ترجمة معاني سورة الصافات باللغة الهندية من كتاب الترجمة الهندية
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ترجمة معاني القرآن الكريم - عادل صلاحي
عادل صلاحي
ﰡ
آية رقم 1
ﭑﭒ
ﭓ
शपथ है पंक्तिवध्द (फ़रिश्तों) की!
آية رقم 2
ﭔﭕ
ﭖ
फिर झिड़कियाँ देने वालों की!
آية رقم 3
ﭗﭘ
ﭙ
फिर स्मरण करके पढ़ने वालों[1] की!
____________________
1. यह तीनों गुण फ़रिश्तों के हैं जो आकाशों में अल्लाह की इबादत के लिये पंक्तिवध्द रहते तथा बादलों को हाँकते और अल्लाह के स्मरण जैसे क़ुर्आन तथा नमाज़ पढ़ने और उस की पवित्रता का गान करने इत्यादि में लगे रहते हैं।
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1. यह तीनों गुण फ़रिश्तों के हैं जो आकाशों में अल्लाह की इबादत के लिये पंक्तिवध्द रहते तथा बादलों को हाँकते और अल्लाह के स्मरण जैसे क़ुर्आन तथा नमाज़ पढ़ने और उस की पवित्रता का गान करने इत्यादि में लगे रहते हैं।
آية رقم 4
ﭚﭛﭜ
ﭝ
निश्चय तुम्हारा पूज्य, एक ही है।
آية رقم 5
आकाशों तथा धरती का पालनहार तथा जो कुछ उनके मध्य है और सुर्योदय होने के स्थानों का रब।
آية رقم 6
ﭦﭧﭨﭩﭪﭫ
ﭬ
हमने अलंकृत किया है संसार (समीप) के आकाश को, तारों की शोभा से।
آية رقم 7
ﭭﭮﭯﭰﭱ
ﭲ
तथा रक्षा करने के लिए प्रत्येक उध्दत शैतान से।
آية رقم 8
वह नहीं सुन सकते (जाकर) उच्च सभा तक फ़रिश्तों की बात तथा मारे जाते हैं, प्रत्येक दिशा से।
آية رقم 9
ﭽﭾﭿﮀﮁ
ﮂ
राँदने के लिए तथा उनके लिए स्थायी यातना है।
آية رقم 10
परन्तु, जो ले उड़े कुछ, तो पीछा करती है उसका दहकती ज्वाला।[1]
____________________
1. फिर यदि उस से बचा रह जाये तो आकाश की बात अपने नीचे के शैतानों तक पहूँचाता है और वह उसे काहिनों तथा ज्योतिषियों को बताते हैं। फिर वह उस में सौ झूठ मिला कर लोगों को बताते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारीः 6213, सह़ीह़ मुस्लिमः2228)
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1. फिर यदि उस से बचा रह जाये तो आकाश की बात अपने नीचे के शैतानों तक पहूँचाता है और वह उसे काहिनों तथा ज्योतिषियों को बताते हैं। फिर वह उस में सौ झूठ मिला कर लोगों को बताते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारीः 6213, सह़ीह़ मुस्लिमः2228)
آية رقم 11
तो आप इन (काफ़िरों) से प्रश्न करें कि क्या उन्हें पैदा करना अधिक कठिन है या जिन्हें[1] हमने पैदा किया है? हमने उन्हें[2] पैदा किया है, लेसदार मिट्टी से।
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1. अर्थात फ़रिश्तों तथा आकाशों को। 2. उन के पिता आदम (अलैहिस्सलाम) को।
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1. अर्थात फ़रिश्तों तथा आकाशों को। 2. उन के पिता आदम (अलैहिस्सलाम) को।
آية رقم 12
ﮙﮚﮛ
ﮜ
बल्कि आपने आश्चर्य किया (उनके अस्वीकार पर) तथा वे उपहास करते हैं।
آية رقم 13
ﮝﮞﮟﮠ
ﮡ
और जब शिक्षा दी जाये, तो वे शिक्षा ग्रहण नहीं करते।
آية رقم 14
ﮢﮣﮤﮥ
ﮦ
और जब देखते हैं कोई निशानी, तो उपहास करने लगते हैं।
آية رقم 15
ﮧﮨﮩﮪﮫﮬ
ﮭ
तथा कहते हें कि ये तो मात्र खुला जादू है।
آية رقم 16
(कहते हैं कि) क्या, जब हम मर जायेंगे तथा मिट्टी और हड्डियाँ हो जायेंगे, तो हम निश्चय पुनः जीवित किये जायेंगे?
آية رقم 17
ﯗﯘ
ﯙ
और क्या, हमारे पहले पूर्वज भी (जीवित किये जायेंगे)?
آية رقم 18
ﯚﯛﯜﯝ
ﯞ
आप कह दें कि हाँ तथा तुम अपमानित (भी) होगे!
