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ترجمة معاني القرآن الكريم - عادل صلاحي
عادل صلاحي
ﰡ
آية رقم 1
ﭑﭒﭓ
ﭔ
१. निःसंशय, ईमान राखणाऱ्यांनी सफलता प्राप्त केली.
آية رقم 2
ﭕﭖﭗﭘﭙ
ﭚ
२. जे आपल्या नमाजमध्ये विनम्रता अंगिकारतात.
آية رقم 3
ﭛﭜﭝﭞﭟ
ﭠ
३. जे निरर्थक गोष्टींपासून तोंड फिरवतात.
آية رقم 4
ﭡﭢﭣﭤ
ﭥ
४. जे जकात (धर्मदान) अदा करणारे आहेत.
آية رقم 5
ﭦﭧﭨﭩ
ﭪ
५. जे अपल्या लज्जास्थानांचे (गुप्तांगांचे) संरक्षण करणारे आहेत.
آية رقم 6
६. आपल्या पत्न्या आणि स्वामित्वात असलेल्या दासींखेरीज. निःसंशय यांच्याबाबतीत त्यांच्यावर कसलाही दोष नाही.
آية رقم 7
७. मात्र याच्याखेरीज जो इतर शोधील तर तेच मर्यादेचे उल्लंघन करणारे आहेत.
آية رقم 8
ﭾﭿﮀﮁﮂ
ﮃ
८. जे आपल्या अमानतीची आणि वायद्याची रक्षा करणारे आहेत.
آية رقم 9
ﮄﮅﮆﮇﮈ
ﮉ
९. जे आपल्या नामाजांचे संरक्षण करतात.
آية رقم 10
ﮊﮋﮌ
ﮍ
१०. हेच लोक उत्तराधिकारी आहेत.
آية رقم 11
ﮎﮏﮐﮑﮒﮓ
ﮔ
११. जे फिर्दोस (जन्नतच्या सर्वोच्च दर्जा) चे वारस होतील, जिथे सदैव राहतील.
آية رقم 12
१२. आणि निःसंशय आम्ही मानवाला खणखणणाऱ्या मातीच्या सत्वापासून निर्माण केले.
آية رقم 13
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ﮣ
१३. मग त्याला वीर्य बनवून सुरिक्षत स्थानी ठेवले.
آية رقم 14
१४. मग वीर्याला आम्ही जमलेल्या रक्ताचे स्वरूप दिले, मग त्या रक्ताच्या गोळ्याला मांसाचा तुकडा बनिवले, मग मांसाच्या तुकड्यात हाडे बनिवली, मग हाडांवर मांस जढविले, मग एका दुसऱ्या स्वरूपात त्याला निर्माण केले. तेव्हा मोठा समृद्धशाली आहे तो अल्लाह जो सर्वोत्तम निर्मिती करणारा आहे.
آية رقم 15
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ﯡ
१५. यानंतर तुम्ही सर्वच्या सर्व निश्चित मरण पावणार आहात.
آية رقم 16
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ﯧ
१६. मग कयामतच्या दिवशी, अवश्य तुम्ही सर्व उठविले जाल.
آية رقم 17
१७. आणि आम्ही तुमच्यावर सात आकाश बनविले आहेत आणि आम्ही आपल्या निर्मितीपासून गाफील नाहीत.
آية رقم 18
१८. आणि आम्ही एका उचित प्रमाणात आकाशातून पाणी वर्षवितो, मग त्याला जमिनीवर संचयित करतो आणि आम्ही ते घेऊन जाण्यास खात्रीने समर्थ आहोत.
آية رقم 19
१९. याच पाण्याद्वारे आम्ही तुमच्यासाठी खजूर आणि द्राक्षांच्या बागा निर्माण करतो. त्यात तुमच्याकरिता अनेक फळे आहेत, त्यातून तुम्ही खाता.
آية رقم 20
२०. आणि ते झाड जे सैना नावाच्या पर्वतावर उगते, ज्यातून तेल निघते, आणि खाणाऱ्यांसाठी रस्सा (कालवण).
