ترجمة معاني سورة الصافات باللغة الماراتية من كتاب الترجمة الماراتية

محمد شفيع أنصاري

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الترجمة الماراتية

محمد شفيع أنصاري

الناشر

مؤسسة البر - مومباي

آية رقم 1
१. शपथ आहे पंक्तिबद्ध होणाऱ्यां (फरिश्त्यां) ची.
آية رقم 2
२. मग पूर्णतः दरडाविणाऱ्यांची.
آية رقم 3
३. मग अल्लाहचा पाठ करणाऱ्यांची.
آية رقم 4
४. निःसंशय, तुम्हा सर्वांचा उपास्य (माबूद) एकच आहे.
آية رقم 5
५. आकाशांच्या आणि धरतीच्या आणि त्यांच्या दरम्यानच्या सर्व वस्तूंचा आणि समस्त पूर्व दिशांचा तोच स्वामी आहे.
آية رقم 6
६. आम्ही जगाच्या (जवळ असलेल्या) आकाशाला तारकांनी सजविले आणि सुशोभित केले आहे.
آية رقم 7
७. आणि (आम्ही त्याचे) प्रत्येक विद्रोही सैतानापासून रक्षण केले आहे.
८. उच्च विश्वाच्या फरिश्त्यां (च्या गोष्टी) ऐकण्याकरिता ते कानही लावू शकत नाही, किंबहुना चोहीकडून त्यांच्यावर मारा होत असतो.
آية رقم 9
९. पिटाळून लावण्याकरिता आणि त्यांच्या साठी कायमस्वरूपी अज़ाब (शिक्षा - यातना) आहे.
آية رقم 10
१०. परंतु जो घाईगर्दीने एखादी गोष्टी हिसकावून पळेल तर (तत्क्षणी) एक धगधगता निखारा त्याच्या पाठीशी लागतो.
११. या काफिर लोकांना विचारा की त्यांना निर्माण करणे जास्त कठीण आहे की ज्यांना आम्ही निर्माण केले आहे? आम्ही तर मानवांना चिकण मातीपासून निर्माण केले आहे.
آية رقم 12
१२. किंबहुना तुम्ही आश्चर्य व्यक्त करत आहात आणि हे लोक थट्टा उडवित आहेत.
آية رقم 13
१३. आणि जेव्हा त्यांना उपदेश केला जातो तेव्हा ते मानत नाहीत.
آية رقم 14
१४. आणि जेव्हा एखादा ईश-चमत्कार (मोजिजा) पाहतात तेव्हा ते थट्टा उडवितात.
آية رقم 15
१५. आणि म्हणतात की ही तर पूर्णपणे उघड जादू आहे.
آية رقم 16
१६. काय जेव्हा आम्ही मरण पावणार आणि माती व हाडे होऊन जाऊ, मग काय (खरोखर) आम्ही जिवंत केले जाऊ?
آية رقم 17
१७. आणि आमच्यापूर्वी होऊन गेलेले वाडवडीलही?
آية رقم 18
१८. (तुम्ही) उत्तर द्या की होय, आणि तुम्ही अपमानितही व्हाल.
آية رقم 19
१९. ती तर केवळ एक जोरदार दटावणी असेल की ते अचानक पाहू लागतील.
آية رقم 20
२०. आणि म्हणतील की, अरेरे आमचा विनाश, हाच मोबदल्याचा दिवस आहे.
آية رقم 21
२१. हाच तो फैसल्याचा (निर्णयाचा) दिवस, ज्याला तुम्ही खोटे ठरवित राहिलात.
آية رقم 22
२२. अत्याचारींना आणि त्यांच्या साथीदारांना आणि ज्यांची ज्यांची ते (अल्लाहखेरीज) उपासना करीत होते.
آية رقم 23
२३. (त्या सर्वांना) एकत्र करून, त्यांना जहन्नमचा मार्ग दाखवा.
آية رقم 24
२४. आणि त्यांना थांबवून घ्या (यासाठी) की त्यांना आवश्यक प्रश्न विचारले जाणार आहेत.
آية رقم 25
२५. (या वेळी) तुम्ही एकमेकांची मदत करीत नाहीत, याला कारण काय?
آية رقم 26
२६. किंबहुना ते (सर्वजण) आज आज्ञाधारक बनले आहेत.
