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ترجمة معاني القرآن الكريم - عادل صلاحي
عادل صلاحي
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آية رقم 1
१. सर्व स्तुती-प्रशंसा त्या अल्लाहकरिताच आहे, ज्याने आपल्या दासावर हा कुरआन अवतरित केला आणि त्यात कसलीही उणीव बाकी राहू दिली नाही.
آية رقم 2
२. किंबहुना सर्व काही यथायोग्य राखले यासाठी की आपल्याजवळच्या सक्त शिक्षेपासून सचेत करावे आणि ईमान राखणाऱ्यांना आणि सत्कर्म करणाऱ्यांना खूशखबरी ऐकवावी की त्यांच्याकरिता उत्तम मोबदला आहे.
آية رقم 3
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३. ज्यात ते नेहमी नेहमी राहतील.
آية رقم 4
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४. आणि त्या लोकांनाही भय दाखवावे जे म्हणतात की अल्लाह संतती बाळगतो.
آية رقم 5
५. वास्तविकत ना त्यांना स्वतःला याचे ज्ञान आहे, ना त्यांच्या थोर बुजूर्ग लोकांना. हा आरोप मोठा वाईट आहे, जो त्यांच्या तोंडून निघत आहे, ते केवळ खोटे बोलत आहेत.
آية رقم 6
६. मग जर या लोकांनी या गोष्टीवर ईमान राखले नाही तर काय तुम्ही त्यांच्या मागे याच दुःखात आपल्या जीवाचा नाश करून घ्याल?
آية رقم 7
७. धरतीवर जे काही आहे, ते आम्ही धरतीच्या शोभा-सजावटीसाठी बनविले आहे की आम्ही त्यांची कसोटी घ्यावी की त्यांच्यापैकी कोण सत्कर्म करणारा आहे.
آية رقم 8
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८. आणि या धरतीवर जे काही आहे, आम्ही त्याला एक सपाट मैदान करून टाकणार आहोत.
آية رقم 9
९. काय तुम्ही आपल्या मते गुफा आणि शिलालेखवाल्यांना आमच्या निशाण्यांपैकी एखादी मोठी नवलपूर्ण निशाणी समजत आहात?
آية رقم 10
१०. त्या तरुणांनी जेव्हा गुफेत आश्रय घेतला तेव्हा दुआ-प्रार्थना केली की, हे आमच्या पालनकर्त्या! आम्हाला आपल्या जवळून दया- कृपा प्रदान कर आणि आमच्या कार्यात आमच्यासाठी मार्ग सोपा कर.
آية رقم 11
११. मग आम्ही त्यांच्या कानांवर अनेक वर्षांपर्यंत त्याच गुफेत पडदे टाकले.
آية رقم 12
१२. मग आम्ही त्यांना उठवून उभे केले की आम्ही हे जाणून घ्यावे की दोन्ही गटांपैकी या मोठ्या मुदतीला, जी त्यांनी पार पाडली, कोणी जास्त स्मरणात राखले?
آية رقم 13
१३. आम्ही त्यांची खरी कहाणी तुमच्यासमोर वर्णन करीत आहोत, या काही तरुणांनी१ आपल्या पालनकर्त्यावर ईमान राखले आणि आम्ही त्यांच्या मार्गदर्शनात प्रगती प्रदान केली.
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(१) काही धर्मज्ञानी लोकांच्या मते हे तरुण ख्रिश्चन धर्माचे अनुयायी होते, काहींच्या मते त्याचा काळ येशू ख्रिस्तापूर्वीचा होता. हाफीज इब्ने कसीर यांनी याच कथनाला प्राधान्य दिले. असे म्हणतात की एक राजा होता, जो लोकांना मूर्तीपूजा करण्याची व त्यांच्या नावाने भोग प्रसाद चढविण्याची शिकवण देत असे. अल्लाहने या काही तरुणांच्या मनात हा विचार आणला की उपासनायोग्य केवळ अल्लाहच आहे, जो आकाश व धरतीचा निर्माणकर्ता आहे, साऱ्या जगाचा पालनहार आहे. ‘फित्युतुन्’ अनेक वचन आहे, तेव्हा त्यांची संख्या नऊपेक्षा कमी नव्हती, हे वेगळे होऊन एका ठिकाणी एकमेव अल्लाहची उपासना करत. हळूहळू लोकांमध्ये त्यांच्या एकेश्वरवादावरील विश्वासाची चर्चा होऊ लागली. हे राजालाही कळाले तेव्हा त्याने, त्यांना दरबारात बोलावून विचारले. त्यांनी निर्भयपणे एकेश्वरवादाविषयी सांगितले. शेवटी राजा आणि आपल्या जमातीच्या मूर्तीपूजकांच्या भयाने आपल्या धर्म व ईमानाच्या रक्षणार्थ, वस्तीपासून दूर एका पर्वताच्या गुफेत लपले. जिथे अल्लाहने त्यांना गाढनिद्रेत झोपविले आणि ते सतत तीनशे वर्षांपर्यंत झोपत राहिले.