آية رقم 21
२१. तुमच्यासाठी चार पायांच्या गुरांमध्येही मोठा बोध आहे. त्यांच्या उदरांपासून आम्ही तुम्हाला (दूध) पाजतो आणि इतरही अनेक फायदे तुमच्यासाठी त्यांच्यात आहेत, त्यांच्यापैकी काहींना तुम्ही खातादेखील.
آية رقم 22
ﮉﮊﮋﮌ
ﮍ
२२. आणि त्यांच्यावर आणि नौकांवर स्वार केले जातात.
آية رقم 23
२३. निःसंशय आम्ही नूहला त्याच्या जनसमूहाकडे (रसूल बनवून) पाठविले. नूह म्हणाले, हे माझ्या जनसमूहाच्या लोकांनो! अल्लाहची उपासना करा आणि त्याच्याखेरीज तुमचा कोणीही उपास्य नाही. काय तुम्ही अल्लाहचे भय नाही बाळगत?
آية رقم 24
२४. त्यांच्या समाजाच्या काफीर सरदारांनी स्पष्ट सांगितले की हा तर तुमच्यासारखाच मनुष्य आहे. हा तुमच्यावर श्रेष्ठत्व (आणि वर्चस्व) प्राप्त करू इच्छितो. जर अल्लाहनेच इच्छिले असते तर एखाद्या फरिश्त्याला अवतरित केले असते. आम्ही तर याबाबत आपल्या पूर्वजांच्या काळात ऐकलेही नाही.
آية رقم 25
२५. निःसंशय, या माणसाला वेड लागले आहे, तेव्हा तुम्ही त्याला एका निर्धारित वेळपर्यंत सूट (ढील) द्या.
آية رقم 26
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ﯬ
२६. नूह यांनी दुआ (प्रार्थना) केली, हे माझ्या पालनकर्त्या! यांनी मला खोटे ठरविले आहे, तेव्हा तू माझी मदत कर.
آية رقم 27
२७. मग आम्ही त्यांच्याकडे वहयी पाठविली की तुम्ही आमच्या डोळ्यांसमोर आमच्या वहयीनुसार एक नौका तयार करा, जेव्हा आमचा आदेश येऊन पोहोचेल, आणि तंदूर उतू लागेल, तेव्हा तुम्ही प्रत्येक प्रकारचा एक एक जोडा त्यात ठेवून घ्या, आणि आपल्या कुटुंबियांनाही, मात्र त्यांच्याखेरीज, ज्यांच्याबाबत आधीच फैसला केला गेला आहे. खबरदार! ज्या लोकांनी जुलूम- अत्याचार केला आहे, त्यांच्याविषयी माझ्याशी काही बोलू नका. ते तर सर्व बुडविले जातील.
آية رقم 28
२८. जेव्हा तुम्ही आणि तुमचे साथीदार नौकेत चांगल्या प्रकारे स्वार व्हाल तेव्हा म्हणा, समस्त स्तुती-प्रशंसा अल्लाहकरिता आहे ज्याने आम्हा लोकांना अत्याचारी जनसमूहापासून मुक्ती दिली.
آية رقم 29
२९. आणि दुआ (प्रार्थना) करा, हे माझ्या पालनकर्त्या! मला सुरक्षितपणे उतरव आणि तूच उत्तम रीतीने उतरविणारा आहेस.
آية رقم 30
३०. निःसंशय, या (घटने) त मोठमोठी बोधचिन्हे आहेत आणि निश्चितच आम्ही कसोटी घेणारे आहोत.
آية رقم 31
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३१. मग त्यांच्यानंतर आम्ही दुसरे समुदाय देखील निर्माण केले.
آية رقم 32
३२. मग त्यांच्यात, त्यांच्यामधून पैगंबरही पाठविला (या आवाहनासह) की तुम्ही सर्व अल्लाहची उपासना करा, त्याच्याखेरीज तुमचा दुसरा कोणी उपास्य नाही, तेव्हा तुम्ही भय का नाही बाळगत?
آية رقم 33
३३. आणि जनसमूहाच्या सरदारांनी उत्तर दिले, जे कुप्र (इन्कार) करीत असत आणि आखिरतच्या भेटीस खोटे ठरवित असत आणि आम्ही त्यांना ऐहिक जीवनात सुखी ठेवले होते, म्हणू लागले, हा तर तुमच्यासारखाच एक मनुष्य आहे. जे तुम्ही खाता तेच तो खातो आणि जे पाणी तुम्ही पिता, तेच तो देखील पितो.