آية رقم 27
२७. आणि ते एकमेकांना संबोधून प्रश्नोत्तर करू लागतील.
آية رقم 28
२८. म्हणतील की तुम्ही तर आमच्याजवळ आमच्या उजव्या बाजूने येत असत.
آية رقم 29
२९. ते उत्तर देतील की नव्हे, उलट तुम्हीच ईमान राखणारे नव्हते.
३०. आणि आमच्या तुमच्यावर काहीच जोर नव्हता, किंबहुना तुम्ही तर (स्वतः) विद्रोही लोक होते.
آية رقم 31
३१. आता आम्हा (सर्वां) वर आमच्या पालनकर्त्याचे हे फर्मान लागू झालेच आहे की आम्ही (शिक्षा-यातनाची) गोडी चाखणार आहोत.
آية رقم 32
३२. तेव्हा आम्ही तुम्हाला पथभ्रष्ट केले, आम्ही तर स्वतःदेखील पथभ्रष्टतेत होतो.
آية رقم 33
३३. तेव्हा आजच्या दिवशी (सर्वच) शिक्षा यातनेचे वाटेकरी आहेत.
آية رقم 34
३४. आम्ही अपराधी लोकांशी असाच (व्यवहार) करतो.
३५. हे असे (लोक) आहेत की जेव्हा त्यांना सांगितले जाते की अल्लाहखेरीज कोणीही उपास्य नाही, तेव्हा हे घमेंड करीत असत.
آية رقم 36
३६. आणि म्हणत की काय आम्ही आपल्या दैवतांना एका वेड्या कवीच्या बोलण्यावरून सोडून द्यावे!
آية رقم 37
३७. (नाही मुळीच नाही) किंबहुना पैगंबर तर सत्य (सच्चा दीन धर्म) घेऊन आले आहेत आणि सर्व पैगंबरांना खरे जाणतात.
آية رقم 38
३८. निःसंशय, तुम्ही दुःखदायक शिक्षा-यातनां (ची गोडी) चाखणार आहात.
آية رقم 39
३९. आणि तुम्हाला त्याचाच मोबदला दिला जाईल, जे तुम्ही करीत होते.
آية رقم 40
४०. तथापि अल्लाहचे सच्चे, प्रामाणिक दास!
آية رقم 41
४१. त्यांच्याचकरिता निर्धारित आजिविका (रोजी) आहे.
آية رقم 42
४२. (प्रत्येक प्रकारचे) मेवे आणि ते सन्मानित आदरणीय असतील.
آية رقم 43
४३. सुखांनी भरलेल्या जन्नतीमध्ये.
آية رقم 44
४४. आसनांवर एकमेकांच्या समोर बसले असतील.
آية رقم 45
४५. प्रवाहित (वाहत्या) मद्याचे प्याले त्यांच्या दरम्यान फिरत असतील.
آية رقم 46
४६. जे स्वच्छ सफेद आणि प्यायला स्वादिष्ट असेल.
آية رقم 47
४७. ना त्याद्वारे डोकेदुखी होईल आणि ना ते प्यायल्याने बहकतील.
آية رقم 48
४८. आणि त्यांच्याजवळ नजर खाली ठेवणाऱ्या आणि मोठमोठे सुंदर नेत्र असणाऱ्या (हूर-पऱ्या) असतील.
آية رقم 49
४९. अशा की जणू लपवून ठेवलेली अंडी!
آية رقم 50
५०. (जन्नतचे लोक) एकमेकांकडे तोंड करून विचारतील.
آية رقم 51
५१. त्यांच्यापैकी एक सांगणारा सांगेल की माझा एक जवळचा (सोबती) होता.
آية رقم 52
५२. जो (मला) सांगत असे की काय तू (कयामतच्या येण्याचा) विश्वास राखणाऱ्यांपैकी आहेस?
آية رقم 53
५३. काय जेव्हा आम्ही मेल्यावर माती आणि हाडे होऊन जाऊ, काय त्या वेळी आम्हाला (कृत कर्मांचा) मोबदला दिला जाईल?
آية رقم 54
५४. सांगितले जाईल, तुम्ही इच्छिता की डोकावून पाहावे?
آية رقم 55
५५. डोकावून पाहताच त्याला जहन्नममध्ये मध्यभागी (जळताना) दिसेल.