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(१) काही धर्मज्ञानी लोकांच्या मते हे तरुण ख्रिश्चन धर्माचे अनुयायी होते, काहींच्या मते त्याचा काळ येशू ख्रिस्तापूर्वीचा होता. हाफीज इब्ने कसीर यांनी याच कथनाला प्राधान्य दिले. असे म्हणतात की एक राजा होता, जो लोकांना मूर्तीपूजा करण्याची व त्यांच्या नावाने भोग प्रसाद चढविण्याची शिकवण देत असे. अल्लाहने या काही तरुणांच्या मनात हा विचार आणला की उपासनायोग्य केवळ अल्लाहच आहे, जो आकाश व धरतीचा निर्माणकर्ता आहे, साऱ्या जगाचा पालनहार आहे. ‘फित्युतुन्’ अनेक वचन आहे, तेव्हा त्यांची संख्या नऊपेक्षा कमी नव्हती, हे वेगळे होऊन एका ठिकाणी एकमेव अल्लाहची उपासना करत. हळूहळू लोकांमध्ये त्यांच्या एकेश्वरवादावरील विश्वासाची चर्चा होऊ लागली. हे राजालाही कळाले तेव्हा त्याने, त्यांना दरबारात बोलावून विचारले. त्यांनी निर्भयपणे एकेश्वरवादाविषयी सांगितले. शेवटी राजा आणि आपल्या जमातीच्या मूर्तीपूजकांच्या भयाने आपल्या धर्म व ईमानाच्या रक्षणार्थ, वस्तीपासून दूर एका पर्वताच्या गुफेत लपले. जिथे अल्लाहने त्यांना गाढनिद्रेत झोपविले आणि ते सतत तीनशे वर्षांपर्यंत झोपत राहिले.
آية رقم 14
१४. आणि आम्ही त्यांची मने मजबूत केली होती जेव्हा ते उठून उभे राहिले आणि म्हणू लागले की आमचा पालनकर्ता तोच आहे, जो आकाशांचा आणि धरतीचा पालनकर्ता आहे, हे असंभव आहे की आम्ही त्याच्याशिवाय दुसऱ्या उपास्याला पुकारावे जर असे केले तर आम्ही मोठी अनुचित गोष्ट बोललो.
آية رقم 15
१५. हा आहे आमचा जनसमूह, ज्याने अल्लाहखेरीज दुसरी उपास्ये बनवून ठेवली आहेत त्यांच्या वर्चस्वाचा एखादा स्पष्ट पुरावा का नाही सादर करत? अल्लाहशी खोट्या गोष्टीचा संबंध जोडणाऱ्यापेक्षा अधिक अत्याचारी कोण आहे?
آية رقم 16
१६. आणि ज्याअर्थी तुम्ही त्यांच्यापासून आणि अल्लाहखेरीज त्यांच्या इतर उपास्यांपासून वेगळे झाला आहात तर आता एखाद्या गुफेत जाऊन बसा, तुमचा पालनकर्ता (अल्लाह) तुमच्यावर आपली दया-कृपा करेल आणि तुमच्या कार्यात सहज सुलभता निर्माण करील.
آية رقم 17
१७. आणि तुम्ही पाहाल की सूर्योदय होताना सूर्य त्यांच्या गुफेच्या उजव्या बाजूला झुकतो आणि अस्तास जाताना त्यांच्या डाव्या बाजूला गुफेचा भाग सोडून मावळतो आणि ते त्या गुफेच्या प्रशस्त स्थानात आहेत. हे अल्लाहच्या निशाण्यांपैकी आहे, अल्लाह ज्याला मार्गदर्शन करील, तो सत्य मार्गावर आहे आणि ज्याला पथभ्रष्ट करील तर अशक्य आहे की तुम्हाला त्याचा कोणी मित्र आणि मार्ग दाखविणारा दिसून यावा.
آية رقم 18
१८. आणि तुम्ही विचार कराल की ते जागत आहेत वस्तुतः ते झोपत होते, आणि आम्ही स्वतः त्याची उजवी डावी कुशी बदलत राहिलो. त्यांचा कुत्रादेखील गुफेच्या तोंडाशी हात पसरलेल्या अवस्थेत होता. जर तुम्ही आत डोकावून पाहू इच्छिले असते तर नक्कीच उलट पावलांनी पळ काढला असता आणि त्यांच्या भय-दहशतीने तुम्ही भारुन गेले असते.
آية رقم 19
१९. आणि त्याच प्रकारे आम्ही त्यांना जागे करून उठविले की आपसात विचारपूस करावी. त्यांच्यापैकी एका बोलणाऱ्याने विचारले की तुम्ही (इथे) किती काळ राहातील त्यांनी उत्तर दिले, एक दिवस किंवा एका दिवसापेक्षाही कमी. म्हणू लागले, की तुमच्या वास्तव्याचे पूर्ण ज्ञान अल्लाहलाच आहे. आता तुम्ही आपल्यापैकी एखाद्यालाही चांदीची (नाणी) देऊन शहरात पाठवा. त्याने चांगल्याप्रकारे पाहून घ्यावे की शहरात कोणते भोजन स्वच्छ शुद्ध आहे, मग त्यातूनच तुमच्या भोजनासाठी आणावे आणि त्याने खूप सावधगिरी आणि नरमीने वागावे आणि कोणालाही तुमची खबर होऊ देऊ नये.
آية رقم 20
२०. जर हे (काफिर) तुमच्यावर वर्चस्व प्राप्त करून घेतील तर तुम्हाला दगडांनी मारून टाकतील किंवा पुन्हा तुम्हाला आपल्या धर्मात परत घेतील, तर मग तुम्ही कधीही सफल होऊ शकणार नाहीत.
آية رقم 21
२१. आणि आम्ही अशा प्रकारे लोकांना त्यांच्या अवस्थेशी अवगत केले की त्यांनी हे जाणून घ्यावे की अल्लाहचा वायदा पूर्णतः सच्चा आहे. आणि कयामत येण्याबाबत काहीच शंका नाही जेव्हा ते आपल्या बोलण्यात आपसात मतभेद करीत होते, म्हणू लागले की गुफेवर एक इमारत बनवून घ्या. त्यांचा पालनकर्ताच त्यांच्या अवस्थेला अधिक जाणणारा आहे, ज्या लोकांनी त्यांच्या बाबतीत वर्चस्व प्राप्त केले, ते म्हणू लागले की आम्ही तर यांच्याजवळ पास मस्जिद बनवू.
