ترجمة معاني سورة الصافات باللغة البنغالية من كتاب الترجمة البنغالية

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الترجمة البنغالية

أبو بكر محمد زكريا

الناشر

مجمع الملك فهد

آية رقم 1
শপথ তাদের যারা সারিবদ্ধভাবে দণ্ডায়মান [১]।
____________________
[১] কাতাদাহ বলেন, আল্লাহ্ তা'আলা তাঁর সৃষ্টির শপথ করেছেন, তারপর আরেক সৃষ্টির শপথ করেছেন, তারপর অপর সৃষ্টির শপথ করেছেন। এখানে কাতারবাদী দ্বারা ফেরেশতাদেরকে বুঝানো হয়েছে। যারা আকাশে কাতারবন্দী হয়ে আছেন। [তাবারী]
آية رقم 2
অতঃপর যারা কঠোর পরিচালক [১]।
____________________
[১] মুজাহিদ বলেন, এখানে কঠোর পরিচালক বলে ফেরেশতাদেরকে বুঝানো হয়েছে। [তাবারী] পক্ষান্তরে কাতাদাহ বলেন, এর দ্বারা কুরআনে যে সমস্ত জিনিসের ব্যাপারে আল্লাহ সতর্ক করেছেন তাই বুঝানো হয়েছে। [তাবারী]
آية رقم 3
আর যারা 'যিকর' আবৃত্তিতে রত- [১]
____________________
[১] মুজাহিদ বলেন, এখানে তেলাওয়াতে রত বলে ফেরেশতাদেরকে বোঝানো হয়েছে। আর কাতাদাহ বলেন, এর দ্বারা উদ্দেশ্য, কুরআন থেকে মানুষের ঘটনাবলী ও পূর্ববর্তী উম্মতদের কাহিনী যা তোমাদের উপর তেলাওয়াত করে শোনানো হয়। [তাবারী] আল্লামা শানকীতী বলেন, এখানে কাতারবন্দী, কঠোর পরিচালক ও তেলাওয়াতকারী বলে ফেরেশতাদের কয়েকটি দলকে বুঝানো হয়েছে। কারণ, এ সূরারই অন্যত্র কাতারবন্দী থাকা ফেরেশতাদের গুণ হিসেবে বর্ণিত হয়েছে। বলা হয়েছে, “আর আমরা তো সারিবদ্ধভাবে দণ্ডায়মান এবং আমরা অবশ্যই তাঁর পবিত্রতা ও মহিমা ঘোষণাকারী।” [১৬৫-১৬৬]
آية رقم 4
নিশ্চয় তোমাদের ইলাহ্ এক,
آية رقم 5
যিনি আসমানসমূহ, যমীন ও তাদের অন্তর্বর্তী সবকিছুর রব এবং রব সকল উদয়স্থলের [১]।
____________________
[১] সুদী বলেন, এর বহু বচনের কারণ হচ্ছে, শীত কাল এবং গ্ৰীষ্ম কালে সূর্য উদিত হওয়ার স্থানের ভিন্নতা। তিনি আরও বলেন, সারা বছরে সূর্যের ৩৬০টি উদিত হওয়ার স্থান রয়েছে, অনুরূপভাবে সূর্যাস্ত যাওয়ারও অনুরূপ স্থান রয়েছে। [তাবারী]
آية رقم 6
নিশ্চয় আমরা কাছের আসমানকে নক্ষত্ররাজির সুষমা দ্বারা সুশোভিত করেছি [১]
____________________
[১] এর সমার্থে দেখুন, সূরা ফুসসিলাত: ১২; সূরা আল-হিজর: ১৬; সূরা আল-মুলক: ৫
آية رقم 7
এবং রক্ষা করেছি প্রত্যেক বিদ্রোহী শয়তান থেকে [১]।
____________________
[১] অনুরূপ দেখুন, সূরা আল-হিজর: ১৭-১৮।
ফলে ওরা ঊর্ধ্ব জগতের কিছু শুনতে পারে না [১]। আর তাদের প্রতি নিক্ষিপ্ত হয় সব দিক থেকে---
____________________
[১] কাতাদাহ বলেন, الْمَلَاِالْاَعْلٰى বলে ফেরেশতাদের ঐ দলটিকে বোঝানো হয়েছে, যারা তাদের নীচে যারা আছে তাদের উপরে অবস্থান করছে। সেখান থেকে কোন কিছু শোনা নিষিদ্ধ করা হয়েছে। [তাবারী।]
آية رقم 9
বিতাড়নের জন্য [১] এবং তাদের জন্য আছে অবিরাম শাস্তি।
____________________
[১] কি নিক্ষিপ্ত হয়, তা বলা হয়নি। কাতাদাহ বলেন, তাদের উপর অগ্নিস্ফুলিঙ্গ বা উল্কাপিণ্ড নিক্ষেপ করা হয়। [তাবারী] আর মুজাহিদ বলেন, এখানে دحوراً শব্দটির অন্য অর্থ বিতাড়িত অবস্থায় [তাবারী]
آية رقم 10
তবে কেউ হঠাৎ কিছু শুনে ফেললে জ্বলন্ত উল্কাপিণ্ড তার পশ্চাদ্ধাবন করে।
সুতরাং তাদেরকে জিজ্ঞেস করুন, তারা সৃষ্টিতে দৃঢ়তর, না আমরা অন্য যা কিছু সৃষ্টি করেছি তা [১]? তাদেরকে তো আমরা সৃষ্টি করেছি আঠাল মাটি হতে।
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[১] মুজাহিদ বলেন, অন্য সৃষ্টি যেমন, আসমান, যমীন ও পাহাড়। [তাবারী।]
آية رقم 12
আপনি তো বিস্ময় বোধ করছেন, আর তারা করছে বিদ্রূপ [১]।
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[১] কাতাদাহ বলেন, মুহাম্মাদ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আশ্চর্য হচ্ছিলেন যে, এ কুরআন তাকে দেয়া হয়েছে, অথচ পথভ্রষ্টরা এটাকে নিয়ে উপহাস করছে। [তাবারী।]
آية رقم 13
এবং যখন তাদেরকে উপদেশ দেয়া হয়, তখন তারা তা গ্রহণ করে না।
آية رقم 14
আর যখন তারা কোন নিদর্শন দেখে, তখন তারা উপহাস করে
آية رقم 15
এবং বলে, 'এটা তো এক সুস্পষ্ট জাদু ছাড়া আর কিছুই নয়।
آية رقم 16
'আমরা যখন মরে যাব এবং মাটি ও অস্থিতে পরিণত হব, তখনও কি আমরা পুনরুত্থিত হব?
آية رقم 17
'এবং আমাদের পিতৃপুরুষরাও?’
آية رقم 18
বলুন, ‘হ্যাঁ, এবং তোমরা হবে লাঞ্ছিত।'
آية رقم 19
অতঃপর তা তো একটিমাত্ৰ প্ৰচণ্ড ধমক---আর তখনই তারা দেখবে [১]।
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[১] زجرة শব্দের একাধিক অর্থ হয়ে থাকে। এর এক অর্থ, ‘প্রচণ্ড ধমক’ বা ‘ভয়ানক শব্দ’। এখানে মৃতদেরকে জীবিত করার উদ্দেশ্যে ইসরাফীল আলাইহিস সালাম এর শিংগায় দ্বিতীয় ফুৎকার বোঝানো হয়েছে। [ফাতহুল কাদীর]
آية رقم 20
এবং তারা বলবে, 'হায়, দুর্ভোগ আমাদের! এটাই তো প্রতিদান দিবস।'
آية رقم 21
এটাই ফয়সালার দিন, যার প্রতি তোমরা মিথ্যা আরোপ করতে।
آية رقم 22
(ফেরেশতাদেরকে বলা হবে,) 'একত্র কর যালিম [১] ও তাদের সহচরদেরকে [২] এবং তাদেরকে, যাদের 'ইবাদত করত তারা---
____________________
[১] আল্লামা শানকীতী বলেন, যালেম বলে এখানে কাফেরদেরকে বোঝানো হয়েছে। কারণ, পরবর্তী অংশ ‘আর যাদের ইবাদাত করত তারা আল্লাহর পরিবর্তে” থেকে এটাই সুস্পষ্ট। কুরআনের বিভিন্ন স্থানে যুলুম বলে শির্ক উদ্দেশ্য নেয়া হয়েছে। [আদওয়াউল বায়ান]
[২] ইবনে আব্বাস বলেন, এখানে أزواج বলে অনুরূপ ও সমমতের লোক বোঝানো হয়েছে। কাতাদাহ বলেন, এর দ্বারা তাদের মত অন্যান্য কাফের বোঝানো হয়েছে। [তাবারী]
آية رقم 23
আল্লাহর পরিবর্তে। আর তাদেরকে পরিচালিত কর জাহান্নামের পথে [১],
____________________
[১] অথবা জাহান্নামের চতুর্থ দরজা হচ্ছে জাহীম। তাদেরকে সেদিকে পথনির্দেশ কর। [আত-তাফসীরুস সহীহ]
آية رقم 24
‘আর তাদেরকে থামাও, কারণ তাদেরকে তো প্রশ্ন করা হবে।
آية رقم 25
'তোমাদের কী হল যে, তোমরা একে অন্যের সাহায্য করছ না?'