آية رقم 56
५६. तो म्हणेल, अल्लाहची शपथ! तू तर माझाही सर्वनाश करण्याच्या जवळ होता.
آية رقم 57
५७. जर माझ्यावर माझ्या पालनकर्त्याची कृपा नसती तर मी देखील जहन्नममध्ये हजर केल्या जाणाऱ्यांपैकी असतो.
آية رقم 58
५८. काय (हे उचित आहे की) आम्ही मरण पावणारच नाहीत?
آية رقم 59
५९. पहिल्या एका मृत्युखेरीज, आणि ना आम्हाला अज़ाब (शिक्षा - यातना) दिला जाईल.
آية رقم 60
६०. मग तर (स्पष्ट आहे की) ही फार मोठी सफलता आहे.
آية رقم 61
६१. अशी (सफलता) प्राप्त करण्यासाठी आचरण करणाऱ्यांनी आचरण केले पाहिजे.
آية رقم 62
६२. काय हे आतिथ्य अधिक चांगले आहे की जक्कूमचे झाड?
آية رقم 63
६३. ज्याला आम्ही अत्याचारी लोकांकरिता कठीण कसोटी बनविले आहे.
آية رقم 64
६४. निःसंशय, ते झाड जहन्नमच्या तळापासून निघते.
آية رقم 65
६५. ज्याचे घोंस (गुच्छे) सैतानाच्या डोक्यांसारखे असतात.
آية رقم 66
६६. जहन्नमवासी याच झाडाला खातील आणि याच्याचद्वारे पोट भरतील.
آية رقم 67
६७. मग त्यावर उकळते पाणी प्यावे लागले.
آية رقم 68
६८. मग त्या सर्वांचे परतणे जहन्नमच्या (आगी) कडेच असेल.
آية رقم 69
६९. विश्वास करा की त्यांना आपले वाडवडील पथभ्रष्ट (असल्याचे) आढळले.
آية رقم 70
७०. आणि हे त्यांच्याच पदचिन्हांवर धावत जात राहिले.
آية رقم 71
७१. आणि त्यांच्यापूर्वी होऊन गेलेले अनेक लोक मार्गभ्रष्ट झाले आहेत.
آية رقم 72
७२. आणि ज्यांच्यात आम्ही खबरदार करणारे रसूल (पैगंबर) पाठविले होते.
آية رقم 73
७३. आता तुम्ही पाहा की ज्यांना (अल्लाहच्या अज़ाबचे) भय दाखविले गेले होते, त्यांचा शेवट कसा झाला.
آية رقم 74
७४. अल्लाहच्या सच्चा प्रामाणिक दासांखेरीज.
آية رقم 75
७५. आम्हाला नूहने पुकारले तर पाहा की आम्ही किती चांगले दुआ (प्रार्थना) कबूल करणारे आहोत.
آية رقم 76
७६. आणि आम्ही त्यांना आणि त्यांच्या कुटुंबियांना त्या घोर संकटापासून वाचविले.
آية رقم 77
७७. आणि त्याच्या संततीला आम्ही बाकी राहणारी बनविले.
آية رقم 78
७८. आणि आम्ही त्याचे स्मरण (चर्चा) नंतरच्या लोकांमध्ये बाकी ठेवले.
آية رقم 79
७९. नूह (अले.) वर साऱ्या जगात सलाम असो.
آية رقم 80
८०. आम्ही सत्कर्म करणाऱ्यांना अशाच प्रकारे मोबदला प्रदान करतो.
آية رقم 81
८१. निःसंशय, तो आमच्या ईमान बाळगणाऱ्या दासांपैकी होता.
آية رقم 82
८२. मग इतर लोकांना आम्ही बुडवून टाकले.
آية رقم 83
८३. आणि त्याच्या (नूहच्या) मागे येणाऱ्यांपैकीच इब्राहीमही होते.
آية رقم 84
८४. जेव्हा ते आपल्या पालनकर्त्याजवळ शुद्ध (निर्दोष) अंतःकरणासह आले.
آية رقم 85
८५. ते आपल्या पित्यास आणि आपल्या जनसमूहाच्या लोकांना म्हणाले की तुम्ही कशाची भक्ती आराधना करीत आहात?
