ترجمة معاني سورة الشعراء باللغة الهندية من كتاب الترجمة الهندية

مولانا عزيز الحق العمري

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عادل صلاحي

الترجمة الهندية

مولانا عزيز الحق العمري

الناشر

مجمع الملك فهد

آية رقم 1
ता, सीन, मीम।
آية رقم 2
ये प्रकाशमय पुस्तक की आयतें हैं।
آية رقم 3
संभवतः, आप अपना प्राण[1] खो देने वाले हैं कि वे ईमान लाने वाले नहीं हैं?
____________________
1. अर्थात उन के ईमान न लाने के शोक में।
यदि हम चाहें, तो उतार दें उनपर आकाश से ऐसी निशानी कि उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी की झुकी रह जायें[1]।
____________________
1. परन्तु ऐसा नहीं किया, क्यों कि दबाव का ईमान स्वीकार्य तथा मान्य नहीं होता।
और नहीं आती है उनके पालनहार, अति दयावान् की ओर से कोई नई शिक्षा, परन्तु वे उससे मुख फेरने वाले बन जाते हैं।
آية رقم 6
तो उन्होंने झुठला दिया! अब उनके पास शीघ्र ही उसकी सूचनाएँ आ जायेंगी, जिसका उपहास वे कर रहे थे।
और क्या उन्होंने धरती की ओर नहीं देखा कि हमने उसमें उगाई हैं, बहुत-सी प्रत्येक प्रकार की अच्छी वनस्पतियाँ?
निश्चय ही, इसमें बड़ी निशानी (लक्षण)[1] है। फिर उनमें अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं हैं।
____________________
1. अर्थात अल्लाह के सामर्थ्य की।
آية رقم 9
तथा वास्तव में, आपका पालनहार ही प्रभुत्वशाली, अति दयावान् है।
آية رقم 10
(उन्हें उस समय की कथा सुनाओ) जब पुकारा आपके पालनहार ने मूसा को कि जाओ अत्याचारी जाति[1] के पास!
____________________
1. यह उस समय की बात है जब मूसा (अलैहिस्सलाम) दस वर्ष मद्यन में रह कर मिस्र वापिस आ रहे थे।
آية رقم 11
फ़िरऔन की जाति के पास, क्या वे डरते नहीं?
آية رقم 12
उसने कहाः मेरे पालनहार! वास्तव में, मुझे भय है कि वे मुझे झुठला देंगे।
آية رقم 13
और संकुचित हो रहा है मेरा सीना और नहीं चल रही है मेरी ज़ुबान, अतः वह़्यी भेज दे हारून की ओर (भी)।
آية رقم 14
और उनका मुझपर एक अपराध भी है। अतः, मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार डालेंगे।
अल्लाह ने कहाः कदापि ऐसा नहीं होगा। तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ, हम तुम्हारे साथ सुनने[1] वाले हैं।
____________________
1. अर्थात तुम दोनों की सहायता करते रहेंगे।
آية رقم 16
तो तुम दोनों जाओ और कहो कि हम विश्व के पालनहार के भेजे हुए (रसूल) हैं।
آية رقم 17
कि तू हमारे साथ बनी इस्राईल को जाने दे।
(फ़िरऔन ने) कहाः क्या हमने तेरा पालन नहीं किया है, अपने यहाँ बाल्यवस्था में और तू (नहीं) रहा है, हममें अपनी आयु के कई वर्ष?
آية رقم 19
और तू कर गया वह कार्य,[1] जो किया और तू कृतघनों में से है!
____________________
1. यह उस हत्या काण्ड की ओर संकेत है जो मूसा (अलैहिस्सलाम) से नबी होने से पहले हो गया था। (देखियेः सूरह क़स़स़)
آية رقم 20
(मूसा ने) कहाः मैंने ऐसा उस समय कर दिया, जबकि मैं अनजान था।
फिर मैं तुमसे भाग गया, जब तुमसे भय हुआ। फिर प्रदान कर दिया मुझे, मेरे पालनहार ने तत्वदर्शिता और मुझे बना दिया रसूलों में से।
آية رقم 22
और ये कोई उपकार है, जो तू मुझे जता रहा है कि तूने दास बना लिया है, इस्राईल के पुत्रों को।
آية رقم 23
फ़िरऔन ने कहाः विश्व का पालनहार क्या है?
(मूसा ने) कहाः आकाशों तथा धरती और उसका पालनहार, जो कुछ दोनों के बीच है, यदि तुम विश्वास रखने वाले हो।
آية رقم 25
उसने उनसे कहा, जो उसके आस-पास थेः क्या तुम सुन नहीं रहे हो?