آية رقم 26
বস্তুত তারা হবে আজ আতাসমৰ্পণকারী।
آية رقم 27
আর তারা একে অন্যের সামনাসামনি হয়ে জিজ্ঞাসাবাদ করবে---
آية رقم 28
তারা বলবে, 'তোমরা তো তোমাদের শপথ নিয়ে আমাদের কাছে আসতে [১]।'
____________________
[১] এ আয়াতের কয়েকটি অর্থ হতে পারে। এক. তোমরা তোমাদের শপথ নিয়ে এসে বলতে যে, তোমরা হকের উপর আছ, তাই আমরা তোমাদেরকে বিশ্বাস করেছিলাম। তোমরা এমনভাবে আসতে যে, আমরা তোমাদেরকে নিরাপদ মনে করতাম। ফলে আমরা তোমাদের অনুসরণ করেছিলাম। অর্থাৎ তোমরাই আমাদেরকে পথভ্রষ্ট করেছ। [জালালাইন] দুই. অন্য অর্থ হচ্ছে, তোমরা দ্বীন ও হকের লেবাস পরে আসতে, আর আমাদেরকে শরীআতের বিধি-বিধান সম্পর্কে উদাসীন করে দিতে। তা থেকে দূরে রাখতে। আর আমাদের কাছে ভ্ৰষ্ট পথকে শোভিত করে দেখাতে। [তাবারী; মুয়াসসার] তিন. তোমরা তোমাদের শক্তি ও প্রভাব নিয়ে আমাদেরকে প্রভাবিত করতে, ফলে আমরা তোমাদের অনুসরণ করতাম। [সা’দী]
آية رقم 29
তারা (নেতৃস্থানীয় কাফেররা) বলবে, 'বরং তোমরা তো মুমিন ছিলে না,
‘এবং তোমাদের উপর আমাদের কোন কর্তৃত্ব ছিল না; বস্তুত তোমরাই ছিলে সীমালংঘনকারী সম্প্রদায়।
آية رقم 31
'তাই আমাদের বিরুদ্ধে আমাদের রবের কথা সত্য হয়েছে, নিশ্চয় আমরা শাস্তি আস্বাদন করব।
آية رقم 32
'সুতরাং আমরা তোমাদেরকে বিভ্রান্ত করেছিলাম, কারণ আমরা নিজেরাও ছিলাম বিভ্রান্ত।'
آية رقم 33
অতঃপর তারা সবাই সেদিন শাস্তির শরীক হবে।
آية رقم 34
নিশ্চয় আমরা অপরাধীদের সাথে এরূপ করে থাকি।
তাদেরকে 'আল্লাহ ছাড়া কোন সত্য ইলাহ নেই’ বলা হলে তারা অহংকার করত [১]।
____________________
[১] অহংকারের কারণেই তারা মূলত: এ কালেমা উচ্চারণ করেনি। যদি তারা এ কালেমা উচ্চারণ করত তবে তাদের অবস্থা সম্পর্কে রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম যা বলেছেন তা হতো। তিনি বলেছেন, “আমি তো মানুষের সাথে যুদ্ধ করার জন্য নির্দেশিত হয়েছি যতক্ষণ না তারা বলবে, "লা ইলাহা ইল্লাল্লাহ”। যদি তারা তা বলে তবে তাদের জান ও মাল আমার হাত থেকে নিরাপদ হবে। তবে ইসলামের হক ছাড়া। আর তাদের হিসেব তো আল্লাহরই উপর। [বুখারী:২৫, মুসলিম:২২] ইমাম যুহরী বলেন, আল্লাহ তা'আলা তাঁর কিতাবেও তা উল্লেখ করেছেন। তিনি তাঁর কিতাবে একদল লোকের অহংকারের কথা বর্ণনা করে বলেছেন, “তাদেরকে 'আল্লাহ ছাড়া কোন সত্য ইলাহ নেই’ বলা হলে তারা অহংকার করত”। আরও বলেছেন, “যখন কাফিররা তাদের অন্তরে পোষণ করেছিল গোত্রীয় অহমিকা---অজ্ঞতার যুগের অহমিকা, তখন আল্লাহ তাঁর রাসূল ও মুমিনদের উপর স্বীয় প্রশান্তি নাযিল করলেন; আর তাদেরকে তাকওয়ার কালেমায় সুদৃঢ় করলেন,” আর সেই তাকওয়ার কালেমা হচ্ছে, লা ইলাহা ইল্লাল্লাহ ও মুহাম্মাদুর রাসূলুল্লাহ। মুশরিকরা হুদাইবিয়ার দিন এটা বলা থেকে অহংকার করে বিরত ছিল। [ইবন হিব্বান: ১/৪৫১-৪৫২; আত-তাফসীরুস সহীহ]
آية رقم 36
এবং বলত, 'আমরা কি এক উন্মাদ কবির কথায় আমাদের ইলাহদেরকে বর্জন করব?'