آية رقم 86
८६. काय तुम्ही अल्लाहखेरीज मनाने रचलेली उपास्ये इच्छिता?
آية رقم 87
८७. तर मग (सांगा की) तुम्ही सर्व विश्वांच्या पालनकर्त्याला काय समजून घेतले आहे?
آية رقم 88
८८. आता (इब्राहीमने) एक नजर ताऱ्यांवर टाकली.
آية رقم 89
८९. आणि म्हणाले की मी तर आजारी आहे.
آية رقم 90
९०. यावर सर्वजण त्याच्यापासून तोंड फिरवित परत चालले गेले.
آية رقم 91
९१. ते (इब्राहीम) हळूच त्यांच्या उपास्यां (देवतां) जवळ गेले आणि म्हणाले, तुम्ही खात का नाहीत?
آية رقم 92
९२. तुम्हाला झालं तरी काय की तुम्ही बोलत सुद्धा नाहीत!
آية رقم 93
९३. मग तर (पूर्ण शक्तीने) उजव्या हाताने त्यांना मारण्यास तुटून पडले.
آية رقم 94
९४. ते (अनेकेश्वरवादी) धावत पळत त्यांच्याकडे आले.
آية رقم 95
९५. तेव्हा ते (इब्राहीम) म्हणाले की तुम्ही अशांची पूजा करता, ज्यांना तुम्ही स्वतः बनविता.
آية رقم 96
९६. वास्तविक तुम्हाला आणि तुम्ही बनविलेल्या वस्तूंना अल्लाहनेच निर्माण केले आहे.
آية رقم 97
९७. ते (लोक) म्हणाले, याच्यासाठी एक घर (अग्निकुंड) तयार करा आणि त्या (धगधगत्या) आगीत याला टाकून द्या.
آية رقم 98
९८. त्यांनी तर त्याच्या (इब्राहीम) शी डाव खेळी इच्छिले, परंतु आम्ही त्यांनाच तोंडघशी पाडले.
آية رقم 99
९९. आणि (इब्राहीम) म्हणाले की मी तर (हिजरत- देशत्याग) करून आपल्या पालनर्त्याकडे जाणार आहे, तो निश्चितच मला मार्ग दाखविल.
آية رقم 100
१००. हे माझ्या पालनकर्त्या! मला नेक सदाचारी पुत्र प्रदान कर.
آية رقم 101
१०१. तेव्हा आम्ही त्याला एक सहनशील पुत्र (प्राप्ती) ची शुभवार्ता दिली.
१०२. मग तेव्हा (बालक) या वयास पोहचले की त्याच्यासोबत हिंडू फिरू शकेल, तेव्हा (इब्राहीम) म्हणाले, हे माझ्या प्रिय पुत्रा! मी स्वप्नात स्वतःला तुझे बलिदान (कुर्बानी) करताना पाहत आहे. आता तूच सांग, तुझा काय विचार आहे?१ पुत्राने उत्तर दिले, हे पिता! जो आदेश (अल्लाहतर्फे) दिला जात आहे, त्याचे पालन करा. अल्लाहने इच्छिले तर मी तुम्हाला धीर-संयम राखणाऱ्यांपैकी आढळेल.
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(१) पैगंबराचे स्वप्न, अल्लाहच्या वहयी आणि आदेशाने असते, या अनुषंगाने ते अमलात आणणे आवश्यक ठरते. पुत्राशी विचारणा करून, सल्ला घेण्याचा आदेश हे जाणून घ्यायचे होते की पुत्र देखील अल्लाहच्या आदेशाचे पालन करण्याकरिता कितपत तयार आहे.
آية رقم 103
१०३. अर्थात जेव्हा दोघांनी स्वीकार केला आणि त्या (पित्या) ने त्या (पुत्रा) ला माथा टेकलेल्या अवस्थेत खाली पाडले.
آية رقم 104
१०४. तेव्हा आम्ही हाक मारली, हे इब्राहीम!
آية رقم 105
१०५. निःसंशय, तुम्ही स्वप्नाला खरे करून दाखविले. निःसंशय, आम्ही भलाई करणाऱ्यांना अशाच प्रकारे मोबदला प्रदान करतो.
آية رقم 106
१०६. वास्तविक ही उघड अशी कसोटी होती.