آية رقم 22
२२. काही लोक म्हणतील की गुफेत तीन जण होते आणि चौथा त्यांचा कुत्रा होता, काही म्हणतील की ते पाच होते, सहावा त्यांचा कुत्रा होता. अपरोक्ष (ग़ैब) विषयी (चिन्ह पाहिल्याविना) अनुमानाने दगड मारणे. काही म्हणतील की ते सात आहेत आठवा त्यांचा कुत्रा आहे. (तुम्ही) सांगा की माझा पालनकर्ता, त्यांची संख्या चांगल्या प्रकारे जाणणारा आहे. त्यांना फार थोडेच लोक जाणतात, मग तुम्हीही त्या लोकांविषयी केवळ संक्षिप्त बोलत जा, आणि त्यांच्यापैकी कोणाशी त्यांच्याविषयी विचारपूसही करू नका.
آية رقم 23
२३. आणि कधीही एखाद्या कामाबद्दल असे बोलू नका की मी हे काम उद्या करेन.
آية رقم 24
२४. परंतु त्यासोबतच ‘इन्शा अल्लाह’ (अल्लाहने इच्छिले तर) जरूर म्हणा आणि जेव्हा देखील विसर पडेल आपल्या पालनकर्त्या (अल्लाह) चे स्मरण करत जा आणि हे म्हणत राहा की मला पूर्ण आशा आहे की माझा पालनकर्ता याहून जास्त मार्गदर्शनाच्या जवळच्या गोष्टीचे मार्गदर्शन करेल.
آية رقم 25
२५. आणि ते लोक आपल्या गुफेत तीनशे वर्षापर्यंत राहिले, आणि नऊ वर्षे त्यांनी अधिक काढली.
آية رقم 26
२६. तुम्ही सांगा, अल्लाहलाच त्यांच्या वास्तव्यकाळाचे चांगल्या प्रकारे ज्ञान आहे. आकाशांचे आणि धरतीचे परोक्ष ज्ञान केवळ त्यालाच आहे. तो किती चांगला पाहणारा ऐकणारा आहे! अल्लाहखेरीज कोणीही त्यांची मदत करणारा नाही आणि अल्लाह आपला आदेश लागू करण्यात कोणालाही सहभागी बनवित नाही.
آية رقم 27
२७. आणि तुमच्याकडे, तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे जो ग्रंथ अवतरित केला गेला आहे, त्याचे पठण करीत राहा. त्याचे फर्मान कोणीही बदलू शकत नाही. तुम्हाला त्याच्याखेरीज कदापि एखादे आश्रयस्थान लाभणार नाही.
آية رقم 28
२८. आणि स्वतःला अशाच लोकांच्या सोबत राखत जा, जे आपल्या पालनकर्त्याला सकाळ संध्याकाळ पुकारतात आणि त्याच्याच मुखा (अनुग्रहा) ची अभिलाषा करतात. खबरदार! तुमची दृष्टी त्यांच्यावरून हटता कामा नये की ऐहिक जीवनाच्या शोभा-सजावटीच्या प्रयत्नात मग्न व्हावे (पाहा) त्याचे म्हणणे मान्य करू नका, ज्याच्या हृदयाला आम्ही आपल्या आठवणीपासून गाफील ठेवले आहे आणि जो इच्छा-आकांक्षांच्या मागे धावत आहे आणि ज्याच्या कर्माने मर्यादा पार केली आहे.
آية رقم 29
२९. आणि ऐलान करा की हे परिपूर्ण सत्य (कुरआन) तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे आहे. आता ज्याची इच्छा होईल त्याने ईमान राखावे आणि ज्याची इच्छा होईल त्याने इन्कार करावा. अत्याचारी लोकांकरिता आम्ही ती आग तयार करून ठेवली आहे, जिच्या (आगीच्या) कनाती त्यांना घेरून टाकतील. जर ते गाऱ्हाणे मांडतील तर त्यांची मदत त्या पाण्याने केली जाईल, जे तेलाच्या गाळासारखे असेल, जे चेहरा भाजून टाकील मोठे वाईट पाणी आहे आणि मोठे वाईट विश्रांतीस्थान (जहन्नम) आहे.
آية رقم 30
३०. निःसंशय ज्या लोकांनी ईमान राखले आणि सत्कर्म करीत राहिले तर आम्ही एखाद्या सर्त्म करणाऱ्याचा मोबदला वाया जाऊ देत नाही.
آية رقم 31
३१. त्यांच्यासाठी नेहमी नेहमी असणारी जन्नत आहे. तिच्याखाली नद्या वाहत असतील. तिथे यांना सुवर्ण कांकण घातले जाईल. आणि हिरव्या रंगाचे तलम व जाड रेशमाचे कपडे घालतील त्या ठिकाणी सिंहासनावर तक्के लावून बसतील. किती चांगला मोबदला आहे आणि किती चांगले आराम करण्याचे घर आहे.
آية رقم 32
३२. आणि त्यांना त्या दोन माणसांचे उदाहरणही ऐकवा ज्यांच्यापैकी एकाला आम्ही द्राक्षांच्या दोन बागा देऊन ठेवल्या होत्या, ज्यांना खजुरीच्या वृक्षांनी आम्ही घेरून ठेवले होते आणि दोघांच्या दरम्यान शेती निर्माण केली होती.
آية رقم 33
३३. दोन्ही बागांनी आपली फळे भरपूर दिलीत आणि त्या काहीच कमतरता केली नाही आणि आम्ही त्या बागांच्या दरम्यान प्रवाह जारी केला होता.
آية رقم 34
३४. आणि (अशा प्रकारे) त्याच्याजवळ फळे होती. एक दिवस बोलता बोलता तो आपल्या साथीदाराला म्हणाला की मी तुझ्यापेक्षा जास्त श्रीमंत आहे आणि जत्थ्यातही अधिक प्रतिष्ठीत आहे.