آية رقم 37
বরং তিনি তো সত্য নিয়ে এসেছেন এবং তিনি রাসূলদেরকে সত্য বলে স্বীকার করেছেন।
آية رقم 38
তোমরা অবশ্যই যন্ত্রণাদায়ক শাস্তি আস্বাদনকারী হবে,
آية رقم 39
এবং তোমরা যা করতে তারই প্রতিফল পাবে---
آية رقم 40
তবে তারা নয়, যারা আল্লাহর একনিষ্ঠ বান্দা।
آية رقم 41
তাদের জন্য আছে নির্ধারিত রিযিক---
آية رقم 42
ফলমূল; আর তারা হবে সম্মানিত,
آية رقم 43
নেয়ামত-পূর্ণ জান্নাতে
آية رقم 44
মুখোমুখি হয়ে আসনে আসীন হবে।
آية رقم 45
তাদেরকে ঘুরে ঘুরে পরিবেশন করা হবে বিশুদ্ধ সুরাপূর্ণ পাত্ৰ [১]।
____________________
[১] শরাবের পানিপাত্র নিয়ে ঘুরে ঘুরে জান্নাতীদের মধ্যে কারা পরিবেশন করবে সেকথা এখানে বলা হয়নি। এর বিস্তারিত বর্ণনা দেয়া হয়েছে অন্যান্য স্থানেঃ “আর তাদের খিদমত করার জন্য ঘুরবে তাদের খাদেম ছেলেরা যারা এমন সুন্দর যেমন ঝিনুকে লুকানো মোতি।” [সূরা আত-তুর: ২৪] “আর তাদের খিদমত করার জন্য ঘুরে ফিরবে এমন সব বালক যারা হামেশা বালকই থাকবে। তোমরা তাদেরকে দেখলে মনে করবে মোতি ছড়িয়ে দেয়া হয়েছে।” [সূরা আল-ইনসান: ১৯]
آية رقم 46
শুভ্ৰ উজ্জ্বল, যা হবে পানকারীদের জন্য সুস্বাদু।
آية رقم 47
তাতে ক্ষতিকর কিছু থাকবে না এবং তাতে তারা মাতালও হবে না,
آية رقم 48
তাদের সঙ্গে থাকবে আনতনয়না [১] ডাগর চোখ বিশিষ্টা [২] (হুরীগণ)।
____________________
[১] এখানে জান্নাতের হুরীদের বৈশিষ্ট্য বর্ণিত হয়েছে। এ আয়াতে প্রথমে তাদের গুণ বর্ণিত হয়েছে যে, তারা হবে "আনতনয়না”। যেসব স্বামীর সাথে আল্লাহ তা'আলা তাদের দাম্পত্য সম্পর্ক স্থাপন করে দেবেন, তারা তাদের ছাড়া কোন ভিন্ন পুরুষের প্রতি দৃষ্টিপাত করবে না। কোন কোন মুফাসসির এর অর্থ করেছেন, তারা তাদের স্বামীদের দৃষ্টি নত রাখবে। অর্থাৎ তারা নিজেরা এমন ‘অনিন্দ্য সুন্দরী ও স্বামীর প্রতি নিবেদিতা’ হবে যে, স্বামীদের মনে অন্য কোন নারীর প্রতি দৃষ্টিপাত করার বাসনাই হবে না। [দেখুন, তাবারী; আব্দওয়াউল বায়ান]
[২] এখানে হুরীদের দ্বিতীয় গুণ বর্ণিত হয়েছে। বলা হয়েছে যে, তাদের চোখ বড় বড় হবে। মেয়েদের চোখ বড় হলে সুন্দর দেখায়। [দেখুন,তাবারী; আদওয়াউল বায়ান]
آية رقم 49
তারা যেন সুরক্ষিত ডিম্ব [১]।
____________________
[১] এখানে জান্নাতের হুরীগণের তৃতীয় গুণ বর্ণিত হয়েছে। তাদেরকে সুরক্ষিত ডিমের সাথে তুলনা করা হয়েছে। আরবদের কাছ এই তুলনা প্রসিদ্ধ ও সুবিদিত ছিল। যে ডিম পাখার নিচে লুকানো থাকে, তা এমনই সুরক্ষিত থাকে যে, এর উপর বাইরের ধূলিকণার কোন প্রভাব পড়ে না। ফলে তা খুব স্বচ্ছ ও পরিচ্ছন্ন থাকে। এছাড়া এর রঙ সাদা হলুদাভ হয়ে থাকে; যা আরবদের কাছে মহিলাদের সর্বাধিক চিত্তাকর্ষক রঙ হিসেবে গণ্য হত। তাই এর সাথে তুলনা করা হয়েছে। [দেখুন,তাবারী; আদওয়াউল বায়ান]
آية رقم 50
অতঃপর তারা একে অন্যের সামনাসামনি হয়ে জিজ্ঞাসাবাদ করবে
آية رقم 51
তাদের কেউ বলবে, 'আমার ছিল এক সঙ্গী;
آية رقم 52
‘সে বলত, 'তুমি কি তাদের অন্তর্ভুক যারা বিশ্বাস করে যে,
آية رقم 53
‘আমরা যখন মরে যাব এবং আমরা মাটি ও অস্থিতে পরিণত হব তখনও কি আমাদেরকে প্রতিফল দেয়া হবে?’
آية رقم 54
আল্লাহ্‌ বলবেন, 'তোমরা কি তাকে দেখতে চাও?’
آية رقم 55
অতঃপর সে ঝুঁকে দেখবে এবং তাকে দেখতে পাবে জাহান্নামের মধ্যস্থলে;
آية رقم 56
বলবে, ‘আল্লাহর কসম! তুমি তো আমাকে প্রায় ধ্বংসই করেছিলে
آية رقم 57
'আমার রবের অনুগ্রহ না থাকলে আমিও তো হাযিরকৃত [১] ব্যক্তিদের মধ্যে শামিল হতাম।
____________________
[১] অর্থাৎ যদি আমার উপর আল্লাহর নেয়ামত না থাকত, তবে তো আমি জাহান্নামের শাস্তিতে হাযিরকৃত লোকদের অন্তর্ভুক্ত হয়ে যেতাম। [সা'দী]
آية رقم 58
'আমাদের তো আর মৃত্যু হবে না
آية رقم 59
প্রথম মৃত্যুর পর এবং আমাদেরকে শাস্তিও দেয়া হবে না !'
آية رقم 60
এটা তো অবশ্যই মহাসাফল্য।
آية رقم 61
এরূপ সাফল্যের জন্য আমলকারীদের উচিত আমল করা,
آية رقم 62
আপ্যায়নের জন্য কি এটাই শ্রেয়, না যাক্কুম গাছ?
آية رقم 63
যালিমদের জন্য আমরা এটা সৃষ্টি করেছি পরীক্ষাস্বরূপ,
آية رقم 64
এ গাছ উদ্‌গত হয় জাহান্নামের তলদেশ থেকে,
آية رقم 65
এর মোচা যেন শয়তানের মাথা,
آية رقم 66
তারা তো এটা থেকে খাবে এবং উদর পূর্ণ করবে এটা দিয়ে [১]।
____________________
[১] আল্লামা শানকীতী বলেন, এ আয়াতে আল্লাহ বলেছেন যে, তারা তো যাক্কুম গাছ থেকে খাবে এবং উদর পূর্ণ করবে এটা দিয়ে। তদুপরি তাদের জন্য থাকবে ফুটন্ত পানির মিশ্রণ। অন্যত্রও তা বলেছেন, “তারপর হে বিভ্রান্ত মিথ্যারোপকারীরা! তোমরা অবশ্যই আহার করবে যক্কুম গাছ থেকে, অতঃপর সেটা দ্বারা তারা পেট পূর্ণ করবে, তদুপরি তারা পান করবে তার উপর অতি উষ্ণ পানি--অতঃপর পান করবে তৃষ্ণার্ত উটের ন্যায়।” [সূরা আল-ওয়াকি'আহঃ ৫১-৫৫]
آية رقم 67
তদুপরি তাদের জন্য থাকবে ফুটন্ত পানির মিশ্রণ।
آية رقم 68
তারপর তাদের প্রত্যাবর্তন হবে প্ৰজ্বলিত আগুনেরই দিকে।
آية رقم 69
তারা তো তাদের পিতৃপুরুষদেরকে পেয়েছিল বিপথগামী,
آية رقم 70
অতঃপর তাদের পদাঙ্ক অনুসরণে ধাবিত হয়েছিল [১]।
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[১] মুজাহিদ বলেন, এর অর্থ কোন কিছুর পিছনে দ্রুত চলা। [তাবারী] কাতাদাহ বলেন, খুব দ্রুত চলা। [তাবারী।]
آية رقم 71
আর অবশ্যই তাদের আগে পূর্ববতীদের বেশীর ভাগ বিপথগামী হয়েছিল,
آية رقم 72
আর অবশ্যই আমরা তাদের মধ্যে সতর্ককারী পাঠিয়েছিলাম।
آية رقم 73
কাজেই লক্ষ্য করুন যাদেরকে সতর্ক করা হয়েছিল, তাদের পরিণাম কী হয়েছিল!