آية رقم 34
३४. आणि जर तुम्ही आपल्यासारख्याच माणसाचे आज्ञापालन मान्य करून घेतले तर निश्चितच तुम्ही मोठ्या तोट्यात आहात.
آية رقم 35
३५. काय हा तुम्हाला या गोष्टीचे वचन देतो की जेव्हा तुम्ही मेल्यावर केवळ माती आणि हाडे बनून राहाल, तर तुम्ही पुन्हा जिवंत केले जाल?
آية رقم 36
ﯖﯗﯘﯙﯚ
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३६. नव्हे. दूर आणि अतिशय दूर आहे ती गोष्ट, जिचे वचन तुम्हाला दिले जात आहे.
آية رقم 37
३७. जीवन तर केवळ याच जगाचे जीवन आहे, ज्यात आम्ही मरत जगत असतो हे नव्हे की आम्हाला (मेल्यानंतर) पुन्हा उठविले जाईल.
آية رقم 38
३८. हा तर तो मनुष्य आहे, ज्याने अल्लाहवर असत्य रचले आहे. आम्ही तर याच्यावर ईमान राखणार नाही.
آية رقم 39
ﯴﯵﯶﯷﯸ
ﯹ
३९. पैगंबराने दुआ (प्रार्थना) केली, हे पालनकर्त्या! यांनी मला खोटे ठरविले आहे, तेव्हा तू माझी मदत कर.
آية رقم 40
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४०. उत्तर मिळाले की, लवकरच हे आपल्या कृतकर्मांवर पश्चात्ताप करतील.
آية رقم 41
४१. शेवटी न्यायाच्या नियमानुसार एका भयंकर आवाजाने त्यांना येऊन धरले आणि आम्ही त्यांना केरकचरा करून टाकले. तेव्हा अशा अत्याचारी लोकांकरिता लांबचे अंतर असो.
آية رقم 42
ﰊﰋﰌﰍﰎﰏ
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४२. मग त्यांच्यानंतर आम्ही दुसरेही जनसमूह निर्माण केले.
آية رقم 43
४३. कोणताही जनसमूह आपल्या मुदतीपूर्वी नाश पावला आणि ना मागे राहिला.
آية رقم 44
४४. त्यानंतर आम्ही सातत्याने रसूल (पैगंबर) पाठविले. ज्या जनसमूहाजवळ ज्या ज्या वेळेस त्याचा पैगंबर आला, त्याने त्यास खोटे ठरविले तेव्हा एका पाठोपाठ एक जनसमूह नष्ट करीत राहिलो आणि त्यांना किस्सा- कहाणी बनवून सोडले. धिःक्कार असो त्या लोकांचा जे ईमान स्वीकारत नाहीत.
آية رقم 45
४५. मग आम्ही मूसाला आणि त्यांचा भाऊ हारुनला आपल्या निशाण्या आणि स्पष्ट प्रमाणांसह पाठविले.
آية رقم 46
४६. फिरऔन आणि त्याच्या सैन्याकडे, परंतु त्यांनी गर्व केला आणि ते होतेच घमेंड करणारे लोक!
آية رقم 47
४७. ते म्हणाले, काय आम्ही आपल्यासारख्या दोन माणसांवर ईमान राखावे वास्तविक त्यांचा स्वतःचा जनसमूह आमची गुलामी करीत आहे.
آية رقم 48
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ﮍ
४८. तेव्हा त्यांनी त्या दोघांना खोटे ठरविले. शेवटी ते लोकही नाश पावलेल्या लोकांत सामील झाले.
آية رقم 49
ﮎﮏﮐﮑﮒﮓ
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४९. आणि आम्ही तर मूसाला ग्रंथही प्रदान केला, यासाठी की लोकांनी सत्य मार्गावर यावे.
آية رقم 50
५०. आणि आम्ही मरियमचा पुत्र आणि त्याच्या मातेला एक निशाणी बनविले१ आणि त्या दोघांना उंच, आरामदायी आणि वाहते पाणी असलेल्या ठिकाणी आश्रय दिला.