آية رقم 26
(मुसा ने) कहाः तुम्हारा पालनहार तथा तुम्हारे पूर्वोजों का पालनहार है।
آية رقم 27
(फ़िरऔन ने) कहाः वास्तव में, तुम्हारा रसूल, जो तुम्हारी ओर भेजा गया है, पागल है।
(मूसा ने) कहाः वह, पूर्व तथा पश्चिम तथा दोनों के मध्य जो कुछ है, सबका पालनहार है।
آية رقم 29
(फ़िरऔन ने) कहाः यदि तूने कोई पूज्य बना लिया मेरे अतिरिक्त, तो तुझे बंदियों में कर दूँगा।
آية رقم 30
(मूसा ने) कहाः क्या यद्यपि मैं ले आऊँ तेरे पास एक खुली चीज़?
آية رقم 31
उसने कहाः तू उसे ले आ, यदि सच्चा है।
آية رقم 32
फिर उसने अपनी लाठी फेंक दी, तो अकस्मात वह एक प्रत्यक्ष अजगर बन गयी।
آية رقم 33
तथा अपना हाथ निकाला, तो अकस्मात वह उज्ज्वल था, देखने वालों के लिए।
آية رقم 34
उसने अपने प्रमुखों से कहा, जो उसके पास थेः वास्तव में, ये तो बड़ा दक्ष जादूगर है।
آية رقم 35
ये चाहता है कि तुम्हें, तुम्हारी धरती से निकाल[1] दे, अपने जादू के बल से, तो अब तुम क्या आदेश देते हो?
____________________
1. अर्थात यह उग्रवाद कर के हमारे देश पर अधिकार कर ले।
آية رقم 36
सबने कहाः अवसर (समय) दो मूसा और उसके भाई (के विषय) को और भेज दो नगरों में एकत्र करने वालों को।
آية رقم 37
वे तुम्हारे पास प्रत्येक बड़े दक्ष जादूगर को लायें।
آية رقم 38
तो एकत्र कर लिए गये जादूगर एक निश्चित दिन के समय के लिए।
آية رقم 39
तथा लोगों से कहा गया कि क्या तुम एकत्र होने वाले[1] हो?
____________________
1. अर्थात लोगों को प्रेरणा दी जा रही है कि इस प्रतियोगिता में अवश्य उपस्थित हों।
آية رقم 40
ताकि हम पीछे चलें जादूगरों के यदि वही प्रभुत्वशाली (विजयी) हो जायें।
और जब जादूगर आये, तो फ़िरऔन से कहाः क्या हमें कुछ पुरस्कार मिलेगा, यदि हम ही प्रभुत्वशाली होंगे?
آية رقم 42
उसने कहाः हाँ! और तुम उस समय (मेरे) समीपवर्तियों में हो जाओगे।
آية رقم 43
मूसा ने उनसे कहाः फेंको, जो कुछ तुम फेंकने वाले हो।
तो उन्होंने फेंक दी उपनी रस्सियाँ तथा अपनी लाठियाँ तथा कहाः फ़िरऔन के प्रभुत्व की शपथ! हम ही अवश्य प्रभुत्वशाली (विजयी) होंगे।
آية رقم 45
अब मूसा ने फेंक दी अपनी लाठी, तो तत्क्षण वह निगलने लगी (उसे), जो झूठ वे बना रहे थे।
آية رقم 46
तो गिर गये सभी जादूगर[1] सज्दा करते हुए।
____________________
1. क्यों कि उन्हें विश्वास हो गया कि मूसा (अलैहिस्सलाम) जादूगर नहीं, बल्कि वह सत्य के उपदेशक हैं।
آية رقم 47
और सबने कह दियाः हम विश्व के पालनहार पर ईमान लाये।
آية رقم 48
मूसा तथा हारून के पालनहार पर।
(फ़िरऔन ने) कहाः तुम उसका विश्वास कर बैठे, इससे पहले कि मैं तुम्हें आज्ञा दूँ? वास्तव में, वह तुम्हारा बड़ा (गुरू) है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है, तो तुम्हें शीघ्र ज्ञान हो जायेगा, मैं अवश्य तुम्हारे हाथों तथा पैरों को विपरीत दिशा[1] से काट दूँगा तथा तुम सभी को फाँसी दे दूँगा!