آية رقم 74
তবে আল্লাহর একনিষ্ঠ বান্দাদের কথা স্বতন্ত্র [১]।
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[১] সুদী বলেন, এরা হচ্ছে, তারা আল্লাহ যাদেরকে তাঁর নিজের জন্য বিশেষভাবে বাছাই করে নিয়েছেন। [তাবারী।]
آية رقم 75
আর অবশ্যই নূহ আমাদেরকে ডেকেছিলেন, অতঃপর (দেখুন) আমরা কত উত্তম সাড়াদানকারী।
آية رقم 76
আর তাকে এবং তার পরিবারবর্গকে আমরা উদ্ধার করেছিলাম মহাসংকট থেকে।
آية رقم 77
আর তার বংশধরদেরকেই আমরা বিদ্যমান রেখেছি (বংশপরম্পরায়) [১],
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[১] ইবনে আব্বাস বলেন, এর অর্থ শুধু নৃহের সন্তানরাই অবশিষ্ট ছিল। [তাবারী]
آية رقم 78
আর আমরা পরবর্তীদের মধ্যে তার জন্য সুখ্যাতি রেখেছি।
آية رقم 79
সমগ্র সৃষ্টির মধ্যে নূহের প্রতি শান্তি বর্ষিত হোক।
آية رقم 80
নিশ্চয় আমরা এভাবে মুহসিনদেরকে পুরস্কৃত করে থাকি,
آية رقم 81
নিশ্চয় তিনি ছিলেন আমাদের মুমিন বান্দাদের অন্যতম।
آية رقم 82
তারপর অন্য সকলকে আমরা নিমজ্জিত করেছিলাম।
آية رقم 83
আর ইবরাহীম তো তার অনুগামীদের অন্তর্ভুক্ত [১]।
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[১] ইবরাহীম আলাইহিস সালামের কাহিনী বিস্তারিত দেখুন, তার পিতা ও সম্প্রদায়ের সাথে তার বিভিন্ন আলোচনা, সূরা মারইয়াম: ৪১-৪৯; সূরা আশ-শু'আরা: ৬৯-৭০। ইবনে আব্বাস বলেন, এখানে তার অনুগামী বলে, তার দ্বীনের অনুগামী বোঝানো হয়েছে। [তাবারী] মুজাহিদ বলেন, তার পদ্ধতি ও নিয়ম-নীতির অনুগামী বোঝানো হয়েছে। [তাবারী।]
آية رقم 84
স্মরণ করুন, যখন তিনি তার রবের কাছে উপস্থিত হয়েছিলেন বিশুদ্ধচিত্তে [১] ;
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[১] সুদী বলেন, অর্থাৎ শির্কমুক্ত হয়ে আল্লাহর কাছে আসলেন। [তাবারী]
آية رقم 85
যখন তিনি তার পিতা ও তার সম্পপ্রদায়কে জিজ্ঞেস করেছিলেন, ‘তোমরা কিসের ইবাদাত করছ?
آية رقم 86
'তোমার কি আল্লাহর পরিবর্তে অলীক ইলাহ্‌গুলোকে চাও?
آية رقم 87
‘তাহলে সকলসৃষ্টির রব সম্বন্ধে তোমাদের ধারণা কী [১] ?’
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[১] কাতাদাহ বলেন, অর্থাৎ যদি তোমরা তাঁর সাথে এমন অবস্থায় সাক্ষাৎ করেছ যে, তোমরা তাকে ছাড়া অন্যকে ইবাদাত করেছ। [তাবারী] তখন তাঁর ব্যাপারে তোমাদের কি ধারণা? তিনি কি তোমাদের এমনিই ছেড়ে দিবেন?
آية رقم 88
অতঃপর তিনি তারকারাজির দিকে একবার তাকালেন,
آية رقم 89
এবং বললেন, 'নিশ্চয় আমি অসুস্থ [১]।'
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[১] ইবরাহীম আলাইহিস সালাম তার জীবনে তিনটি মিথ্যা বলেছিলেন বলে যে কথা বলা হয়ে থাকে এটি তার একটি। কোন কোন মুফাসসির বলেন, এখানে অসুস্থ বলে বোঝানো হয়েছে যে, আমি অসুস্থ হয়ে পড়ব। কারণ, আরবী ভাষায় فعيل এর পদবাচ্য বহুল পরিমাণে ভবিষ্যৎ কালের জন্য ব্যবহৃত হয়। যেমন পবিত্র কুরআনে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামকে সম্বোধন করে বলা হয়েছে
اِنَّكَ مَيِّتٌ وَّاِنَّهُمْ مَّيِّتُوْنَ
[সূরা আয-যুমার: ৩০] এর বাহ্যিক অর্থ আপনিও মৃত এবং তারাও মৃত। কিন্তু এখানে এরূপ অর্থ উদ্দেশ্য নয়, বরং অর্থ হল, আপনিও মৃত্যুবরণ করবেন এবং তারাও মৃত্যুবরণ করবে। এমনিভাবে ইব্রাহীম আলাইহিস সালাম سقيم এর অর্থ নিয়েছিলেন যে, “আমি অসুস্থ হয়ে পড়ব”। এ কথা বলার কারণ এই যে, মৃত্যুর পূর্বে প্রত্যেক মানুষের অসুস্থ হওয়া স্থির নিশ্চিত। কোন কোন মুফাসসির বলেন, এতে তার উদ্দেশ্য ছিল মানসিক সংকোচ; যা স্বগোত্রের মুশরিকসুলভ কাণ্ডকীর্তি দেখে তার মনে সৃষ্টি হচ্ছিল। ‘আমার মন খারাপ’ বলেও এ অর্থ অনেকটা ব্যক্ত করা যায়। বলা বাহুল্য, এ বাক্যে 'মানসিক সংকোচ’ অর্থেরও পুরোপুরি অবকাশ রয়েছে। কেউ কেউ বলেন, ইব্রাহীম আলাইহিস সালাম এর একথাটিকে মিথ্যা বা বাস্তববিরোধী বলার জন্য প্রথমে কোন উপায়ে একথা জানা উচিত যে, সে সময় ইবরাহীম আলাইহিসসালামের কোন প্রকারের কোন কষ্ট ও অসুস্থতা ছিল না এবং তিনি নিছক বাহানা করে একথা বলেছিলেন। যদি এর কোন প্রমাণ না থেকে থাকে, তাহলে অযথা কিসের ভিত্তিতে একে মিথ্যা গণ্য করা হবে? হতে পারে ইব্রাহীম আলাইহিসসালাম তখন বাস্তবিকই কিছুটা অসুস্থ ছিলেন; তবে উৎসবে যোগদানে প্রতিবন্ধক হতে পারে, এমন অসুস্থতা ছিল না। তিনি তার মামুলি অসুস্থতার কথাই এমনভাবে ব্যক্ত করেছেন, যাতে শ্রোতারা মনে করে নেয় যে, তিনি গুরুতর অসুস্থ হয়ে পড়েছেন, কাজেই মেলায় যাওয়া সম্ভবপর নয়। আলেমগণ এটাকেই তাওরিয়াহ হিসেবে গ্রহণ করেছেন। যা বাহ্যিক আকার-আকৃতিতে মিথ্যা মনে হয়, কিন্তু বক্তার উদ্দেশ্যের দিকে লক্ষ্য করলে মিথ্যা হয় না। অর্থাৎ যার বাহ্যিক অৰ্থ বাস্তবের প্রতিকূলে এবং বক্তার উদ্দিষ্ট অর্থ বাস্তবের অনুকূলে। [দেখুন-তাবারী; ফাতহুল কাদীর] এ ব্যাখ্যা সর্বাধিক যুক্তিযুক্ত এবং সন্তোষজনক। কারণ, এক হাদিসে ইব্রাহীম আলাইহিস সালাম এর উক্তি فَقَالَ اَنِّىْ سَقِيْمٌ এর জন্যে كذب (মিথ্যা) শব্দ ব্যবহার করা হয়েছে। [বুখারী: ৩৩৫৮] এ হাদীসেরই কোন কোন বর্ণনায় আরও বলা হয়েছে, “এগুলোর মধ্যে কোন মিথ্যা এরূপ নয়; যা আল্লাহর দ্বীনের প্রতিরক্ষা ও সমর্থনে বলা হয়নি”। [তিরমিয়ী: ৩১৪৮]
آية رقم 90
অতঃপর তারা তাকে পিছনে রেখে চলে গেল।
آية رقم 91
পরে তিনি চুপিচুপি তাদের দেবতাগুলোর কাছে গেলেন এবং বললেন, 'তোমরা খাদ্য গ্রহণ করছ না কেন?'
آية رقم 92
'তোমাদের কী হয়েছে যে তোমরা কথা বল না?'
آية رقم 93
অতঃপর তিনি তাদের উপর সবলে আঘাত হানলেন।
آية رقم 94
তখন ঐ লোকগুলো তার দিকে ছুটে আসল।
آية رقم 95
তিনি বললেন, 'তোমরা নিজেরা যাদেরকে খোদাই করে নির্মাণ কর তোমরা কি তাদেরই ইবাদাত কর?