____________________
(१) कारण पैगंबर हजरत ईसा यांचा जन्म पित्याविना झाला, जे अल्लाहच्या सामर्थ्याचे प्रतीक होय. ज्याप्रमाणे आदमला माता-पित्याविना आणि हव्वाला मातेविना हजरत आदमपासून आणि इतर सर्व मानवांना माता-पित्याच्या माध्यमाने निर्माण करणे त्याच्या निशाण्यांपैकी आहे.
____________________
(१) कारण पैगंबर हजरत ईसा यांचा जन्म पित्याविना झाला, जे अल्लाहच्या सामर्थ्याचे प्रतीक होय. ज्याप्रमाणे आदमला माता-पित्याविना आणि हव्वाला मातेविना हजरत आदमपासून आणि इतर सर्व मानवांना माता-पित्याच्या माध्यमाने निर्माण करणे त्याच्या निशाण्यांपैकी आहे.
آية رقم 51
५१. पैगंबरांनो! हलाल (वैध) वस्तू खा आणि सत्कर्म करा. तुम्ही जे काही करीत आहात, ते मी चांगल्या प्रकारे जाणतो.
آية رقم 52
५२. आणि निःसंशय तुमचा हा दीन (धर्म) एकच दीन (धर्म) आहे १ आणि मी तुम्हा सर्वांचा पालनकर्ता आहे, तेव्हा माझेच भय बाळगून राहा.
____________________
(१) ‘उम्मत’शी अभिप्रेत दीन (धर्म) होय आणि एकच असण्याचा अर्थ हा की समस्त पैगंबरांनी एक अल्लाहच्या उपासनेचे आवाहन केले आहे, परंतु लोक तौहिद (एकेश्वरवाद) सोडून वेगवेगळ्या पंथ-संप्रदायांमध्ये विभाजित झाले आणि प्रत्येक गट आपल्या निष्ठा व आचरणावर खूश आहे, मग ते सत्यापासून कितीही दूर असो.
____________________
(१) ‘उम्मत’शी अभिप्रेत दीन (धर्म) होय आणि एकच असण्याचा अर्थ हा की समस्त पैगंबरांनी एक अल्लाहच्या उपासनेचे आवाहन केले आहे, परंतु लोक तौहिद (एकेश्वरवाद) सोडून वेगवेगळ्या पंथ-संप्रदायांमध्ये विभाजित झाले आणि प्रत्येक गट आपल्या निष्ठा व आचरणावर खूश आहे, मग ते सत्यापासून कितीही दूर असो.
آية رقم 53
५३. मग त्यांनी स्वतःच आपल्या धर्मांचे आपसात तुकडे तुकडे करून टाकले. प्रत्येक संप्रदाय, त्याच्याजवळ जे काही आहे, त्यावरच घमेंड करीत आहे.
آية رقم 54
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५४. तेव्हा तुम्ही देखील त्यांना त्यांच्या गफलतीत काही काळ पडून राहू द्या.
آية رقم 55
५५. काय यांनी असे समजून घेतले आहे की आम्ही जी काही यांची धन-संपत्ती आणि संतती वाढवित आहोत.
آية رقم 56
५६. ते त्याच्यासाठी शुभ-मांगल्यात घाई करीत आहोत? नव्हे, किंबहुना यांना समजतच नाही.
آية رقم 57
५७. निःसंशय, जे लोक आपल्या पालनकर्त्या (अल्लाहचे) भय बाळगतात.
آية رقم 58
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५८. आणि जे आपल्या पालनकर्त्याच्या आयतींवर ईमान राखतात.
آية رقم 59
ﰈﰉﰊﰋﰌ
ﰍ
५९. आणि जे आपल्या पालनकर्त्यासोबत दुसऱ्या कुणाला सहभागी ठरवित नाही.
آية رقم 60
६०. आणि जे लोक देतात, जे काही देतात, अशा स्थितीत की त्यांची हृदये भयाने थरथर कांपत असतात की ते आपल्या पालनकर्त्याकडे परतणार आहेत.
آية رقم 61
६१. हेच आहेत जे तत्परतेने नेकी (सत्कर्म) प्राप्ता करीत आहेत आणि हेच आहेत जे त्यांच्याकडे धाव घेणारे आहेत.
