমাদের সকলকে ঈমানের তাওফীক দিতে তাহলে তিনি তোমাদের সকলকে সে তাওফীক দিতে পারতেন।
১০. তিনিই তোমাদের জন্য মেঘ থেকে পানি নাযিল করেন। যে পানি থেকে তোমরাও পান করো এবং তোমাদের পশুগুলোও পান করে। উপরন্তু তা থেকে বৃক্ষলতাও উৎপন্ন হয় যার মধ্যে তোমরা নিজেদের পশুগুলো চরাও।
১১. আল্লাহ তা‘আলা এ পানি থেকে তোমাদের জন্য উৎপন্ন করেন ফসল যা তোমরা খাও। তিনি আরো উৎপন্ন করেন তোমাদের জন্য যাইতুন, খেজুর ও আঙ্গুর। তেমনিভাবে তিনি তোমাদের জন্য সকল ধরনের ফলও উৎপন্ন করেন। নিশ্চয়ই এ পানি ও তা থেকে যা উৎপন্ন হয় তাতে আল্লাহর সৃষ্টি নিয়ে চিন্তাশীলদের জন্য তাঁর কুদরতের বিশেষ প্রমাণ রয়েছে। তারা এ থেকে তাঁর মহত্তে¡র প্রমাণ গ্রহণ করে।
১২. আল্লাহ তা‘আলা তোমাদের প্রশান্তি ও আরামের জন্য রাতকে এবং জীবিকা উপার্জনের জন্য দিনকে তোমাদের অধীন করে দিয়েছেন। তেমনিভাবে তিনি সূর্য ও চন্দ্রকে তোমাদের অধীন করে সেগুলোকে প্রখর ও ¯িœগ্ধ আলোতে রূপান্তরিত করেছেন। অনুরূপভাবে তাঁর নির্ধারিত আদেশে নক্ষত্রগুলোও তোমাদের অধীনস্থ। সেগুলোর মাধ্যমে তোমরা জল ও স্থলের অন্ধকারে পথ খুঁজে পাও এবং সময় ও অন্য বিষয়াদি জানতে পারো। নিশ্চয়ই এ সবগুলোর নিয়ন্ত্রণে বুদ্ধিমান জাতির জন্য আল্লাহর কুদরতের সুস্পষ্ট প্রমাণ রয়েছে। কারণ, তারাই এগুলোর হিকমত বুঝতে পারে।
১৩. তেমনিভাবে তিনি জমিনে যে হরেক রকমের খনিজদ্রব্য, পশু, উদ্ভিদ ও ফসল সৃষ্টি করেছেন সেগুলোকেও তিনি তোমাদের অধীন করেছেন। নিশ্চয়ই উল্লিখিত এ সৃষ্টিরাজি ও তা অধীন করার মাঝে সেই সম্প্রদায়ের জন্য আল্লাহর কুদরতের এক সুস্পষ্ট প্রমাণ রয়েছে যারা তা দ্বারা শিক্ষা গ্রহণ করে এবং বুঝে যে, নিশ্চয়ই আল্লাহ তা‘আলা ক্ষমতাধর ও নিয়ামত দানকারী।
১৪. তিনিই তোমাদের জন্য সাগরকে অধীন করেছেন তথা তোমাদেরকে তার উপর চলতে ও তার মধ্যকার ভাÐার বের করে আনার সুযোগ দিয়েছেন। যাতে তোমরা সেখানকার শিকার করা মাছের তাজা ও নরম গোস্ত খেতে পারো এবং সেখান থেকে সৌন্দর্যের এমন ভ‚ষণ বের করে আনতে পারো যা তোমরা ও তোমাদের স্ত্রীরা পরতে পারে যেমন: মণিমুক্তা। আর আপনি নৌযানগুলোকে দেখেন সাগরের ঢেউগুলোর বুক চিরে চলতে। আশা করা যায় যে, তোমরা এ নৌযানগুলোতে চড়ে ব্যবসায়িক লাভের মাধ্যমে আল্লাহর অনুগ্রহ হাসিল করবে এবং আল্লাহর নিয়ামতের কৃতজ্ঞতা আদায় ও একক উপাস্য হিসেবে তাঁরই ইবাদাত করবে।
১৫. তিনি জমিনকে স্থিতিশীল রাখার জন্য তাতে অনেকগুলো পাহাড় স্থাপন করেছেন। যাতে তা তোমাদেরকে নিয়ে নড়াচড়া না করে ও হেলে না যায়। তেমনিভাবে তিনি সেখানে অনেকগুলো নদী চালু করেছেন। যেন তোমরা সেখান থেকে পানি পান করতে পারো এবং নিজেদের পশু ও ক্ষেত-খামারে পানি সরবরাহ করতে পারো। তিনি আরো সেখানে চলার জন্য অনেকগুলো পথ তৈরি করেছেন। ফলে তোমরা পথভ্রষ্ট না হয়ে নিজেদের উদ্দেশ্যে পৌঁছাতে পারো।
آية رقم 16
১৬. তেমনিভাবে তিনি তোমাদের জন্য জমিনে কিছু সুস্পষ্ট আলামত রেখেছেন দিনের বেলায় চলার পথে সেগুলো কর্তৃক সঠিক পথ খুঁজে পাওয়ার জন্য। তিনি রাতের বেলায় সঠিক পথ খুঁজে পাওয়ার জন্য আকাশে তারকারাজিও রেখেছেন।
آية رقم 17
১৭. যিনি এ সবসহ অন্যান্য সকল কিছু সৃষ্টি করেছেন তিনি কি তার মতো যে কোন কিছুই সৃষ্টি করেনি?! তোমরা কি সবকিছুর ¯্রষ্টা আল্লাহর মহত্তে¡র কথা স্মরণ করে এবং যে কোন কিছুই সৃষ্টি করতে পারে না তাকে তাঁর সাথে শরীক না করে এককভাবে শুধু তাঁরই ইবাদাত করবে না?
১৮. হে মানুষ! তোমরা যদি নিজেদের উপরে আল্লাহর দেয়া প্রচুর নিয়ামতকে গণনা ও সেগুলোর সংখ্যা নিরূপণের চেষ্টা করো তাহলে তোমরা সেগুলোর আধিক্য ও রকমারিত্বের কারণে তা গণনা করে শেষ করতে পারবে না। নিশ্চয়ই আল্লাহ তা‘আলা ক্ষমাশীল। সেহেতু তিনি তাঁর কৃতজ্ঞতা থেকে গাফিল হওয়ার দরুন তোমাদেরকে পাকড়াও করেননি। অনন্তর তিনি দয়ালু। তাই তিনি তাঁর কৃতজ্ঞতায় ত্রæটি ও গুনাহের দরুন তোমাদের নিয়ামত বন্ধ করে দেননি।
آية رقم 19
১৯. হে বান্দারা! আল্লাহ তা‘আলা তোমাদের গোপন ও প্রকাশ্য আমল সম্পর্কে ভালোই জানেন। তাঁর নিকট এগুলোর কোন কিছুই অজানা নয়। তিনি অচিরেই তোমাদেরকে এগুলোর প্রতিদান দিবেন।
২০. মুশরিকরা আল্লাহকে বাদ দিয়ে যাদের ইবাদাত করে তারা অতি সামান্য কিছুও তৈরি করতে পারবে না। বরং যারা আল্লাহকে বাদ দিয়ে তাদের ইবাদাত করছে তারাই ওদেরকে সৃষ্টি করেছে। সুতরাং তারা নিজেদের হাত দিয়ে যে মূর্তিগুলোকে তৈরি করেছে তারা আল্লাহকে বাদ দিয়ে সেগুলোর কেন ইবাদাত করবে?!