____________________
1. अर्थात दाँया हाथ और बायाँ पैर या बायाँ हाथ और दायाँ पैर।
آية رقم 50
सबने कहाः कोई चिन्ता नहीं, हमतो अपने पालनहार हीकी ओर फिरकर जाने वाले हैं।
हम आशा रखते हैं कि क्षमा कर देगा, हमारे लिए, हमारा पालनहार, हमारे पापों को, क्योंकि हम सबसे पहले ईमान लाने वाले हैं।
और हमने मूसा की ओर वह़्यी की कि रातों-रात निकल जा मेरे भक्तों को लेकर, तुम सबका पीछा किया जायेगा।
آية رقم 53
तो फ़िरऔन ने भेज दिया नगरों में (सेना) एकत्र करने[1] वालों को।
____________________
1. जब मूसा (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के आदेशानुसार अपने साथियों को ले कर निकल गये तो फ़िरऔन ने उन का पीछा करने के लिये नगरों में हरकारे भेजे।
آية رقم 54
कि वे बहुत थोड़े लोग हैं।
آية رقم 55
और (इसपर भी) वे हमें अति क्रोधित कर रहे हैं।
آية رقم 56
और वास्तव में, हम एक गिरोह हैं सावधान रहने वाले।
آية رقم 57
अन्ततः, हमने निकाल दिया उन्हें, बागों तथा स्रोतों से।
آية رقم 58
तथा कोषों और उत्तम निवास स्थानों से।
آية رقم 59
इसी प्रकार हुआ और हमने उनका उत्तराधिकारी बना दिया, इस्राईल की संतान को।
آية رقم 60
तो उन्होंने उनका पीछा किया, प्रातः होते ही।
آية رقم 61
और जब दोनों गिरोहों ने एक-दूसरे को देख लिया, तो मूसा के साथियों ने कहाः हमतो निश्चय ही पकड़ लिए[1] गये।
____________________
1. क्यों कि अब सामने सागर और पीछे फ़िरऔन की सेना थी।
آية رقم 62
(मूसा ने) कहाः कदापि नहीं, निश्चय मेरे साथ मेरा पालनहार है।
तो हमने मूसा को वह़्यी की कि मार अपनी लाठी से सागर को, अकस्मात् सागर फट गया तथा प्रत्येक भाग, भारी पर्वत के समान[1] हो गया।
____________________
1. अर्थात बीच से मार्ग बन गया और दोनों ओर पानी पर्वत के समान खड़ा हो गया।
آية رقم 64
तथा हमने समीप कर दिया उसी स्थान के, दूसरे गिरोह को।
آية رقم 65
और मुक्ति प्रदान कर दी मूसा और उसके सब साथियों को।
آية رقم 66
फिर हमने डुबो दिया दूसरों को।
वास्तव में, इसमें बड़ी शिक्षा है और उनमें से अधिक्तर लोग ईमान वाले नहीं थे।
آية رقم 68
तथा वास्तव में, आपका पालनहार निश्चय अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
آية رقم 69
तथा आप, उन्हें सुना दें, इब्राहीम का समाचार (भी)।
آية رقم 70
जब उसने कहा, अपने बाप तथा अपनी जाति से कि तुम क्या पूज रहे हो?
آية رقم 71
उन्होंने कहाः हम मूर्तियों की पूजा कर रहे हैं और उन्हीं की सेवा में लगे रहते हैं।
آية رقم 72
उसने कहाः क्या वे तुम्हारी सुनती हैं, जब तुम पुकारते हो?
آية رقم 73
या तुम्हें लाभ पहुँचाती या हानि पहुँचाती हैं?
آية رقم 74
उन्होंने कहाः बल्कि हमने अपने पूर्वोजों को ऐसा ही करते हुए पाया है।
آية رقم 75
उसने कहाः क्या तुमने कभी (आँख खोलकर) उसे देखा, जिसे तुम पूज रहे हो।
آية رقم 76
तुम तथा तुम्हारे पहले पूर्वज?