آية رقم 107
१०७. आणि आम्ही एक मोठा जबीहा (बळी), त्याच्या फिदिया (मुक्तीधन) स्वरूपात दिला.२
____________________
(२) हा मोठा बळी एक मेंढा होता, ज्याला अल्लाहने जन्नतमधून हजरत जिब्रील यांच्याद्वारे पाठविले (इब्ने कसीर), त्याला इस्माईलच्या जागी बळी दिले गेले आणि मग इब्राहीमी सुन्नत (स्मरणिका) ला कयामतपावेतो अल्लाहचे सान्निध्य आणि ईदे अज्हा (बकरा ईद) चे सर्वोत्तम आचरण बनविले गेले.
آية رقم 108
१०८. आणि आम्ही त्यांची शुभ चर्चा नंतरच्या लोकांमध्ये बाकी ठेवली.
آية رقم 109
१०९. इब्राहीमवर सलाम असो.
آية رقم 110
११०. आम्ही सत्कर्म करणाऱ्यांना अशाच प्रकारे मोबदला प्रदान करतो.
آية رقم 111
१११. निश्चितच तो आमच्या ईमान बाळगणाऱ्या दासांपैकी होता.
آية رقم 112
११२. आणि आम्ही त्याला पैगंबर इसहाकचा शुभ समाचार दिला, जो नेक सदाचारी लोकांपैकी असेल.
११३. आणि आम्ही इब्राहीम व इसहाकवर अनेक (प्रकारची) समृद्धी अवतरित केली आणि या दोघांच्या संततीत काही तर भाग्यशाली आहेत आणि काही आपल्या प्राणांवर उघड अत्याचार करतात.
آية رقم 114
११४. आणि निश्चितच आम्ही मूसा आणि हारूनवर मोठा उपकार केला.
آية رقم 115
११५. आणि त्यांची आणि त्यांच्या जनसमूहाची फार मोठ्या दुःख-यातनेतून सुटका केली.
آية رقم 116
११६. आणि त्यांची मदत केली, तेव्हा तेच वर्चस्वशाली (विजयी) राहिले.
آية رقم 117
११७. आणि आम्ही त्यांना (स्पष्ट आणि) दिव्य ग्रंथ प्रदान केला.
آية رقم 118
११८. आणि त्या दोघांना सरळ मार्गावर स्थिर (बाकी) ठेवले.
آية رقم 119
११९. आणि आम्ही त्या दोघांकरिता नंतर येणाऱ्यांमध्ये ही गोष्ट बाकी ठेवली.
آية رقم 120
१२०. मूसा आणि हारूनवर सलाम असोे.
آية رقم 121
१२१. निःसंशय, आम्ही सत्कर्म करणाऱ्यांना अशाच प्रकारे मोबदला प्रदान करीत असतो.
آية رقم 122
१२२. निःसंशय, हे दोघे आमच्या ईमानधारक दासांपैकी होते.
آية رقم 123
१२३. आणि निःसंशय, इलियास देखील पैगंबरांपैकी होते.
آية رقم 124
१२४. जेव्हा ते आपल्या जनसमूहाच्या लोकांना म्हणाले, तुम्ही अल्लाहचे भय नाही बाळगत.
آية رقم 125
१२५. काय तुम्ही (वअ्‌ल) नावाच्या मूर्तीला पुकारता आणि सर्वांत उत्तम अशा निर्माणकर्त्याला सोडून देता?
آية رقم 126
१२६. अल्लाह, जो तुमचा आणि तुमच्यापूर्वी होऊन गेलेल्या सर्व वाडवडिलांचा स्वामी व पालनकर्ता आहे.
آية رقم 127
१२७. परंतु जनसमूहाच्या लोकांनी त्यांना खोटे ठरविले, तेव्हा ते अवश्य (शिक्षा - यातनाग्रस्त अवस्थेत) हजर केले जातील.
آية رقم 128
१२८. मात्र अल्लाहच्या सच्चा प्रामाणिक दासांखेरीज.
آية رقم 129
१२९. आणि आम्ही (इलियासची) शुभा चर्चा नंतरच्या लोकांमध्ये बाकी ठेवली.
آية رقم 130
१३०. इलियासवर सलाम असो.
آية رقم 131
१३१. आम्ही सत्कर्म करणाऱ्यांना अशाच प्रकारे मोबदला प्रदान करतो.