آية رقم 21
২১. মূর্তিপূজারীরা যে মূর্তিগুলোকে নিজেদের হাতে তৈরি করেছে সেগুলো জড় পদার্থও বটে। যাতে কোন জীবন ও জ্ঞান নেই। তারা জানে না তাদেরকে কখন তাদের পূজারীদেরসহ পুনরুত্থিত করে কিয়ামতের দিন জাহান্নামের আগুনে নিক্ষেপ করা হবে।
২২. তোমাদের সত্যিকারের মা’বূদ হলো এক ও অদ্বিতীয়। যার কোন শরীক নেই। তিনি হলেন আল্লাহ। আর যারা প্রতিদানের জন্য পুনরুত্থানে বিশ্বাসী নয় তাদের অন্তরগুলো নির্ভয় হওয়ার দরুন আল্লাহর এককত্বকে অস্বীকার করে। সেগুলো কোন হিসাবেও বিশ্বাস করে না, আবার কোন শাস্তিকেও ভয় করে না। তারা মূলতঃ অহঙ্কারী। তারা সত্যকে গ্রহণ করে না, আবার সত্যের প্রতি অনুগতও হয় না।
২৩. এরা যে আমলগুলোকে প্রকাশ্যে ও গোপনে করে নিশ্চয়ই আল্লাহ তা‘আলা সত্যিকারার্থে তা সবই জানেন। তাঁর নিকট কোন কিছুই গোপন নয়। তিনি অচিরেই সেগুলোর প্রতিদান দিবেন। নিশ্চয়ই আল্লাহ তা‘আলা তাঁর ইবাদাত ও তাঁর সামনে নতি স্বীকারের প্রতি যারা অহঙ্কার দেখায় তাদেরকে ভালোবাসেন না। বরং তিনি তাদেরকে কঠিন ঘৃণা করেন।
২৪. যারা আল্লাহর এককত্ব ও পুনরুত্থানকে অস্বীকার করে তাদেরকে যখন বলা হয়, আল্লাহ তা‘আলা মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) এর উপর কী নাযিল করেছেন? তখন তারা বলে, তিনি তার উপর কিছুই নাযিল করেননি। বরং সে নিজ থেকেই কিছু পূর্ববর্তীদের ঘটনা ও মিথ্যা কাহিনী নিয়ে এসেছে।
২৫. যেন তাদের পরিণতি এমন হয় যে, তারা নিজেদের গুনাহ তো পুরোপুরি বহন করবেই সাথে সাথে যাদেরকে তারা মূর্খতা ও অন্ধ অনুকরণের ভিত্তিতে ইসলাম থেকে পথভ্রষ্ট করেছে তাদের গুনাহও তারা বহন করবে। তারা নিজেদের ও তাদের অনুসারীদের যে গুনাহের বোঝা বহন করবে তা কতোই না নিকৃষ্ট বোঝা।
২৬. ইতিপূর্বে কাফিররা রাসূলদের বিরুদ্ধে অনেক ষড়যন্ত্র করেছে। আল্লাহ তা‘আলা তাদের ঘরবাড়ীসমূহ সমূলে ধ্বংস করে দিয়েছেন। ফলে সে ঘরগুলো তাদের মাথার উপর ছাদসহ ভেঙ্গে পড়ে এবং অনাকাক্সিক্ষতভাবে তাদের উপর আযাব নেমে আসে। তারা ধারণা করছিলো যে, তাদের ঘরগুলো তাদেরকে রক্ষা করবে। অথচ সেগুলোর মাধ্যমেই তাদের ধ্বংস আসে।
২৭. আল্লাহ তা‘আলা কিয়ামতের দিন শাস্তির মাধ্যমে তাদেরকে লাঞ্ছিত ও অপমানিত করে বলবেন: কোথায় সেই অংশীদারগুলো যাদেরকে তোমরা আমার ইবাদাতে শরীক করতে এবং সে জন্য তোমরা আমার নবী ও মু’মিনদেরকে শত্রæ মনে করতে? ঐশী জ্ঞানপ্রাপ্ত আলিমরা বললেন: নিশ্চয়ই অবমাননা ও শাস্তি কিয়ামতের দিন কাফিরদের উপরই পতিত হবে।
২৮. মৃত্যুর ফিরিশতা ও তাঁর সহযোগী ফিরিশতারা যাদের রূহ এমতাবস্থায় কবজ করে যে, তারা তখনো আল্লাহর সাথে কুফরির মাধ্যমে নিজেদের উপর যুলুমে লিপ্ত। তারা সে সময় আত্মসমর্পণকরতঃ আনুগত্য করে এবং কুফরি ও গুনাহের কথা অস্বীকার করে। তাদের ধারণা যে, অস্বীকার তাদের উপকারে আসবে। তখন তাদেরকে বলা হয়, তোমরা মিথ্যুক। বরং তোমরা কাফির ছিলে ও গুনাহর কাজ করতে। আল্লাহ তা‘আলা জানেন তোমরা দুনিয়াতে কী করতে। তাঁর নিকট এর কোন কিছুই গোপন নয়। তিনি অচিরেই তোমাদেরকে এর প্রতিদান দিবেন।
২৯. তাদেরকে আরো বলা হয়, তোমরা নিজেদের আমল অনুসারে জাহান্নামের দরজাগুলো দিয়ে প্রবেশ করো। সেখানে তোমরা চিরকাল থাকবে। আল্লাহর উপর ঈমান ও তাঁর একক ইবাদাতের প্রতি যারা অহঙ্কার দেখায় তাদের জন্য এটি কতোই না নিকৃষ্ট স্থান।
৩০. আর যারা নিজেদের প্রতিপালকের আদেশ-নিষেধ মেনে তাঁকে ভয় করে তাদেরকে বলা হবে: তোমাদের প্রতিপালক তোমাদের নবী মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) এর উপর কী নাযিল করেছেন? তারা উত্তরে বলবে: আল্লাহ তা‘আলা তাঁর উপর মহা কল্যাণ নাযিল করেছেন। যারা এ দুনিয়ার জীবনে আল্লাহর ইবাদাত ও তাঁর সৃষ্টির সাথে আচরণ ভালো করেছে তাদের জন্য রয়েছে ভালো প্রতিদান তথা রিযিকের প্রশস্ততা ও সাহায্য। বস্তুতঃ আল্লাহ তা‘আলা তাদের জন্য আখিরাতে যে প্রতিদান রেখেছেন তা দুনিয়ার নগদ প্রতিদানের চেয়ে অনেক উত্তম। নিজেদের প্রতিপালকের আদেশ-নিষেধ মেনে যারা তাঁকে ভয় করে তাদের আখিরাতের ঘর কতোই না উত্তম ঘর।
৩১. তাদের জন্য স্থিতিশীলতা ও স্থায়িত্বের জান্নাতসমূহ। যেখানে তারা প্রবেশ করবে। যেগুলোর অট্টালিকা ও গাছের নিচ দিয়ে অনেকগুলো নদী প্রবাহিত হবে। এ জান্নাতগুলোতে তাদের মনের চাহিদানুযায়ী বহু ধরনের খাদ্য, পানীয় এবং অন্যান্য সবকিছু রয়েছে। মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) এর উম্মতের মুত্তাকীদেরকে যা প্রতিদান হিসেবে দেয়া হবে। তেমনিভাবে পূর্ববর্তী উম্মতের মুত্তাকীদেরকেও দেয়া হবে।
৩২. মৃত্যুর ফিরিশতা ও তাঁর সহযোগী ফিরিশতারা যাদের রূহ এমতাবস্থায় কবজ করে যে, তাদের অন্তরাত্মা কুফরি থেকে পবিত্র রয়েছে, তাদেরকে ফিরিশতারা এ বলে সম্বোধন করে যে, তোমাদের উপর শান্তি বর্ষিত হোক। তোমরা সকল বিপদ থেকে মুক্ত। তোমরা দুনিয়াতে যে বিশুদ্ধ আকীদা পোষণ ও নেক আমল করতে সেগুলোর বিনিময়ে জান্নাতে প্রবেশ করো।
৩৩. এ মিথ্যারোপকারী মুশরিকরা কি অপেক্ষা করে যে, তাদের রূহ কবজ এবং তাদের চেহারা ও পশ্চাদ্দেশে মরার জন্য মৃত্যুর ফিরিশতা ও তাঁর সহযোগীরা একদা তাদের নিকট নেমে আসবে অথবা শাস্তির মাধ্যমে দুনিয়াতে তাদের মূলোৎপাটনের জন্য আল্লাহর আদেশ নেমে আসবে? মক্কায় মুশরিকরা যে কাজ করে তেমনই করেছিলো পূর্বেকার মুশরিকরা। ফলে আল্লাহ তাদেরকে ধ্বংস করে দিয়েছেন। তাদেরকে ধ্বংস করার সময় আল্লাহ কোন যুলুম করেননি। বরং তারা নিজেরাই আল্লাহর সাথে কুফরি করে নিজেদেরকে ধ্বংসের দ্বারে উপনীত করে নিজেদের উপর যুলুম করেছে।
৩৪. ফলে তাদের উপর নিজেদের কৃতকার্যের শাস্তি নেমে এসেছে এবং তাদেরকে সে শাস্তিই বেষ্টন করেছে যা তাদেরকে যখন স্মরণ করিয়ে দেয়া হতো তখন তা নিয়ে তারা ঠাট্টা-বিদ্রƒপ করতো।
৩৫. যারা আল্লাহর সাথে নিজেদের ইবাদাতে অন্যকে শরীক বানিয়েছে তারা বলে: আল্লাহ যদি চাইতেন যে, আমরা এককভাবে তাঁরই ইবাদাত করি এবং তাঁর সাথে শিরক না করি তাহলে আমরা কখনোই তাঁকে বাদ দিয়ে অন্যের ইবাদাত করতাম না। না আমরা, না আমাদের পূর্ববর্তী বাপ-দাদারা। তিনি যদি চাইতেন আমরা কোন বস্তুকে হারাম না করি তাহলে আমরা তা হারাম করতাম না। এ বাতিল যুক্তি পূর্বের কাফিররাও দিয়েছে। তাই রাসূলদের দায়িত্ব হলো যা প্রচারের আদেশ তাদেরকে দেয়া হয়েছে সুস্পষ্টভাবে তাই প্রচার করা। আর তারা তাই প্রচার করেছে। তাকদীরের ওজর দেখিয়ে তাদের কোন ফায়েদা নেই। কারণ, আল্লাহ তা‘আলা তাদেরকে ইচ্ছা ও এখতিয়ার দিয়েছেন এবং তাদের নিকট তাঁর রাসূলদেরকেও পাঠিয়েছেন।
৩৬. আমি পূর্বের সকল উম্মতের নিকট রাসূল পাঠিয়েছি। যিনি তাঁর উম্মতকে আল্লাহর একক ইবাদাত করতে ও আল্লাহ ছাড়া অন্য সকল মূর্তি ও শয়তান ইত্যাদির ইবাদত ছাড়তে আদেশ করেন। অতঃপর তাদের মধ্যকার যাকে আল্লাহ তাওফীক দিয়েছেন সেই আল্লাহর উপর ঈমান এনেছে এবং তাঁর রাসূল আনীত বিধানের অনুসরণ করেছে। আর যে আল্লাহর সাথে কুফরি ও তাঁর রাসূলের বিরুদ্ধাচরণ করেছে তাকে তিনি তাওফীক দেননি। ফলে তার উপর ভ্রষ্টতা অবধারিত হয়েছে। সুতরাং তোমরা জমিনে ভ্রমণ করো। যাতে তোমরা নিজেদের চোখেই দেখতে পাও মিথ্যারোপকারীদের উপর শাস্তি ও ধ্বংস নেমে আসার পর তাদের পরিণতি কেমন হয়েছিলো।