آية رقم 77
क्योंकि ये सब मेरे शत्रु हैं, पूरे विश्व के पालनहार के सिवा।
آية رقم 78
जिसने मुझे पैदा किया, फिर वही मुझे मार्ग दर्शा रहा है।
آية رقم 79
और जो मुझे खिलाता और पिलाता है।
آية رقم 80
और जब रोगी होता हूँ, तो वही मुझे स्वस्थ करता है।
آية رقم 81
तथा वही मुझे मारेगा, फिर[1] मुझे जीवित करेगा।
____________________
1. अर्थात प्रलय के दिन अपने कर्मों का फल भोगने के लिये।
آية رقم 82
तथा मैं आशा रखता हूँ कि क्षमा कर देगा, मेरे लिए, मेरे पाप, प्रतिकार (प्रलय) के दिन।
آية رقم 83
हे मेरे पालनहार! प्रदान कर दे मुझे तत्वदर्शिता और मुझे सम्मिलित कर सदाचारियों में।
آية رقم 84
और मुझे सच्ची ख्याति प्रदान कर, आगामी लोगों में।
آية رقم 85
और बना दे मुझे, सुख के स्वर्ग का उत्तराधिकारी।
آية رقم 86
तथा मेरे बाप को क्षमा कर दे,[1] वास्तव में, वह कुपथों में से है।
____________________
1. (देखियेः सूरह तौबा, आयतः114)
آية رقم 87
तथा मुझे निरादर न कर, जिस दिन सब जीवित किये[1] जायेंगे।
____________________
1. ह़दीस में वर्णित है कि प्रलय के दिन इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपने बाप से मिलेंगे। और कहेंगेः हे मेरे पालनहार! तू ने मुझे वचन दिया था कि मुझे पुनः जीवित होने के दिन अपमानित नहीं करेगा। तो अल्लाह कहेगाः मैं ने स्वर्ग को काफ़िरों के लिये अवैध कर दिया है। (सह़ीह़ बुख़ारीः4769)
آية رقم 88
जिस दिन, लाभ नहीं देगा कोई धन और न संतान।
آية رقم 89
परन्तु, जो अल्लाह के पास स्वच्छ दिल लेकर आयेगा।
آية رقم 90
और समीप कर दी जायेगी स्वर्ग आज्ञाकारियों के लिए।
آية رقم 91
तथा खोल दी जायेगी नरक कुपथों के लिए।
آية رقم 92
तथा कहा जायेगाः कहाँ हैं वे, जिन्हें तुम पूज रहे थे?
آية رقم 93
अल्लाह के सिवा, क्या वे तुम्हारी सहायता करेंगे अथवा स्वयं अपनी सहायता कर सकते हैं?
آية رقم 94
फिर उसमें औंधे झोंक दिये जायेंगे वे और सभी कुपथ।
آية رقم 95
और इब्लीस की सेना सभी।
آية رقم 96
और वे उसमें आपस में झगड़ते हुए कहंगेः
آية رقم 97
अल्लाह की शपथ! वास्तव में, हम खुले कुपथ में थे।
آية رقم 98
जब हम तुम्हें, बराबर समझ रहे थे विश्व के पालनहार के।
آية رقم 99
और हमें कुपथ नहीं किया, परन्तु अपराधियों ने।
آية رقم 100
तो हमारा कोई अभिस्तावक (सिफ़ारिशी) नहीं रह गया।
آية رقم 101
तथा न कोई प्रेमी मित्र।
آية رقم 102
तो यदि हमें पुनः संसार में जाना होता,[1] तो हम ईमान वालों में हो जाते।
____________________
1. इस आयत में संकेत है कि संसार में एक ही जीवन कर्म के लिये मिलता है। और दूसरा जीवन प्रलोक में कर्मों के फल के लिये मिलेगा।
آية رقم 103
निःसंदेह, इसमें बड़ी निशानी है और उनमें से अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं हैं।
آية رقم 104
और वास्तव में, आपका पालनहार ही अति प्रभुत्वशाली,[1] दयावान् है।
____________________
1. परन्तु लोग स्वयं अत्याचार कर के नरक के भागी बन रहे हैं।
آية رقم 105
नूह़ की जाति ने भी रसूलों को झुठलाया।
آية رقم 106
जब उनसे उनके भाई नूह़ ने कहाः क्या तुम (अल्लाह से) डरते नहीं हो?
آية رقم 107
वास्तव में, मैं तुम्हारे लिए एक[1] रसूल हूँ।
____________________
1. अल्लाह का संदेश बिना कमी और अधिक्ता के तुम्हें पहूँचा रहा हूँ।
آية رقم 108
अतः, तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।
मैं नहीं माँगता इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला), मेरा बदला तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।
آية رقم 110
अतः, तुम अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा का पालन करो।
آية رقم 111
उन्होंने कहाः क्या हम तुझे मान लें, जबकि तेरा अनुसरण पतित (नीच) लोग[1] कर रहे हैं?
____________________
1. अर्थात धनी नहीं, निर्धन लोग कर रहे हैं।
آية رقم 112
(नूह़ ने) कहाः मूझे क्य ज्ञान कि वे क्या कर्म करते रहे हैं?