آية رقم 19
वो तो बस एक झिड़की होगी, फिर सहसा वे देख रहे होंगे।
آية رقم 20
ﯧﯨﯩﯪﯫ
ﯬ
तथा कहेंगेः हाय हमारा विनाश! ये तो बदले (प्रलय) का दिन है।
آية رقم 21
यही निर्णय का दिन है, जिसे तुम झुठला रहे थे।
آية رقم 22
(आदेश होगा कि) घेर लाओ सब अत्याचारियों को तथा उनके साथियों को और जिसकी वे इबादत (वंदना) कर रहे थे।
آية رقم 23
अल्लाह के सिवा। फिर दिखा दो उन्हें नरक की राह।
آية رقم 24
ﰆﰇﰈﰉ
ﰊ
और उन्हें रोक[1] लो। उनसे प्रश्न किया जाये।
____________________
1. नरक में झोंकने से पहले।
____________________
1. नरक में झोंकने से पहले।
آية رقم 25
ﭑﭒﭓﭔ
ﭕ
क्या हो गया है तुम्हें कि एक-दूसरे की सहायता नहीं करते?
آية رقم 26
ﭖﭗﭘﭙ
ﭚ
बल्कि वे उस दिन, सिर झुकाये खड़े होंगे।
آية رقم 27
ﭛﭜﭝﭞﭟ
ﭠ
और एक-दूसरे के सम्मुख होकर परस्पर प्रश्न करेंगेः[1]
____________________
1. अर्थात एक-दूसरे को धिक्कारेंगे।
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1. अर्थात एक-दूसरे को धिक्कारेंगे।
آية رقم 28
ﭡﭢﭣﭤﭥﭦ
ﭧ
कहेंगे कि तुम हमारे पास आया करते थे दायें[1] से।
____________________
1. इस से अभिप्राय यह है कि धर्म तथा सत्य के नाम से आते थे अर्थात यह विश्वास दिलाते थे कि यही मिश्रणवाद मूल तथा सत्धर्म है।
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1. इस से अभिप्राय यह है कि धर्म तथा सत्य के नाम से आते थे अर्थात यह विश्वास दिलाते थे कि यही मिश्रणवाद मूल तथा सत्धर्म है।
آية رقم 29
ﭨﭩﭪﭫﭬ
ﭭ
वे[1] कहेंगेः बल्कि तुम स्वयं ईमान वाले न थे।
____________________
1. इस से अभिप्राय उन के प्रमुख लोग हैं।
____________________
1. इस से अभिप्राय उन के प्रमुख लोग हैं।
آية رقم 30
तथा नहीं था हमारा तुमपर कोई अधिकार,[1] बल्कि तुम सवंय अवज्ञाकारी थे।
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1. देखियेः सूरह इब्राहीम, आयतः22
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1. देखियेः सूरह इब्राहीम, आयतः22
آية رقم 31
तो सिध्द हो गया हमपर हमारे पालनहार का कथन कि हम (यातना) चखने वाले हैं।
آية رقم 32
ﮂﮃﮄﮅ
ﮆ
तो हमने तुम्हें कुपथ कर दिया। हम तो स्वयं कुपथ थे।
آية رقم 33
ﮇﮈﮉﮊﮋ
ﮌ
फिर वे सभी, उस दिन यातना में साझी होंगे।
آية رقم 34
ﮍﮎﮏﮐ
ﮑ
हम, इसी प्रकार, किया करते हैं अपराधियों के साथ।
آية رقم 35
ये वो हैं कि जब कहा जाता था उनसे कि कोई पूज्य (वंदनीय) नहीं अल्लाह के अतिरिक्त, तो वे अभिमान करते थे।
آية رقم 36
ﮝﮞﮟﮠﮡﮢ
ﮣ
तथा कह रहे थेः क्या हम त्याग देने वाले हैं अपने पूज्यों को, एक उन्मत कवि के कारण?