آية رقم 62
६२. आम्ही कोणत्याही जीवावर त्याच्या कुवतीपेक्षा जास्त भार टाकत नाही. आमच्याजवळ एक ग्रंथ आहे, जो सत्य तेच सांगतो आणि त्यांच्यावर किंचितही अत्याचार केला जाणार नाही.
آية رقم 63
६३. परंतु त्यांची हृदये या गोष्टीकडून गाफील (असावध) आहेत आणि त्यांच्यासाठी याखेरीजही अनेक कर्म आहेत, जी ते करणार आहेत.
آية رقم 64
६४. येथेपर्यंत की जेव्हा आम्ही त्यांच्यातल्या सुख-संपन्न अवस्थेच्या लोकांना शिक्षा- यातनेत धरले तेव्हा ते किंचाळू लागले.
آية رقم 65
६५. आज गयावया करू नका. निःसंशय आमच्याकडून तुम्हाला मदत मिळणार नाही.
آية رقم 66
६६. माझ्या आयती तर तुमच्यासमोर वाचून ऐकविल्या जात होत्या, तरीही तुम्ही आपल्या टाचांवर उलटपावली पळ काढत होते.
آية رقم 67
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६७. घमेंड करीत, ताठरता दाखवित, कथा- कहाणी बनवून त्यास सोडून देत.
آية رقم 68
६८. काय त्यांनी या गोष्टीवर विचार- चिंतन नाही केले? किंवा त्यांच्याजवळ ती गोष्ट आली, जी यांच्या पूर्वजांजवळ आली नव्हती?
آية رقم 69
६९. किंवा यांनी आपल्या पैगंबराला ओळखले नाही, म्हणून त्याचा इन्कार करणारे झालेत.
آية رقم 70
७०. किंवा हे म्हणतात की याचे डोके फिरले आहे. किंबहुना तो तर त्यांच्याजवळ सत्य घेऊन आला आहे. होय त्यांच्यापैकी अधिकांश लोक सत्यापासून चिडणारे आहेत.
آية رقم 71
७१. जर सत्यच त्यांच्या इच्छा-आकांक्षांचे अनुयायी झाले तर धरती आणि आकाश आणि त्यांच्या दरम्यान जेवढ्या वस्तू आहेत सर्व अस्ताव्यस्त होतील. खरी गोष्ट अशी की आम्ही त्यांना त्यांचा बोध- उपदेश पोहचविला आहे, परंतु ते आपल्या बोध- उपदेशापासून तोंड फिरविणारे आहेत.
آية رقم 72
७२. काय तुम्ही त्यांच्याकडून काही पारिश्रमिक मागता? लक्षात ठेवा, तुमच्या पालनकर्त्याने दिलेले पारिश्रमिक अधिक उत्तम आहे आणि तो सर्वांत उत्तम रोजी (आजिविका) पोहचविणारा आहे.
آية رقم 73
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७३. निःसंशय, तुम्ही तर त्यांना सरळ मार्गाकडे बोलावित आहात.
آية رقم 74
७४. आणि निःसंशय, जे लोक आखिरतवर ईमान राखत नाहीत ते सरळ मार्गापासून विचलित होणारे आहेत.
آية رقم 75
७५. आणि जर आम्ही त्यांच्यावर दया- कृपा केली आणि त्यांची कष्ट- यातना दूर केली तर ते आपल्या विद्रोहात अधिक मजबूत होऊन भटकत राहतील.
آية رقم 76
७६. आणि आम्ही त्यांना शिक्षा- यातनाग्रस्तही केले तरीही हे लोक ना तर आपल्या पालनकर्त्यासमोर झुकले आणि ना विनम्रतेचा मार्ग पत्करला.
آية رقم 77
७७. येथेपर्यंत की जेव्हा आम्ही त्यांच्यावर कठोर शिक्षा- यातनेचे द्वार खुले केले तेव्हा त्याच वेळी त्वरित निराश झाले.
آية رقم 78
७८. तोच (अल्लाह) आहे, ज्याने तुमच्यासाठी कान, डोळे आणि हृदय बनविले, परंतु तुम्ही फार कमी आभार मानता.