৩৭. হে রাসূল! আপনি যদি নিজের সাধ্যমতো এদেরকে দা’ওয়াত দেয়ার চেষ্টা ও হিদায়েত প্রদানের আগ্রহ এবং এজন্য সকল পদক্ষেপও গ্রহণ করেন তারপরও আল্লাহ যাকে পথভ্রষ্ট করবেন তাকে তিনি হিদায়েতের তাওফীক দিবেন না। না তাদের জন্য আল্লাহ ছাড়া এমন কোন সাহায্যকারী রয়েছে যে তাদের পক্ষ নিয়ে শাস্তি প্রতিরোধ করবে।
৩৮. এ পুনরুত্থান অস্বীকারকারীরা বিশেষ তাকিদ দিয়ে কঠিনভাবে শক্ত কসম খেয়ে বলে যে, আল্লাহ তা‘আলা মৃত ব্যক্তিকে পুনরুত্থিত করবেন না। এ ব্যাপারে তাদের কোন প্রমাণ নেই। অবশ্যই তিনি প্রত্যেক মৃতকে পুনরুত্থিত করবেন। এটি আল্লাহর সত্য ওয়াদা। কিন্তু অধিকাংশ মানুষই জানে না যে, নিশ্চয়ই আল্লাহ তা‘আলা মৃতদেরকে পুনরুত্থিত করবেন। তাই তারা পুনরুত্থানকে অস্বীকার করে।
৩৯. আল্লাহ তা‘আলা কিয়ামতের দিন সবাইকে পুনরুত্থিত করবেন। যাতে করে তিনি তাদেরকে নিজেদের দ্ব›দ্বপূর্ণ বিষয়সমূহ তথা তাওহীদ, পুনরুত্থান ও নবুওয়াতের বাস্তবতা সুস্পষ্টভাবে জানিয়ে দিতে পারেন এবং কাফিররাও জানতে পারে যে, তারা নিশ্চয়ই আল্লাহর সাথে শরীকের দাবিতে এবং পুনরুত্থানকে অস্বীকারের ক্ষেত্রে সত্যিই মিথ্যাবাদী ছিলো।
৪০. আমি যখন মৃতদেরকে জীবিত করা এবং তাদের পুনরুত্থানের ইচ্ছা করি তখন কেউ আমাকে তা করতে বাধা দিতে পারে না। বস্তুতঃ আমি যখন কোন কিছু সৃষ্টির ইচ্ছা করি তখন আমি সেটিকে বলি, হয়ে যাও তখন তা অবশ্যম্ভাবীরূপে হয়ে যায়।
৪১. যারা কাফিরদের শাস্তি ও তাদের দীর্ঘ কোণঠাসার পর নিজেদের ঘর-বাড়ি, পরিবার ও ধন-সম্পদ পরিত্যাগ করে আল্লাহর সন্তুষ্টির উদ্দেশ্যে কুফরির এলাকা থেকে ইসলামের এলাকার দিকে হিজরত করেছে আমি অবশ্যই তাদেরকে দুনিয়াতে এমন এলাকায় অবস্থান দেবো যেখানে তারা সম্মানিত হবে। আর আখিরাতের প্রতিদান তো আরো বড়। কারণ, সেটির মধ্যে জান্নাতও রয়েছে। যদি হিজরত থেকে পেছনে পড়া লোকেরা মুহাজিরদের প্রতিদান জানতে পারতো তাহলে তারা তা থেকে অবশ্যই পেছনে পড়তো না।
آية رقم 42
৪২. আল্লাহর পথের এ মুহাজিররাই নিজেদের সম্প্রদায়ের দেয়া কষ্ট এবং নিজেদের পরিবার ও এলাকা ছেড়ে যাওয়া উপরন্তু আল্লাহর আনুগত্য ধৈর্যসহ মেনে নিয়েছে। তারাই একমাত্র নিজেদের প্রতিপালকের উপর সকল ব্যাপারে ভরসা করে। ফলে আল্লাহ তা‘আলা তাদেরকে এ মহা প্রতিদান দিয়েছেন।
৪৩. হে রাসূল! আমি আপনার পূর্বে পুরুষ মানুষদের নিকটই ওহী পাঠিয়েছি। আমি ইতিপূর্বে কোন ফিরিশতা রাসূল পাঠাইনি। এটিই হলো আমার সাধারণ নিয়ম। যদি তোমরা এটিকে অস্বীকার করো তাহলে পূর্ববর্তী কিতাবধারীদেরকে জিজ্ঞাসা করতে পারো। তারা তোমাদেরকে এ সংবাদ দিবে যে, রাসূলগণ মূলতঃ মানুষই ছিলেন। তাঁরা কখনো ফিরিশতা ছিলেন না।
৪৪. আমি এ মানুষ রাসূলগণকে সুস্পষ্ট প্রমাণ ও নাযিলকৃত কিতাব দিয়ে পাঠিয়েছি। আর হে রাসূল! আপনার উপর কুর‘আন নাযিল করেছি। যাতে আপনি মানুষের সামনে তাদের প্রয়োজনীয় বিষয়াদি সুস্পষ্টভাবে বলতে পারেন এবং তারা নিজেদের বুদ্ধি খাটিয়ে তার বিষয়বস্তু থেকে শিক্ষা গ্রহণ করতে পারে।
৪৫. যারা আল্লাহর পথ থেকে মানুষকে দূরে সরিয়ে দেয়ার জন্য ষড়যন্ত্রের পরিকল্পনা করেছে তারা কি এ ব্যাপারে নিরাপদ যে, আল্লাহ তা‘আলা তাদেরকে জমিনে ধ্বসিয়ে দিবেন না যেমনিভাবে ধ্বসিয়ে দিয়েছেন কারূনকে অথবা তাদের নিকট এমন জায়গা থেকে শাস্তি আসবে না তারা যেখান থেকে আসার অপেক্ষায় ছিলো না।
آية رقم 46
৪৬. অথবা তাদের সফররত অবস্থা ও কর্মব্যস্ত অবস্থায় তাদের নিকট আযাব আসবে না। সুতরাং তারা হাতছাড়াও হবে না এবং রক্ষাও পাবে না।
آية رقم 47
৪৭. না কি তারা এ ব্যাপারে নিরাপদ যে, তাদের ভীতি অবস্থায় তাদের উপর আল্লাহর আযাব আসবে না। বস্তুতঃ আল্লাহ তা‘আলা তাদেরকে সর্বাবস্থায় শাস্তি দিতে সক্ষম। নিশ্চয়ই তোমাদের প্রতিপালক অতি দয়ালু ও অত্যন্ত মেহেরবান। তিনি দ্রæত শাস্তি দেন না। যেন তাঁর বান্দারা তাওবার সুযোগ পায়।
৪৮. এ মিথ্যারোপকারীরা কি তাঁর সৃষ্টিজগতের দিকে একটু চিন্তাশীল দৃষ্টি দিয়ে দেখে না যে, সেগুলোর ছায়া দিনের বেলায় সূর্যের এবং রাতের বেলায় চন্দ্রের গতি ও নড়াচড়া অনুযায়ী নিজেদের প্রতিপালকের সামনে একান্ত অনুগত ও সাজদাবনত হয়ে ডানে-বাঁয়ে হেলে পড়ে। বস্তুতঃ সেগুলো হলো আল্লাহর ক্ষমতা ও নির্দেশ দ্বারা নিয়ন্ত্রিত ও বাধ্যগত।
৪৯. আকাশ ও জমিনের সকল প্রাণী কেবল আল্লাহর জন্য সাজদাহ করে। তেমনিভাবে ফিরিশতারাও কেবল তাঁরই জন্য সাজদাহ করে। তারা আল্লাহর ইবাদাত ও আনুগত্য থেকে অহঙ্কারবশত সামান্যও মুখ ফিরিয়ে নেয় না।
آية رقم 50
৫০. তারা সর্বদা তাঁর ইবাদাত ও আনুগত্যে থাকা সত্তে¡ও নিজেদের প্রতিপালককে ভয় করে। যিনি নিজ সত্তা, প্রতিপত্তি ও ক্ষমতায় তাদের সবার উপরে। তাদের প্রতিপালক তাদেরকে আনুগত্যের যে আদেশ করেন তারা তাই করে।
৫১. আল্লাহ তা‘আলা তাঁর সকল বান্দাদেরকে বলেন: তোমরা একাধিক মা’বূদ গ্রহণ করো না। নিশ্চয়ই সত্য মা’বূদ কেবল এক একক ও অদ্বিতীয়। যাঁর কোন শরীক নেই। তাই আমাকেই তোমরা ভয় করো। অন্য কাউকে ভয় করো না।
৫২. আকাশ ও জমিনের সবকিছুর ¯্রষ্টা, মালিক ও পরিকল্পনাকারী কেবল তিনিই। তাই তাঁর জন্যই কেবল আনুগত্য, বিনয় ও নিষ্ঠা অবধারিত। তোমরা কি আল্লাহ ছাড়া অন্য কাউকে ভয় করছো?! না, তা হয় না। বরং তোমরা কেবল তাঁকেই ভয় করো।
৫৩. হে মানুষ! তোমাদের নিকট দুনিয়ার ও ধর্মীয় যে নিয়ামত রয়েছে তা আল্লাহর পক্ষ থেকে; অন্য কারো পক্ষ থেকে নয়। অতঃপর তোমরা যখন কোন বিপদ, রোগ কিংবা দরিদ্রতার সম্মুখীন হও তখন কেবল দু‘আর মাধ্যমে তাঁরই নিকট ব্যাকুলতা প্রকাশ করে থাকো। যাতে তিনি তোমাদের বিপদ দূর করে দেন। অতএব, যিনি নিয়ামত দেন ও বিপদ দূর করেন কেবল তাঁরই ইবাদাত করা আবশ্যক।
৫৪. অতঃপর যখন তিনি তোমাদের দু‘আ কবুল করে তোমাদের কষ্ট দূর করে দেন তখন তোমাদের এক দল তাদের প্রতিপালকের সাথে শিরক করে। তথা তাঁর সাথে অন্যের ইবাদাত করে। এটি কী ধরনের হীনমন্যতা?!
آية رقم 55
৫৫. আল্লাহর সাথে শিরক করা মূলতঃ তাদেরকে তাঁর নিয়ামতের সাথে কুফরি করা শিখিয়েছে। আর তাঁর নিয়ামতগুলোর একটি হলো দুঃখ-দুর্দশা দূর করা। এজন্য তাদেরকে বলা হলো, তোমরা নিজেদের নিয়ামতগুলো ভোগ করো যতক্ষণ না আল্লাহর তাৎক্ষণিক বা পরবর্তী শাস্তি তোমাদের উপর নেমে আসে।
৫৬. মুশরিকরা নিজেদের কিছু অক্ষম ও অজ্ঞ মূর্তিগুলোর জন্য তাদের নৈকট্য লাভের আশায় আমার দেয়া সম্পদে ভাগ বসিয়েছে। অথচ সেগুলো জড়ো বস্তু। না কোন উপকার করতে পারে, না কোন ক্ষতি। হে মুশরিকরা! আল্লাহর কসম! কিয়ামতের দিন অবশ্যই তোমাদেরকে জিজ্ঞাসা করা হবে সে মূর্তিগুলো সম্পর্কে যেগুলোকে তোমরা ইলাহ মনে করতে। আর এটাও মনে করতে যে, তোমাদের সম্পদে তাদের ভাগ রয়েছে।
آية رقم 57
৫৭. মুশরিকরা আল্লাহর সাথে কন্যা সন্তানকে সম্পৃক্ত করে থাকে। তারা বিশ্বাস করে যে, ফিরিশতাগণ হলেন কন্যা সন্তান। এ মুশরিকরা তাঁর সাথে সন্তান থাকার বিষয়টি সম্পৃক্ত করেছে। অথচ তিনি এ থেকে একেবারেই পূত-পবিত্র। কী আশ্চর্য ব্যাপার! তারা তাঁর সাথে কন্যা সন্তানকেই সম্পৃক্ত করেছে। কিন্তু নিজেদের জন্য তা অপছন্দ করে। পক্ষান্তরে তারা নিজেদের জন্য নিজেদের পছন্দনীয় ছেলে সন্তানদেরকে নির্ধারণ করছে। এর চেয়ে বড় অপরাধ আর কি হতে পারে?!
৫৮. যখন এ মুশরিকদের কাউকে মেয়ে সন্তান জন্ম হওয়ার সংবাদ দেয়া হয় তখন সে এটাকে কঠিন দুঃসংবাদ ভাবে। ফলে তার চেহারা কালো এবং মন চিন্তা ও বিষণœতায় ভরে যায়। এতদসত্তে¡ও সে যা নিজের জন্য পছন্দ করে না তাই আল্লাহর সাথে সম্পৃক্ত করে!