آية رقم 37
ﮤﮥﮦﮧﮨ
ﮩ
बल्कि वह (नबी) सच लाये हैं तथा पुष्टि की है, सब रसूलों की।
آية رقم 38
ﮪﮫﮬﮭ
ﮮ
निश्चय तुम दुःखदायी यातना चखने वाले हो।
آية رقم 39
ﮯﮰﮱﯓﯔﯕ
ﯖ
तथा तुम उसका प्रतिकार (बदला) दिये जाओगे, जो तुम कर रहे थे।
آية رقم 40
ﯗﯘﯙﯚ
ﯛ
परन्तु अल्लाह के शुध्द भक्त।
آية رقم 41
ﯜﯝﯞﯟ
ﯠ
यही हैं, जिनके लिए विदित जीविका है।
آية رقم 42
ﯡﯢﯣ
ﯤ
प्रत्येक प्रकार के फल तथा यही आदरणीय होंगे।
آية رقم 43
ﯥﯦﯧ
ﯨ
सुख के स्वर्गों में।
آية رقم 44
ﯩﯪﯫ
ﯬ
आसनों पर एक-दूसरे के सम्मुख असीन होंगे।
آية رقم 45
ﯭﯮﯯﯰﯱ
ﯲ
फिराये जायेंगे इनपर प्याले, प्रवाहित पेय के।
آية رقم 46
ﯳﯴﯵ
ﯶ
श्वेत आस्वात पीने वालों के लिए।
آية رقم 47
नहीं होगी उसमें शारिरिक पीड़ा, न वे उसमें बहकेंगे।
آية رقم 48
ﯿﰀﰁﰂ
ﰃ
तथा उनके पास आँखे झुकाये, (सति) बड़ी आँखों वाली (नारियाँ) होंगी।
آية رقم 49
ﰄﰅﰆ
ﰇ
वह छुपाये हुए अन्डों के मानिन्द होंगी।[1]
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1. अर्थात जिस प्रकार पक्षी के पंखों के नीचे छुपे हुये अन्डे सुरक्षित होते हैं वैसे ही वह नारियाँ सुरक्षित, सुन्दर रंग और रूप की होंगी।
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1. अर्थात जिस प्रकार पक्षी के पंखों के नीचे छुपे हुये अन्डे सुरक्षित होते हैं वैसे ही वह नारियाँ सुरक्षित, सुन्दर रंग और रूप की होंगी।
آية رقم 50
ﰈﰉﰊﰋﰌ
ﰍ
वह एक-दूसरे से सम्मुख होकर प्रश्न करेंगे।
آية رقم 51
तो कहेगा एक कहने वाला उनमें सेः मेरा एक साथी था।
آية رقم 52
ﭑﭒﭓﭔ
ﭕ
जो कहता था कि क्या तुम (प्रलय का) विश्वास करने वालों में से हो?
آية رقم 53
क्या जब हम, मर जायेंगे तथा मिट्टी और अस्थियाँ हो जायेंगे, तो क्या हमें (कर्मों) का प्रतिफल दिया जायेगा?
آية رقم 54
ﭞﭟﭠﭡ
ﭢ
वह कहेगाः क्या तुम झाँककर देखने वाले हो?
آية رقم 55
ﭣﭤﭥﭦﭧ
ﭨ
फिर झाँकते ही उसे देख लेगा, नरक के बीच।
آية رقم 56
ﭩﭪﭫﭬﭭ
ﭮ
उससे कहेगाः अल्लाह की शपथ! तुम तो मेरा विनाश कर देने के समीप थे।
آية رقم 57
ﭯﭰﭱﭲﭳﭴ
ﭵ
और यदि मेरे पालनहार का अनुग्रह न होता, तो मैं (नरक के) उपस्थितों में होता।
آية رقم 58
ﭶﭷﭸ
ﭹ
फिर वह कहेगाः क्या (ये सही नहीं है कि) हम मरने वाले नहीं हैं?
آية رقم 59
ﭺﭻﭼﭽﭾﭿ
ﮀ
सिवाय अपनी प्रथम मौत के और न हमें यातना दी जायेगी।
آية رقم 60
ﮁﮂﮃﮄﮅ
ﮆ
वास्तव में, यही बड़ी सफलता है।
آية رقم 61
ﮇﮈﮉﮊ
ﮋ
इसी (जैसी सफलता) के लिए चाहिये कि कर्म करें, कर्म करने वाले।
آية رقم 62
ﮌﮍﮎﮏﮐﮑ
ﮒ
क्या ये आतिथ्य उत्तम है अथवा थोहड़ का वृक्ष?