آية رقم 79
७९. आणि तोच आहे, ज्याने तुम्हाला (निर्माण करून) जमिनीवर पसरविले आणि त्याच्याचकडे तुम्ही एकत्रित केले जाल.
آية رقم 80
८०. आणि तोच होय जो जिवंत राखतो आणि मृत्यु देतो आणि रात्र व दिवसाचा फेरबदल करण्याचा अधिकारही तोच राखतो. काय तुम्ही अकलेचा वापर करीत नाही?
آية رقم 81
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८१. किंबहुना त्या लोकांनी देखील तेच सांगितले, जे पूर्वीचे लोक सांगत आले आहेत.
آية رقم 82
८२. म्हणतात की जेव्हा मेल्यानंतर आम्ही माती आणि हाडे होऊन जाऊ, काय तरीही आम्ही अवश्य उभे केले जाऊ?
آية رقم 83
८३. आमच्याशी आणि आमच्या पूर्वजां (बुजूर्ग लोकां) शी पूर्वीपासूनच हा वायदा होत आला आहे. काही नाही, या केवळ पूर्वी होऊन गेलेल्या लोकांच्या कथा- कहाण्या आहेत.
آية رقم 84
८४. यांना विचारा, जर जाणत असाल तर सांगा की धरती आणि तिच्या समस्त वस्तू कोणाच्या मालकीच्या आहेत?
آية رقم 85
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८५. ते त्वरित उत्तर देतील की अल्लाहच्या, सांगा तर मग तुम्ही बोध प्राप्त का नाही करीत?
آية رقم 86
८६. त्यांना विचारा, आकाशांचा आणि अतिशय महान ईशसिंहासना (अर्श) चा स्वामी कोण आहे?
آية رقم 87
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८७. ते लोक उत्तर देतील, अल्लाहच आहे. सांगा, मग तुम्ही भय का नाही राखत?
آية رقم 88
८८. यांना विचारा की सर्व गोष्टींचा अधिकार कोणाच्या हाती आहे, जो आश्रय देतो आणि ज्याच्या तुलनेत (विरोधात) कोणी आश्रय देऊ शकत नाही. तुम्ही जाणत असाल तर सांगा.
آية رقم 89
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८९. हेच उत्तर देतील की, अल्लाहच आहे. सांगा, मग तुमच्यावर कोणीकडून जादूटोणा होतो?
آية رقم 90
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९०. खरी गोष्ट अशी की आम्ही त्यांच्यापर्यंत सत्य पोहचविले आहे, आणि निःसंशय हे अगदी खोटारडे आहेत.
آية رقم 91
९१. ना तर अल्लाहने कोणाला पुत्र बनविले आहे आणि ना त्याच्यासोबत दुसरा कोणी उपास्य आहे, अन्यथा प्रत्येक ईश्वर आपल्या निर्मितीला घेऊन फिरत राहिला असता आणि प्रत्येकजण एकमेकावर श्रेष्ठतम होण्याचा प्रयत्न करीत राहिला असता. जी गुणवैशिट्ये हे सांगतात अल्लाह त्यापासून पवित्र आहे.
آية رقم 92
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९२. तो गुप्त - उघड जाणणारा आहे आणि जो शिर्क (अनेकेश्वरवादी गोष्टी) हे करतात, अल्लाह त्याहून अतिशय उच्चतम आहे.
آية رقم 93
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९३. (तुम्ही) दुआ (प्रार्थना) करा की हे माझ्या पालनकर्त्या! जर तू मला ते दाखवशील, ज्याचा वायदा या लोकंना दिला जात आहे.
آية رقم 94
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९४. तेव्हा हे माझ्या पालनकर्त्या! तू मला या अत्याचारी समूहात समील करू नकोस.
آية رقم 95
९५. आणि आम्ही जे काही वायदे- वचन त्यांना देत आहोत, ते सर्व तुम्हाला दाखवून देण्याचे सामर्थ्य बाळगतो.
آية رقم 96
९६. वाईट गोष्टीला अशा रीतीने दूर करा जी पूर्णतः भलेपणाची असावी. हे जे काही सांगतात ते आम्ही चांगल्या प्रकारे जाणतो.