آية رقم 96
অথচ আল্লাহ্ই সৃষ্টি করেছেন। তোমাদেরকে এবং তোমরা যা তৈরী কর তাও [১]।'
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[১] হাদীসে এসেছে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন, “নিশ্চয় আল্লাহই প্রত্যেক শিল্পী ও তার শিল্পকে তৈরী করেন’ [মুস্তাদরাকে হাকিম: ১/৩১] অর্থাৎ মানুষের কাজের স্রষ্টাও আল্লাহ। [আত-তাফসীরুস সহীহ]
آية رقم 97
তারা বলল, 'এর জন্য এক ইমারত নির্মাণ কর, তারপর একে জ্বলন্ত আগুনে নিক্ষেপ কর।'
آية رقم 98
এভাবে তারা তার বিরুদ্ধে চক্রান্তের সংকল্প করেছিল; কিন্তু আমরা তাদেরকে খুবই হেয় করে দিলাম [১]।
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[১] কাতাদাহ বলেন, অর্থাৎ এরপর আর তাদের সাথে বিতণ্ডায় যেতে হয়নি। তারপূর্বেই তাদের ধ্বংস করা হয়েছিল। [তাবারী; আত-তাফসীরুস সহীহ]
آية رقم 99
তিনি বললেন, 'আমি আমার রবের দিকে চললাম [১], তিনি আমাকে অবশ্যই হেদায়াত করবেন,
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[১] কাতাদাহ বলেন, অর্থাৎ তিনি বললেন, তিনি তার আমল, মন ও নিয়্যত সব নিয়েই যাচ্ছেন। [তাবারী]
آية رقم 100
'হে আমার রব! আমাকে এক সৎকর্মপরায়ণ সন্তান দান করুন।'
آية رقم 101
অতঃপর আমরা তাকে এক সহিষ্ণু পুত্রের সুসংবাদ দিলাম [১]।
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[১] এখান থেকে ইবরাহীম আলাইহিস সালাম ও তার বড় সন্তান ইসমাঈলের কাহিনী বর্ণিত হচ্ছে। এখানে আরও আছে ইসমাঈলের যবেহ ও তার বিনিময় দেয়ার আলোচনা। এ সূরা আস-সাফফাত ব্যতীত আর কোথাও এ ঘটনা আলোচিত হয় নি। [আত-তাফসীরুস সহীহ]
অতঃপর তিনি যখন তার পিতার সাথে কাজ করার মত বয়সে উপনীত হলেন, তখন ইবরাহীম বললেন, 'হে প্রিয় বৎস! আমি স্বপ্নে দেখি যে, তোমাকে আমি যবেহ করছি [১], এখন তোমার অভিমত কি বল?' তিনি বললেন, 'হে আমার পিতা! আপনি যা আদেশপ্ৰাপ্ত হয়েছেন তা-ই করুন। আল্লাহর ইচ্ছায় আপনি আমাকে ধৈর্যশীল পাবেন।'
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[১] কাতাদাহ বলেন, নবী-রাসূলদের স্বপ্ন ওহী হয়ে থাকে। তারা যখন স্বপ্নে কিছু দেখতেন সেটা বাস্তবে রূপ দিতেন। [তাবারী।]
آية رقم 103
অতঃপর যখন তারা উভয়ে আনুগত্য প্রকাশ করলেন [১] এবং ইবরাহীম তার পুত্রকে উপুড় করে শায়িত করলেন,
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[১] কাতাদাহ বলেন, যখন ইসমাঈল তার আত্মাকে আল্লাহর জন্য সোপর্দ করলেন, আর ইবরাহীম তার ছেলেকে আল্লাহর জন্য সমর্পন করলেন। [তাবারী।]
آية رقم 104
তখন আমরা তাকে ডেকে বললাম, ‘হে ইবরাহীম!
آية رقم 105
আপনি তো স্বপ্নের আদেশ সত্যই পালন করলেন!’---এভাবেই আমরা মুহসিনদেরকে পুরস্কৃত করে থাকি।
آية رقم 106
নিশ্চয়ই এটা ছিল এক স্পষ্ট পরীক্ষা।
آية رقم 107
আর আমরা তাকে মুক্ত করলাম এক বড় যবেহ এর বিনিময়ে।
آية رقم 108
আর আমরা তার জন্য পরবর্তীদের মধ্যে সুনাম-সুখ্যাতি রেখে দিয়েছি।
آية رقم 109
ইবরাহীমের উপর শান্তি বৰ্ষিত হোক।
آية رقم 110
এভাবেই আমরা মুহসিনদেরকে পুরস্কৃত করে থাকি।
آية رقم 111
নিশ্চয় তিনি ছিলেন আমাদের মুমিন বান্দাদের অন্যতম;
آية رقم 112
আর আমরা তাকে সুসংবাদ দিয়েছিলাম ইসহাকের, তিনি ছিলেন এক নবী, সৎকর্মপরায়ণদের অন্যতম।
আর আমরা ইবরাহীমের ওপর বরকত দান করেছিলাম এবং ইসহাকের উপরও; তাদের উভয়ের বংশধরদের মধ্যে কিছু সংখ্যক মুহসিন এবং কিছু সংখ্যক নিজেদের প্রতি স্পষ্ট অত্যাচারী।
آية رقم 114
আর অবশ্যই আমরা অনুগ্রহ করেছিলাম মূসা ও হারূনের প্রতি,
آية رقم 115
এবং তাদেরকে এবং তাদের সম্প্রদায়কে আমরা উদ্ধার করেছিলাম মহাসংকট থেকে [১]।
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[১] সুদী বলেন, মহাসংকট বলে ডুবে যাওয়া বুঝানো হয়েছে। [তাবারী] তবে হাসান বসরী বলেন, মহাসংকট বলে ফের’আউনের বংশধরদের বুঝানো হয়েছে। [তাবারী]
آية رقم 116
আর আমরা সাহায্য করেছিলাম তাদেরকে, ফলে তারাই হয়েছিল বিজয়ী।
آية رقم 117
আর আমরা উভয়কে দিয়েছিলাম বিশদ কিতাব [১]।
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[১] কাতাদাহ বলেন, অর্থাৎ তাওরাত দিয়েছিলাম। যাতে হেদায়াত বর্ণিত ছিল, বিস্তারিত ও আহকামসমৃদ্ধ ছিল। [তাবারী।]
آية رقم 118
আর উভয়কে আমরা পরিচালিত করেছিলাম সরল পথে।
آية رقم 119
আর আমরা তাদের উভয়ের জন্য পরবর্তীদের মধ্যে সুনাম-সুখ্যাতি রেখে দিয়েছি।
آية رقم 120
মূসা ও হারূনের প্রতি সালাম (শান্তি ও নিরাপত্তা)।
آية رقم 121
এভাবেই আমরা মুহসিনদেরকে পুরস্কৃত করে থাকি।
آية رقم 122
নিশ্চয় তারা উভয়ে ছিলেন আমাদের মুমিন বান্দাদের অন্তর্ভুক্ত।
آية رقم 123
আর নিশ্চয় ইলইয়াস ছিলেন রাসূলদের একজন [১]।
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[১] কাতাদা বলেন, ইলইয়াস ও ইন্দ্রীস একই ব্যক্তি। [তাবারী] অন্যদের নিকট তাদের মধ্যে পার্থক্য রয়েছে। [ইবন কাসীর] সে মতে তিনি ছিলেন, ইলইয়াস ইবনে ফিনহাস ইবনে আইযার ইবনে হারূন ইবনে ইমরান। তারা বালি নামীয় এক মূর্তির পূজা করত। তিনি তাদেরকে তা থেকে নিষেধ করেন। কিন্তু তারা তা থেকে বিরত হয় না। [ইবন কাসীর]
آية رقم 124
যখন তিনি তার সম্পপ্রদায়কে বলেছিলেন, 'তোমরা কি তাকওয়া অবলম্বন করবে না?