آية رقم 63
ﮓﮔﮕﮖ
ﮗ
हमने उसे अत्याचारियों के लिए एक परीक्षा बनाया है।
آية رقم 64
ﮘﮙﮚﮛﮜﮝ
ﮞ
वह एक वृक्ष है, जो नरक की जड़ (तह) से निकलता है।
آية رقم 65
ﮟﮠﮡﮢ
ﮣ
उसके गुच्छे शैतानों के सिरों के समान हैं।
آية رقم 66
ﮤﮥﮦﮧﮨﮩ
ﮪ
तो वे (नरक वासी) खाने वाले हैं, उससे। फिर भरने वाले हैं, उससे अपने पेट।
آية رقم 67
फिर उनके लिए उसके ऊपर से खौलता गरम पानी है।
آية رقم 68
ﯔﯕﯖﯗﯘ
ﯙ
फिर उन्हें प्रत्यागत होना है, नरक की ओर।
آية رقم 69
ﯚﯛﯜﯝ
ﯞ
वास्तव में, उन्होंने पाया अपने पूर्वजों को कुपथ।
آية رقم 70
ﯟﯠﯡﯢ
ﯣ
फिर वे उन्हीं के पद्चिन्हों पर[1] दौड़े चले जा रहे हैं।
____________________
1. इस में नरक में जाने का जो सब से बड़ा कारण बताया गया है वह है नबी को न मानना, और अपने पूर्वजों के पंथ पर ही चलते रहना।
____________________
1. इस में नरक में जाने का जो सब से बड़ा कारण बताया गया है वह है नबी को न मानना, और अपने पूर्वजों के पंथ पर ही चलते रहना।
آية رقم 71
ﯤﯥﯦﯧﯨ
ﯩ
और कुपथ हो चुके हैं, इनसे पूर्व अगले लोगों में से अधिक्तर।
آية رقم 72
ﯪﯫﯬﯭ
ﯮ
तथा हम भेज चुके हैं उनमें, सचेत (सावधान) करने वाले।
آية رقم 73
ﯯﯰﯱﯲﯳ
ﯴ
तो देखो कि कैसा रहा सावधान किये हुए लोगों का परिणाम?[1]
____________________
1. अतः उन के दुष्परिणाम से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिये।
____________________
1. अतः उन के दुष्परिणाम से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिये।
آية رقم 74
ﯵﯶﯷﯸ
ﯹ
हमारे शुध्द भक्तों के सिवा।
آية رقم 75
ﯺﯻﯼﯽﯾ
ﯿ
तथा हमें पुकारा नूह़ नेः तो हम क्या ही अच्छे प्रार्थना स्वीकार करने वाले हैं।
آية رقم 76
ﰀﰁﰂﰃﰄ
ﰅ
और हमने बचा लिया उसे और उसके परिजनों को, घोर आपदा से।
آية رقم 77
ﭑﭒﭓﭔ
ﭕ
तथा कर दिया हमने उसकी संतति को, शेष[1] रह जाने वालों में से।
____________________
1. उस की जाति के जलमग्न हो जाने के पश्चात्।
____________________
1. उस की जाति के जलमग्न हो जाने के पश्चात्।
آية رقم 78
ﭖﭗﭘﭙ
ﭚ
तथा शेष रखा हमने उसकी सराहना तथा प्रशंसा को पिछलों में।
آية رقم 79
ﭛﭜﭝﭞﭟ
ﭠ
सलाम (सुरक्षा)[1] है नूह़ के लिए समस्त विश्ववासियों में।
____________________
1. अर्थात उस की बुरी चर्चा से।
____________________
1. अर्थात उस की बुरी चर्चा से।
آية رقم 80
ﭡﭢﭣﭤ
ﭥ
इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।
آية رقم 81
ﭦﭧﭨﭩ
ﭪ
वास्तव में, वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।
آية رقم 82
ﭫﭬﭭ
ﭮ
फिर हमने जलमगन कर दिया दूसरों को।
آية رقم 83
ﭯﭰﭱﭲﭳ
ﭴ
और उसके अनुयायियों में निश्चय इब्राहीम है।
آية رقم 84
ﭵﭶﭷﭸﭹ
ﭺ
जब लाया वह अपने पालनहार के पास स्वच्छ दिल।
آية رقم 85
ﭻﭼﭽﭾﭿﮀ
ﮁ
जब कहा उसने अपने पिता तथा अपनी जाति सेः तुम किसकी इबादत (वंदना) कर रहे हो?
آية رقم 86
ﮂﮃﮄﮅﮆ
ﮇ
क्या अपने बनाये हुए पूज्यों को अल्लाह के सिवा चाहते हो?
آية رقم 87
ﮈﮉﮊﮋ
ﮌ
तो तुम्हारा क्या विचार है, विश्व के पालनहार के विषय में?
آية رقم 88
ﮍﮎﮏﮐ
ﮑ
फिर उसने देखा तोरों की[1] ओर।
____________________
1. यह सोचते हुये कि इन के उत्सव में न जाने के लिये क्या बहाना करूँ।
____________________
1. यह सोचते हुये कि इन के उत्सव में न जाने के लिये क्या बहाना करूँ।
آية رقم 89
ﮒﮓﮔ
ﮕ
तथा उनसे कहाः मैं रोगी हूँ।
آية رقم 90
ﮖﮗﮘ
ﮙ
तो उसे छोड़कर चले गये।
آية رقم 91
ﮚﮛﮜﮝﮞﮟ
ﮠ
फिर वह जा पहुँचा, उनके उपास्यों (पूज्यों) की ओर। कहा कि (वे प्रसाद) क्यों नहीं खाते?
آية رقم 92
ﮡﮢﮣﮤ
ﮥ
तुम्हें क्या हुआ है कि बोलते नहीं?
آية رقم 93
ﮦﮧﮨﮩ
ﮪ
फिर पिल पड़ा उनपर मारते हुए, दायें हाथ से।
آية رقم 94
ﮫﮬﮭ
ﮮ
तो वे आये उसकी ओर दौड़ते हुए।
آية رقم 95
ﮯﮰﮱﯓ
ﯔ
इब्राहीम ने कहाः क्या तुम इबादत (वंदना) करते हो उसकी जिसे, पत्थरों से तराश्ते हो?