آية رقم 97
९७. आणि दुआ (प्रार्थना) करा की हे माझ्या पालनकत्या! सैतानांद्वारे (मनात येणाऱ्या) शंका-कुशंकांपासून मी तुझे शरण मागतो.
آية رقم 98
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९८. आणि हे माझ्या पालनकर्त्या! मी या गोष्टीपासूनही तुझे शरण मागतो की त्यांनी माझ्याजवळ यावे.
آية رقم 99
९९. येथेपर्यंत की त्यांच्यापैकी एखाद्याचे मरण येऊन ठेपले तेव्हा तो म्हणतो की हे माझ्या पालनकर्त्या! मला परत पाठव.
آية رقم 100
१००. अशासाठी की आपल्या सोडून आलेल्या जगात जाऊन सत्कर्म करावे, असे कदापि होणार नाही. हे केवळ एक कथन आहे, जे सांगणारा हा आहे त्यांच्या पाठीमागे एक पट आहे. त्यांचे दुसऱ्यांदा जिवंत होण्याच्या दिवसापर्यंत.१
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(१) दोन वस्तूंच्या दरम्यान पडदा किंवा आडोशाला ‘बर्जख’ म्हटले जाते. या जगाचे जीवन आणि आखिरतचे जीवन यांच्या दरम्यानची जी मुदत आहे, तिला इथे ‘बर्जख’ म्हटले गेले आहे, कारण मेल्यानंतर माणसाचे या जगाशी असलेले नाते संपुष्टात येते, आणि आखिरच्या जीवनाचा आरंभ त्या वेळी होईल, जेव्हा सर्व लोकांना दुसऱ्यांदा जिवंत केले जाईल. तेव्हा दरम्यानचे हे जीवन, जे कबरीत किंवा पशू-पक्ष्यांच्या पोटात किंवा जाळून टाकण्याच्या स्थितीत मातीच्या कणात व्यतीत होते, ते ‘बर्जख’चे जीवन होय. माणसाचे हे अस्तित्व ज्या ज्या ठिकाणी, ज्या ज्या स्वरूपात असेल, स्पष्टतः तो माती बनला असेल, किंवा राख बनवून हवेत उडविला गेला असेल, किंवा नदीच्या पात्रात वाहविला गेला असेल, किंवा एखाद्या जनावराचे भक्ष्य ठरला असेल, परंतु सर्वश्रेष्ठ अल्लाह सर्वांना एक नवे रूप प्रदान करून ‘हश्र’ (हिशोबा) च्या मैदानात एकत्र करील.
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(१) दोन वस्तूंच्या दरम्यान पडदा किंवा आडोशाला ‘बर्जख’ म्हटले जाते. या जगाचे जीवन आणि आखिरतचे जीवन यांच्या दरम्यानची जी मुदत आहे, तिला इथे ‘बर्जख’ म्हटले गेले आहे, कारण मेल्यानंतर माणसाचे या जगाशी असलेले नाते संपुष्टात येते, आणि आखिरच्या जीवनाचा आरंभ त्या वेळी होईल, जेव्हा सर्व लोकांना दुसऱ्यांदा जिवंत केले जाईल. तेव्हा दरम्यानचे हे जीवन, जे कबरीत किंवा पशू-पक्ष्यांच्या पोटात किंवा जाळून टाकण्याच्या स्थितीत मातीच्या कणात व्यतीत होते, ते ‘बर्जख’चे जीवन होय. माणसाचे हे अस्तित्व ज्या ज्या ठिकाणी, ज्या ज्या स्वरूपात असेल, स्पष्टतः तो माती बनला असेल, किंवा राख बनवून हवेत उडविला गेला असेल, किंवा नदीच्या पात्रात वाहविला गेला असेल, किंवा एखाद्या जनावराचे भक्ष्य ठरला असेल, परंतु सर्वश्रेष्ठ अल्लाह सर्वांना एक नवे रूप प्रदान करून ‘हश्र’ (हिशोबा) च्या मैदानात एकत्र करील.
آية رقم 101
१०१. मग जेव्हा सूर (शंख) फुंकला जाईल, त्या दिवशी ना तर आपसातील संबंध राहतील ना एकमेकांची विचारपूस.