آية رقم 113
उनका ह़िसाब तो बस मेरे पालनहार के ऊपर है, यदि तुम समझो।
آية رقم 114
और मैं धुतकारने वाला[1] नहीं हूँ, ईमान वालों को।
____________________
1. अर्थात मैं हीन वर्ग के लोगों को जो ईमान लाये हैं अपने से दूर नहीं कर सकता जैसा कि तुम चाहते हो।
آية رقم 115
मैं तो बस खुला सावधान करने वाला हूँ।
آية رقم 116
उन्होंने कहाः यदि रुका नहीं, हे नूह़! तो तू अवश्य पथराव करके मारे हुओं में होगा।
آية رقم 117
उसने कहाः मेरे पालनहार! मेरी जाति ने मुझे झुठला दिया।
آية رقم 118
अतः, तू निर्णय कर दे मेरे और उनके बीच और मुक्त कर दे मुझे तथा उन्हें जो मेरे साथ हैं, ईमान वालों में से।
آية رقم 119
तो हमने उसे मुक्त कर दिया तथा उन्हें जो उसके साथ भरी नाव में थे।
آية رقم 120
फिर हमने डुबो दिया उसके पश्चात्, शेष लोगों को।
آية رقم 121
वास्तव में, इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है तथा उनमें से अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं।
آية رقم 122
और निश्चय आपका पालनहार ही अति प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
آية رقم 123
झुठला दिया आद (जाति) ने (भी) रसूलों को।
آية رقم 124
जब कहा उनसे, उनके भाई हूद[1] नेः क्या तुम डरते नहीं हो?
____________________
1. आद जाति के नबी हूद (अलैहिस्सलाम) को उन का भाई कहा गया है क्यों कि वह भी उन्हीं के समुदाय में से थे।
آية رقم 125
वस्तुतः, मैं तुम्हारे लिए एक न्यासिक (अमानतदार) रसूल हूँ।
آية رقم 126
अतः, अल्लाह से डरो और मेरा अनुपालन करो।
और मैं तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।
آية رقم 128
क्यों तुम बना लेते हो, हर ऊँचे स्थान पर एक यादगार भवन, व्यर्थ में?
آية رقم 129
तथा बनाते हो, बड़े-बड़े भवन, जैसे कि तुम सदा रहोगे।
آية رقم 130
और जबकिसी को पकड़ते हो, तो पकड़ते हो, महा अत्याचारी बनकर।
آية رقم 131
तो अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा का पालन करो।
آية رقم 132
तथा उससे भय रखो, जिसने तुम्हारी सहायता की है उससे, जो तुम जानते हो।
آية رقم 133
उसने सहायता की है तुम्हारी चौपायों तथा संतान से।
آية رقم 134
तथा बाग़ों (उद्यानो) तथा जल स्रोतों से।
آية رقم 135
मैं तुमपर डरता हूँ, भीषण दिन की यातना से।
آية رقم 136
उन्होंने कहाः नसीह़त करो या न करो, हमपर सब समान है।
آية رقم 137
ये बात तो बस प्राचीन लोगों की नीति[1] है।
____________________
1. अर्थात प्राचीन युग से होती चली आ रही है।
آية رقم 138
और हम उनमें से नहीं हैं, जिन्हें यातना दी जायेगी।
अन्ततः, उन्होंने हमें झुठला दिया, तो हमने उन्हें ध्वस्त कर दिया। निश्चय इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है और लोगों में अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं हैं।
آية رقم 140
और वास्तव में, आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
آية رقم 141
झुठला दिया समूद ने (भी)[1] रसूलों को।
____________________
1. यहाँ यह बात याद रखने की है कि एक रसूल का इन्कार सभी रसूलों का इन्कहार है क्यों कि सब का उपदेश एक ही था।
آية رقم 142
जब कहा उनसे उनके भाई सालेह़ नेः क्या तुम डरते नहीं हो?
آية رقم 143
वास्तव में, मैं तुम्हारा विश्वसनीय रसूल हूँ।
آية رقم 144
तो तुम अल्लाह से डरो और मेरा कहा मानो।
तथा मैं नहीं माँगता इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक, मेरा पारिश्रमिक तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।
آية رقم 146
क्या तुम छोड़ दिये जाओगे उसमें, जो यहाँ हैं निश्चिन्त रहकर?
آية رقم 147
बाग़ों तथा स्रोतों में।
آية رقم 148
तथा खेतों और खजूरों में, जिनके गुच्छे रस भरे हैं।
آية رقم 149
तथा तुमपर्वतों को तराशकर घर बनाते हो, गर्व करते हुए।
آية رقم 150
अतः, अल्लाह से डरो और मेरा अनुपालन करो।
آية رقم 151
और पालन न करो उल्लंघनकारियों के आदेश का।
آية رقم 152
जो उपद्रव करते हैं धरती में और सुधार नहीं करते।
آية رقم 153
उन्होंने कहाः वास्तव में, तू उनमें से है, जिनपर जादू कर दिया गया है।
तू तो बस हमारे समान एक मानव है। तो कोई चमत्कार ले आ, यदि तू सच्चा है।
آية رقم 155
कहाः ये ऊँटनी है,[1] इसके लिए पानी पीने का एक दिन है और तुम्हारे लिए पानी लेने का निश्चित दिन है।
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1. अर्थता यह ऊँटनी चमत्कार है जो उन की माँग पर पत्थर से निकली थी।
آية رقم 156
तथा उसे हाथ न लगाना बुराई से, अन्यथा तुम्हें पकड़ लेगी एक भीषण दिन की यातना।
آية رقم 157
तो उन्होंने वध कर दिया उसे, अन्ततः, पछताने वाले हो गये।
और पकड़ लिया उन्हें यातना ने। वस्तुतः, इसमें बड़ी निशानी है और नहीं थे उनमें से अधिक्तर ईमान वाले।
آية رقم 159
और निश्चय आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
آية رقم 160
झुठला दिया लूत की जाति ने (भी) रसूलों को।
آية رقم 161
जब कहा उनसे उनके भाई लूत नेः क्या तुम डरते नहीं हो?