آية رقم 96
ﯕﯖﯗﯘ
ﯙ
जबकि अल्लाह ने पैदा किया है तुम्हें तथा जो तुम करते हो।
آية رقم 97
उन्होंने कहाः इसके लिए एक (अग्निशाला का) निर्माण करो और उसे झोंक दो दहकती अग्नि में।
آية رقم 98
ﯢﯣﯤﯥﯦ
ﯧ
तो उन्होंने उसके साथ षड्यंत्र रचा, तो हमने उन्हीं को नीचा कर दिया।
آية رقم 99
ﯨﯩﯪﯫﯬﯭ
ﯮ
तथा उसने कहाः मैं जाने वाला हूँ अपने पालनहार की[1] ओर। वह मुझे सुपथ दर्शायेगा।
____________________
1. अर्थात ऐसे स्थान की ओर जहाँ अपने पालनहार की इबादत कर सकूँ।
____________________
1. अर्थात ऐसे स्थान की ओर जहाँ अपने पालनहार की इबादत कर सकूँ।
آية رقم 100
ﯯﯰﯱﯲﯳ
ﯴ
हे मेरे पालनहार! प्रदान कर मुझे, एक सदाचारी (पुनीत) पुत्र।
آية رقم 101
ﯵﯶﯷ
ﯸ
तो हमने शुभ सूचना दी उसे, एक सहनशील पुत्र की।
آية رقم 102
फिर जब वह पहुँचा उसके साथ चलने-फिरने की आयु को, तो इब्राहीम ने कहाः हे मेरे प्रिय पुत्र! मैं देख रहा हूँ स्वप्न में कि मैं तुझे वध कर रहा हूँ। अब, तू बता कि तेरा क्या विचार है? उसने कहाः हे पिता! पालन करें, जिसका आदेश आपको दिया जा रहा है। आप पायेंगे मुझे सहनशीलों में से, यदि अल्लाह की इच्छा हूई।
آية رقم 103
ﭑﭒﭓﭔ
ﭕ
अन्ततः, जब दोनों ने स्वयं को अर्पित कर दिया और उस (पिता) ने उसे गिरा दिया माथे के बल।
آية رقم 104
ﭖﭗﭘ
ﭙ
तब हमने उसे आवाज़ दी कि हे इब्राहीम!
آية رقم 105
तूने सच कर दिया अपना स्वप्न। इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।
آية رقم 106
ﭣﭤﭥﭦﭧ
ﭨ
वास्तव में, ये खुली परीक्षा थी।
آية رقم 107
ﭩﭪﭫ
ﭬ
और हमने उसके मुक्ति-प्रतिदान के रूप में, प्रदान कर दी एक महान[1] बली।
____________________
1. यह महान बलि एक मेंढा था। जिसे जिब्रील (अलाहिस्सलाम) द्वारा स्वर्ग से भेजा गया। जो आप के प्रिय पुत्र इस्माईल (अलैहिस्सलाम) के स्थान पर बलि दिया गया। फिर इस विधि को प्रलय तक के लिये अल्लाह के सामिप्य का एक साधन तथा ईदुल अज़्ह़ा (बक़रईद) का प्रियवर कर्म बना दिया गया। जिसे संसार के सभी मुसलमान ईदुल अज़्ह़ा में करते हैं।
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1. यह महान बलि एक मेंढा था। जिसे जिब्रील (अलाहिस्सलाम) द्वारा स्वर्ग से भेजा गया। जो आप के प्रिय पुत्र इस्माईल (अलैहिस्सलाम) के स्थान पर बलि दिया गया। फिर इस विधि को प्रलय तक के लिये अल्लाह के सामिप्य का एक साधन तथा ईदुल अज़्ह़ा (बक़रईद) का प्रियवर कर्म बना दिया गया। जिसे संसार के सभी मुसलमान ईदुल अज़्ह़ा में करते हैं।
آية رقم 108
ﭭﭮﭯﭰ
ﭱ
तथा हमने शेष रखी उसकी शुभ चर्चा पिछलों में।
آية رقم 109
ﭲﭳﭴ
ﭵ
सलाम है इब्रीम पर।
آية رقم 110
ﭶﭷﭸ
ﭹ
इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।
آية رقم 111
ﭺﭻﭼﭽ
ﭾ
निश्चय ही वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।
آية رقم 112
ﭿﮀﮁﮂﮃ
ﮄ
तथा हमने उसे शुभसूचना दी इस्ह़ाक़ नबी की, जो सदाचारियों में[1] होगा।
____________________
1. इस आयत से विद्वत होता है कि इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को इस बलि के पश्चात् दूसरे पुत्र आदरणीय इस्ह़ाक़ की शुभ सूचना दी गई। इस से ज्ञान हुआ की बलि इस्माईल (अलैहिस्सलाम) की दी गई थी। और दोनों की आयु में लग-लग चौदह वर्ष का अन्तर है।