৫৯. তাকে যে বিষয়ের সংবাদ দেয়া হয়েছে তার অনিষ্টতা থেকে বাঁচার জন্য নিজেকে স্বজাতির লোকসমাজ থেকে লুকিয়ে রাখতে চায়। সে মনে মনে বলে: এই কন্যা সন্তানকে সকল অপমান ও গøানির সাথেই গ্রহণ করবে, না কি তাকে জীবন্ত কবর দিয়ে মাটির নিচে পুঁতে রাখবে? বস্তুতঃ মুশরিকদের ফায়সালা কতোই না নিকৃষ্ট। তারা নিজেদের প্রতিপালকের জন্য তাই ফায়সালা করেছে যা তারা নিজেদের জন্য অপছন্দ করে।
৬০. যে কাফিররা পরকালে বিশ্বাস করে না তাদের মাঝে রয়েছে কিছু নিকৃষ্ট বৈশিষ্ট্য তথা ছেলে সন্তানের প্রয়োজনীয়তা, মূর্খতা ও কুফরি। আর আল্লাহর জন্য রয়েছে প্রশংসনীয় কিছু উঁচু মানের বৈশিষ্ট্যাবলী তথা মহিমা, পরিপূর্ণতা, সচ্ছলতা ও জ্ঞান। তিনি নিজ ক্ষমতায় পরাক্রমশালী। যাঁকে কেউ পরাজিত করতে পারে না। যিনি তাঁর সৃষ্টি, পরিকল্পনা ও আইন রচনায় অতি প্রজ্ঞাময়।
৬১. যদি আল্লাহ তা‘আলা মানুষদেরকে তাদের যুলুম ও কুফরির জন্য সর্বদা শাস্তি দিতেন তাহলে তিনি কোন মানুষ বা পশুকে জমিনের উপর বিচরণ করতে দিতেন না। তবে তিনি তাঁর জ্ঞান মুতাবিক তাদেরকে একটি নির্দিষ্ট সময় পর্যন্ত সুযোগ দিয়ে থাকেন। তাঁর জানা মতে সে নির্দিষ্ট সময় যখন চলে আসবে তখন তাদের মৃত্যুর সময়ের সামান্য কোন আগ-পিছ হবে না।
৬২. যে কন্যা সন্তানকে তারা নিজেদের সাথে সম্পৃক্ত করতে অপছন্দ করে তারা তাই আল্লাহর জন্য নির্ধারিত করেছে। উপরন্তু তারা আরো মিথ্যা বলে যে, যদি তাদেরকে সত্যিই পুনরুত্থিত করা হয় যা তাদের ধারণা তাহলে আল্লাহর নিকট তাদের অবশ্যই উচ্চ মর্যাদা রয়েছে। মূলতঃ তাদের জন্য অবশ্যই জাহান্নাম রয়েছে। তাদেরকে সেখানে ছেড়ে দেয়া হবে। সেখান থেকে তাদেরকে কখনোই বের করা হবে না।
৬৩. হে রাসূল! আল্লাহর কসম! আমি আপনার পূর্বের জাতিসমূহের নিকট অনেক রাসূল পাঠিয়েছি। অতঃপর শয়তান তাদের সামনে নিকৃষ্ট আমলগুলো তথা শিরক, কুফরি ও গুনাহকে সুন্দরভাবে উপস্থাপন করেছে। সে কিয়ামতের দিনে তাদের ধারণাকৃত সাহায্যকারী। অতএব, তারা যেন তার নিকট সাহায্য কামনা করে। তাদের জন্য রয়েছে কিয়ামতের দিন যন্ত্রণাদায়ক শাস্তি।
৬৪. হে রাসূল! আমি আপনার উপর কুর‘আন নাযিল করেছি। যেন আপনি সকল মানুষের সামনে দ্ব›দ্বপূর্ণ বিষয়সমূহ তথা তাওহীদ, পুনরুত্থান ও শরীয়তের বিধি-বিধানের সুস্পষ্ট বর্ণনা দিতে পারেন এবং কুর‘আন যেন হিদায়েত ও রহমত হয় সেই মু’মিনদের জন্য যারা আল্লাহ ও তাঁর রাসূলগণ এবং কুর‘আন আনীত বিধি-বিধানকে বিশ্বাস করে। কারণ, তারাই তো সত্য দ্বারা উপকৃত হয়।
৬৫. আল্লাহ তা‘আলা আকাশ থেকে বৃষ্টি বর্ষণের মাধ্যমে জমিনকে শুষ্ক মরুতে রূপান্তরিত হওয়ার পরও তাতে উদ্ভিদ জন্মিয়ে আবারো সেটিকে উজ্জীবিত করেছেন। নিশ্চয়ই আকাশ থেকে বৃষ্টিবর্ষণ এবং তদ্বারা জমিন থেকে উদ্ভিদ উৎপন্ন করার মধ্যে যারা আল্লাহর বাণী শুনে চিন্তা-ভাবনা করে তাদের জন্য আল্লাহর কুদরতের উপর সুস্পষ্ট প্রমাণাদি রয়েছে।
৬৬. হে মানুষ! তোমাদের জন্য উট, গরু ও ছাগলের মাঝে শিক্ষণীয় ব্যাপার রয়েছে। যেহেতু আমি তোমাদেরকে সেগুলোর স্তনসমূহ থেকে দুধ পান করাই যা তাদের পেটে থাকা ময়লা ও শরীরের রক্তের মাঝ থেকে বেরিয়ে আসে। এতদসত্তে¡ও তা সুস্বাদু, পরিচ্ছন্ন ও খাঁটি দুধরূপে বেরিয়ে আসে যা পানকারীদের নিকট পছন্দনীয় ও মজাদার।
৬৭. তোমাদের জন্য আরো শিক্ষণীয় বিষয় রয়েছে তোমাদেরকে রিযিক হিসেবে দেয়া খেজুর ও আঙ্গুর ফলে। যা থেকে তোমরা মেধা বিনষ্টকারী নেশাদ্রব্য বানাও যা বস্তুতঃ ভালো কাজ নয়। সেখান থেকে তোমরা আরো পেয়ে থাকো লাভজনক সুন্দর রিযিক যেমন: খেজুর, কিসমিস, সিরকা ও খেজুরের মধু। নিশ্চয়ই উল্লিখিত এসব বিষয়ে বুদ্ধিমান জাতির জন্য আল্লাহর কুদরত ও তাঁর বান্দাদের উপর তাঁর দয়ার ব্যাপারে বিশেষ প্রমাণ রয়েছে। কারণ, তারাই তো এখান থেকে শিক্ষা লাভ করে থাকে।
৬৮. হে রাসূল! আপনার প্রতিপালক মৌমাছিকে এ ব্যাপারে ইলহাম ও নির্দেশনা দিয়ে বলেছেন, তুমি নিজের জন্য পাহাড়ে, গাছে ও মানুষের বানানো ছাদে ঘর বানিয়ে নাও।
৬৯. অতঃপর তুমি নিজ চাহিদা মাফিক প্রত্যেক ফল খাও এবং তোমার প্রতিপালক তোমাকে যে সহজ পথে চলতে শিখিয়েছেন সে পথে চলো। এ মৌমাছির পেট থেকে বিভিন্ন রকমের মধু বেরিয়ে আসে। যার মধ্যে রয়েছে সাদা, হলদে ইত্যাদি রং। যাতে মানুষের রোগসমূহের চিকিৎসা রয়েছে। নিশ্চয়ই মৌমাছিকে এ বার্তা দেয়ার মাঝে এবং তার পেট থেকে আহরিত মধুর মাঝে চিন্তাশীল জাতির জন্য আল্লাহর কুদরত এবং তাঁর সৃষ্টির সমূহ ব্যাপার পরিচালনার উপর বিশেষ নিদর্শন রয়েছে। কারণ, তারাই তো কেবল সেগুলো থেকে শিক্ষা গ্রহণ করে থাকে।
৭০. আল্লাহ তা‘আলা তোমাদেরকে পূর্বের নমুনা ছাড়াই সৃষ্টি করেছেন। তোমাদের বয়সশেষে তিনি তোমাদেরকে আবার মৃত্যু দিবেন। আবার তোমাদের কারো কারো বয়স চরম বার্ধক্য পর্যন্ত প্রলম্বিত হবে। ফলে একদা সে যা জানতো তার কিছুই তখন স্মরণে থাকবে না। নিশ্চয়ই আল্লাহ তা‘আলা সবজান্তা। তাঁর নিকট তাঁর বান্দাদের আমলসমূহের কোন কিছুই গোপন নয়। তিনি অতি ক্ষমতাধর। কেউই তাঁকে কোন ব্যাপারে অক্ষম করতে পারে না।
৭১. আল্লাহ তা‘আলা তোমাদেরকে রিযিক দেয়ার ক্ষেত্রে কাউকে অন্যের উপর শ্রেষ্ঠত্ব দিয়েছেন। তিনি তোমাদের মাঝে ধনী ও গরিব, নেতা ও অনুসারী সবকিছুই বানিয়েছেন। তিনি যাদেরকে রিযিকে শ্রেষ্ঠত্ব দিয়েছেন তারা কখনোই আল্লাহর দেয়া সবকিছু নিজেদের গোলামদেরকে দিয়ে তাদের সাথে মালিকানায় সমান অংশীদার হতে চাইবে না। তাহলে তারা কীভাবে আল্লাহর জন্য তাঁর গোলামদের মধ্য থেকে কেউ তাঁর অংশীদার হোক তাতে সন্তুষ্ট থাকতে চায়? অথচ তারা নিজেদের জন্য নিজেদের গোলামদের মধ্য থেকে কেউ তাদের সমান অংশীদার হোক তাতেই সন্তুষ্ট নয়? এটি কী ধরনের যুলুম? এর চেয়ে বড় আল্লাহর নিয়ামতের অস্বীকার আর কী হতে পারে?!
৭২. হে মানুষ! আল্লাহ তা‘আলা তোমাদের জন্য স্ত্রীদেরকে তৈরি করলেন। যাতে তোমরা তাদেরকে দিয়ে প্রশান্তি লাভ করতে পারো। তেমনিভাবে তিনি তোমাদের স্ত্রীদের থেকে সন্তান-সন্ততি তৈরি করলেন। আর তিনি তোমাদেরকে অনেক রকমের পবিত্র খাদ্যসামগ্রী দিলেন। যেমন: গোস্ত, শস্যবীজ ও ফলমূল। এরপরও কি তারা সেই বাতিল মূর্তি ও প্রতিমাতে বিশ্বাস করবে এবং আল্লাহর প্রচুর ও অগণিত নিয়ামতের সাথে কুফরি করবে? পক্ষান্তরে তারা কি এক আল্লাহতে বিশ্বাস করে তাঁর কৃতজ্ঞতা আদায় করবে না?!