آية رقم 162
वास्तव में, मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
آية رقم 163
अतः अल्लाह से डरो और मेरा अनुपालन करो।
और मैं तुमसे प्रश्न नहीं करता, इसपर किसी पारिश्रमिक (बदले) का। मेरा बदला तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।
آية رقم 165
क्या तुम जाते[1] हो पुरुषों के पास, संसार वासियों में से।
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1. इस कुकर्म का आरंभ संसार में लूत (अलैहिस्सलाम) की जाति से हुआ। और अब यह कुकर्म पूरे विश्व में विशेष रूप से यूरोपीय सभ्य देशों में व्यापक है। और समलैंगिक विवाह को यूरोप के बहुत से देशों में वैध मान लिया गया है। जिस के कारण कभी भी उन पर अल्लाह की यातना आ सकती है।
तथा छोड़ देते हो उसे, जिसे पैदा किया है तुम्हारे पालनहार ने, अर्थात अपनी प्तनियों को, बल्कि तुम एक जाति हो, सीमा का उल्लंघन करने वाली।
آية رقم 167
उन्होंने कहाः यदि तू नहीं रुका, हे लूत! तो अवश्य तेरा बहिष्कार कर दिया जायेगा।
آية رقم 168
उसने कहाः वास्तव में, मैं तुम्हारे करतूत से बहुत अप्रसन्न हूँ।
آية رقم 169
मेरे पालनहार! मुझे बचा ले तथा मेरे परिवार को उससे, जो वे कर रहे हैं।
آية رقم 170
तो हमने उसे बचा लिया तथा उसके सभी परिवार को।
آية رقم 171
परन्तु, एक बुढ़िया[1] को, जो पीछे रह जाने वालों में थी।
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1. इस से अभिप्रेत लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नी थी।
آية رقم 172
फिर हमने विनाश कर दिया दूसरों का।
آية رقم 173
और वर्षा की उनपर, एक घोर[1] वर्षा। तो बुरी हो गयी डराये हुए लोगों की वर्षा।
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1. अर्थात पत्थरों की वर्षा। (देखियेः सूरह हूद, आयतः82-83)
آية رقم 174
वास्तव में, इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है और उनमें से अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं थे।
آية رقم 175
और निश्चय आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
آية رقم 176
झुठला दिया ऐय्का[1] वालों ने रसूलों को।
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1. ऐय्का का अर्थ झाड़ी है। यह मद्यन का क्षेत्र है जिस में शोऐब अलैहिस्सलाम को भेजा गया था।
آية رقم 177
जब कहा उनसे शोऐब नेः क्या तुम डरते नहीं हो?