آية رقم 35
३५. आणि तो आपल्या बागेत गेला आणि आपल्या जीवावर जुलूम करणारा होता, म्हणाला, मला नाही वाटत ही बाग कधी बरबाद होऊ शकेल.
آية رقم 36
३६. आणि ना मी कयामतचे प्रस्थापित होण्यास मानतो आणि जर हे मानूनही घेतली की मी आपल्या पालनकर्त्याकडे परतविलो गेलो तर खात्रीने (ते परतीचे ठिकाण) मला याहून जास्त चांगले आढळेल.
آية رقم 37
३७. त्याचा साथीदार त्याच्याशी बोलताना म्हणाला, काय तू त्या (अल्लाह) ला नाही मानत, ज्याने तुला मातीपासून निर्माण केले, नंतर वीर्यापासून, मग तुला पूर्ण मानव (पुरुष) घडविले.
آية رقم 38
३८. परंतु मी (तर पूर्ण श्रद्धा राखतो की) तोच अल्लाह माझा स्वामी व पालनकर्ता आहे, मी आपल्या पालनकर्त्यासोबत कोणालाही सहभागी ठरविणार नाही.
آية رقم 39
३९. आणि तू आपल्या बागेत जाण्याच्या वेळी असे का नाही म्हणाला की अल्लाहने जे इच्छिले ते होईल. कोणतेही शक्ती-सामर्थ्य नाही परंतु अल्लाहच्या मदतीने, जरी तू मला धन आणि संततीत कमतरता असलेला पाहात आहेस.
آية رقم 40
४०. परंतु फार शक्य आहे की माझा पालनकर्ता मला तुझ्या या बागेपेक्षा उत्तम प्रदान करील आणि या (तुझ्या बागे) वर आसमानी संकट पाठविल तर ही सपाट आणि निसटणारे मैदान बनेल.
آية رقم 41
४१. किंवाच हिचे पाणी खाली उतरले आणि तुझ्या आवाक्यात न राहावे की तू ते शोधून आणावे.
آية رقم 42
४२. आणि त्याची (सर्व) फळे घेरली गेलीत मग तो आपल्या या खर्चाबद्दल, जो त्याने बागेवर केला होता, आपले हात मळू लागला, आणि ती बाग छप्परासमेत तोंडघशी पडली होती आणि (तो मनुष्य) म्हणत होता की अरेरे! मी आपल्या पालनकर्त्यासोबत दुसऱ्या कुणाला भागीदार बनविले नसते.
آية رقم 43
४३. त्याच्या हक्कात कोणताही समूह उठून उभा राहिला नाही की अल्लाहपासून त्याचा काही बचाव करू शकला असता आणि ना तो स्वतःही सूड घेणारा बनू शकला.
آية رقم 44
४४. इथूनच (सिद्ध होते) की समस्त अधिकार त्याच अल्लाहकरिता आहेत. तो मोबदला प्रदान करण्याच्या व परिणामाच्या दृष्टीने अतिशय उत्तम आहे.
آية رقم 45
४५. आणि त्यांना या जगाच्या जीवनाचे उदाहरणही सांगा, जणू पाणी जे आम्ही आकाशातून अवतरित करतो त्याद्वआरे जमिनीची पैदावार मिळतीजुळती असते, मग शेवटी ती चूरेचूर होते, जिला वारे उडवित नेत फिरतात आणि अल्लाह प्रत्येक गोष्टीचे सामर्थ्य बाळगतो.
آية رقم 46
४६. धन-संपत्ती आणि संतती तर या जगाच्या जीवनाची शोभा आहे परंतु सदैव टिकून राहणारे सत्कर्म (नेकी) तुमच्या पालनकर्त्याजवळ मोबदल्याच्या दृष्टीने आणि (भविष्याच्या) चांगल्या आशेसाठी फार उत्तम आहे.
آية رقم 47
४७. आणि ज्या दिवशी आम्ही पर्वतांना चालवू आणि जमिनीला तुम्ही आवरण नसलेल्या स्थितीत पाहाल, आणि समस्त लोकांना आम्ही एकत्र करू तेव्हा त्यांच्यापैकी कोणालाही बाकी सोडणार नाही.
آية رقم 48
४८. आणि सर्वच्या सर्व तुमच्या पालनकर्त्यासमोर रांगारांगांनी हजर केले जातील. निःसंशय तुम्ही आमच्यासमोर त्याच प्रकारे आले, ज्या प्रकारे आम्ही तुम्हाला पहिल्या खेपेस निर्माण केले होते. परंतु तुम्ही मात्र आशा भ्रमात राहिले की आम्ही कधी तुमच्यासाठी एखादा वायद्याचा दिवस निश्चित करणार नाही.
آية رقم 49
४९. आणि कर्म-लेख समोर ठेवले जातील, मग तुम्ही पाहाल की अपराधी त्यांच्या कर्मलेखापासून भयभीत होतील आणि म्हणतही असतील की अरेरे! आमचा विनाश! हा कसा लेख आहे, ज्याने कोणताही लहान-मोठा (गुन्हा) घेरल्याविना सोडले नाही, आणि त्यांनी जे कर्म केले होते, ते सर्व काही त्यांना दिसून येईल आणि तुमचा पालनकर्ता कोणावरही अत्याचार व अन्याय करणार नाही.
آية رقم 50
५०. आणि जेव्हा आम्ही फरिश्त्यांना आदेश दिला की आदमच्या पुढे सजदा करा, तेव्हा इब्लिस (सैताना) खेरीज सर्वांनी सजदा केला तो जिन्नांपैकी होता. त्याने आपल्या पालनकर्त्याच्या आदेशाची अवज्ञा केली. काय तरीही तुम्ही त्याला आणि त्याच्या संततीला, मला सोडून आपला मित्र बनवित आहात? वास्तविक तो तुम्हा सर्वांचा शत्रू आहे. अशा जुलमी लोकांचा किती वाईट मोबदला आहे.