آية رقم 125
'তোমরা কি বা'আলকে ডাকবে এবং পরিত্যাগ করবে শ্রেষ্ঠ স্রষ্টা---
آية رقم 126
'আল্লাহকে, যিনি তোমাদের রব এবং তোমাদের প্রাক্তন পিতৃপুরুষদেরও রব।'
آية رقم 127
কিন্তু তারা তার প্রতি মিথ্যারোপ করেছিল, কাজেই তাদেরকে অবশ্যই শাস্তির জন্য উপস্থিত করা হবে।
آية رقم 128
তবে আল্লাহর একনিষ্ঠ বান্দাদের কথা স্বতন্ত্ৰ।
آية رقم 129
আর আমরা তার জন্য পরবর্তীদের মধ্যে সুনাম-সুখ্যাতি রেখে দিয়েছি।
آية رقم 130
ইল্‌য়াসীনের [১] উপর শান্তি বৰ্ষিত হোক।
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[১] অধিকাংশ মুফাসসির বলেন, এটি ইলিয়াসের দ্বিতীয় নাম। যেমন ইবরাহীমের দ্বিতীয় নাম ছিল আব্রাহাম। আর অন্য কোন কোন মুফাসসিরের মতে আরববাসীদের মধ্যে ইবরানী (হিব্রু) ভাষায় শব্দাবলীর বিভিন্ন উচ্চারণের প্রচলন ছিল। যেমন মীকাল ও মীকাইল এবং মীকাইন একই ফেরেশতাকে বলা হতো। একই ঘটনা ঘটেছে ইলিয়াসের নামের ব্যাপারেও। স্বয়ং কুরআন মজীদে একই পাহাড়কে একবার “তুরে সাইনা” বলা হচ্ছে এবং অন্যত্র বলা হচ্ছে, “তুরে সীনীন।” [তাবারী]
آية رقم 131
এভাবেই তো আমরা মুহসিনদেরকে পুরস্কৃত করে থাকি।
آية رقم 132
তিনি তো ছিলেন আমাদের মুমিন বান্দাদের অন্যতম।
آية رقم 133
আর নিশ্চয় লুত ছিলেন রাসূলদের একজন।
آية رقم 134
স্মরণ করুন, যখন আমরা তাকে ও তার পরিবারের সকলকে উদ্ধার করেছিলাম---
آية رقم 135
পিছনে অবস্থানকারীদের অন্তর্ভুক্ত এক বৃদ্ধা ছাড়া।
آية رقم 136
অতঃপর অবশিষ্টদেরকে আমরা সম্পূর্ণভাবে ধ্বংস করেছিলাম।
آية رقم 137
আর তোমরা তো তাদের ধ্বংসাবশেষগুলো অতিক্রম করে থাক সকালে।
آية رقم 138
ও সন্ধ্যায় [১]। তবুও কি তোমরা বোঝা না?
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[১] এ বিষয়ের দিকে ইংগিত করা হয়েছে যে, কুরাইশ ব্যবসায়ীরা সিরিয়া ও ফিলিস্তীন যাবার পথে লুতের সম্প্রদায়ের বিধ্বস্ত জনপদ যেখানে অবস্থিত ছিল দিনরাত সে এলাকা অতিক্রম করতো। [দেখুন, তাবারী, মুয়াস্‌সার, ফাতহুল কাদীর]
آية رقم 139
আর নিশ্চয় ইউনুস ছিলেন রাসূলদের একজন।
آية رقم 140
স্মরণ করুন, যখন তিনি বোঝাই নৌযানের দিকে পালিয়ে গেলেন,
آية رقم 141
অতঃপর তিনি লটারীতে যোগগান করে পরাভূতদের অন্তর্ভুক্ত হলেন [১]।
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[১] কাতাদাহ বলেন, তিনি নৌকায় উঠার পর নৌকাটির চলা থেমে গেল। তখন লোকেরা বুঝল যে, কোন ঘটনা ঘটেছে, যার কারণে এটা আটকে গেছে। তখন তারা লটারী করল। তাতে ইউনুস আলাইহিস সালামের নাম আসল। তখন তিনি তার নিজেকে সাগরে নিক্ষেপ করলেন। আর তখনি একটি বড় মাছ তাকে গিলে ফেলল। [তাবারী]
آية رقم 142
অতঃপর এক বড় আকারের মাছ তাকে গিলে ফেলল, আর তিনি ছিলেন ধিকৃত।
آية رقم 143
অতঃপর তিনি যদি আল্লাহর পবিত্ৰতা ও মহিমা ঘোষণাকারীদের অন্তর্ভুক্ত না হতেন [১],
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[১] এর দুটি অর্থ হয় এবং দুটি অর্থই এখানে প্রযোজ্য। একটি অর্থ হচ্ছে, ইউনুস আলাইহিস সালাম পূর্বেই আল্লাহ থেকে গাফিল লোকদের অন্তর্ভুক্ত ছিলেন না বরং তিনি তাদের অন্তর্ভুক্ত ছিলেন যারা ছিলেন আল্লাহর চিরন্তন প্রশংসা, মহিমা ও পবিত্ৰতা ঘোষণাকারী। দ্বিতীয়টি হচ্ছে, যখন তিনি মাছের পেটে পৌঁছুলেন তখন আল্লাহরই দিকে রুজূ করলেন এবং তারই প্রশংসা, মহিমা ও পবিত্রতা ঘোষণা করতে থাকলেন। অন্যত্র বলা হয়েছেঃ “তাই সে অন্ধকারের মধ্যে তিনি ডেকে উঠলেন, আপনি ছাড়া আর কোন ইলাহ নেই,পাক-পবিত্র আপনার সত্তা, অবশ্যই আমি অপরাধী।” [সূরা আল আম্বিয়া: ৮৭] রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেন, মাছের পেটে ইউনূস আলাইহিস সালাম-এর পঠিত দোআ যে কোন মুসলিম যে কোন উদ্দেশ্যে পাঠ করবে, তার দো'আ কবুল হবে। [তিরমিয়ী: ৩৫০৫]
آية رقم 144
তাহলে তাকে উত্থানের দিন পর্যন্ত থাকতে হত তার পেটে।
آية رقم 145
অতঃপর ইউনুসকে আমরা নিক্ষেপ করলাম এক তৃণহীন প্রান্তরে [১] এবং তিনি ছিলেন অসুস্থ।
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[১] এটি কাতাদাহ এর মত। ইবন আব্বাস থেকে বর্ণিত, এর অর্থ, নদীর তীরে। [তাবারী]
آية رقم 146
আর আমরা তার উপর ইয়াকতীন [১] প্ৰজাতির এক গাছ উদ্‌গত করলাম,
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[১] ইয়াকতীন আরবী ভাষায় এমন ধরনের গাছকে বলা হয় যা কোন গুঁড়ির ওপর দাঁড়িয়ে থাকে না বরং লতার মতো ছড়িয়ে যেতে থাকে। যেমন লাউ, তরমুজ, শশা ইত্যাদি। মোটকথা সেখানে অলৌকিকভাবে এমন একটি লতাবিশিষ্ট বা লতানো গাছ উৎপন্ন করা হয়েছিল যার পাতাগুলো ইউনুসকে ছায়া দিচ্ছিল এবং ফলগুলো একই সংগে তার জন্য খাদ্য সরবরাহ করছিল এবং পানিরও যোগান দিচ্ছিল। [দেখুন, তাবারী।]
آية رقم 147
আর তাকে আমরা একলক্ষ বা তার চেয়ে বেশী লোকের প্রতি পাঠিয়েছিলাম।
آية رقم 148
অতঃপর তারা ঈমান এনেছিল; ফলে আমরা তাদেরকে কিছু কালের জন্য জীবনোপভোগ করতে দিলাম।
آية رقم 149
এখন তাদেরকে জিজ্ঞেস করুন, 'আপনার রবের জন্যই কি রয়েছে কন্যা সন্তান [১] এবং তাদের জন্য পুত্র সন্তান?'