৭৩. এ মুশরিকরা আল্লাহ ছাড়া এমন মূর্তিগুলোর পূজা করে যারা তাদেরকে আকাশ ও জমিন থেকে কোন রিযিক দেয়ার ক্ষমতা রাখে না। আর তাদের পক্ষ থেকে এ মালিকানা হাসিল হওয়ারও নয়। কারণ, সেগুলো জড়ো পদার্থ। না সেগুলোর কোন জীবন আছে, না সেগুলো কিছু জানে।
৭৪. হে মানুষ! তোমরা আল্লাহর জন্য এ মূর্তিগুলোর কোন সাদৃশ্য সাব্যস্ত করো না। যেগুলো না কোন উপকার করতে পারে, না কোন ক্ষতি। কারণ, আল্লাহর কোন সাদৃশ্য নেই যে, তোমরা তাঁর সাথে ওকে ইবাদাতে শরীক করবে। নিশ্চয়ই আল্লাহ তা‘আলাই ভালো জানেন তাঁর পরিপূর্ণতা ও মহত্তে¡র গুণ কোনগুলো। তোমরা তা জানো না। তাই তাঁর সাথে তোমরা শিরকে লিপ্ত হও এবং তোমাদের মূর্তিগুলোর জন্য তাঁর সাদৃশ্যের দাবি করে থাকো।
৭৫. আল্লাহ তা‘আলা মুশরিকদের ভ্রান্তি স্পষ্ট করার জন্য একটি সুন্দর দৃষ্টান্ত দাঁড় করিয়েছেন। আর তা হলো, একটি মালিকানাধীন গোলাম যে কোন ধরনের খরচ করতে অক্ষম। তাছাড়া তার নিকট খরচ করার মতোও কিছু নেই। আরেকজন স্বাধীন। যাকে আমি নিজ পক্ষ থেকে হালাল সম্পদ দিয়েছি। যাতে সে ইচ্ছেমতো খরচ করতে পারে। সে সেখান থেকে যতটুকু ইচ্ছা প্রকাশ্যে ও গোপনে দান করে। এ দু’জন কখনোই সমান নয়। অতএব, তোমরা কীভাবে সেই আল্লাহ -যিনি সবকিছুর মালিক, তাঁর মালিকানায় যা চান খরচ করতে পারেন- তাঁকে ও তোমাদের অক্ষম মূর্তিগুলোকে সমান করো?! সকল প্রশংসা আল্লাহর জন্য যিনি বস্তুতই সকল প্রশংসার উপযুক্ত। কিন্তু অধিকাংশ মুশরিক আল্লাহর একক উপাস্য হওয়ার ব্যাপারটি জানে না।
৭৬. আল্লাহ তা‘আলা তাদের প্রসঙ্গে আরেকটি দৃষ্টান্ত দিয়েছেন। সেটি হলো, এমন দু’ ব্যক্তির দৃষ্টান্ত, যাদের একজন হলো বোবা। সে কিছু শুনতে পায় না, কোন কিছু বলতে পারে না, না কোন কিছু বুঝতে পারে। যে তার মূকতা ও বধিরতার দরুন নিজের বা অন্য কারো জন্য উপকার করতেও অক্ষম। বরং সে তার অভিভাবকের জন্য একটি ভারী বোঝা। তাকে যেদিকেই পাঠানো হয় সে কোন কল্যাণ নিয়ে আসতে পারে না। কোন উদ্দেশ্যও হাসিল করতে পারে না। যার এ অবস্থা সেকি ওর সমান হতে পারে যে সঠিকভাবে শুনতে পায় এবং ভালোভাবে কথা বলতে পারে। যার উপকারিতা অন্যের নিকটও পৌঁছায়। সে মানুষকে ইনসাফের আদেশ করে এবং নিজেও ইনসাফের উপর অটল। ফলে সে এমন একটি সুস্পষ্ট পথের উপর রয়েছে। যাতে না কোন সংশয় রয়েছে, না কোন বক্রতা?! তাহলে হে মুশরিকরা! তোমরা কীভাবে আল্লাহর সাথে -যিনি সকল মহৎ ও পরিপূর্ণ গুণাবলীতে গুণান্বিত- তোমাদের মূর্তিগুলোকে সমান করে ফেলো, অথচ তারা না কিছু শুনতে পায়, না কিছু বলতে পারে, না কোন উপকার করতে পারে, না কোন ক্ষতি দূর করতে পারে?!
৭৭. এক আল্লাহই আকাশ ও জমিনের সকল অদৃশ্য সম্পর্কে জানেন। তিনিই এসব কিছু বিশেষভাবে জানেন; তাঁর সৃষ্টির অন্য কেউ নয়। আর কিয়ামতের ব্যাপারটি -যা বিশেষ একটি গায়েবী বিষয়- যখন আল্লাহ তা‘আলা তার সংঘটিত হওয়া চাইবেন তখন তা চোখের পলকের মতো অতিদ্রæত সংঘটিত হয়ে যাবে। বরং তা আরো সন্নিকটে। নিশ্চয়ই আল্লাহ তা‘আলা সবকিছু করতে সক্ষম। কেউই তাঁকে অক্ষম করতে পারে না। তিনি যখন কোন কিছু করতে চান তখন তাকে বলেন, হয়ে যাও, তখন তা হয়ে যায়।
৭৮. হে মানুষ! আল্লাহ তোমাদেরকে মায়ের গর্ভধারণ শেষে তার পেট থেকে বাচ্চারূপে বের করেছেন। তখন তোমরা কিছুই জানতে না। অতঃপর তিনি তোমাদেরকে শুনার জন্য কান, দেখার জন্য চক্ষু এবং বুঝার জন্য অন্তর দিয়েছেন। যেন তোমরা আল্লাহর নিয়ামতের কৃতজ্ঞতা আদায় করতে পারো।
৭৯. মুশরিকরা কি পাখিগুলোর দিকে তাকায় না। যেগুলোকে আল্লাহ তা‘আলা বাতাসে উড়ার জন্য প্রস্তুত ও উপযুক্ত করেছেন। উপরন্তু তিনি সেগুলোকে পাখাগুলো মেলানো এবং গুটিয়ে নেয়াও শিখিয়েছেন। শক্তিধর আল্লাহ ছাড়া আর কেউ সেগুলোকে পড়ে যাওয়া থেকে বাতাসে ধরে রাখতে পারে না। নিশ্চয়ই পাখিগুলোকে এভাবে প্রস্তুতকরণে এবং পড়ে যাওয়া থেকে ধরে রাখায় আল্লাহতে বিশ্বাসী জাতির জন্য বিশেষ নিদর্শন রয়েছে। কারণ, তারাই এ প্রমাণ ও শিক্ষা থেকে লাভবান হয়ে থাকে।
৮০. তোমরা পাথর ও অন্যান্য বস্তু দিয়ে যে ঘরগুলো বানাও আল্লাহ তা‘আলা তোমাদের জন্য তাতে প্রশান্তি ও স্থিরতা রেখেছেন। তেমনিভাবে তিনি তোমাদের জন্য উট, গরু ও ছাগলের চামড়া থেকে গ্রাম্য পরিবেশে শহরের ঘরগুলোর ন্যায় তাঁবু এবং অস্থায়ী ছাউনি বানানোর ব্যবস্থা করেছেন। সফরের সময় যেগুলো বহন করে এক জায়গা থেকে অন্য জায়গায় নিয়ে যাওয়া এবং অবতরণের সময় সেগুলোকে দাঁড় করানো তোমাদের জন্য অতি হালকা ও সহজ। অনুরূপভাবে তিনি তোমাদের জন্য ছাগল, উট ও ভেড়ার পশম থেকে গৃহস্থালীর আসবাবপত্র, পোশাক-পরিচ্ছদ বানিয়েছেন। যাতে একটি নির্দিষ্ট সময় পর্যন্ত তোমরা তা থেকে উপকৃত হতে পারো।
৮১. আল্লাহ তা‘আলা তোমাদের জন্য গাছপালা ও ঘরবাড়ীর ব্যবস্থা করেছেন। যেন তোমরা সেগুলোর মাধ্যমে রোদের তাপ থেকে বাঁচার জন্য ছায়া গ্রহণ করতে পারো। তেমনিভাবে তিনি তোমাদের জন্য পাহাড়ের মাঝে সুড়ঙ্গ পথ, গর্ত ও গুহা তৈরি করেছেন। যেন তোমরা অতি ঠাÐা, গরম ও শত্রæ থেকে বেঁচে থাকার জন্য সেগুলোতে আশ্রয় নিতে পারো। অনুরূপভাবে তিনি তোমাদের জন্য সুতা ইত্যাদি থেকে জামা-কাপড়ও তৈরি করেছেন। যা তোমাদের থেকে ঠাÐা ও গরম প্রতিরোধ করে। তেমনিভাবে তিনি তোমাদের জন্য বর্ম তৈরি করেছেন। যেন তা তোমাদেরকে যুদ্ধক্ষেত্রে অন্যের আঘাত থেকে রক্ষা করে। ফলে অস্ত্র তোমাদের শরীর পর্যন্ত পৌঁছুতে পারে না। যেমনিভাবে তিনি তোমাদেরকে পূর্বের নিয়ামতগুলো দিয়েছেন তেমনিভাবে তিনি তোমাদেরকে তাঁর নিয়ামত আরো পরিপূর্ণরূপে দিবেন। আশা করা যায়, তোমরা এক আল্লাহর অনুগত হবে এবং তাঁর সাথে কোন কিছুকে শরীক করবে না।
آية رقم 82
৮২. হে রাসূল! তারা যদি আপনার আনীত বিধানকে বিশ্বাস করা ও তার প্রতি ঈমান আনা থেকে মুখ ফিরিয়ে নেয় তাহলে আপনার কোন অসুবিধে নেই। কারণ, আপনার দায়িত্ব হলো যা আপনাকে প্রচার করার আদেশ করা হয়েছে তা সুস্পষ্টভাবে প্রচার করা। তাদেরকে হিদায়েত দান করা আপনার দায়িত্ব নয়।
آية رقم 83
৮৩. মুশরিকরা তাদেরকে দেয়া আল্লাহর নিয়ামতসমূহ ভালোভাবেই জানে। যেগুলোর অন্যতম হলো তাদের নিকট নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) কে পাঠানো। এরপরও তারা সেগুলোর কৃতজ্ঞতা আদায় না করে বরং রাসূলের প্রতি মিথ্যারোপ করে তাঁর নিয়ামতসমূহকে অস্বীকার করে। বস্তুতঃ তাদের অধিকাংশই তাঁর নিয়ামত অস্বীকারকারী।