آية رقم 178
मैं तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूँ।
آية رقم 179
अतः, अल्लाह से डरो तथा मेरी आज्ञा का पालन करो।
और मैं नहीं माँगता तुमसे इसपर कोई पारिश्रमिक, मेरा पारिश्रमिक तो बस समस्त विश्व के पालनहार पर है।
آية رقم 181
तुम नाप-तोल पूरा करो और न बनो कम देने वालों में।
آية رقم 182
और तोलो सीधी तराज़ू से।
آية رقم 183
और मत कम दो लोगों को उनकी चीज़ें और मत फिरो धरती में उपद्रव फैलाते।
آية رقم 184
और डरो उससे, जिसने पैदा किया है तुम्हें तथा अगले लोगों को।
آية رقم 185
उन्होंने कहाःवास्तव में, तू उनमें से है, जिनपर जादू कर दिया गया है।
آية رقم 186
और तू तो बस एक पुरुष[1] है, हमारे समान और हम तो तुझे झूठों में समझते हैं।
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1. यहाँ यह बात विचारणीय है कि सभी विगत जातियों ने अपने रसूलों को उन के मानव होने के कारण नकार दिया। और जिस ने स्वीकार भी किया तो उस ने कुछ युग व्यतीत होने के पश्चात् अति कर के अपने रसूलों को प्रभु अथवा प्रभु का अंश बना कर उन्हीं को पूज्य बना लिया। तथा एकेश्वरवाद को कड़ा आघात पहुँचा कर मिश्रणवाद का द्वार खोल लिया और कुपथ हो गये। वर्तमान युग में भी इसी का प्रचलन है और इस का आधार अपने पूर्वजों की रीतियों को बनाया जाता है। इस्लाम इसी कुपथ का निवारण कर के एकेश्वरवाद की स्थापना के लिये आया है और वास्तव में यही सत्धर्म है। ह़दीस में है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः मूझे वैसे न बढ़ा चढ़ाना जैसे ईसाईयों ने मर्यम के पुत्र (ईसा) को बढ़ा चढ़ा दिया। वास्तव में मैं उस का दास हूँ। अतः मुझे अल्लाह का दास और उस का रसूल कहो। (देखिये सह़ीह़ बुख़ारीः 3445)
آية رقم 187
तो हमपर गिरा दे कोई खण्ड आकाश का, यदि तू सच्चा है।
آية رقم 188
उसने कहाः मेरा पालनहार भली प्रकार जानता है उसे, जो कुछ तुम कर रहे हो।
तो उन्होंने उसे झुठला दिया। अन्ततः, पकड़ लिया उन्हें छाया के[1] दिन की यातना ने। वस्तुतः, वह एक भीषण दिन की यातना थी।
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1. अर्थात उन की यातना के दिन उन पर बादल छा गया। फिर आग बरसने लगी और धरती कंपित हो गई। फिर एक कड़ी ध्वनि ने उन की जानें ले लीं। (इब्ने कसीर)
آية رقم 190
निश्चय ही, इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है और नहीं थे उनमें अधिक्तर ईमान लाने वाले।
آية رقم 191
और वास्तव में, आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
آية رقم 192
तथा निःसंदेह, ये (क़ुर्आन) पूरे विश्व के पालनहार का उतारा हुआ है।
آية رقم 193
इसे लेकर रूह़ुल अमीन[1] उतरा।
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1. रूह़ुल अमीन से अभिप्राय आदरणीय फ़रिश्ता जिब्रील (अलैहिस्सलाम) हैं। जो मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अल्लाह की ओर से वह़्यी ले कर उतरते थे जिस के कारण आप रसूलों की और उन की जातियों की दशा से अवगत हुये। अतः यह आप के सत्य रसूल होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
آية رقم 194
आपके दिल पर, ताकि आप हो जायें सावधान करने वालों में।
آية رقم 195
खुली अरबी भाषा में।
آية رقم 196
तथा इसकी चर्चा[1] अगले रसूलों की पुस्तकों में (भी) है।
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1. अर्थात सभी आकाशीय ग्रन्थों में अन्तिम नबी मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आगमन तथा आप पर पुस्तक क़ुर्आन के अवतरित होने की भविष्वाणी की गई है। और सब नबियों ने इस की शुभ सूचना दी है।
آية رقم 197
क्या और उनके लिए ये निशानी नहीं है कि इस्राईलियों के विद्वान[1] इसे जानते हैं।
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1. बनी इस्राईल के विद्वान अब्दुल्लाह बिन सलाम आदि जो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और क़ुर्आन पर ईमान लाये वह इस के सत्य होने का खुला प्रमाण हैं।
آية رقم 198
और यदि हम इसे उतार देते किसी अजमी[1] पर।
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1. अर्थात ऐसे व्यक्ति पर जो अरब देश और जाति के अतिरिक्त किसी अन्य जाति का हो।
آية رقم 199
और वह, इसे उनके समक्ष पढ़ता, तो वे उसपर ईमान लाने वाले न होते[1]।
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1. अर्थात अर्बी भाषा में न होता तो कहते कि यह हमारी समझ में नहीं आता। (देखियेः सूरह ह़ा, मीम, सज्दा, आयतः44)
آية رقم 200
इसी प्रकार, हमने घुसा दिया है इस (क़ुर्आन के इन्कार) को पापियों के दिलों में।
آية رقم 201
वे नहीं ईमान लायेंगे उसपर, जब तक देख नहीं लेंगे दुःखदायी यातना।
آية رقم 202
फिर, वह उनपर सहसा आ जायेगी और वे समझ भी नहीं पायेंगे।
آية رقم 203
तो कहेंगेः क्या हमें अवसर दिया जायेगा?
آية رقم 204
तो क्या वे हमारी यातना की जल्दी मचा रहे हैं?