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1. इस आयत से विद्वत होता है कि इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को इस बलि के पश्चात् दूसरे पुत्र आदरणीय इस्ह़ाक़ की शुभ सूचना दी गई। इस से ज्ञान हुआ की बलि इस्माईल (अलैहिस्सलाम) की दी गई थी। और दोनों की आयु में लग-लग चौदह वर्ष का अन्तर है।
آية رقم 113
तथा हमने बरकत (विभूति) अवतरिक की उसपर तथा इस्ह़ाक़ पर और उन दोनों की संतति में से कोई सदाचारी है और कोई अपने लिए खुला अत्याचारी।
آية رقم 114
ﮑﮒﮓﮔﮕ
ﮖ
तथा हमने उपकार किया मूसा और हारून पर।
آية رقم 115
ﮗﮘﮙﮚﮛ
ﮜ
तथा मुक्त किया दोनों को और उनकी जाति को, घोर व्यग्रता से।
آية رقم 116
ﮝﮞﮟﮠ
ﮡ
तथा हमने सहायता की उनकी, तो वही प्रभावशाली हो गये।
آية رقم 117
ﮢﮣﮤ
ﮥ
तथा हमने प्रदान की दोनों को प्रकाशमय पुस्तक (तौरात)।
آية رقم 118
ﮦﮧﮨ
ﮩ
और हमने दर्शाई दोनों को सीधी डगर।
آية رقم 119
ﮪﮫﮬﮭ
ﮮ
तथा शेष रखी दोनों की शुभ चर्चा, पिछलों में।
آية رقم 120
ﮯﮰﮱﯓ
ﯔ
सलाम है मूसा तथा हारून पर।
آية رقم 121
ﯕﯖﯗﯘ
ﯙ
हम इसी प्रकार प्रतिफल प्रदान करते हैं, सदाचारियों को।
آية رقم 122
ﯚﯛﯜﯝ
ﯞ
वस्तुतः, वे दोनों हमारे ईमान वाले भक्तों में थे।
آية رقم 123
ﯟﯠﯡﯢ
ﯣ
तथा निश्चय इल्यास, नबियों में से था।
آية رقم 124
ﯤﯥﯦﯧﯨ
ﯩ
जब कहा उसने अपनी जाति सेः क्या तुम डरते नहीं हो?
آية رقم 125
ﯪﯫﯬﯭﯮ
ﯯ
क्या तुम बअल ( नामक मूर्ति) को पुकारते हो? तथा त्याग रहे हो सर्वोत्तम उत्पत्तिकर्ता को?
آية رقم 126
ﯰﯱﯲﯳﯴ
ﯵ
अल्लाह ही तुम्हारा पालनहार है तथा तुम्हारे प्रथम पूर्वजों का पालनहार है।
آية رقم 127
ﭑﭒﭓ
ﭔ
अन्ततः, उन्होंने झुठला दिया उसे। तो निश्चय वही (नरक में) उपस्थित होंगे।
آية رقم 128
ﭕﭖﭗﭘ
ﭙ
किन्तु, अल्लाह के शुध्द भक्त।
آية رقم 129
ﭚﭛﭜﭝ
ﭞ
तथा शेष रखी हमने उसकी शुभ चर्चा पिछलों में।
آية رقم 130
ﭟﭠﭡﭢ
ﭣ
सलाम है इल्यासीन[1] पर।
____________________
1. इल्यासीन इल्यास ही का एक उच्चारण है। उन्हें अन्य धर्म ग्रन्थों में इलया भी कहा गया है।
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1. इल्यासीन इल्यास ही का एक उच्चारण है। उन्हें अन्य धर्म ग्रन्थों में इलया भी कहा गया है।
آية رقم 131
ﭤﭥﭦﭧ
ﭨ
वास्तव में, हम इसी प्रकार प्रतिफल प्रदान करते हैं, सदाचारियों को।
آية رقم 132
ﭩﭪﭫﭬ
ﭭ
वस्तुतः, वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।
آية رقم 133
ﭮﭯﭰﭱ
ﭲ
तथा निश्चय लूत नबियों में से था।
آية رقم 134
ﭳﭴﭵﭶ
ﭷ
जब हमने मुक्त किया उसे तथा उसके सबपरिजनों को।
آية رقم 135
ﭸﭹﭺﭻ
ﭼ
एक बुढ़िया[1] के सिवा, जो पीछे रह जाने वालों में थी।
____________________
1. यह लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नि थी।
____________________
1. यह लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नि थी।
آية رقم 136
ﭽﭾﭿ
ﮀ
फिर हमने अन्यों को तहस-नहस कर दिया।
آية رقم 137
ﮁﮂﮃﮄ
ﮅ
तथा तुम[1] ग़ुज़रते हो उन (की निर्जीव बस्तियों) पर, प्रातः के समय।
____________________
1. मक्का वासियों को संबोधित किया गया है।
____________________
1. मक्का वासियों को संबोधित किया गया है।
آية رقم 138
ﮆﮇﮈﮉ
ﮊ
तथा रात्रि में। तो क्या तुम समझते नहीं हो?