آية رقم 51
५१. मी त्यांना आकाशांच्या आणि जमिनीच्या निर्मितीप्रसंगी हजर ठेवले नव्हते आणि ना स्वतः त्याच्या निर्मितीत आणि मी मार्गभ्रष्ट करणाऱ्यांना आपला सहाय्यक बनविणाराही नाही.
آية رقم 52
५२. आणि ज्या दिवशी तो म्हणेल की तुमच्या मते माझे जे साथीदार होते त्यांना हाक मारा, हे हाक मारतील, परंतु त्यांच्यापैकी कोणीही उत्तर देणार नाही आणि आम्ही त्यांच्या दरम्यान विनाशाचे साधन निर्माण करू.
آية رقم 53
५३. आणि अपराधी लोक जहन्नमला पाहून समजून घेतील की ते यातच जाणार आहेत, परंतु तिच्यापासून बचावाचे स्थान त्यांना कोठेही आढळणार नाही.
آية رقم 54
५४. आणि आम्ही या कुरआनात प्रत्येक प्रकारची सर्व उदाहरणे लोकांसाठी सांगितली आहेत, परंतु समस्त वस्तूंपेक्षा जास्त भांडखोर मनुष्य आहे.
آية رقم 55
५५. आणि लोकांजवळ मार्गदर्शन येऊन पोहोचल्यानंतर, त्यांना ईमान राखण्यापासून आणि आपल्या पालनकर्त्याजवळ क्षमा-याचना करण्यापासून केवळ याच गोष्टीने रोखले की पूर्वी होऊन गेलेल्या लोकांसारखा व्यवहार त्यांच्याशीही केला जावा किंवा त्यांच्यासमोर शिक्षा –यातना (अज़ाब) उघड स्वरूपात यावी.
آية رقم 56
५६. आणि आम्ही तर आपल्या पैगंबरांना केवळ अशासाठी पाठवितो की त्यांनी शुभ-समाचार द्यावा आणि लोकांना सचेत करावे. इन्कारी लोक असत्याला पुरावा बनवून विवाद घालू इच्छितात की याद्वारे सत्य डळमळीत करावे. ते माझ्या आयतींची आणि ज्या गोष्टीचे भय दाखविले जावे तिची थट्टा उडवितात.
آية رقم 57
५७. आणि त्याहून अधिक अत्याचारी कोण आहे, ज्याला त्याच्या पालनकर्त्याच्या आयतींद्वारे उपदेश केला जावा तरीही त्याने तोंड फिरवून राहावे आणि जे काही त्याच्या हातांनी पुढे पाठविले आहे, ते विसरून जावे. निःसंशय, आम्ही त्यांच्या हृदयांवर ते समजण्यापासून पडदे टाकून ठेवले आहेत, आणि त्यांच्या कानात बधीरता. तुम्ही त्यांना मार्गदर्शनाकडे कितीही बोलवा, परंतु मार्गदर्शन त्यांना कधीही लाभणार नाही.
آية رقم 58
५८. आणि तुमचा पालनकर्ता मोठा माफ करणारा आणि दया करणारा आहे. तो जर त्यांना त्यांच्या कर्मांची शिक्षा देण्यासाठी धरू इच्छिल तर निश्चितच त्यांना त्वरित शिक्षा देईल, परंतु त्यांच्यासाठी एक वायद्याची वेळ निर्धारीत आहे, ज्यापासून पळ काढण्याचे स्थान त्यांना कधीही लाभणार नाही.
آية رقم 59
५९. आणि या त्या वस्त्या आहेत, ज्यांना आम्ही त्यांच्या अत्याचारापायी नष्ट करून टाकले आणि त्यांच्या विनाशाची एक वेळ आम्ही निश्चित करून ठेवली होती.
آية رقم 60
६०. आणि जेव्हा मूसा आपल्या तरुणाला म्हणाले की मी तर चालतच राहीन येथेपर्यंत की दोन नद्यांच्या संगमाच्या ठिकाणी पोहोचेन, मग त्यासाठी मला वर्षानुवर्षे का चालावे लागेना.
آية رقم 61
६१. जेव्हा ते दोघे त्या ठिकाणी पोहोचले, जे दोन नद्यांचे संगमस्थान होते, तिथे आपली मासळी विसरले, जिने नदीत भुयारासारखा आपला मार्ग बनवून घेतला.
آية رقم 62
६२. जेव्हा ते दोघे तिथून निघून पुढे गेले तेव्हा मूसा आपल्या तरुणाला म्हणाले, आणा आमचा नाश्ता द्या. आम्हाला तर या प्रवासात खूपच त्रास घ्यावा लागला.
آية رقم 63
६३. (त्याने) उत्तर दिले की, काय तुम्ही पाहिले नाही? जेव्हा आम्ही दगडाला टेका लावून आराम करीत होतो, तिथेच मी ती मासळी विसरलो, वस्तुतः सैतानाने मला विसर पाडला की तुमच्याजवळ या गोष्टीची चर्चा करावी. त्या मासळीने मोठ्या चमत्कारिकरित्या नदीत आपला मार्ग बनवून घेतला.
آية رقم 64
६४. (मूसा) म्हणाले, हेच ते ठिकाण होते, ज्याच्या शोधात आम्ही होतो तेव्हा ते तिथूनच आपल्या पद-चिन्हांना शोधत परत फिरले.
آية رقم 65
६५. मग त्यांना आमच्या दासांपैकी एक दास भेटला, ज्याला आम्ही आपल्या जवळून विशेष दया-कृपा प्रदान केली होती आणि त्याला आपल्या जवळून खास ज्ञानही शिकविले होते.