آية رقم 132
१३२. निःसंशय, तो आमच्या ईमानधारक दासांपैकी होता.१
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(१) अंतिम आकाशिय ग्रंथ कुरआनने पैगंबरांची चर्चा करून त्यांच्या संदर्भात अधिकांश ठिकाणी हे शब्द वापरले आहेत की ते आमच्या ईमानधारक दासांपैकी होते. याचे दोन अर्थ आहेत, त्यांचे चारित्र्य आणि आचरणाची श्रेष्ठता दर्शविणे, जो ईमानचा आवश्यक भाग आहे, यासाठी की लोकांचे खंडन व्हावे, जे बहुतेक पैगंबरांविषयी नैतिक गोष सिद्ध करतात. उदा. तौरात आणि इंजीलच्या आजच्या प्रतींमध्ये अनेक पैगंबरांविषयी अशा मनोरचित कहाण्या सामील आहेत. दुसरा हेतु त्या लोकांचे खंडन, जे काही पैगंबरांसबंधी अतिशयोक्ती करून त्यांच्या अंगी ईश्वरी गुण व सत्ताधिकार असल्याचे सिद्ध करतात. अर्थात ते पैगंबर जरूर होते, परंतु शेवटी अल्लाहचे दासच होते. स्वतः अल्लाह किंवा त्याचा अंश अथवा सहभागी मुळीच नव्हते.
آية رقم 133
१३३. निःसंशय, लूत (अलै.) पैगंबरांपैकी होते.
آية رقم 134
१३४. आम्ही त्यांना आणि त्यांच्या कुटुंबियांना, सर्वांना मुक्ती प्रदान केली.
آية رقم 135
१३५. मात्र त्या म्हातारीखेरीज, जी मागे राहणाऱ्यांमध्ये राहिली.
آية رقم 136
१३६. मग आम्ही इतर सर्वांचा सर्वनाश केला.
آية رقم 137
१३७. आणि तुम्ही तर सकाळ झाल्यावर त्यांच्या वस्त्यांवरून जाता.
آية رقم 138
१३८. आणि रात्री देखील, मग काय तरीही समजून घेत नाही?
آية رقم 139
१३९. आणि निःसंशय, यूनुस देखील पैगंबरांपैकी होते.
آية رقم 140
१४०. जेव्हा ते पळून जाऊन भरेलल्या नौकेजवळ पोहोचले.
آية رقم 141
१४१. मग (फासा टाकून) नाव काढले गेले, तेव्हा हे पराभूत झाले.
آية رقم 142
१४२. मग त्यांना माशाने गिळून टाकले आणि ते स्वतःचाच धिःक्कार करू लागले.
آية رقم 143
१४३. तेव्हा जर ते तस्बीह (अल्लाहचे गुणगान) करणाऱ्यांपैकी नसते.
آية رقم 144
१४४. तर लोकांना उठविले जाण्याच्या दिवसापर्यंत माशाच्या पोटातच राहिले असते.
آية رقم 145
१४५. तर आम्ही त्याला सपाट मैदानात टाकून दिले, आणि त्या वेळी तो आजारी होता.
آية رقم 146
१४६. आणि त्याच्यावर सावली करणारे एक वेलीचे झाड उगविले.
آية رقم 147
१४७. आणि आम्ही त्यांना एक लाख, किंबहुना त्याहून जास्त लोकांकडे पाठविले.
آية رقم 148
१४८. तेव्हा त्यांनी ईमान राखले आणि आम्ही एका ठराविक मुदतपर्यंत त्यांना सुख सुविधा प्रदान केली.
آية رقم 149
१४९. त्यांना जरा विचारा की, काय तुमच्या पालनकर्त्याच्या तर मुली (कन्या) आहेत आणि त्यांच्यासाठी पुत्र आहेत?
آية رقم 150
१५०. किंवा हे त्या वेळी हजर होते, जेव्हा आम्ही फरिश्त्यांना स्त्रिया बनवून निर्माण केले?
آية رقم 151
१५१. खबरदार राहा की हे लोक आपल्या मनाने रचलेल्या गोष्टी बोलत आहेत.
آية رقم 152
१५२. की अल्लाहला संतान (मुले बाळे) आहेत, निःसंशय, हे अगदी खोटारडे आहेत.