آية رقم 139
ﮋﮌﮍﮎ
ﮏ
तथा निश्चय यूनुस नबियों में से था।
آية رقم 140
ﮐﮑﮒﮓﮔ
ﮕ
जब वह भाग[1] गया भरी नाव की ओर।
____________________
1. अल्लाह की अनुमति के बिना अपने नगर से नगर वासियों को यातना के आन की सूचना दे कर निकल गये। और नाव पर सवार हो गये। नाव सागर की लहरों में घिर गई। इस लिये बोझ कम करने के लिये नाम निकाला गया। तो यूनुस अलैहिस्सलाम का नाम निकला और उन्हें समुद्र में फेंक दिया गया।
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1. अल्लाह की अनुमति के बिना अपने नगर से नगर वासियों को यातना के आन की सूचना दे कर निकल गये। और नाव पर सवार हो गये। नाव सागर की लहरों में घिर गई। इस लिये बोझ कम करने के लिये नाम निकाला गया। तो यूनुस अलैहिस्सलाम का नाम निकला और उन्हें समुद्र में फेंक दिया गया।
آية رقم 141
ﮖﮗﮘﮙ
ﮚ
फिर नाम निकाला गया, तो वह हो गया फेंके हुओं में से।
آية رقم 142
ﮛﮜﮝﮞ
ﮟ
तो निगल लिया उसे मछली ने और वह निन्दित था।
آية رقم 143
ﮠﮡﮢﮣﮤ
ﮥ
तो यदि न होता अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करने वालों में।
آية رقم 144
ﮦﮧﮨﮩﮪﮫ
ﮬ
तो वह रह जाता उसके उदर में उस दिन तक, जब सब पुनः जीवित किये[1] जायेंगे।
____________________
1. अर्थात प्रयल के दिन तक। (देखियेः सूरह अम्बिया, आयतः87)
____________________
1. अर्थात प्रयल के दिन तक। (देखियेः सूरह अम्बिया, आयतः87)
آية رقم 145
ﮭﮮﮯﮰﮱ
ﯓ
तो हमने फेंक दिया उसे खुले मैदान में और वह रोगी[1] था।
____________________
1. अर्थात निर्बल नवजात शिशु के समान।
____________________
1. अर्थात निर्बल नवजात शिशु के समान।
آية رقم 146
ﯔﯕﯖﯗﯘ
ﯙ
और उगा दिया उस[1] पर लताओं का एक वृक्ष।
____________________
1. रक्षा के लिये।
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1. रक्षा के लिये।
آية رقم 147
ﯚﯛﯜﯝﯞﯟ
ﯠ
तथा हमने उसे रसूल बनाकर भेजा एक लाख, बल्कि अधिक की ओर।
آية رقم 148
ﯡﯢﯣﯤ
ﯥ
तो वे ईमान लाये। फिर हमने उन्हें सुख-सुविधा प्रदान की एक समय[1] तक।
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1. देखियेः सूरह यूनुस।
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1. देखियेः सूरह यूनुस।
آية رقم 149
ﯦﯧﯨﯩﯪ
ﯫ
तो (हे नबी!) आप उनसे प्रश्न करें कि क्या आपके पालनहार के लिए तो पुत्रियाँ हों और उनके लिए पुत्र?
آية رقم 150
ﯬﯭﯮﯯﯰﯱ
ﯲ
अथवा किया हमने पैदा किया है फ़रिश्तों को नारियाँ और वे उस समय उपस्थित[1] थे?
____________________
1. इस में मक्का के मिश्रणवादियों का खण्डन किया जा रहा है जो फ़रिश्तों को देवियाँ तथा अल्लाह की पुत्रियाँ कहते थे। जब कि वह स्वयं पुत्रियों के जन्म को अप्रिय मानते थे।
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1. इस में मक्का के मिश्रणवादियों का खण्डन किया जा रहा है जो फ़रिश्तों को देवियाँ तथा अल्लाह की पुत्रियाँ कहते थे। जब कि वह स्वयं पुत्रियों के जन्म को अप्रिय मानते थे।
آية رقم 151
ﯳﯴﯵﯶﯷ
ﯸ
सावधान! वास्तव में, वे अपने मन से बनाकर ये बात कह रहे हैं।
آية رقم 152
ﯹﯺﯻﯼ
ﯽ
कि अल्लाह ने संतान बनाई है और निश्चय ये मिथ्या भाषी हैं।
آية رقم 153
ﯾﯿﰀﰁ
ﰂ
क्या अल्लाह ने प्राथमिक्ता दी है पुत्रियों को, पुत्रों पर?
آية رقم 154
ﭑﭒﭓﭔ
ﭕ
तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा निर्णय दे रहे हो?
آية رقم 155
ﭖﭗ
ﭘ
तो क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते?
آية رقم 156
ﭙﭚﭛﭜ
ﭝ
अथवा तुम्हारे पास कोई प्रत्यक्ष प्रमाण है?