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[১] বিভিন্ন বর্ণনায় এসেছে আরবের কুরাইশ, জুহাইনা, বনী সালামাহ, খুযা’আহ এবং অন্যান্য গোত্রের কেউ কেউ বিশ্বাস করতো, ফেরেশতারা আল্লাহর কন্যা। কুরআন মজীদের বিভিন্ন স্থানে তাদের এ জাহেলী আকীদার কথা বলা হয়েছে। উদাহরণস্বরূপ দেখুন সূরা আন নিসা, ১১৭ ; আন নাহল, ৫৭-৫৮; আল-ইসরা, ৪০ ; আয্‌ যুখরুফ, ১৬-১৯ এবং আন নাজম, ২১-২৭ আয়াতসমূহ।
آية رقم 150
অথবা আমরা কি ফেরেশতাদেরকে নারীরূপে সৃষ্টি করেছিলাম আর তারা দেখেছিল [১] ?
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[১] অন্যস্থানে এসেছে, “আর তারা রহমানের বান্দা ফেরেশতাগণকে নারী গণ্য করেছে; এদের সৃষ্টি কি তারা দেখেছিল? তাদের সাক্ষ্য অবশ্যই লিপিবদ্ধ করা হবে এবং তাদেরকে জিজ্ঞেস করা হবে।” [সূরা আয-যুখরুফ: ১৯]
آية رقم 151
সাবধান! তারা তো মনগড়া কথা বলে যে,
آية رقم 152
‘আল্লাহ সন্তান জন্ম দিয়েছেন।' আর তারা নিশ্চয় মিথ্যাবাদী।
آية رقم 153
তিনি কি পুত্ৰ সন্তানের পরিবর্তে কন্যা সন্তান পছন্দ করেছেন?
آية رقم 154
তোমাদের কী হয়েছে, তোমরা কিরূপ বিচার কর?
آية رقم 155
তবে কি তোমরা উপদেশ গ্ৰহণ করবে না?
آية رقم 156
নাকি তোমাদের কোন সুস্পষ্ট দলীল-প্ৰমাণ আছে?
آية رقم 157
তোমরা সত্যবাদী হলে তোমাদের কিতাব [১] উপস্থিত কর।
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[১] কাতাদাহ বলেন, এখানে কিতাব বলে, গ্রহণযোগ্য ওযর উদ্দেশ্য। [তাবারী]
তারা আল্লাহ্ ও জিন জাতির মধ্যে আত্মীয়তার সম্পর্ক স্থির করেছে [১], অথচ জিনেরা জানে, নিশ্চয় তাদেরকে উপস্থিত করা হবে (শাস্তির জন্য)।
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[১] এটা মুশরিকদের ভ্রান্ত বিশ্বাসের বর্ণনা যে, জিন সরদার দুহিতারা ফেরেশতাগণের জননী। কাজেই (নাউযুবিল্লাহ) আল্লাহ তা'আলা ও জিন সরদার-দুহিতাদের মধ্যে দাম্পত্য সম্পর্ক ছিল। এই সম্পর্কের ফলেই ফেরেশতাগণ জন্মলাভ করেছে। কোন কোন বর্ণনায় এসেছে, মুশরিকরা যখন ফেরেশতাগণকে আল্লাহর কন্যা সাব্যস্ত করল, তখন আবু বকর রাদিয়াল্লাহু ‘আনহু জিজ্ঞেস করলেন, তাহলে তাদের জননী কে? তারা জওয়াবে বলল, জিন সরদার-দুহিতারা। অপর এক বর্ণনায় এসেছে, কোন কোন আরববাসীর বিশ্বাস ছিল যে, (নাউযুবিল্লাহ) ইবলীস আল্লাহর ভ্রাতা। আল্লাহ মঙ্গলের স্রষ্টা আর সে অমঙ্গলের স্রষ্টা। এখানে তাদের বাতিল বিশ্বাস খণ্ডন করা হয়েছে। [দেখুন, ইবন কাসীর]
آية رقم 159
তারা (মুশরিকরা) যা আরোপ করে তা থেকে আল্লাহ্ পবিত্ৰ, মহান---
آية رقم 160
তবে আল্লাহর একনিষ্ঠ বান্দাগণ ছাড়া,
آية رقم 161
অতঃপর নিশ্চয় তোমরা এবং তোমরা যাদের ইবাদাত কর তারা---
آية رقم 162
তোমরা (একনিষ্ঠ বান্দাদের) কাউকেও আল্লাহ সম্বন্ধে বিভ্রান্ত করতে পারবে না---
آية رقم 163
শুধু প্ৰজ্জলিত আগুনে যে দগ্ধ হবে সে ছাড়া [১]।
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[১] ইবনে আব্ববাস বলেন, তোমরা কাউকে পথভ্রষ্ট করতে পারবে না, আর আমিও তোমাদের কাউকে পথভ্রষ্ট করব না তবে যার জন্য আমার ফয়সালা হয়ে গেছে সে জাহান্নামে দগ্ধ হবে, তার কথা ভিন্ন। [তাবারী] কাতাদাহ বলেন, তোমরা তোমাদের বাতিল দিয়ে আমার বান্দাদের কাউকে পথভ্ৰষ্ট করতে পারবে না, তবে যে জাহান্নামের আমল করে তোমাদেরকে বন্ধু বানিয়েছে সে ছাড়া। [তাবারী।]
آية رقم 164
‘আর (জিবরীল বললেন) আমাদের প্রত্যেকের জন্য নির্ধারিত স্থান রয়েছে,
آية رقم 165
‘আর আমরা তো সারিবদ্ধভাবে দণ্ডায়মান,
آية رقم 166
'এবং আমরা অবশ্যই তাঁর পবিত্ৰতা ও মহিমা ঘোষনাকারী [১]।’
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[২] আবদুল্লাহ ইবন মাসউদ রাদিয়াল্লাহু আনহু বলেন, আসমানসমূহের মধ্যে এমন এক আসমান রয়েছে যার প্রতি বিঘাত জায়গায় কোন ফেরেশতার কপাল অথবা তার দু’পা দাঁড়ানো অথবা সিজদা-রত অবস্থায় আছে। তারপর আবদুল্লাহ ইবনে মাসউদ রাদিয়াল্লাহু আনহু এ আয়াত তেলাওয়াত করলেন। [তাফসীর আবদুর রাযযাক: ২৫৬৫] হাদীসে আরও এসেছে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, তোমরা কি সেভাবে কাতারবন্দী হবে না যেভাবে ফেরেশতারা তাদের রবের কাছে কাতারবন্দী হয়? আমরা বললাম, হে আল্লাহ্‌র রাসূল! কিভাবে তারা তাদের রবের কাছে কাতারবন্দী হয়? তিনি বললেন, প্রথম কাতারগুলো পূর্ণ করে এবং কাতারে প্রাচীরের ন্যায় ফাঁক না রেখে দাঁড়ায়। [মুসলিম: ৫২২]
آية رقم 167
আর তারা (মক্কাবাসীরা) অবশ্যই বলে আসছিল,
آية رقم 168
‘পূর্ববর্তীদের কিতাবের মত যদি আমাদের কোন কিতাব থাকত,
آية رقم 169
‘আমরা অবশ্যই আল্লাহর একনিষ্ঠ বান্দা হতাম।’
آية رقم 170
কিন্তু তারা কুরআনের সাথে কুফরী করল সুতরাং শীঘ্রই তারা জানতে পারবো [১];
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[১] অর্থাৎ তারা তাদের কাছে নাযিলকৃত কিতাব কুরআনের সাথে কুফরী করেছে। অচিরেই তারা এ কুফরীর পরিণাম জানতে পারবে। [জালালাইন]
آية رقم 171
আর অবশ্যই আমাদের প্রেরিত বান্দাদের সম্পর্কে আমাদের এ বাক্য আগেই স্থির হয়েছে যে,
آية رقم 172
নিশ্চয় তারা সাহায্যপ্রাপ্ত হবে,
آية رقم 173
এবং আমাদের বাহিনীই হবে বিজয়ী।
آية رقم 174
অতএব কিছু কালের জন্য আপনি তাদের থেকে মুখ ফিরিয়ে থাকুন।
آية رقم 175
আর আপনি তাদেরকে পর্যবেক্ষণ করুন, শীঘ্রই তারা দেখতে পাবে।
آية رقم 176
তারা কি তবে আমাদের শাস্তি ত্বরান্বিত করতে চায়?