آية رقم 153
१५३. काय अल्लाहने स्वतःकरिता कन्यांना पुत्रांवर प्राधान्य दिले?
آية رقم 154
१५४. तुम्हाला झाले तरी काय, कसा हुकूम लावत फिरता?
آية رقم 155
१५५. काय तुम्हाला एवढेही समजत नाही?
آية رقم 156
१५६. किंवा तुमच्याजवळ (त्याविषयी) एखादे स्पष्ट प्रमाण आहे?
آية رقم 157
१५७. तर मग जा, सच्चे असाल तर आपलाच ग्रंथ घेऊन या.
१५८. आणि त्या लोकांनी तर अल्लाह आणि जिन्नांच्या दरम्यानही नाते कायम केले आहे, आणि वास्तविक जिन्न लोक स्वतः हे ज्ञान बाळगतात की ते (अशी श्रद्धा राखणारे अज़ाबच्या समोर) प्रस्तुत केले जातील.
آية رقم 159
१५९. हे, जे काही (अल्लाहविषयी) सांगत आहेत, त्यापासून सर्वश्रेष्ठ अल्लाह पवित्र (अलिप्त) आहे.
آية رقم 160
१६०. मात्र अल्लाहच्या सच्चा प्रामाणिक दासांखेरीज.
آية رقم 161
१६१. विश्वास करा की तुम्ही सर्व आणि तुमची (खोटी) उपास्ये.
آية رقم 162
१६२. कोणा एकालाही बहकवू शकत नाही.
آية رقم 163
१६३. मात्र त्यांच्याखेरीज, जे जहन्नममध्ये जाणारच आहेत.
آية رقم 164
१६४. (फरिश्त्यांचे कथन आहे) की आमच्यापैकी प्रत्येकाचे स्थान निर्धारित आहे.
آية رقم 165
१६५. आणि आम्ही (अल्लाहच्या आज्ञापालनात) पंक्तिबद्ध (रांगांनी) उभे आहोत.
آية رقم 166
१६६. आणि त्याची तस्बीह (पावित्र्यगान) करीत आहोत.
آية رقم 167
१६७. आणि काफिर तर म्हणत असत
آية رقم 168
१६८. की जर आमच्याजवळ पूर्वीच्या लोकांची स्मृती असती
آية رقم 169
१६९. तर आम्ही देखील अल्लाहचे निवडक दास बनलो असतो.
آية رقم 170
१७०. परंतु मग त्यांनी या (कुरआना) चा इन्कार केला, तेव्हा त्यांना लवकरच कळून येईल.
آية رقم 171
१७१. आणि निःसंशय, आमचा वायदा आधीच आपल्या पैगंबरांकरिता लागू झालेला आहे
آية رقم 172
१७२. की निःसंशय, त्याच लोकांची मदत केली जाईल.
آية رقم 173
१७३. आणि आमचे सैन्य वर्चस्वशाली (आणि श्रेष्ठतम) राहील.
آية رقم 174
१७४. आता तुम्ही काही दिवसा पर्यंत यांच्याकडून तोंड फिरवून घ्या.
آية رقم 175
१७५. आणि त्यांना पाहत राहा, आणि ते देखील लवकरच पाहतील.
آية رقم 176
१७६. काय हे आमच्या (शिक्षा-यातनांकरिता घाई माजवित आहेत.
آية رقم 177
१७७. (ऐका!) जेव्हा आमचा अज़ाब (शिक्षा यातना) त्यांच्या मैदानांमध्ये येईल, त्या वेळी त्यांची, ज्यांना सावध केले गेले होते, फार वाईट सकाळ असेल.
آية رقم 178
१७८. आणि तुम्ही काही काळापर्यंत त्यांच्याकडून ध्यान हटवा.
آية رقم 179
१७९. आणि पाहात राहा, हे सुद्धा लवकरच पाहतील.
آية رقم 180
१८०. पवित्र आहे तुमचा पालनकर्ता, जो मोठा प्रतिष्ठा बाळगणारा आहे, त्या प्रत्येक गोष्टीहून जी (अनेकेश्वरवादी) बोलत असतात.
آية رقم 181
१८१. आणि पैगंबरांवर सलाम आहे.
آية رقم 182
१८२. आणि समस्त प्रशंसा, सर्व विश्वांच्या पालनकर्त्या अल्लाहकरिता आहे.
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