آية رقم 66
६६. मूसा त्याला म्हणाले, आपण मला आज्ञा पाळेल की आपण मला ते सत्य ज्ञान शिकवावे, जे आपणास शिकविले गेले आहे.
آية رقم 67
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६७. तो म्हणाला, तुम्ही माझ्यासोबत धीर-संयम राखू शकत नाही.
آية رقم 68
६८. आणि ज्या गोष्टीला तुम्ही आपल्या ज्ञानकक्षेत घेतले नसेल त्यावर धीर-संयम कसे राखू शकता?
آية رقم 69
६९. मूसाने उत्तर दिले की अल्लाहने इच्छिल्यास मी तुम्हाला धीर-संयम राखणाऱ्यांपैकी आढळून येईल आणि कोणत्याही बाबतीत तुमची अवज्ञा करणार नाही.
آية رقم 70
७०. (तो) म्हणाला, जर तुम्ही माझ्यासोबतच चालण्याचा आग्रह धरता तर लक्षात ठेवा की कोणत्याही गोष्टीबाबत मला काही विचारु नका जोपर्यंत मी स्वतः त्याबाबत न सांगावे.
آية رقم 71
७१. मग ते दोघे तेथून निघाले, येथेपर्यंत की एका नौकेत बसले (खिज्रने) नौकेच्या फळ्या तोडल्या. (मूसा) म्हणाले, काय तुम्ही नौका तोडत आहात की नौकेत बसलेल्यांना बुडवून टाकावे? तुम्ही तर हे मोठे अनुचित काम केले.
آية رقم 72
७२. (ख्रिजने) उत्तर दिले की मी आधीच तुम्हाला बोललो होतो की तुम्ही माझ्यासोबत राहून धीर-संयम राखू शकणार नाही.
آية رقم 73
७३. (मूसा) म्हणाले की माझ्या या चुकीबद्दल मला धरू नका आणि माझ्या बाबतीत सक्तीने वागू नका.
آية رقم 74
७४. मग दोघे निघाले, येथेपर्यंत की त्यांना एक बालक दिसले, (खिज्रने) त्या बालकाला मारून टाकले. (मूसा) म्हणाले की, तुम्ही तर एका निरपराधाचा जीव घेतला. वास्तविक त्याने कोणाची हत्या केली नव्हती. निःसंशय, तुम्ही हे मोठे वाईट कृत्य केले.
آية رقم 75
७५. ते म्हणाले, काय मी तुम्हाला सांगितले नव्हते की तुम्ही माझ्यासोबत राहून कधीही धीर-संयम राखू शकत नाही.
آية رقم 76
७६. (मूसा यांनी) उत्तर दिले, आता जर यानंतर मी तुम्हाला एखाद्या गोष्टीबाबत काही विचारले तर बेलाशक तुम्ही मला आपल्यासोबत ठेवू नका, निःसंशय, माझ्यातर्फे तुम्ही सबबीस पोहचला आहात.
آية رقم 77
७७. पुन्हा दोघे निघाले, एका गावाच्या लोकांपर्यंत पोहोचले आणि त्यांच्याजवळ जेवण मागितले. त्यांनी त्यांचा पाहुणचार करण्यास नकार दिला. दोघांना त्या ठिकाणी एक भिंत आढळली, जी कोसळण्याच्या बेतात होती, त्याने तिला सरळ केले (मूसा) म्हणाले, जर तुम्ही इच्छिले असते तर या (कामा) बद्दल मजुरी घेतली असती.
آية رقم 78
७८. तो म्हणाला, आता मात्र माझ्या आणि तुझ्या दरम्यान वेगळे होण्याची वेळ आली आहे, तेव्हा मी तुला त्या गोष्टींची हकीकत सांगतो, ज्यावर तुम्ही धीर-संयम राखू शकले नाही.
آية رقم 79
७९. ती नौका काही काही गरीब लोकांची होती, जे नदीत काम करीत असत. मी तिच्यात काही तोडफोड करण्याचे ठरविले कारण पुढच्या इलाक्यात एक राजा होता, जो प्रत्येक चांगली नौका जबरदस्तीने (आपल्या ताब्यात) घेत असे.
آية رقم 80
८०. आणि त्या तरुणाचे आई-बाप ईमान राखणारे होते. आम्हाला ही भीती वाटली की कदाचित हा त्यांना आपल्या बंडखोरी आणि अधार्मिकतेने लाचार व व्याकूळ न करून टाको.
آية رقم 81
८१. म्हणून आम्ही इच्छिले की त्यांना त्यांचा पालनकर्ता (अल्लाह) त्याच्याऐवजी त्याहून उत्तम पवित्र आणि त्याच्यापेक्षा अधिक प्रिय आणि आवडता पुत्र प्रदान करो.
آية رقم 82
८२. आणि भिंतीचा किस्सा असा की त्या शहरात दोन अनाथ मुले आहेत, ज्यांचा खजिना (धन) त्यांच्या त्या भिंतीखाली गाडलेला आहे. त्यांचे पिता मोठे नेक सदाचारी होते. तेव्हा तुमचा पालनकर्ता इच्छित होता की या दोन्ही अनाथ मुलांनी आपल्या तरुण वयास पोहोचून आपला हा खजिना, तुमच्या पालनकर्त्याच्या दया-कृपेने आणि मेहरबानीने काढून घ्यावा. मी स्वतःच्या इराद्याने (आणि इच्छेने) कोणतेही काम केले नाही. ही हकीकत होती त्या घटनांची ज्यांच्याबाबत तुम्ही धीर-संयम राखू शकले नाहीत.
آية رقم 83
८३. आणि तुम्हाला जुल्करनैनच्या घटनेविषयी हे लोक विचारतात, (तुम्ही) सांगा की मी त्यांचा थोडासा वृत्तांत तुम्हाला वाचून ऐकवितो.