آية رقم 177
অতঃপর তাদের আঙিনায় যখন শাস্তি নেমে আসবে তখন সতর্কীকৃতদের প্ৰভাত হবে কত মন্দ [১] !
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[১] আরবী বাক-পদ্ধতিতে আঙিনায় নেমে আসার অর্থ কোন বিপদ একেবারে সামনে এসে উপস্থিত হওয়া বোঝায়। "সকাল” বলার কারণ এই যে, আরবে শক্ররা সাধারণতঃ এ সময়েই আক্রমণ পরিচালনা করত। রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামও তাই করতেন। তিনি কোন শত্রুর ভূখণ্ডে রাত্ৰিবেলায় পৌঁছালেও আক্রমণের জন্যে সকাল পর্যন্ত অপেক্ষা করতেন। [মুসলিম: ৮৭৩] হাদীসে বর্ণিত আছে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম যখন সকালবেলায় খায়বার দুর্গ আক্রমণ করেন, তখন এই বাক্যাবলি উচ্চারণ করেন,
أللّٰهُ أكْبَرُ، خَرِبَتْ كَيْبَرُ، إنَّا إذَا نَزَلْنَا بِسَا حَةِ قَوْمٍ فَسَاءَ صَبَاحُ الُمنْزَرِيْنَ
অর্থাৎ, আল্লাহ মহান। খায়বার বিধ্বস্ত হয়ে গেছে। আমরা যখন কোন সম্প্রদায়ের আঙিনায় অবতরণ করি, তখন যাদেরকে পূর্ব-সতর্ক করা হয়েছিল, তাদের সকাল খুবই মন্দ হয় ৷ [বুখারী: ৩৭১, মুসলিম: ১৩৬৫]
آية رقم 178
আর কিছু কালের জন্য আপনি তাদের থেকে মুখ ফিরিয়ে থাকুন।
آية رقم 179
আর আপনি তাদেরকে পর্যবেক্ষণ করুন, শীঘ্রই তারা দেখতে পাবে।
آية رقم 180
তারা যা আরোপ করে, তা থেকে পবিত্র ও মহান আপনার রব, সকল ক্ষমতার অধিকারী।
آية رقم 181
আর শান্তি বৰ্ষিত হোক রাসূলদের প্ৰতি!
آية رقم 182
আর সকল প্রশংসা সৃষ্টিকুলের রব আল্লাহরই প্ৰাপ্য [১]।
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[১] ১৮০-১৮২ নং আয়াতগুলোর মাধ্যমে সূরা সাফফাত সমাপ্ত করা হয়েছে। কি সুন্দর সমাপ্তি! সংক্ষেপে বলা যায় যে, আল্লাহ তা’আলা এই সংক্ষিপ্ত তিনটি আয়াতের মধ্যে সূরার সমস্ত বিষয়বস্তু ভরে দিয়েছেন। তাওহীদের বর্ণনা দ্বারা সূরার সূচনা হয়েছিল, যার সারমর্ম ছিল এই যে, মুশরিকরা আল্লাহ সম্পর্কে যেসব বিষয় বর্ণনা করে, আল্লাহ তা'আলা সেগুলো থেকে পবিত্র। সে মতে আলোচ্য প্রথম আয়াতে সে দীর্ঘ বিষয়বস্তুর দিকেই ইঙ্গিত রয়েছে। এরপর সূরায় নবী-রাসূলগণের ঘটনাবলী বৰ্ণিত হয়েছিল। সে মতে দ্বিতীয় আয়াতে সেগুলোর দিকে ইশারা করা হয়েছে। অতঃপর পুঙ্খানুপুঙ্খরূপে কাফেরদের বিশ্বাস, সন্দেহ ও আপত্তিসমূহ যুক্তি ও উক্তির মাধ্যমে খণ্ডন করে বলা হয়েছিল যে, শেষ বিজয় সত্যপন্থীরাই অর্জন করবে। এসব বিষয়বস্তু যে ব্যক্তিই জ্ঞান ও অন্তদৃষ্টি সহকারে পাঠ করবে, সে অবশেষে আল্লাহ্ তা'আলার প্রশংসা ও স্তুতি পাঠ করতে বাধ্য হবে। সে মতে এই প্রশংসা ও স্তুতির ওপরই সূরার সমাপ্তি টানা হয়েছে।
তাছাড়া এ তিন আয়াতের পরস্পর এক ধরনের সামঞ্জস্যতা লক্ষণীয়, প্রথম আয়াতে বলা হচ্ছে যে, কাফের মুশরিকরা যে সমস্ত খারাপ গুণে মহান আল্লাহকে চিত্রিত করার অপচেষ্টা চালিয়েছে তা থেকে তিনি কতই না পবিত্ৰ! তাদের কথা ও কর্মকাণ্ড তাঁর মহান সমীপে ও তার মর্যাদার সামান্যতমও হেরফের করার ক্ষমতা রাখে না। তারা তাঁকে খারাপ গুণে গুণান্বিত করতে চায়, পক্ষান্তরে নবী রাসূলগণ তাঁকে সঠিকভাবে জানে বিধায় তাঁর জন্য সমস্ত হক নাম ও সঠিক গুণে গুণান্বিত করে। তাই তারা সালাম পাওয়ার যোগ্য। তারা নিরাপত্তা পাবে কারণ তারা আল্লাহর ব্যাপারে নিরাপত্তার বেষ্টনী অবলম্বন করেছে। আল্লাহর সঠিক গুণাগুণকে অস্বীকার করেনি। তারা তাঁকে তাঁর সঠিক নাম ও গুণ দ্বারা গুণান্বিত করে এবং সেগুলোর অসীলায় আহবান করে। আর তাদের আহবানে তিনিই সাড়া দেন; কারণ তিনিই তো সর্বপ্রশংসিত সত্ত্বা। দুনিয়া ও আখেরাতে সর্বদা সর্বত্র সর্বাবস্থায় তিনি প্ৰশংসিত। আর এটাই শেষ আয়াতে বর্ণিত হয়েছে।
এখানে আরো একটি বিষয় লক্ষণীয় যে, প্রথম আয়াতে তাসবীহ বা পবিত্ৰতা ও মহানুভবতা ঘোষণার মাধ্যমে যাবতীয় খারাপ গুণকে সরাসরি অস্বীকার করা হয়েছে। আর পরোক্ষভাবে যাবতীয় সৎ ও সঠিক গুণকে সাব্যস্ত করা হয়েছে। তৃতীয় আয়াতে তাহমীদ বা প্রশংসা ও কৃতজ্ঞতা প্রকাশের মাধ্যমে যাবতীয় সৎ ও সঠিক গুণাবলীকে আল্লাহর জন্য সরাসরি সাব্যস্ত করা হয়েছে। আর পরোক্ষভাবে যাবতীয় খারাপ গুণ থেকে মুক্ত ঘোষণা করা হয়েছে। এর মাঝখানে রাসূলদের উল্লেখ করে এ কথাই প্রমাণ করতে চেয়েছেন যে, এ তাওহীদ বা আল্লাহর নাম ও গুণাবলীর ক্ষেত্রে সে নীতি অবলম্বন করা উচিত, যা প্রথম ও তৃতীয় আয়াতে বর্ণিত হয়েছে এবং তা একমাত্র রাসূলগণই সঠিকভাবে বুঝতে সক্ষম হয়েছেন; সুতরাং তারাই সালাম ও নিরাপত্তা পাওয়ার যোগ্য। এর বিপরীতে যারা আল্লাহর সুন্দর সুন্দর নামসমূহকে অস্বীকার করে, তার সিফাত বা গুণাগুণকে বিকৃত করে তারা রাসূলদের পথে নয়, তাদের জন্য শান্তি ও নিরাপত্তা নেই। [দেখুন, মাজমু’ ফাতাওয়া ৩/১৩০; ইবনুল কাইয়্যেম, বাদায়ে’উল ফাওয়ায়েদ ২/১৭১; জালাউল আফহাম: ১৭০]
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