৮৪. হে রাসূল! আপনি স্মরণ করুন সে দিনের কথা যেদিন আল্লাহ তা‘আলা প্রত্যেক জাতির নিকট পাঠানো রাসূলকে পুনরুত্থিত করবেন। তিনি সেদিন তাদের মু’মিনের ঈমান এবং কাফিরের কুফরির ব্যাপারে সাক্ষ্য দিবেন। অতঃপর কাফিরদেরকে তাদের কুফরির ব্যাপারে কোন ওযর পেশ করার সুযোগ দেয়া হবে না। তারা নিজেদের প্রতিপালককে খুশি করার মতো কোন আমল করতে দুনিয়াতে আর ফিরে আসবে না। বস্তুতঃ আখিরাত হলো হিসাবের জায়গা; কোন আমল করার জায়গা নয়।
৮৫. যালিম মুশরিকরা যে দিন আযাবের মুখোমুখী হবে সে দিন তাদের আযাব সামান্যও কমানো হবে না। তেমনিভাবে আযাব দিতে দেরি করে তাদেরকে কোন সময়-সুযোগও দেয়া হবে না। বরং তারা সেখানে অবশ্যই প্রবেশ করবে এবং চিরকাল থাকবে।
৮৬. মুশরিকরা যখন পরকালে আল্লাহ ছাড়া তাদের উপাস্য মা’বূদগুলোকে দেখতে পাবে তখন তারা বলবে: হে আমাদের প্রতিপালক! এরা হলো সেই অংশীদারসমূহ আপনাকে বাদ দিয়ে আমরা দুনিয়াতে যাদের ইবাদাত করতাম। তারা মূলতঃ এ কথা বলবে ওদের উপর তাদের গুনাহের বোঝা চাপিয়ে দেয়ার জন্য। তখন আল্লাহ তা‘আলা তাদের মা’বূদগুলোকে কথা বলার শক্তি দিলে তারা এর উত্তরে বলবে: হে মুশরিকরা! তোমরা আল্লাহর সাথে অন্য শরীকের ইবাদাতের ব্যাপারে মিথ্যা বলছো। কারণ, তাঁর সাথে ইবাদাত করার মতো সত্যিকারার্থে আর কোন শরীক নেই।
৮৭. তখন মুশরিকরা আত্মসমর্পণ করে এক আল্লাহর অনুগত হবে। আর তারা যে দাবি করতো, তাদের মূর্তিগুলো তাদের জন্য আল্লাহর নিকট সুপারিশ করবে। এ দাবি শেষ হয়ে যাবে এবং মিথ্যা প্রমাণিত হবে।
৮৮. যারা আল্লাহর সাথে কুফরি করে এবং অন্যদেরকে তাঁর রাস্তা থেকে দূরে সরিয়ে দেয় তারা নিজেরা নষ্ট এবং অন্যদেরকে পথভ্রষ্ট করে নষ্ট করার দরুন আমি তাদের কুফরির উপযুক্ত শাস্তির উপর আরো শাস্তি বাড়িয়ে দেবো।
৮৯. হে রাসূল! আপনি স্মরণ করুন সে দিনের কথা যে দিন আমি প্রত্যেক জাতির রাসূলকে পুনরুত্থিত করবো তাদের কুফরি কিংবা ঈমানের ব্যাপারে সাক্ষ্য দেয়ার জন্য। যে রাসূল তাদের বংশ ও ভাষারই হবে। আর আপনাকে সকল জাতির উপর সাক্ষী বানাবো। বস্তুতঃ আমি আপনার উপর কুর‘আন নাযিল করেছি হালাল ও হারাম এবং সাওয়াব ও শাস্তি ইত্যাদি তথা যা কিছু বর্ণনা করা প্রয়োজন তা সবই বর্ণনা করার জন্য। আমি সেটিকে নাযিল করেছি সত্যের প্রতি মানুষের হিদায়েত, তার উপর ঈমান ও আমলকারীর জন্য রহমত এবং আল্লাহ বিশ্বাসীদের জন্য অপেক্ষমাণ স্থায়ী নিয়ামতের সুসংবাদ স্বরূপ।
৯০. আল্লাহ তা‘আলা নিজ বান্দাদেরকে ইনসাফের আদেশ করেছেন। প্রত্যেক বান্দা যেন আল্লাহ ও তাঁর বান্দাদের অধিকারসমূহ আদায় করে এবং শ্রেষ্ঠত্বকে আবশ্যক করে এমন কোন অধিকার ছাড়া ফায়সালার ক্ষেত্রে সে একজনকে অন্যজনের উপর শ্রেষ্ঠত্ব না দেয়। তিনি আরো আদেশ করেন সদাচরণের। প্রত্যেক বান্দা যেন তার উপর বাধ্যতামূলক নয় এমন কিছুও অন্যকে দান করে। যেমন: নফল সাদাকা ও যালিমকে ক্ষমা করা। তিনি আরো আদেশ করেন আত্মীয়দেরকে তাদের প্রয়োজনীয় সবকিছু দেয়ার জন্য। তেমনিভাবে তিনি নিষেধ করেন প্রত্যেক নিকৃষ্ট কথা থেকে যেমন: অশ্লীল কথা এবং প্রত্যেক নিকৃষ্ট কাজ থেকে যেমন: ব্যভিচার। তিনি আরো নিষেধ করেন শরীয়ত গর্হিত সকল বস্তু তথা সকল গুনাহ থেকে। তিনি আরো নিষেধ করেন যুলুম ও মানুষের প্রতি অহঙ্কার দেখানো থেকে। এ আয়াতে আল্লাহ তা‘আলা আদেশ ও নিষেধের মাধ্যমে তোমাদেরকে উপদেশ দিচ্ছেন। যাতে তোমরা তাঁর উপদেশ থেকে শিক্ষা গ্রহণ করতে পারো।
৯১. তোমরা আল্লাহ ও মানুষের সাথে কৃত সকল ওয়াদা পুরা করো এবং কোন অঙ্গীকার আল্লাহর কসম খেয়ে পাকা করার পর তা আর ভঙ্গ করো না। যেহেতু তোমরা অঙ্গীকার পূরণের ক্ষেত্রে নিজেদের উপর আল্লাহ তা‘আলাকে সাক্ষী বানিয়েছো। নিশ্চয়ই আল্লাহ তা‘আলা তোমাদের কর্মকাÐসমূহ জানেন। তাঁর নিকট এগুলোর কোন কিছুই গোপন নয়। তিনি অচিরেই তোমাদেরকে এর প্রতিদান দিবেন।
৯২. তোমরা অঙ্গীকার ভঙ্গ করে সেই বোকা মহিলার ন্যায় বোকা ও নির্বোধ হতে যেও না যে সুতা বা পশমকে খুব কষ্ট করে শক্তভাবে পাকিয়ে সেটিকে আবার খুলে আগের ন্যায় বানিয়ে ফেলেছে। ফলে সে সুতা পাকাতে ও খুলতে গিয়ে ক্লান্ত হয়েছে ঠিকই কিন্তু তাতে তার কোন উদ্দেশ্য হাসিল হয়নি। বস্তুতঃ তোমরা নিজেদের অঙ্গীকারগুলোকে ধোঁকার মাধ্যম বানিয়েছো যেগুলোর মাধ্যমে তোমরা একে অপরকে ধোঁকা দিয়ে থাকো। যাতে তোমাদের পক্ষের লোকরা শত্রæপক্ষের লোকের চেয়ে বেশি ও শক্তিশালী হয়। বস্তুতঃ আল্লাহ তা‘আলা অঙ্গীকার পুরা করার বিষয়ে তোমাদেরকে পরীক্ষা করছেন, তোমরা কি তা পুরা করো, না ভেঙ্গে ফেলো? আল্লাহ তা‘আলা তোমাদের দুনিয়ার দ্ব›দ্বপূর্ণ বিষয়গুলো কিয়ামতের দিন সুস্পষ্ট করতে চান। তিনি সেদিন সত্যপন্থীকে বাতিলপন্থী থেকে এবং সত্যবাদীকে মিথ্যাবাদী থেকে সুস্পষ্ট করতে চান।
৯৩. আল্লাহ তা‘আলা চাইলে তিনি তোমাদেরকে সত্যের উপর একমত এমন এক জাতিতে রূপান্তরিত করতে পারতেন। কিন্তু আল্লাহ তা‘আলা যাকে চান তাকে নিজ ইনসাফের ভিত্তিতে অঙ্গীকার পুরা করা ও সত্যের ব্যাপারে অসহযোগিতা করে পথভ্রষ্ট করেন। আর যাকে চান নিজ অনুগ্রহে সেটির তাওফীক দিয়ে থাকেন। কিয়ামতের দিন অবশ্যই তোমাদেরকে দুনিয়ার কর্মকাÐ সম্পর্কে জিজ্ঞাসিত হতে হবে।
৯৪. তোমরা নিজেদের শপথগুলোকে ধোঁকার মাধ্যম বানিয়ে নিয়ো না। যেগুলোর মাধ্যমে তোমরা একে অপরকে ধোঁকা দিবে। আর সে ক্ষেত্রে তোমরা নিজেদের কুপ্রবৃত্তির অনুসরণ করে যখন চাইবে সেটিকে পুরা করবে আর যখন চাইবে সেগুলোকে ভঙ্গ করবে। যদি তোমরা এমন করো তাহলে সঠিক পথের উপর দৃঢ় থাকার পর তোমাদের পদস্খলন ঘটবে। আর আল্লাহর পথ থেকে নিজেরা পথভ্রষ্ট ও অন্যদেরকে পথভ্রষ্ট করার দরুন শাস্তি আস্বাদন করবে। অনুরূপভাবে তোমাদের জন্য রয়েছে দ্বিগুণ শাস্তি।
৯৫. তোমরা আল্লাহর সাথে কৃত অঙ্গীকার ভঙ্গ ও তা পুরা না করার বদলে সামান্য বিনিময় গ্রহণ করো না। নিশ্চয়ই অঙ্গীকার ভঙ্গ করে সামান্য বিনিময় পাওয়ার চেয়ে আল্লাহর কাছে থাকা দুনিয়ার বিজয় ও যুদ্ধলব্ধ সম্পদ এবং পরকালের স্থায়ী নিয়ামত তোমাদের জন্য অনেক উত্তম। যদি তোমরা এটি জানতে তাহলে আর এমন করতে না।