آية رقم 84
८४. आम्ही धरतीवर त्याला शक्ती-सामर्थ्य प्रदान केले होते, आणि त्याला प्रत्येक गोष्टीची साधनेही प्रदान केली होती.
آية رقم 85
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८५. तो एका मार्गामागे लागला.
آية رقم 86
८६. येथेपर्यंत की सूर्यास्ताच्या ठिकाणापर्यंत पोहोचला आणि त्याला (सूर्याला) एका दलदलीच्या प्रवाहात बुडताना पाहिले आणि त्या प्रवाहाच्या ठिकाणावर एक जनसमूहही आढळला. आम्ही सांगितले, हे जुल्करनैन! तू त्यांना शिक्षा दे किंवा त्यांच्या बाबतीत एखादा चांगला मार्ग काढ.
آية رقم 87
८७. तो म्हणाला, जो अत्याचार करेल, त्याला तर आम्हीही आता शिक्षा देऊ. मग तो आपल्या पालनकर्त्याकडे परतविला जाईल आणि तो त्याला सक्त सजा-यातना देईल.
آية رقم 88
८८. परंतु जो ईमान राखेल आणि सत्कर्म करेल तर त्याच्याकरिता मोबदल्यात भलाई आहे आणि त्याला आपल्या कामातही सोपेपणाचा आदेश देऊ.
آية رقم 89
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८९. मग तो दुसऱ्या एका मार्गास लागला.
آية رقم 90
९०. येथेपर्यंत की जेव्हा तो सूर्योदयाच्या ठिकाणापर्यंत पोहोचला तेव्हा सूर्याला एका अशा जनसमूहावर उगवताना पाहिले की त्यांच्याकरिता आम्ही त्यापासून कोणताही आडपडदा राखला नाही.
آية رقم 91
९१. घटना अशीच आहे, आम्ही त्याच्या जवळपासच्या समस्त खबरी घेरून ठेवल्या आहेत.१
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(१) अर्थात जुल्करनैनविषयी आम्ही जे सांगितले आहे ते अशाच प्रकारे आहे की प्रथम तो पश्चिमेच्या अंतिम सीमेपर्यंत, मग पूर्वेच्या अंतिम सीमेपर्यंत पोहोचले आणि आम्हाला त्याच्या सर्व प्रकारची पात्रता, साधन-सामुग्री आणि इतर गोष्टींचे पूर्ण ज्ञान आहे.
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(१) अर्थात जुल्करनैनविषयी आम्ही जे सांगितले आहे ते अशाच प्रकारे आहे की प्रथम तो पश्चिमेच्या अंतिम सीमेपर्यंत, मग पूर्वेच्या अंतिम सीमेपर्यंत पोहोचले आणि आम्हाला त्याच्या सर्व प्रकारची पात्रता, साधन-सामुग्री आणि इतर गोष्टींचे पूर्ण ज्ञान आहे.
آية رقم 92
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९२. मग तो दुसऱ्या एका मार्गाकडे निघाला.
آية رقم 93
९३. येथेपर्यंत की जेव्हा दोन भिंतींच्या दरम्यान पोहोचला, त्या दोघींच्या पलीकडे अशी जमात आढळली, जी गोष्ट समजून घेण्याच्या जवळही नव्हती.
آية رقم 94
९४. (त्यांनी) सांगितले हे जुल्करनैन! याजूज आणि माजूज या देशात मोठा उपद्रव व उत्पात पसरवित आहे. तर काय आम्ही तुमच्याकरिता काही धन जमा करून द्यावे (या अटीवर की) तुम्ही आमच्या आणि त्यांच्या दरम्यान एखादी भिंत बनवावी.
آية رقم 95
९५. त्याने उत्तर दिले की माझ्याजवळ, माझ्या पालनकर्त्याने जे प्रदान केले आहे, तेच उत्तम आहे. तुम्ही फक्त आपली शक्ती आणि सामर्थ्याने माझी मदत करा. तुमच्या आणि त्यांच्या दरम्यान मी भक्कम भिंत बनवून देतो.
آية رقم 96
९६. मला लोखंडाची चादर आणून द्या, येथेपर्यंत की जेव्हा त्या दोन पर्वतांच्या दरम्यान भिंत उभारून दिली तेव्हा आदेश दिला की फूंक मारा (अर्थात प्रखर आग प्रज्वलित करा) त्या वेळेपर्यंत की लोखंडाच्या या चादरींना अगदी आग करून टाकले, तेव्हा सांगितले, माझ्याजवळ आणा, याच्यावर वितळलेले तांबे टाकतो.
آية رقم 97
९७. मग ना तर त्यांच्यात त्या भिंतीवर चढण्यचाची शक्ती होती आणि ना तिच्यात एखादे छिद्र करू शकत होते.
آية رقم 98
९८. सांगितले की ही केवळ माझ्या पालनकर्त्याची दया-कृपा आहे, परंतु जेव्हा माझ्या पालनकर्त्याचा वायदा (आदेश) येईल तेव्हा त्याचे तुकडे तुकडे करून टाकेल. निःसंशय, माझ्या पालनकर्त्याचा वायदा सच्चा आहे.
آية رقم 99
९९. आणि त्या दिवशी आम्ही त्यांना आपसात एकमेकांशी मिसळत असताना सोडून देऊ आणि सूर (शंख) फूंकला जाईल, मग सर्वांना आम्ही एकाच वेळी जमा करू.
آية رقم 100
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१००. आणि त्या दिवशी आम्ही जहन्नमला (देखील) काफिरांच्या समोर आणून उभी करू.
آية رقم 101
१०१. ज्यांचे डोळे माझ्या स्मरणापासून पडद्यात होते आणि (सत्य) ऐकूही शकत नव्हते.