آية رقم 157
ﭞﭟﭠﭡﭢ
ﭣ
तो अपनी पुस्तक लाओ, यदि तुम सत्यवादी हो?
آية رقم 158
और उन्होंने बना दिया अल्लाह तथा जिन्नों के मध्य, वंश-संबंध। जबकि जिन्न स्वयं जानते हैं कि वे अल्लाह के समक्ष निश्चय उपस्थित किये[1] जायेंगे।
____________________
1. अर्थात यातना के लिये। तो यदि वे उस के संबंधी होते तो उन्हें यातना क्यों देता?
____________________
1. अर्थात यातना के लिये। तो यदि वे उस के संबंधी होते तो उन्हें यातना क्यों देता?
آية رقم 159
ﭰﭱﭲﭳ
ﭴ
अल्लाह पवित्र है उन गुणों से, जिनका वे वर्णन कर रहे हैं।
آية رقم 160
ﭵﭶﭷﭸ
ﭹ
परन्तु, अल्लाह के शुध्द भक्त।[1]
____________________
1. वह अल्लाह को ऐसे दुर्गुणों से युक्त नहीं करते।
____________________
1. वह अल्लाह को ऐसे दुर्गुणों से युक्त नहीं करते।
آية رقم 161
ﭺﭻﭼ
ﭽ
तो निश्चय तुम तथा तुम्हारे पूज्य।
آية رقم 162
ﭾﭿﮀﮁ
ﮂ
तुम सब किसी एक को भी कुपथ नहीं कर सकते।
آية رقم 163
ﮃﮄﮅﮆﮇ
ﮈ
उसके सिवा, जो नरक में झोंका जाने वाला है।
آية رقم 164
ﮉﮊﮋﮌﮍﮎ
ﮏ
और नहीं है हम (फ़रिश्तों) में से कोई, परन्तु उसका एक नियमित स्थान है।
آية رقم 165
ﮐﮑﮒ
ﮓ
तथा हम ही (आज्ञापालन के लिए) पंक्तिवध्द हैं।
آية رقم 166
ﮔﮕﮖ
ﮗ
और हम ही तस्बीह़ (पवित्रता गान) करने वाले हैं।
آية رقم 167
ﮘﮙﮚ
ﮛ
तथा वे (मुश्रिक) तो कहा करते थे किः
آية رقم 168
ﮜﮝﮞﮟﮠﮡ
ﮢ
यदि हमारे पास कोई स्मृति (पुस्तक) होती, जो पहले लोगों में आई......
آية رقم 169
ﮣﮤﮥﮦ
ﮧ
तो हम अवश्य अल्लाह के शुध्द भक्तों में हो जाते।
آية رقم 170
ﮨﮩﮪﮫﮬ
ﮭ
(फिर जब आ गयी) तो उन्होंने क़ुर्आन के साथ कुफ़्र कर दिया, अतः, शीघ्र ही उन्हें ज्ञान हो जायेगा।
آية رقم 171
ﮮﮯﮰﮱﯓ
ﯔ
और पहले ही हमारा वचन हो चुका है अपने भेजे हुए भक्तों के लिए।
آية رقم 172
ﯕﯖﯗ
ﯘ
कि निश्चय उन्हीं की सहायता की जायेगी।
آية رقم 173
ﯙﯚﯛﯜ
ﯝ
तथा वास्तव में हमारी सेना ही प्रभावशाली (विजयी) होने वाली है।
آية رقم 174
ﯞﯟﯠﯡ
ﯢ
तो आप मुँह फेर लें उनसे, कुछ समय तक।
آية رقم 175
ﯣﯤﯥ
ﯦ
तथा उन्हें देखते रहें। वे भी शीघ्र ही देख लेंगे।
آية رقم 176
ﯧﯨ
ﯩ
तो क्या, वे हमारी यातना की शीघ्र माँग कर रहे हैं।
آية رقم 177
ﯪﯫﯬﯭﯮﯯ
ﯰ
तो जब वह उतर आयेगी उनके मैदानों में, तो बुरा हो जायेगा सावधान किये हुओं का सवेरा।
آية رقم 178
ﯱﯲﯳﯴ
ﯵ
और आप मुँह फेर लें उनसे, कुछ समय तक।
آية رقم 179
ﯶﯷﯸ
ﯹ
तथा देखते रहें, अन्ततः वे (भी) देख लेंगे।
آية رقم 180
ﯺﯻﯼﯽﯾﯿ
ﰀ
पवित्र है आपका पालनहार, गौरव का स्वामी, उस बात से, जो वे बना रहे हैं।
آية رقم 181
ﰁﰂﰃ
ﰄ
तथा सलाम है रसूलों पर।
آية رقم 182
ﰅﰆﰇﰈ
ﰉ
तथा सभी प्रशंसा, अल्लाह, सर्वलोक के पालनहार के लिए है।
تقدم القراءة