৯৬. হে মানুষ! তোমাদের নিকট যে সম্পদ, নিয়ামত ও ভোগ-বিলাস রয়েছে তা যতোই বেশি হোক না কেন তা একদিন শেষ হয়ে যাবে। কিন্তু আল্লাহর কাছে থাকা প্রতিদান চিরস্থায়ী। অতএব, তোমরা কীভাবে অস্থায়ী বস্তুকে স্থায়ী বস্তুর উপর প্রাধান্য দিচ্ছো? যারা ধৈর্য ধরে অঙ্গীকার ভঙ্গ না করে বরং তা মেনে চলবে আমি অবশ্যই তাদেরকে কৃত নেক আমলের চেয়ে অনেক বেশি প্রতিদান দেবো। আমি তাদেরকে একে দশ থেকে শুরু করে সাতশ’ গুণ এমনকি আরো বেশি দেবো।
৯৭. যে ব্যক্তি আল্লাহর উপর ঈমান নিয়ে শরীয়ত সম্মত নেক আমল করে -চাই সে পুরুষ হোক কিংবা মহিলা- আমি অবশ্যই তাকে দুনিয়াতে আল্লাহর ফায়সালায় সন্তুষ্ট, আল্লাহর আনুগত্যের তাওফীকপ্রাপ্ত ও স্বল্পে তুষ্ট পবিত্র জীবন দেবো। আর আমি তাদেরকে পরকালে তাদের দুনিয়ার নেক আমলের চেয়ে আরো সুন্দর প্রতিদান দেবো।
آية رقم 98
৯৮. হে মু’মিন! যখন তুমি কুর‘আন পড়তে চাও তখন আল্লাহর রহমত থেকে বিতাড়িত শয়তানের কুমন্ত্রণা থেকে তাঁর নিকট আশ্রয় কামনা করো।
৯৯. যারা আল্লাহতে বিশ্বাসী এবং সকল ব্যাপারে নিজেদের প্রতিপালকের উপর একক নির্ভরশীল শয়তান তাদের উপর তার ক্ষমতা বিস্তার করতে পারে না।
آية رقم 100
১০০. শুধু তার কুমন্ত্রণার ক্ষমতা চলবে ওদের উপর যারা তাকে বন্ধু হিসেবে গ্রহণ করে ও পথভ্রষ্টতায় তার অনুসরণ করে। আর যারা তার ভ্রষ্টতার প্রভাবে আল্লাহর সাথে অন্যের ইবাদাত করে তাঁর সাথে শিরক করেছে।
১০১. যখন আমি কুর‘আনের কোন আয়াতের বিধানকে অন্য আয়াত কর্তৃক রহিত করি (আর আল্লাহ জানেন কুর‘আনের কোন আয়াতকে প্রজ্ঞা ও কৌশলের ভিত্তিতে রহিত করা হবে আর কোনটিকে করা হবে না) তখন তারা বলে: হে মুহাম্মাদ! তুমি তো মিথ্যুক; আল্লাহর ব্যাপারে কথা বানিয়ে বলো। বরং তাদের অধিকাংশই জানে না যে, নিশ্চয়ই রহিত করার ব্যাপারটি আল্লাহর চ‚ড়ান্ত কৌশলের ভিত্তিতেই হয়ে থাকে।
১০২. হে রাসূল! আপনি তাদেরকে বলে দিন: জিব্রীল (আলাইহিস-সালাম) আল্লাহর পক্ষ থেকে এ কুর‘আন নিয়ে এসেছেন। এমন সত্য তাতে রয়েছে যাতে কোন ভুল, পরিবর্তন ও বিকৃতি নেই। যাতে করে আল্লাহতে বিশ্বাসীরা নিজেদের ঈমানের উপর অটল থাকতে পারে। যখনই কোন নতুন কিছু নাযিল ও রহিত হয়। উপরন্তু তাদের জন্য যেন সত্যের পথ প্রদর্শক এবং মুসলমানদের জন্য সম্মানজনক প্রতিদান হাসিলের সুসংবাদ হয়।
১০৩. আমি জানি মুশরিকরা এ কথা বলে বেড়ায় যে, নিশ্চয়ই মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) কে কোন মানুষ কুর‘আন শিক্ষা দিচ্ছে। বস্তুতঃ তারা নিজেদের এ দাবিতে মিথ্যুক। কারণ, যার ব্যাপারে তারা ধারণা করছে যে, সেই তাঁকে কুর‘আন শিক্ষা দিচ্ছে তার ভাষা তো অনারবদের ভাষা। আর এ কুর‘আন নাযিল হয়েছে উন্নতমানের ভাষাশৈলীপূর্ণ সুস্পষ্ট আরবী ভাষায়। সুতরাং তারা কীভাবে মনে করছে যে, এ কুর‘আন তিনি অনারবী থেকে শিখেছেন?!
১০৪. যারা আল্লাহর আয়াতসমূহ তাঁর কাছ থেকে এসেছে বলে বিশ্বাস করে না আল্লাহ তা‘আলা তাদেরকে হিদায়েতের তাওফীক দেন না। যতক্ষণ তারা এ কথার উপর অটল থাকে। বরং আল্লাহর সাথে কুফরি ও তাঁর আয়াতসমূহকে অস্বীকার করার দরুন তাদের জন্য যন্ত্রণাদায়ক শাস্তি রয়েছে।
১০৫. মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) তাঁর প্রতিপালকের পক্ষ থেকে আনীত কুর‘আনের ব্যাপারে মিথ্যাবাদী নন। বরং যারা আল্লাহর আয়াতসমূহকে বিশ্বাস করে না তারাই মিথ্যা কথা বানায়। কারণ, তারা শাস্তিকে ভয় পায় না, না কোন প্রতিদানের আশা করে। বস্তুতঃ এ কাফিররাই মিথ্যুক। কারণ, মিথ্যা তাদের পুরাতন স্বভাব।
১০৬. যে ঈমান আনার পর আল্লাহর সাথে কুফরি করেছে সে অবশ্যই দোষী। কিন্তু যাকে কুফরি করতে বাধ্য করা হয়েছে এবং ফলশ্রæতিতে সে মুখে কুফরি শব্দ উচ্চারণ করেছে ঠিকই কিন্তু তার অন্তর ঈমানের মর্ম কথায় বিশ্বাসী ও ঈমানের নিয়ামত পেয়ে প্রশান্ত সে অবশ্যই দোষী নয়। তবে যে খোলা মনে ঈমানের উপর কুফরিকে গ্রহণ করেছে এবং সে স্বেচ্ছায় কুফরি কথা বলেছে বস্তুতঃ সে ইসলাম থেকে ফিরে গেছে। তাদের উপর আল্লাহর অসন্তুষ্টি ও তাদের জন্য রয়েছে মহা শাস্তি।
১০৭. এ ইসলাম থেকে ফিরে যাওয়ার কারণ হলো তারা কুফরির জন্য পুরস্কার স্বরূপ দুনিয়ার যে উচ্ছিষ্ট পাচ্ছে তারা সেটিকে আখিরাতের উপর প্রাধান্য দিয়েছে। বস্তুতঃ আল্লাহ তা‘আলা কাফির জাতিকে ঈমানের তাওফীক দেন না। বরং তিনি এ ব্যাপারে তাদের অসহযোগিতা করেন।
১০৮. যারা ঈমান আনার পর তা থেকে ফিরে যায় তাদের অন্তরের উপর আল্লাহ তা‘আলা মহর মেরে দিয়েছেন। তাই তারা উপদেশ গ্রহণ করে না। তেমনিভাবে তিনি তাদের কানের উপরও মহর মেরে দিয়েছেন। ফলে তারা লাভজনক কোন কিছু শুনে না। অনুরূপভাবে তিনি তাদের চোখের উপরও মহর মেরে দিয়েছেন। ফলে তারা ঈমানকে প্রমাণ করে এমন নিদর্শনসমূহ দেখে না। তারাই মুলতঃ সৌভাগ্য ও দুর্ভাগ্যের উপকরণসমূহ এবং তাদের জন্য প্রস্তুতকৃত আল্লাহর আযাব থেকে গাফিল।
آية رقم 109
১০৯. বস্তুতঃ যারা ঈমান আনার পর কুফরি করে নিজেদেরকে ক্ষতির সম্মুখীন করেছে তারা কিয়ামতের দিন সত্যিই ক্ষতিগ্রস্ত হবে। যদি তারা এ ঈমানকে আঁকড়ে ধরতে পারতো তাহলে তারা জান্নাতে প্রবেশ করতে পারতো।
১১০. হে রাসূল! নিশ্চয়ই আপনার প্রতিপালক সেসব দুর্বল মু’মিনদের প্রতি ক্ষমাশীল ও দয়ালু যারা মুশরিকদের শাস্তি সহ্য করে এবং ধর্মীয় ক্ষেত্রে তাদের পরীক্ষার সম্মুখীন হয়ে মক্কা থেকে মদীনায় হিজরত করেছে। পরিস্থিতি এমন হয়েছিলো যে, তারা কুফরি বাক্য বলতে বাধ্য হয়েছে; অথচ তাদের অন্তরগুলো ছিলো ঈমানে প্রশান্ত। অতঃপর তারা আল্লাহর বাণীকে সুউচ্চ এবং কাফিরদের কথাকে নিচু করার জন্য আল্লাহর পথে যুদ্ধ করেছে ও সে পথের কষ্টগুলোকে সহ্য করেছে। নিশ্চয়ই আপনার প্রতিপালক তাদের সেই ফিতনাতে পতিত এবং সেই শাস্তিতে পিষ্ট হওয়ার পর -যাতে তারা কুফরির বাক্য বলতে বাধ্য হয়েছে- তাদের প্রতি ক্ষমাশীল ও দয়ালু। কারণ, তারা বাধ্য হয়েই কুফরির কথা উচ্চারণ করেছে।
১১১. হে রাসূল! আপনি স্মরণ করুন সে দিনের কথা যেদিন প্রত্যেক ব্যক্তি তার নিজের পক্ষ হয়ে ঝগড়া করবে। পরিস্থিতির ভয়াবহতার দরুন সে অন্যের পক্ষ নিয়ে ঝগড়া করবে না। আর প্রত্যেককে তার ভালো-মন্দ আমলের পরিপূর্ণ প্রতিদান দেয়া হবে। সাওয়াব কমিয়ে ও গুনাহ বাড়িয়ে সেদিন তাদের উপর কোন যুলুম করা হবে না।