آية رقم 205
(हे नबी!) तो क्या आपने विचार किया कि यदि हम लाभ पहुँचायें इन्हें वर्षों।
آية رقم 206
फिर आ जाये उनपर वह, जिसकी उन्हें धमकी दी जा रही थी।
آية رقم 207
तो कुछ काम नहीं आयेगा उनके, जो उन्हें लाभ पहुँचाया जाता रहा?
آية رقم 208
और हमने किसी बस्ती का विनाश नहीं किया, परन्तु उसके लिए सावधान करने वाले थे।
آية رقم 209
शिक्षा देने के लिए और हम अत्याचारी नहीं हैं।
آية رقم 210
तथा नहीं उतरे हैं (इस क़ुर्आन) को लेकर शैतान।
آية رقم 211
और न योग्य है उनके लिए और न वे इसकी शक्ति रखते हैं।
آية رقم 212
वास्तव में, वे तो (इसके) सुनने से भी दूर[1] कर दिये गये हैं।
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1. अर्थात इस के अवतरित होने के समय शैतान आकाश की ओर जाते हैं तो उल्का उन्हें भष्म कर देते हैं।
آية رقم 213
अतः, आप न पुकारें अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य को, अन्यथा आप दण्डितों में हो जायेंगे।
آية رقم 214
और आप सावधान कर दें अपने समीपवर्ती[1] संबंधियों को।
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1. आदरणीय इब्ने अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि जब यह आयत उतरी तो आप सफ़ा पर्वत पर चढ़े। और क़ुरैश के परिवारों को पुकरा। और जब सब एकत्र हो गये, और जो स्वयं नहीं आ सका तो उस ने किसी प्रतिनिधि को भेज दिया। और अबू लहब तथा क़ुरैश आ गये तो आप ने फ़रमायाः यदि मैं तुम से कहूँ कि उस वादी में एक सेना है जो तुम पर आक्रमण करने वाली है, तो क्या तुम मुझे सच्चा मानोगे? सब ने कहाः हाँ। हम ने आप को सदा ही सच्चा पाया है। आप ने कहाः मैं तुम्हें आगामी कड़ी यातना से सावधान कर रहा हूँ। इस पर अबू लहब ने कहाः तेरा पूरे दिन नाश हो! क्या हमें इसी के लिये एकत्र किया है? और इसी पर सूरह लह्ब उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारीः4770)
آية رقم 215
और झुका दें अपना बाहु[1] उसके लिए, जो आपका अनुयायी हो, ईमान वालों में से।
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1. अर्थात उस के साथ विनम्रता का व्यवहार करें।
آية رقم 216
और यदि वे आपकी अवज्ञा करें, तो आप कह दें कि मैं निर्दोष हूँ उससे, जो तुम कर रहे हो।
آية رقم 217
तथा आप भरोसा करें अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् पर।
آية رقم 218
जो देखता है आपको, जिस समय (नमाज़) में खड़े होते हैं।
آية رقم 219
और आपके फिरने को सज्दा करने[1] वालों में।
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1. अर्थात प्रत्येक समय अकेले हों या लोगों के बीच हों।
آية رقم 220
निःसंदेह, वही सब कुछ सुनने-जानने वाला है।
آية رقم 221
क्या मैं तुम सबको बताऊँ कि किसपर शैतान उतरते हैं?
آية رقم 222
वे उतरते हैं, प्रत्येक झूठे पापी[1] पर।
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1. ह़दीस में है कि फ़रिश्ते बादल में उतरते हैं, और आकाश के निर्णय की बात करते हैं, जिसे शैतान चोरी से सुन लेते हैं। और ज्योतिषियों को पहुँचा देते हैं। फिर वह उस में सौ झूठ मिलाते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारीः3210)
آية رقم 223
वे पहुँचा देते हैं, सुनी सुनाई बातों को और उनमें अधिक्तर झूठे हैं।
آية رقم 224
और कवियों का अनुसरण बहके हुए लोग करते हैं।
آية رقم 225
क्या आप नहीं देखते कि वे प्रत्येक वादी में फिरते[1] हैं।
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1. अर्थात कल्पना की उड़ान में रहते हैं।
آية رقم 226
और ऐसी बात कहते हैं, जो करते नहीं।
परन्तु वो (कवि), जो[1] ईमान लाये, सदाचार किये, अल्लाह का बहुत स्मरण किया तथा बदला लिया इसके पश्चात् कि उनके ऊपर अत्याचार किया गया! तथा शीघ्र ही जान लेंगे, जिन्होंने अत्याचार किया है कि व किस दुष्परिणाम की ओर फिरते हैं!
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1. इन से अभिप्रेत ह़स्सान बिन साबित आदि कवि हैं जो क़ुरैश के कवियों की भर्त्सना किया करते थे। (देखियेः सह़ीह़ बुख़ारीः4124)
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