آية رقم 102
१०२. काय काफिर हा विचार करून बसले आहेत की माझ्याशिवाय ते माझ्या दासांना आपला समर्थक बनवून घेतील? (ऐका) आम्ही तर त्या काफिरांच्या पाहुणचारासाठी जहन्नम तयार करून ठेवली आहे.
آية رقم 103
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१०३. सांगा की (तुम्ही सांगत असाल) तर मी सांगतो की आपल्या कर्मांमुळे सर्वांत जास्त नुकसान उचलणारा कोण आहे?
آية رقم 104
१०४. ते लोक आहेत, ज्यांचे ऐहिक जीवनाचे सर्व प्रयत्न व्यर्थ ठरले, आणि ते याच भ्रमात राहिले की ते फार चांगले काम करीत आहेत.
آية رقم 105
१०५. हेच ते लोक होते, ज्यांनी आपल्या पालनकर्त्या (अल्लाह) च्या आयतींशी आणि त्याच्याशी भेट होण्याचा इन्कार केला, यास्तव त्यांची सर्व कर्मे वाया गेलीत. मग कयामतच्या दिवशी आम्ही त्यांचा कसलाही भार निश्चित करणार नाही.
آية رقم 106
१०६. वस्तुतः त्यांचा मोबदला जहन्नम आहे, कारण त्यांनी इन्कार केला आणि माझ्या आयतींची आणि माझ्या पैगंबरांची थट्टा उडविली.
آية رقم 107
१०७. ज्या लोकांनी ईमान राखले आणि सत्कर्म करीत राहिले, निश्चितच त्यांच्यासाठी फिर्दोस१ (जन्नतमधील सर्वोच्च स्थान) च्या बागांमध्ये स्वागत आहे.
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(१) ‘जन्नतुल फिरदौस’ जन्नतचा सर्वोच्च दर्जा आहे. यास्तव पैगंबर (स.) यांनी फर्माविले की जेव्हा देखील तुम्ही अल्लाहजवळ जन्नतची याचना कराल, तेव्हा अल फिर्दोसची याचना करा, कारण ते जन्नतचे सर्वोच्च स्थान आहे आणि तिथूनच जन्नतच्या नद्यांचा उगम आहे. (सहीह बुखारी, किताबुत्तौहिद, बाबुल व कान अर्शुहु अलल माए)
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(१) ‘जन्नतुल फिरदौस’ जन्नतचा सर्वोच्च दर्जा आहे. यास्तव पैगंबर (स.) यांनी फर्माविले की जेव्हा देखील तुम्ही अल्लाहजवळ जन्नतची याचना कराल, तेव्हा अल फिर्दोसची याचना करा, कारण ते जन्नतचे सर्वोच्च स्थान आहे आणि तिथूनच जन्नतच्या नद्यांचा उगम आहे. (सहीह बुखारी, किताबुत्तौहिद, बाबुल व कान अर्शुहु अलल माए)
آية رقم 108
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१०८. जिथे ते नेहमी राहतील, जे स्थान बदलण्याचा कधीही त्यांचा इरादा होणार नाही.
آية رقم 109
१०९. सांगा की जर माझ्या पालनकर्त्याच्या गोष्टी (प्रशंसा व गुणगान) लिहिण्याकरिता समुद्र शाई बनला तर तोही माझ्या पालनकर्त्याच्या गोष्टी संपण्यापूर्वीच संपून जाईल, मग वाटल्यास आम्ही त्यासारखाच दुसरा (समुद्र) त्याच्या मदतीकरिता घेऊन यावे.
آية رقم 110
११०. तुम्ही सांगा की मी तर तुमच्यासारखाच एक मनुष्य आहे (होय)माझ्याकडे वह्यी(प्रकाशना)केली जाते की सर्वांचा उपास्य केवळ एकच उपास्य आहे, तर ज्याला देखील आपल्या पालनकर्त्याशी भेटण्याची आशा असेल, त्याने सत्कर्म करीत राहिले पाहिजे, आणि आपल्या पालनकर्त्याच्या भक्ती-उपासनेत१ दुसऱ्या कोणालाही सहभागी करू नये.
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(१) सत्कर्म ते होय, जे पैगंबरांच्या आचरणशैलीनुसार असावे, अर्थात जो कोणी आपल्या पालनकर्त्या(अल्लाह) च्या भेटीचा पुरेपूर विश्वास बाळगत असेल त्याने प्रत्येक कर्म पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांच्या आचरणशैलीनुसार करावे, आणि दुसरे असे की अल्लाहच्या उपासनेत दुसऱ्या कोणालाही सहभागी ठरवू नये, यासाठी की धर्मात नवीन गोष्टी सामील करणे आणि मूर्तीपूजा करणे या दोन्ही गोष्टी कर्म वाया जाण्यास कारक ठरतात. सर्वश्रेष्ठ अल्लाह, या दोन्ही गोष्टींपासून प्रत्येक मुसलमानाचे रक्षण करो.
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(१) सत्कर्म ते होय, जे पैगंबरांच्या आचरणशैलीनुसार असावे, अर्थात जो कोणी आपल्या पालनकर्त्या(अल्लाह) च्या भेटीचा पुरेपूर विश्वास बाळगत असेल त्याने प्रत्येक कर्म पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांच्या आचरणशैलीनुसार करावे, आणि दुसरे असे की अल्लाहच्या उपासनेत दुसऱ्या कोणालाही सहभागी ठरवू नये, यासाठी की धर्मात नवीन गोष्टी सामील करणे आणि मूर्तीपूजा करणे या दोन्ही गोष्टी कर्म वाया जाण्यास कारक ठरतात. सर्वश्रेष्ठ अल्लाह, या दोन्ही गोष्टींपासून प्रत्येक मुसलमानाचे रक्षण करो.
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