১১২. আল্লাহ তা‘আলা একটি এলাকা তথা মক্কার দৃষ্টান্ত দিচ্ছেন। যা ছিলো নিরাপদ; যার অধিবাসীরা কিছুরই ভয় পেতো না। যা ছিলো স্থিতিশীল; অথচ তার আশপাশের অন্যান্য এলাকার লোকদেরকে অপহরণ করা হতো। সকল জায়গা থেকে সহজ ও সুন্দর পন্থায় সেখানে রিযিক আসতো। অতঃপর তার অধিবাসীরা আল্লাহর নিয়ামতসমূহের সাথে কুফরি করলো এবং সেগুলোর কৃতজ্ঞতা আদায় করেনি। ফলে আল্লাহ তা‘আলা তাদেরকে ক্ষুধা ও মারাত্মক ভয়ের প্রতিদান দিলেন। যা তাদের শরীরে আতঙ্ক ও দুর্বলতায় প্রকাশ পেলো। এমনকি এ দু’টো তাদের কুফরি ও অস্বীকারের দরুন তাদের পোশাকে পরিণত হলো।
آية رقم 113
১১৩. নিশ্চয়ই মক্কার অধিবাসীদের নিকট আমানত ও সত্যবাদিতায় সুপ্রসিদ্ধ এমন একজন রাসূল আসলেন যিনি হলেন মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)। অতঃপর তারা তাঁর প্রতিপালকের পক্ষ থেকে নাযিলকৃত কুর‘আনকে অস্বীকার করলো। ফলে তাদের উপর ক্ষুধা ও ভয়ের ন্যায় আল্লাহর শাস্তি নাযিল হলো। বস্তুতঃ তারা আল্লাহর সাথে শিরক ও তাঁর রাসূলকে অস্বীকার করে নিজেদেরকে ধ্বংসের দ্বারপ্রান্তে উপনীত করে নিজদের উপরই যুলুম করলো।
১১৪. হে বান্দারা! তোমরা আল্লাহর দেয়া রিযিক থেকে সকল পবিত্র ও হালাল খাদ্য গ্রহণ করো। আর তোমরা আল্লাহর নিয়ামতগুলোকে স্বীকার করে এবং সেগুলোকে তাঁর সন্তুষ্টি মাফিক ব্যয় করে সেগুলোর কৃতজ্ঞতা আদায় করো। যদি তোমরা শিরক বিহীন তাঁর একক ইবাদাত করতে চাও।
১১৫. আল্লাহ তা‘আলা খাদ্যসামগ্রীর মধ্য থেকে তোমাদের উপর হারাম করেছেন জবাই ছাড়া প্রত্যেক জবাইযোগ্য মৃত পশু, প্রবাহিত রক্ত, শূকরের যে কোন অংশ এবং জবাইকারী ব্যক্তি যে পশুটি আল্লাহ ছাড়া অন্য কারো নৈকট্য অর্জনের জন্য জবাই করেছে। এ হারামের বিধানটি মূলতঃ স্বেচ্ছাবস্থায় প্রযোজ্য। তবে যাকে প্রয়োজন বাধ্য করেছে উক্ত কিছু খেতে -ফলে সে তা থেকে খেয়েছে হারামে উৎসাহী না হয়ে এবং প্রয়োজনের সীমা অতিক্রম না করে- তাহলে তার কোন গুনাহ হবে না। কারণ, আল্লাহ তা‘আলা ক্ষমাশীল। তিনি তার ধরনের খাওয়ার বিষয়কে ক্ষমা করবেন। তেমনিভাবে তিনি তার প্রতি দয়াশীল যেহেতু তিনি প্রয়োজনের সময় তার জন্য তা খাওয়া জায়িয করেছেন।
১১৬. হে মুশরিকরা! তোমাদের মুখগুলো সাধারণত মিথ্যা বলে। তাই হারাম নয় এমন জিনিসকে হারাম করে এবং হালাল নয় এমন জিনিসকে হালাল করে আল্লাহর উপর মিথ্যা চাপানোর উদ্দেশ্যে তাঁর ব্যাপারে তোমরা এ কথা বলো না যে, এ জিনিসটি হালাল এবং এ জিনিসটি হারাম। নিশ্চয়ই যারা আল্লাহর উপর মিথ্যা বানিয়ে বলে তারা কোন উদ্দেশ্য হাসিলে সফল হবে না। আবার তারা ভয়ের ব্যাপার থেকে নাজাতও পাবে না।
آية رقم 117
১১৭. দুনিয়াতে তারা নিজেদের কুপ্রবৃত্তির অনুসরণ করে সামান্য ও নগণ্য ভোগের বস্তুর মালিক হয়েছে। তবে তাদের জন্য কিয়ামতের দিন রয়েছে যন্ত্রণাদায়ক শাস্তি।
১১৮. আমি ইহুদিদের উপর বিশেষভাবে সেগুলোই হারাম করেছি যা আমি ইতিপূর্বে (সূরা আনআমের ১৪৬ নং আয়াতে) উল্লেখ করেছি। আমি এগুলো হারাম করে তাদের উপর কোন যুলুম করিনি। তবে তারা শাস্তির কাজ করে নিজেদের উপরই যুলুম করেছে। ফলে আমি তাদের অত্যাচারের শাস্তিস্বরূপ তাদের উপর এগুলোকে হারাম করেছি।
১১৯. হে রাসূল! যারা ইচ্ছাকৃত হলেও পরিণতির কথা না জেনে অপকর্ম করে আল্লাহর নিকট তাওবা করেছে এবং তাদের বদ আমলগুলো ঠিক করে নিয়েছে নিশ্চয়ই আপনার প্রতিপালক তাওবার পর তাদের গুনাহগুলো ক্ষমা করে দিবেন এবং তিনি তাদের প্রতি অত্যন্ত দয়ালু।
১২০. নিশ্চয়ই ইব্রাহীম (আলাইহিস-সালাম) ছিলেন সকল কল্যাণকর বৈশিষ্ট্যের অধিকারী, সর্বদা তাঁর প্রতিপালকের আনুগত্যকারী ও সকল ধর্মকে বাদ দিয়ে কেবল ইসলাম ধর্মের অনুসারী। তিনি কখনো মুশরিকদের অন্তর্ভুক্ত ছিলেন না।
آية رقم 121
১২১. তিনি ছিলেন আল্লাহর দেয়া সকল নিয়ামতের কৃতজ্ঞতা আদায়কারী। আল্লাহ তা‘আলা তাঁকে নবুওয়াতের জন্য মনোনীত করেছেন এবং তাঁকে সঠিক ইসলাম ধর্মের হিদায়েত দিয়েছেন।
১২২. আমি তাঁকে দুনিয়াতে নবুওয়াত, উত্তম প্রশংসা ও নেককার সন্তান দিয়েছি। আর তিনি পরকালে এমন নেককারদের অন্তর্ভুক্ত হবেন যাঁদের জন্য আল্লাহ তা‘আলা জান্নাতের উচ্চ মর্যাদা তৈরি রেখেছেন।
১২৩. হে রাসূল! অতঃপর আমি আপনার নিকট এ মর্মে ওহী করেছি যে, আপনি সকল ধর্মকে বাদ দিয়ে কেবল ইসলাম ধর্মের অনুসারী হয়ে তাওহীদ প্রতিষ্ঠা ও মুশরিকদের সাথে সম্পর্ক ছিন্ন করা এবং আল্লাহর প্রতি দা’ওয়াত ও তাঁর শরীয়তের উপর আমল করার ক্ষেত্রে ইব্রাহীম (আলাইহিস-সালাম) এর ধর্মের অনুসরণ করুন। তিনি কখনো মুশরিক ছিলেন না। যেমনটা মুশরিকরা ধারণা করছে। বরং তিনি ছিলেন আল্লাহর এককত্বে দৃঢ় বিশ্বাসী।
১২৪. শনিবারকে সম্মান করা দ্ব›দ্বকারী ইহুদিদের উপর ফরয করে দেয়া হয়েছে। যেন তারা এদিনে নিজেদের সকল ব্যস্ততা ছেড়ে ইবাদাতের জন্য অবসর হতে পারে। তারা মূলতঃ জুমু‘আর দিনকে হারিয়ে ফেলেছে যেদিন তাদেরকে অবসর থাকতে আদেশ করা হয়েছে। হে রাসূল! নিশ্চয়ই আপনার প্রতিপালক কিয়ামতের দিন এ দ্ব›দ্বপূর্ণ জাতির মাঝে দ্ব›দ্বপূর্ণ বিষয়ের ফায়সালা করবেন। অতঃপর প্রত্যেককে তার উপযুক্ত প্রতিদান দিবেন।
১২৫. হে রাসূল! আপনি ও আপনার অনুসারী মু’মিনরা অন্যদেরকে তার অবস্থা, বুঝ ও আনুগত্যের দাবি অনুযায়ী উৎসাহ ও ভীতিপূর্ণ নসীহতের মাধ্যমে ইসলাম ধর্মের দিকে আহŸান করুন এবং কথা, চিন্তা ও শিষ্টাচারের উত্তম পন্থায় তাদের সাথে বিতর্ক করুন। কারণ, আপনার দায়িত্ব নয় মানুষকে হিদায়েত করা। আপনার দায়িত্ব শুধু তাদের নিকট সত্য কথা পৌঁছিয়ে দেয়া। নিশ্চয়ই আপনার প্রতিপালক জানেন কে ইসলাম ধর্মভ্রষ্ট আর কে হিদায়েতপ্রাপ্ত। তাই আপনি তাদের ব্যাপারে আফসোস করে নিজের মন খারাপ করবেন না।
১২৬. তোমরা যদি নিজেদের শত্রæকে শাস্তি দিতে চাও তাহলে সে তোমাদের সাথে যে আচরণ করেছে কোন বাড়াবাড়ি ছাড়া সেভাবেই তাকে শাস্তি দাও। আর যদি শক্তি থাকা সত্তে¡ও তাকে শাস্তি না দিয়ে ধৈর্য ধারণ করো তাহলে তা হবে ইনসাফের সাথে তাদেরকে শাস্তি দেয়া থেকেও অনেক উত্তম।
১২৭. হে রাসূল! আপনি তাদের দেয়া কষ্টের উপর ধৈর্য ধরুন। আল্লাহ আপনাকে তাওফীক দিয়েছেন বলেই আপনি ধৈর্যের তাওফীক পাচ্ছেন। কাফিররা আপনার থেকে মুখ ফিরিয়ে নিলে আপনি দুঃখিত হবেন না। আর তাদের চক্রান্ত ও ষড়যন্ত্রের দরুন যেন আপনার মন ভেঙ্গে না যায়।
آية رقم 128
১২৮. নিশ্চয়ই আল্লাহ তা‘আলা গুনাহ পরিত্যাগকারী মুত্তাকী এবং আদেশ মান্যকারী ও আনুগত্যকারী সৎকর্মশীলদের সাথেই রয়েছেন। তিনি তাঁর সাহায্য ও সহযোগিতা নিয়ে তাদের সাথেই আছেন।
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