آية رقم 102
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१०२. तेव्हा ज्यांच्या तराजूचे पारडे वजनदार असेल, ते तर सफलता प्राप्त करणारे ठरतील.
آية رقم 103
१०३. आणि ज्यांच्या तराजूचे पारडे वजनात हलके राहील तर हे असे लोक आहेत, ज्यांनी आपले नुकसान स्वतः करून घेतले, जे नेहमीकरिता जहन्नममध्ये दाखल झाले.
آية رقم 104
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१०४. त्यांच्या चेहऱ्यांना आग होरपळत राहील. ते तिथे विद्रुप आणि भयानक बनलेले असतील.
آية رقم 105
१०५. काय माझ्या आयतींचे पठण तुमच्यासमोर केले जात नव्हते? तरीही तुम्ही त्यांना खोटे ठरवित होते?
آية رقم 106
१०६. ते म्हणतील, हे आमच्या पालनकर्त्या! आमचे दुर्दैव आमच्यावर प्रभावशाली झाले. खरोखर आम्ही मार्गभ्रष्ट लोक होतो.
آية رقم 107
१०७. हे आमच्या पालनकर्त्या! आम्हाला येथून बाहेर काढ. जर आम्ही पुन्हा असे केले तर निश्चितच आम्ही अत्याचारी ठरू.
آية رقم 108
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१०८. (अल्लाह) फर्माविल, धिःक्कार असो तुमचा, यातच पडून राहा, आणि माझ्याशी बोलू नका.
آية رقم 109
१०९. माझ्या दासांचा एक समूह असा होता, जो सतत हेच म्हणत राहिला की हे आमच्या पालनकर्त्या! आम्ही ईमान राखले आहे. तू आम्हाला माफ कर आणि आमच्यावर दया कर. तू सर्व दया करणाऱ्यांपेक्षा जास्त दया करणारा आहेस.
آية رقم 110
११०. (परंतु) तुम्ही त्यांची थट्टाच उडवित राहिले, येथे पर्यंत की (त्यांच्या मागे लागून) तुम्ही माझे स्मरण देखील विसरले आणि त्यांना हसण्यावारी घेत राहिले.
آية رقم 111
१११. आज मी त्यांच्या सहनशीलता (आणि सदाचारा) चा असा मोबदला दिला की ते सफलता प्राप्त करणारे ठरले.
آية رقم 112
११२. (सर्वश्रेष्ठ अल्लाह) विचारील, तुम्ही धरतीवर वर्षांच्या गणनेनुसार किती दिवस राहिलात?
آية رقم 113
११३. (ते) म्हणतील, एक दिवस किंवा एका दिवसापेक्षाही कमी. गणना करणाऱ्यांनाही विचारा.
آية رقم 114
११४. (सर्वश्रेष्ठ अल्लाह) फर्माविल, खरी गोष्ट अशी की तुम्ही तिथे फार कमी काळ राहिलात. हे तुम्ही पहिल्यापासून जाणून घेतले असते तर!
آية رقم 115
११५. काय तुम्ही असे समजून बसला आहात की आम्ही तुम्हाला व्यर्थच निर्माण केले आहे, आणि हे की तुम्ही आमच्याकडे परतविले जाणार नाहीत?
آية رقم 116
११६. सर्वश्रेष्ठ अल्लाह खराखुरा बादशहा आहे, तो अतिउच्च आहे, त्याच्याखेरीज कोणीही उपासनीय नाही. तोच सन्मानित सिंहासना (अर्श) चा स्वामी आहे.
آية رقم 117
११७. आणि जो मनुष्य, अल्लाहसोबत अन्य एखाद्या ईश्वराला पुकारेल ज्याचे त्याच्याजवळ कोणतेही प्रमाण (पुरावा) नाही तर त्याचा हिशोब त्याच्या पालनकर्त्याजवळ आहे. निःसंशय काफिर (अविश्वाशी) लोक सफलतेपासून वंचित आहेत.
آية رقم 118
११८. आणि म्हणा की हे माझ्या पालनकर्त्या! तू माफ कर आणि दया कृपा कर, आणि तू सर्व दया करणाऱ्यांपेक्षा उत्तम दया करणारा आहेस.
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